उपभोक्तावाद की संस्कृति


अति लघुत्तरीय प्रश्न


१ उपभोक्ता वाद की संस्कृति के रचनाकार कौन है?

उत्तर- श्यामाचरण दुबे।

२- आज के दौर (समय) में हमारा बाजार किस से प्रभावित हो रहा है?

उत्तर- विज्ञापन की चमक-दमक से।

३ बाजार किससे भरा पड़ा है?

उत्तर- विलासिता की सामग्रियों से।

४- माज में हमारी हैसियत किससे मापी जाती है?

उत्तर- हमारे दिखावे से।

५- सामान्य जन किन्हें ललचाई निगाहों (नजर) से देख रहे हैं?

उत्तर- विशिष्ट जन के समाज को।

६- 'उत्पाद तो आपके लिए है' पंक्ति पाठ से ली गई है?

उत्तर - उपभोक्तावाद की संस्कृति से।

७- क्या उपभोक्तावाद की संस्कृति भारत में विकसित हो रही है?

उत्तर - हां।

८- कौन सी संस्कृति भारत में पहले से ही विद्यमान (पाया जाना) थी?

उत्तर -सांमति संस्कृति।

९- उनकी दृष्टि में, एक विज्ञापन की भाषा में, यही है राइट च्वाइस बेबी यह पंक्तिकिस पाठ से ली गई है?

उत्तर- उपभोक्तावाद की संस्कृति से।

१०- अवमूल्यन का अर्थ बताएं?

उत्तर- मूल्य को गिरा देना।

११- हमारे नैतिकता का रहा है? अवमूल्यन क्यों हो 

उत्तर- उपभोक्तावाद के प्रसार (फैलना) के कारण।

१२- हमारा देश क्या स्वीकार करते जा रहा है?

उत्तर- बौद्धिक दासता को।

दिप्पणी बौद्धिक दासता का यह अर्थ है कि दूसरे व्यक्ति को अपने आप से ज्यादा बुद्धिमान समझना और उसकी बातों को ज्यों का त्यों मान लेना।

१३- हम आधुनिकता के किस प्रतिमान को अपनाते जा रहे हैं?

उत्तर - झूठे प्रतिमान (प्रतिबिंब, परछाई) को।

१४- हमारा देश क्या बनते जा रहा है?

उत्तर-पश्चिमी देशों की संस्कृतिक उपनिवेश।

टिप्पणी हमारा देश पश्चिमी देशों की आर्थिक उपनिवेश अवश्य बनी पर संस्कृतिक

उपनिवेश बनने से हमेशा बचा रहा किंतु उपभोक्तावाद की संस्कृति ने सब कुछ बदल दिया।

१८- 'जीवन की गुणवत्ता आलू के चिप्स से नहीं सुधरती ना बहु विज्ञापित शीतल पेयों से' ये पंक्तियां किस पाठ से ली गई है?

उत्तर -उपभोक्तावाद की संस्कृति से।

१९- 'पीजा और बर्गर कितनी ही आधुनिक हों, हैं वे कूड़ा खाद्य' 'यह पंक्ति किस पाठ से ली गई है?

उत्तर-उपभोक्तावाद की की संस्कृति से।

२०- आज समाज में आक्रोश अशांति क्यों जन्म ले रहा है? (गुस्सा) और

उत्तर- समाज में वर्गों की दूरी बढ़ जाने के कारण।

टिप्पणी-दिखावे के कारण समाज में अंतर बढ़ते जा रहा है जीवन शैली में विभिनता होने के कारण लोग एक दूसरे से दूरी बनाते जा रहें हैं

२१- क्या गांधी जी उपभोक्तावाद संस्कृति के खिलाफ में थे?

उत्तर-हां।

२२- गांधी जी ने कैसी संस्कृति अपनाने की सलाह दी थी?

उत्तर- स्वस्थ संस्कृति।

२३- उपभोक्ता वाद की संस्कृति को लेखक ने भविष्य के लिए क्या माना है?

