वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

1. 'राजिया' का मूल नाम था –

उत्तर: (ख) राजाराम


2. दूध एवं जल की मिलावट को कौन अलग करता है?

उत्तर: (घ) राजहंस


अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

3. कवि के अनुसार किसके अभाव में कोई भी कार्य सिद्ध नहीं हो सकता है?

उत्तर: बल, पराक्रम एवं हिम्मत के अभाव में।


4. दूध एवं नीर (जल) को कौन अलग-अलग कर सकता है?

उत्तर: राजहंस।


5. कवि के अनुसार किन-किन का उपाय पहले ही कर लेना चाहिए?

उत्तर: शत्रु का उपाय पहले ही कर लेना चाहिए।


6. कौनसी जगह चंदन के वृक्ष बहुतायत में पाये जाते हैं?

उत्तर: मलयगिर (मलय पर्वत) में।


7. किस के घाव कभी नहीं भरते हैं?

उत्तर: वाणी (जीभ) के घाव।


लघुत्तरात्मक प्रश्न:

8. संकलित अंश के अनुसार किस नगर में नहीं रहना चाहिए?

उत्तर: उस नगर में नहीं रहना चाहिए जहाँ गुण और अवगुण की पहचान न हो और जहाँ कोई गुणों का सम्मान न करता हो।

(सोरठा 1 — "गुण अवगुण जिण गांव, सुणै न कोई सांभलै।")


9. 'अस्वाभाविक मित्रता के घातक परिणाम होते हैं' — संकलित अंश के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: सोरठा (12) में कवि ने कहा है कि जैसे बिल्ली और चूहे में मित्रता स्वाभाविक नहीं होती, वैसे ही यदि हित करने के उद्देश्य से चूहा बिल्ली के पास बैठता है, तो पूरी दुनिया यही मानेगी कि वह मर गया। इससे पता चलता है कि अस्वाभाविक मित्रता जीवन को संकट में डाल सकती है।

(उदाहरण: "मूसा नै मंजार, हित कर बैठा हेकण।")


10. 'जन्मजात प्रवृत्तियों में बदलाव असंभव है' — संकलित अंश के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: सोरठा (8) में कवि ने कहा है कि कोयल की वाणी सदा मधुर होती है जिससे मन प्रसन्न होता है, वहीं कौआ कितना भी प्रयास करे, उसकी वाणी कर्कश ही होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वभाव में जन्मजात विशेषताएं होती हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता।

(सोरठा: "उपजावै अनुराग, कोयल मन हरखत करै। कडवौ लागै काग…")


1. 'राजिया' का मूल नाम क्या था?

उत्तर: राजिया का मूल नाम राजाराम था। वह कवि कृपाराम का सेवक एवं विश्वासपात्र था।


2. कवि कृपाराम कौनसी शाखा के चारण थे?

उत्तर: कृपाराम खिड़िया शाखा के चारण कवि थे।


3. कवि ने 'राजिया रा सोरठा' क्यों लिखे?

उत्तर: कवि कृपाराम ने ‘राजिया रा सोरठा’ अपने सेवक राजाराम को अमर बनाने के उद्देश्य से लिखे, जो निःसंतान होने के कारण दुखी था।


4. 'राजिया रा सोरठा' किस भाषा में लिखे गए हैं?

उत्तर: 'राजिया रा सोरठा' राजस्थानी भाषा में लिखे गए हैं, जिनमें डिंगल शैली का प्रयोग हुआ है।


5. 'राजिया रा सोरठा' में कौन सा छंद प्रयुक्त हुआ है?

उत्तर: इसमें सोरठा छंद का प्रयोग किया गया है।


6. कवि ने गुण-अवगुण की पहचान न करने वाले नगर को लेकर क्या कहा है?

उत्तर: कवि ने ऐसे नगर में न रहने की सलाह दी है जहाँ गुण और अवगुण की कोई पहचान न हो और गुणों का सम्मान न किया जाए।


7. राजहंस का उल्लेख किस संदर्भ में हुआ है?

उत्तर: राजहंस का उल्लेख इस बात के लिए हुआ है कि वह दूध और पानी को अलग कर सकता है, जैसे विवेकशील व्यक्ति सत्य और असत्य को अलग करता है।


8. कवि ने शत्रु के विषय में क्या नीति बताई है?

उत्तर: कवि ने कहा है कि शत्रु का उपाय समय रहते पहले ही कर लेना चाहिए, अन्यथा वह विनाश का कारण बन सकता है।


9. वाणी (बोली) को लेकर कवि का क्या विचार है?

उत्तर: कवि के अनुसार वाणी का घाव तलवार से भी अधिक तीखा होता है और यह कभी नहीं भरता, इसलिए सोच-समझकर और मधुर वाणी बोलनी चाहिए।


10. 'राजिया रा सोरठा' की विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: 'राजिया रा सोरठा' की प्रमुख विशेषताएँ हैं—सहजता, सरलता, नीति-बोध, प्रसाद गुण, डिंगल भाषा, सोरठा छंद, और लोकहितकारी विचार।