Chapter 4
प्रतिरक्षा एंव रक्त समूह
प्रश्न.17 मनुष्यों में कितने प्रकार की प्रतिरक्षी विधियाँ पाई जाती हैं?
उत्तर: मनुष्यों में दो प्रकार की प्रतिरक्षी विधियाँ पाई जाती हैं: स्वाभाविक (innate) और उपार्जित (acquired) प्रतिरक्षा।प्रश्न.18 प्रतिरक्षी कितने प्रकार के होते हैं?
प्रश्न.19 प्रतिजन का आण्विक भार कितना होना चाहिए?
उत्तर: प्रतिजन का आण्विक भार सामान्यतः 10,000 डलटन से अधिक होना चाहिए।
प्रश्न.20 प्रतिरक्षी किस प्रकार के प्रोटीन होते हैं?
उत्तर: प्रतिरक्षी गामा ग्लोबुलिन प्रोटीन होते हैं, जो शरीर में प्रतिजनों के खिलाफ प्रतिक्रिया करते हैं।
प्रश्न.21 कौन सा प्रतिरक्षी आवल को पार कर भ्रूण में पहुँच सकता है?
उत्तर: IgG प्रतिरक्षी भ्रूण में पहुँच सकता है।
प्रश्न.22 मास्ट कोशिका पर पाई जाने वाली प्रतिरक्षी का नाम लिखें।
उत्तर: मास्ट कोशिका पर IgE प्रतिरक्षी पाई जाती है।
प्रश्न.23 रक्त में उपस्थित कौन सी कोशिका गैसों के विनिमय में संलग्न होती है?
उत्तर: लाल रक्त कोशिकाएँ (Red blood cells) गैसों के विनिमय में संलग्न होती हैं।
उत्तर: रक्त का वर्गीकरण कार्ल लैंडस्टाइनर (Karl Landsteiner) द्वारा किया गया था।
प्रश्न.25 सर्वदाता रक्त समूह कौन सा है?
उत्तर: सर्वदाता रक्त समूह O- (O negative) होता है।
प्रश्न.26 विश्व के लगभग कितने प्रतिशत व्यक्तियों का रक्त आर एच धनात्मक है?
प्रश्न.27 कौन सा आर एच कारक सबसे महत्वपूर्ण है?
उत्तर: आर एच डी (Rh D) कारक सबसे महत्वपूर्ण है।
प्रश्न.28 प्रथम रक्तदान किसके द्वारा संपादित किया गया?
उत्तर: प्रथम रक्तदान का प्रयोग 15 जून 1667 को फ्रांस के चिकित्सक डॉ. जीन बेप्टिस्ट डेनिस द्वारा किया गया।
प्रश्न.29 समजात साधान क्या है?
प्रश्न.30 रुधिर वर्ग को नियंत्रित करने वाले विकल्पियों के नाम लिखें।
उत्तर: रुधिर वर्ग को नियंत्रित करने वाले विकल्पियाँ IA, IB और i (O) होते हैं।
प्रश्न.31भारत में अंगदान दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: हाल ही में देहदान करने वाले दो प्रमुख व्यक्तियों के नाम: डॉ. विष्णु प्रभाकर और पूर्व मुख्यमंत्री श्री ज्योतिबसु हैं।
प्रश्न.33 प्रतिरक्षी को परिभाषित करें।
उत्तर: प्रतिरक्षी (Antibody) एक प्रकार का प्रोटीन है जो शरीर द्वारा प्रतिजनों (Antigens) के खिलाफ उत्पन्न किया जाता है। यह प्रतिजन को निष्क्रिय करने या हटाने में मदद करता है।
प्रश्न.34 एण्टीजनी निर्धारक क्या होते हैं?
उत्तर: एण्टीजनी निर्धारक (Antigenic determinants) वे छोटे भाग होते हैं जो किसी प्रतिजन पर होते हैं और जो प्रतिरक्षी प्रणाली द्वारा पहचानें जाते हैं। इन्हें एपिटोप्स (Epitopes) भी कहा जाता है।
प्रश्न.35 प्रतिरक्षी में हिन्ज का क्या कार्य है?
उत्तर: "हिन्ज" (Hinge) एक क्षेत्र होता है जो प्रतिरक्षी के संरचना में लचीलापन प्रदान करता है, जिससे प्रतिरक्षी को विभिन्न प्रतिजनों के साथ जुड़ने में आसानी होती है।
प्रश्न.36 रक्त क्या है?