उत्तर - गंभीर चुनौती।

२५- पांच सितारा अस्पताल में इलाज कराना किस बात का प्रतीक है? करा

उत्तर-प्रदर्शन (दिखावा) पूर्ण का।

२६- लेखक विज्ञापन को क्या मानते है?

उत्तर- वशीकरण (वश में करने वाला) करने वाला तंत्र (जाल)।

२७- उपभोक्तवाद की संस्कृति किस विधा (प्रकार) की रचना है?

उत्तर - निबंध।

२७ उपभोक्तवाद की संस्कृति किस विधा (प्रकार) की रचना है?

उत्तर-निबंध।

२८- 'गांधी जी ने कहा था कि हम स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने दरवाज़े -खिड़की खुले रखें पर अपनी बुनियाद पर कायम रहें' यह पंक्तिकिस पाठ से ली गई है

उत्तर- उपभोक्तवाद की संस्कृति पाठ से ली गई है।

२९- बुनियाद का अर्थ बताएं?

उत्तर- नींव, जड़।

३०- उपभोक्ता का अर्थ क्या है?

उत्तर-उपभोग करने वाला।

३१ आज के समाज में कीमती ब्रांड खरीदना किसका प्रतीक माना जाता है?

उत्तर - प्रतिष्ठित (सम्मान) का।

३२- हैसियत का अर्थ बताएं ?

उत्तर- इज्जत, प्रतिष्ठित, रुतबा।

३३- 'छोड़िए इस सामग्री को वस्तु और परिधान की दुनिया में आइए' यह यह पंक्ति किस पाठ से ली गई है?

उत्तर-उपभोक्तावाद की संस्कृति।

३४- आलू के चिप्स, शीतल पेय, पिज्जा और बर्गर क्या हमें दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए?

उत्तर - नहीं।

टिप्पणी- ये सभी खाद्य पदार्थ कूड़ा खाद्य माने जाते हैं।

३५- हमारा स्वार्थ किस पर हावी (भारी पड़ना) होते जा रहा है?

 उत्तर- हमारे परमार्थ (दूसरों का उपकार करने वाला) पर।


लघु उत्तरीय प्रश्न

१- जगह-जगह बुटीक खुल गए हैं, नए-नए डिज़ाइन परिधान बाज़ार में आ गए हैं यह पंक्ति किस पाठ से ली गई है इसके रचनाकार का नाम बताएं?

उत्तर- पाठ का नाम उपभोक्तावाद की संस्कृति उपभोक्तावाद और रचनाकार का नाम श्यामाचरण दुबे है।

२- 'यह ट्रेंडी हैं और महंगे भी पिछले वर्ष का फ़ैशन इस वर्ष? शर्म की बात है। यह पंक्ति किस पाठ से ली गई है इसके रचनाकार का नाम बताएं?

उत्तर- पाठ का नाम

नाम 'उपभोक्तावाद' की संस्कृति एवं रचनाकार का नाम श्यामाचरण दुबे है।

३- हैसियत जताने के लिए लोग आज क्या-क्या करते हैं?

उत्तर- अपनी हैसियत दिखाने के लिए लोग महंगी और अनावश्यक वस्तुओं को खरीदते हैं, पांच सितारा होटल में खाना, विवाह और इलाज तक करवाते हैं।

४- सामान्य जन विशिष्ट जन के समाज को ललचाई निगाहों से क्यों देखते हैं?

उत्तर- विशिष्ट जनों का जीवन शैली उच्च कोटि का होने के कारण सामान्य जन उनका अनुकरण कर प्रतिष्ठा प्राप्त करने की चाहता रखते हैं।

५- उपभोक्तावाद की संस्कृति का विकास भारत में क्यों हो रहा है?

उत्तर- उपभोक्ता वाद की संस्कृति भारत में बड़ी तेजी से फैल रही है, क्योंकि इच्छा-पूर्ति और उपभोग की मानसिकता भारतीय लोगों ने अपना लिया है।

६- हमारी संस्कृति किस प्रकार की संस्कृति बन गई है?

