Chapter 5 

                                                                     دنیا ( نظم )


1. प्रश्न: “ہے دنیا جس کا نانوں میاں…” कविता का रचयिता कौन है?

उत्तर: इस कविता के रचयिता प्रसिद्ध उर्दू कवि नज़ीर अकबराबादी हैं। उन्हें उर्दू कविता का “जनक” या “باوا آدم” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सबसे पहले आम जनता की ज़िंदगी, उनके दुःख-सुख, रीति-रिवाज और सामाजिक सच्चाइयों को अपनी कविताओं में स्थान दिया, जिससे उर्दू कविता में यथार्थ और लोकभावना का समावेश हुआ।

2. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी का वास्तविक नाम क्या था?

उत्तर: नज़ीर अकबराबादी का असली नाम सैयद वली मुहम्मद था। लेकिन उनकी पहचान और प्रसिद्धि नज़ीर अकबराबादी नाम से हुई, इसी नाम ने उन्हें उर्दू साहित्य में अमर कर दिया।

3. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी का जन्म कहाँ हुआ था?

उत्तर: नज़ीर अकबराबादी का जन्म दिल्ली में हुआ था, परंतु बाद में वे आगरा चले गए, जिसे उस समय अकबराबाद कहा जाता था। वहीं उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त की और साहित्यिक जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।

4. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी को “اردو نظم کا باوا آدم” क्यों कहा जाता है?

उत्तर:  नज़ीर अकबराबादी को “اردو نظم کا باوا آدم” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने उर्दू कविता को दरबारी विषयों से निकालकर आम लोगों की ज़िंदगी से जोड़ा। उन्होंने जनजीवन, सामाजिक यथार्थ, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं को कविता का केंद्र बनाया, जिससे उर्दू कविता को एक नई दिशा और पहचान मिली।

5. प्रश्न: कविता “ہے دنیا جس کا نانوں میاں…” में कवि ने दुनिया की कैसी तस्वीर पेश की है?

उत्तर:इस कविता में कवि ने दुनिया को एक व्यापारिक और न्यायपूर्ण स्थान के रूप में दिखाया है, जहाँ हर कार्य का प्रतिफल अवश्य मिलता है। जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। यहाँ अच्छाई का बदला अच्छाई से और बुराई का बदला बुराई से दिया जाता है।

6. प्रश्न: कवि के अनुसार इस दुनिया में न्याय किस रूप में मिलता है?

उत्तर: कवि के मतानुसार इस संसार में “انصاف اور عدل پرستی” यानी न्याय और निष्पक्षता का सिद्धांत चलता है। यहाँ हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्राप्त होता है — जो भलाई करेगा उसे भलाई मिलेगी, और जो बुराई करेगा उसे उसके कर्मों का दंड अवश्य मिलेगा।

7. प्रश्न: कविता में "اس ہاتھ کرو اس ہاتھ ملے" का क्या अर्थ है?

उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह बताना चाहते हैं कि इस संसार में हर कर्म का परिणाम तत्काल मिलता है। यदि कोई व्यक्ति अच्छे कार्य करेगा तो उसे तुरंत उसका अच्छा फल मिलेगा, और यदि वह किसी के साथ बुरा करेगा तो उसका बुरा परिणाम भी शीघ्र ही सामने आएगा।

8. प्रश्न: कवि ने “دنیا” को “بستی” क्यों कहा है?

उत्तर:कवि ने “دنیا” को “بستی” इसलिए कहा है क्योंकि यह मनुष्यों के पारस्परिक संबंधों, लेन-देन और व्यवहारों से बनी हुई एक सामाजिक दुनिया है। यहाँ हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में एक-दूसरे से जुड़ा है और जीवन आपसी संबंधों पर आधारित है।

9. प्रश्न: कविता में अमीर और गरीब के प्रति कवि का दृष्टिकोण क्या है?

उत्तर: कवि का मानना है कि यह दुनिया अमीरों के लिए सुख-सुविधा और वैभव से भरी हुई है — “مہنگوں کو یہ مہنگی ہے”, जबकि गरीबों के लिए यही दुनिया कठिनाइयों, उपेक्षा और अन्याय से भरी है — “ستوں کو یہ سنتی ہے”। इस प्रकार कवि ने समाज में व्याप्त आर्थिक असमानता को उजागर किया है।

10. प्रश्न: कवि “جھگڑے اٹھتے ہیں” कहकर क्या दर्शाना चाहते हैं?

