Chapter 4 


वस्तुनिष्ठ प्रश्न -

1. कवि देव का जन्म स्थान है

(क) इटावा

(ख) सौरों

(ग) रूनुकता

(घ) अज्ञात

उत्तर: (क) इटावा



2. 'घहरी-घहरी घटा' में कौन-सा शब्दालंकार है?

(क) रूपक

(ख) उपमा

(ग) अनुप्रास

(घ) यमक

उत्तर: (ग) अनुप्रास



अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न -

3. 'श्री ब्रजदूलह' की संज्ञा किसे प्रदान की गई है?

उत्तर: 'श्री ब्रजदूलह' की संज्ञा भगवान श्रीकृष्ण को प्रदान की गई है।

➡️ कवि देव ने श्रीकृष्ण को ब्रज भूमि के सुंदर वर, जगत मंदिर के दीपक और सौंदर्य एवं माधुर्य के प्रतीक रूप में चित्रित किया है।


4. रस की लालची और दासी कौन हो गई है?

उत्तर: गोपिका (नायिका) रस की लालची होकर श्रीकृष्ण की दासी बन गई है।

➡️ पंक्ति – "देव कछू अपनो बस ना, रस-लालच लाल चितै भयीं चेरी।"

यहाँ गोपिका श्रीकृष्ण के सौंदर्य और माधुर्य के रस में इस कदर डूब जाती है कि उसकी स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है, और वह कृष्ण की चेरी (दासी) बन जाती है।


5. श्याम ने किसे झूला झूलने के लिए आमंत्रित किया?

उत्तर: श्याम (श्रीकृष्ण) ने गोपिका (नायिका) को झूला झूलने के लिए आमंत्रित किया।

➡️ यह दृश्य नायिका के स्वप्न में घटित होता है।

पंक्ति – "आनि कह्यो स्याम मो सों, चलौ झूलिबे को आजु..."

जैसे ही नायिका उठने लगती है, नींद उड़ जाती है, और स्वप्न टूट जाता है।



लघुत्तरात्मक प्रश्न

6. नेत्रों को मधुमक्खी के समान क्यों बताया गया है?

उत्तर: नेत्रों को मधुमक्खी के समान इसलिए बताया गया है क्योंकि जैसे मधुमक्खियाँ मधु (शहद) की लालसा में फूलों पर मंडराती हैं, वैसे ही नायिका की आँखें श्रीकृष्ण के सौंदर्यरस में डूबी हुई हैं।

➡️ पंक्ति – "अखियों मधु की मखियों भीं मेरी।।"

यहाँ नेत्रों की चंचलता, सौंदर्य के प्रति आकर्षण, और प्रेमरस में डूबने की व्याकुलता को मधुमक्खी के प्रतीक से दर्शाया गया है।


7. नायिका के भाग क्यों सो गये?

उत्तर: नायिका के भाग (भाग्य) इसलिए सो गए क्योंकि वह जिस समय श्रीकृष्ण के साथ झूला झूलने का सुखद अनुभव कर रही थी, वह केवल एक स्वप्न था।

जैसे ही वह उठती है, नींद टूट जाती है और कृष्ण लुप्त हो जाते हैं।

➡️ पंक्ति – "सोय गए भाग मेरे जागि वा जगन में।।"

इसका आशय है कि वास्तविक जीवन में उसका सौभाग्य सोया हुआ है, और वह केवल स्वप्न में ही कृष्ण-संग का सुख पा सकी।


8. 'जै जग मंदिर दीपक सुंदर' से कवि का क्या तात्पर्य है?

उत्तर: ‘जै जग मंदिर दीपक सुंदर’ से कवि का तात्पर्य यह है कि श्रीकृष्ण समस्त संसार रूपी मंदिर के दीपक (प्रकाश स्रोत) हैं।

➡️ जैसे दीपक अंधकार में प्रकाश फैलाता है, वैसे ही श्रीकृष्ण संसार को आलोकित करते हैं, प्रेम, करुणा और सौंदर्य के प्रतीक बनकर।

इस उपमा से कवि ने श्रीकृष्ण की महिमा, दिव्यता और सौंदर्य का स्तुतिपूर्वक चित्रण किया है।