उत्तर: रक्त एक तरल संयुग्म तंत्र है जो शरीर के विभिन्न भागों में पोषक तत्वों, ऑक्सीजन और अपशिष्टों का परिवहन करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं, श्वेत रक्त कोशिकाओं, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा से बना होता है।
प्रश्न.37 ABO रक्त समूहीकरण को समझाइए।
उत्तर: ABO रक्त समूह प्रणाली में रक्त को चार श्रेणियों में बांटा जाता है: A, B, AB, और O। यह रक्त समूह एंटीजन A और B के आधार पर निर्धारित होते हैं, जो रक्त कोशिकाओं की सतह पर होते हैं।
प्रश्न.38आर एच कारक क्या है? इसके महत्त्व को समझाइए।
उत्तर: आर एच कारक (Rh factor) एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाया जाता है। यदि यह प्रोटीन मौजूद हो तो रक्त को Rh धनात्मक (Rh+) और यदि यह अनुपस्थित हो तो Rh ऋणात्मक (Rh-) कहते हैं। यह गर्भावस्था में महत्वपूर्ण होता है क्योंकि Rh- मां और Rh+ शिशु के बीच असंगति से समस्याएँ हो सकती हैं।
प्रश्न.39 रक्तदान क्या है? समझाइए।
उत्तर: रक्तदान एक प्रक्रिया है जिसमें एक स्वस्थ व्यक्ति अपना रक्त देता है, जिसे विभिन्न चिकित्सा स्थितियों में अन्य व्यक्तियों को ट्रांसफ्यूज़ किया जा सकता है। यह जीवन बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न.40 रक्तदान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ लिखें।
उत्तर: रक्तदान के दौरान निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए:
दाता को स्वस्थ होना चाहिए।रक्तदान से पूर्व उचित जांच और परामर्श जरूरी है।
रक्तदान से पहले और बाद में पर्याप्त तरल पदार्थ लेना चाहिए।
रक्तदान के बाद दाता को आराम देना चाहिए और उसकी निगरानी रखना चाहिए।
प्रश्न.41अंगदान की आवश्यकता समझाइए।
प्रश्न.42 ABO रुधिर वर्ग के लिए चत्तरदायी जीन प्रारूपों को समझाइए।
उत्तर: ABO रुधिर वर्ग के लिए तीन प्रमुख जीन प्रारूप होते हैं: IA, IB और i। IA और IB रक्त में एंटीजन A और B के निर्माण के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि i का कोई प्रभाव नहीं होता। इन जीनों के संयोजन से चार रक्त समूह बनते हैं: A (IAIA या IAi), B (IBIB या IBi), AB (IAIB), और O (ii)।
निबंधात्मक प्रश्नों
प्रश्न.43 प्रतिरक्षियों की संरचना को समझाइए।
उत्तर: प्रतिरक्षी (Antibodies) एक प्रकार के प्रोटीन होते हैं, जो शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा उत्पन्न होते हैं। इनकी संरचना Y आकार की होती है, जिसमें दो हल्की श्रृंखलाएँ (Light Chains) और दो भारी श्रृंखलाएँ (Heavy Chains) होती हैं। इनकी संरचना में मुख्य रूप से दो प्रमुख भाग होते हैं:
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V (Variable) क्षेत्र: यह क्षेत्र प्रतिरक्षी के सिरों पर स्थित होता है और यह प्रतिजन (Antigen) के विशिष्ट हिस्से के साथ जुड़ने में सक्षम होता है। V क्षेत्र में परिवर्तनशीलता होती है, जो इसे विभिन्न प्रकार के प्रतिजनों के साथ जुड़ने का मौका देती है।
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C (Constant) क्षेत्र: यह क्षेत्र प्रतिरक्षी के बाकी हिस्सों में होता है और इसका कार्य प्रतिरक्षी के कार्य को स्थिर बनाए रखना और शरीर के विभिन्न अंगों से जुड़ना होता है।
प्रतिरक्षी शरीर के विभिन्न भागों, जैसे लसीका ग्रंथियाँ और अस्थिमज्जा में उत्पन्न होते हैं। ये प्रतिजनों से जुड़कर उन्हें निष्क्रिय करते हैं, जिससे शरीर को रोगों से बचाव मिलता है।
44. गर्भ रक्ताणुकोरकता को समझाइए।
उत्तर: गर्भ रक्ताणुकोरकता (Hemolytic Disease of the Newborn - HDN) तब होती है जब एक गर्भवती महिला का रक्त Rh- (Rh ऋणात्मक) होता है और उसके शिशु का रक्त Rh+ (Rh धनात्मक) होता है। इस स्थिति में, गर्भवती महिला के शरीर का इम्यून सिस्टम शिशु के Rh+ रक्त को विदेशी समझ सकता है और उस पर एंटीबॉडी उत्पन्न कर सकता है। यह स्थिति तब और अधिक गंभीर हो सकती है, जब महिला के पहले बच्चे का रक्त Rh+ होता है और महिला ने पहले बच्चे को जन्म दिया है।
यह एंटीबॉडी शिशु के रक्त के लाल रक्त कणिकाओं पर हमला कर सकती हैं, जिससे शिशु में एनीमिया (रक्त की कमी) और अन्य गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। इसे रोकने के लिए गर्भवती महिला को "Rh इम्युनोग्लोबुलिन" (Rh immunoglobulin) दिया जाता है, जो एंटीबॉडी के निर्माण को रोकता है।
45. रक्ताधान की प्रक्रिया कैसे संपादित की जाती है?