उत्तर:इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह संकेत देते हैं कि इस संसार में हर समय किसी-न-किसी कारण से झगड़े, विवाद और मतभेद होते रहते हैं। यहाँ मनुष्य निरंतर एक-दूसरे से उलझा रहता है, मानो पूरी दुनिया एक अदालत बन गई हो जहाँ हर पल कोई न कोई मुकदमा चलता रहता है।

11. प्रश्न: कविता का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: इस कविता के माध्यम से कवि यह सिखाना चाहते हैं कि संसार में हर व्यक्ति को अपने कर्मों का प्रतिफल अवश्य मिलता है। इसलिए मनुष्य को सदैव सच्चा, ईमानदार और न्यायप्रिय रहना चाहिए। जो दूसरों के साथ भलाई करेगा, उसे भलाई का फल मिलेगा, और जो बुराई करेगा, उसे उसका दुष्परिणाम भोगना पड़ेगा।

12. प्रश्न: “جو جیسا جس کے ساتھ کرے پھر دیا اس کو آن ملے” से क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर:इस पंक्ति से यह शिक्षा मिलती है कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है — अच्छे कर्म करने वाला सुख और आदर पाता है, जबकि बुरे कर्म करने वाला दुःख और अपमान भोगता है।

13. प्रश्न: कवि ने “دنیا” की तुलना अदालत से क्यों की है?

उत्तर:  कवि ने “دنیا” की तुलना अदालत से इसलिए की है क्योंकि इस संसार में हर व्यक्ति को उसके कर्मों का न्याय मिलता है — यहाँ देर तो हो सकती है, लेकिन अन्याय कभी नहीं होता।

14. प्रश्न: “دست برستی” का क्या अर्थ है?

उत्तर:“دست برستی” का अर्थ है हाथों-हाथ सौदा या बदला लेना — यानी यहाँ कर्मों का परिणाम तुरंत मिलता है, देर नहीं होती।

15. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी की कविता की विशेषता क्या है?

उत्तर:नज़ीर अकबराबादी की कविताओं की विशेषता यह है कि वे सीधी, सहज और बोलचाल की भाषा में आम इंसान के जीवन, उसके संघर्ष, नैतिकता और समाज के यथार्थ को बड़ी सजीवता से प्रस्तुत करती हैं।

16. प्रश्न: “آدمی نامہ” कविता का विषय क्या है?

उत्तर:“آدمی نامہ” कविता का विषय मानव जीवन की विविधता है — इसमें कवि ने मनुष्य के अनेक रूपों और स्वभावों को उजागर किया है, जैसे—भले-बुरे, स्वार्थी, ईमानदार और दिखावटी लोग, जिनसे समाज की वास्तविक तस्वीर सामने आती है।

17. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी किस युग के कवि थे?

उत्तर:नज़ीर अकबराबादी अठारहवीं शताब्दी के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने उर्दू कविता में आम जनजीवन, सामाजिक यथार्थ और मानवीय अनुभवों को सरल व प्रभावशाली भाषा में अभिव्यक्त किया।

18. प्रश्न: कविता में कवि ने समाज की कौन सी विडंबनाएँ दिखाई हैं?

उत्तर: कवि ने समाज की विडंबनाएँ इस रूप में दिखाईं कि अमीर सुख-सुविधाओं में डूबे हैं, गरीबों की तकलीफ़ें अनसुनी रह जाती हैं, और इंसानियत की जगह स्वार्थ और लेन-देन ने ले ली है।

19. प्रश्न: नज़ीर की कविताओं में कौन-कौन से विषय मिलते हैं?

उत्तर: नज़ीर की कविताओं में जीवन के हर पहलू की झलक मिलती है — त्योहारों की रौनक, समाज की सच्चाई, इंसान की अच्छाई-बुराई, नैतिक मूल्य और आम जनता के संघर्ष का सजीव चित्रण मिलता है।

20. प्रश्न: “انصاف اور عدل پرستی” पंक्ति का क्या संकेत है?

उत्तर: यह पंक्ति इस बात की ओर संकेत करती है कि इस दुनिया में न्याय और सच्चाई का राज है — यहाँ किसी के साथ अन्याय नहीं होता, हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है।

21. प्रश्न: कविता में कवि ने कौन-कौन से विरोधाभास दिखाए हैं?