उत्तर- अनुकरण की संस्कृति बन गई है।

७- सामंती संस्कृति के तत्व भारत में पहले भी रहे हैं इस वाक्य का अर्थ स्पष्ट करें।

उत्तर- भारत में सामंती लोग अर्थात पैसे वाले लोगों का सदैव से बोलबाला रहा है उनकी जीवनशैली में उपभोग का स्थान विशेष रहा है यह लोग उपभोक्तावाद की संस्कृति को बढ़ाने में हमेशा से सहायक रहे हैं।

८- सामंत बदल गए हैं, सामंती संस्कृति का मुहावरा बदल गया है इस कथन का आशय बताएं?

उत्तर- पश्चिमी देश आज हमारे सामंत है और उनकी संस्कृति का हम लोस अनुकरण कर रहे हैं।

९- व्यक्ति-केंद्रीयता बढ़ रही है, स्वार्थ परमार्थ पर हावी हो रहा है इस कथन का आशय स्पष्ट करें।

उत्तर- इस कथन का आशय (अर्थ) यह है कि १) यह है कि लोग अब दूसरे के बारे में नहीं सोच कर अपने नहीं सोच क आप के बारे में सोचने लगे हैं।

१०- स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने दरवाजे खिड़की खुले रखें पर अपने बुनियाद

११- उपभोक्तावाद की संस्कृति भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है कैसे?

उत्तर- उपभोक्तावाद की संस्कृति भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि इस संस्कृति से समाज में अशांति और असमानता बढ़ेगी, प्रदर्शन पूर्ण आचरण में बढ़ोतरी होगी, मानव चरित्र में बदलाव की संभावना बढ़ेगी और नैतिकता में कमी आएगी।

१२- उपभोक्तावाद की-संस्कृति के संदर्भ में झूठी तुष्टि (संतुष्ठ) का अर्थ बताएं?

उत्तर- जो उत्पाद हमारे काम का नहीं है हम लोग उसे दिखावे के चक्कर में खरीद लेते है और जबरदस्ती उसके हिसाब से अपने आप को फिट (ढालने) करने की कोशिश करते हैं और यह मान लेते हैं कि इस उत्पाद से हम संतुष्ट हैं।

प्रश्न -अभ्यास

१- लेखक के अनुसार जीवन में 'सुख' से क्या अभिप्राय है?

उत्तर- उत्पाद का भोग करना और इच्छापूर्ति को पूर्ण करना ही लेखक के अनुसार सुख का अभिप्राय है।

२- आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर रही है?

उत्तर- आज उपभोक्तावाद की संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित कर रही है-

१- उपभोग की वस्तुओं को लोग प्रतिष्ठा का विषय बना रहे हैं।

२- इच्छा पूर्ति करने के चक्कर में लोग समाज से दूरी बना रहे हैं।

३- झूठी तुष्टि (संतोष) में फंसकर लोग अपना नुकसान कर रहे हैं।

प्रश्न (३) गांधी जी ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है?

उत्तर- उपभोक्तावाद का सबसे बड़ा अंग दिखावा है। लोग दिखावे के चक्कर में एक दूसरे से दूर होते जा रहे हैं परिणाम स्वरूप समाज में में अशांति अशांति और विषमता फैलते जा रही है।

प्रश्न ४) आशय स्पष्ट कीजिए-

(क) जाने-अनजाने आज के माहौल में आपका चरित्र भी बदल रहा है और आप उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं।


(ख) प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हो।

उत्तर-

(क) किसी भी उत्पाद को खरीदते समय दो बातों का होना अनिवार्य (आवश्यक) है-१) आवश्यकता एवं २) गुणवत्ता किंतु हम लोग इसे नजर अंदाज करके उस उत्पाद को ले

अपने चरित्र को ही उस उत्पाद के हिसाब से बदल लेते हैं।

उत्तर-

(ख) उपयुक्त कथन का आशय यह है की प्रतिष्ठा पाने के लिए लोग ऐसे काम कर जाते हैं जो समाज में हंसी का विषय बन जाता है जैसे- अमेरिका और यूरोप के देशों में मरने के पहले ही कब्र का प्रबंध कर लिया जाता है।