उत्तर: रक्ताधान (Blood Transfusion) एक चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसमें एक व्यक्ति को रक्त या रक्त के घटक (जैसे, प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएँ) दिया जाता है। रक्ताधान की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में संपादित की जाती है:
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रक्त का मिलान: रक्तदान से पहले, दाता और प्राप्तकर्ता के रक्त समूह (ABO और Rh) का मिलान किया जाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि रक्त समूह उपयुक्त हो और रक्तदान सुरक्षित हो।
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रक्त संग्रहण: दाता से रक्त लिया जाता है। रक्तदान के बाद, रक्त को उचित तरीके से संग्रहित और पैक किया जाता है।
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रक्त का परीक्षण: रक्त को विभिन्न संक्रमणों जैसे HIV, हैपेटाइटिस B, C, और सिफलिस के लिए परीक्षण किया जाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि रक्त संक्रमण से मुक्त हो।
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रक्त का ट्रांसफ्यूजन: परीक्षण के बाद, रक्त को प्राप्तकर्ता के शरीर में उचित मात्रा में ट्रांसफ्यूज़ किया जाता है। यह प्रक्रिया डॉक्टर की निगरानी में की जाती है, ताकि किसी भी प्रतिक्रिया से बचा जा सके।
46. अंगदान क्या है? अंगदान का महत्व बताइए।
उत्तर: अंगदान वह प्रक्रिया है, जिसमें एक व्यक्ति अपने अंग (जैसे, गुर्दा, हृदय, यकृत, लिवर आदि) को किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए दान करता है। यह दान एक जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। अंगदान का महत्व इस प्रकार है:
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जीवन को बचाने का अवसर: अंगदान के द्वारा, एक व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से दूसरों के जीवन को बचा सकता है। उदाहरण के लिए, एक मृत व्यक्ति का गुर्दा जीवन बचाने के लिए दान किया जा सकता है।
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सामाजिक जिम्मेदारी: अंगदान से न केवल चिकित्सा समस्याओं को हल किया जाता है, बल्कि समाज में एक महत्वपूर्ण मानवीय संदेश भी जाता है कि हम एक दूसरे की मदद के लिए तैयार हैं।
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प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग: अंगदान के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है, जिससे जीवन के लिए जरूरी अंग उपलब्ध होते हैं।
अंगदान से हर साल हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है, खासकर वे लोग जिनके पास अंग प्रत्यारोपण का कोई विकल्प नहीं है।
47. रुधिर वर्ग की आनुवंशिकता के महत्व की व्याख्या करें।
उत्तर: रुधिर वर्ग (Blood Group) की आनुवंशिकता का महत्व जीवन के कई पहलुओं में है। यह मुख्यतः निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:
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रक्ताधान (Blood Transfusion): रक्त समूह की आनुवंशिकता यह निर्धारित करती है कि एक व्यक्ति को किस प्रकार का रक्त दिया जा सकता है। यदि रक्त समूह का मिलान सही नहीं होता, तो रक्त की प्रतिक्रिया हो सकती है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
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पैतृकता संबंधी विवादों का समाधान: रुधिर वर्ग की आनुवंशिकता का उपयोग पैतृकता संबंधी विवादों में किया जाता है। यह दावे को प्रमाणित करने के लिए उपयोगी होता है कि कौन व्यक्ति किसी बच्चे का वास्तविक माता-पिता हो सकता है।
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एंटीजन और एंटीबॉडी प्रतिक्रिया: रक्त समूह के कारण शरीर में विभिन्न एंटीजन और एंटीबॉडी प्रतिक्रिया होती है, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों और संक्रमणों से शरीर को बचाती हैं।
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आनुवंशिक रोगों की पहचान: रुधिर वर्ग की आनुवंशिकता का अध्ययन करके, विभिन्न आनुवंशिक रोगों जैसे हीमोफीलिया आदि की पहचान की जा सकती है। यह इलाज के उपायों को निर्धारित करने में मदद करता है।