उत्तर: कवि ने समाज के भीतर मौजूद गहरे विरोधाभासों को उजागर किया है — जहाँ एक ओर अमीरों के पास सब कुछ है, वहीं गरीबों के पास कुछ भी नहीं; एक ओर ईमानदारी है तो दूसरी ओर धोखा, और इन्हीं के टकराव से दुनिया की असली तस्वीर सामने आती है।

22. प्रश्न: “جو روٹی دے تو نان ملے” का क्या अर्थ है?

उत्तर: इस पंक्ति का भाव यह है कि इस संसार में हर कर्म का फल उसी प्रकार लौटता है — यदि कोई दूसरों को रोटी (भोजन) देता है, तो उसे भी उसी का प्रतिफल “نان” (अच्छा भोजन) के रूप में अवश्य प्राप्त होता है।

23. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी की भाषा शैली कैसी है?

उत्तर: नज़ीर अकबराबादी की भाषा सहज, सरस और लोक-जीवन से जुड़ी हुई है। उन्होंने आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग कर कविता को जनसामान्य के निकट बना दिया।

24. प्रश्न: “جو جیسا کرتا ہے ویسا بھرتا ہے” पंक्ति किस भावना को व्यक्त करती है?

उत्तर:  यह पंक्ति इस सच्चाई को प्रकट करती है कि मनुष्य अपने कर्मों का फल स्वयं भोगता है — जैसा करेगा, वैसा ही पाएगा; यही जीवन का अटल नियम है।

25. प्रश्न: नज़ीर की कविताओं में व्यंग्य किस रूप में मिलता है?

उत्तर:उनकी कविताओं में व्यंग्य हास्य के माध्यम से व्यक्त होता है — वे समाज की कुरीतियों और पाखंडों को मज़ाकिया लेकिन गहरी शैली में उजागर करते हैं।

26. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी की कविताओं में कौन-सा सामाजिक संदेश निहित है?

उत्तर: उनकी कविताओं में यह सामाजिक संदेश मिलता है कि इंसान को सच्चाई, न्याय और मानवता का पालन करना चाहिए — क्योंकि यही उसके जीवन का असली मूल्य है।

27. प्रश्न: नज़ीर अकबराबादी ने किस वर्ग के लोगों की भावनाएँ व्यक्त कीं?

उत्तर: नज़ीर अकबराबादी ने समाज के सामान्य लोगों — गरीब, मजदूर, दुकानदार, स्त्रियाँ और बच्चे — सबकी भावनाएँ अपनी कविताओं में सजीव रूप से प्रकट कीं।

28. प्रश्न: कविता में “مہنگا” शब्द का विलोम क्या है?

उत्तर:“مہنگا” शब्द का विलोम “سستا” है, जिसका अर्थ होता है — कम दाम या किफ़ायती।

29. प्रश्न: कविता में “بستی” शब्द का विलोम क्या है?

उत्तर:  “بستی” शब्द का विलोम “ویرانہ” है, जिसका अर्थ होता है — सुनसान या निर्जन स्थान।

30. प्रश्न: “ناحق میں” का क्या अर्थ है?

उत्तर:“ناحق میں” का अर्थ है — अन्यायपूर्वक या बिना किसी उचित कारण के।

31. प्रश्न: “مضاف” और “مضاف الیہ” में क्या अंतर है?

उत्तर:“مضاف” उस संज्ञा को कहते हैं जो किसी दूसरी संज्ञा पर निर्भर होती है, जबकि “مضاف الیہ” वह संज्ञा होती है जिसके साथ संबंध स्थापित किया जाता है। उदाहरण — “اللہ کا بندہ” में “بندہ” = مضاف और “اللہ” = مضاف الیہ।

32. प्रश्न: “ان کا ہاتھی” में مضاف और مضاف الیہ कौन हैं?

उत्तर:“ان کا ہاتھی” वाक्य में “ہاتھی” مضاف है और “ان کا” مضاف الیہ है। यहाँ “کا” اضافت की निशानी के रूप में प्रयोग हुआ है।

33. प्रश्न: “امی کی باتیں” में اضافت की पहचान कीजिए।

उत्तर: “امی کی باتیں” में “باتیں” مضاف है, “امی” مضاف الیہ है, और “کی” اضافت की निशानी है।

34. प्रश्न: कविता में “کچھ دیر نہیں اندھیر نہیں” का क्या संदेश है?

उत्तर: यह पंक्ति यह संदेश देती है कि देर हो सकती है पर अंधेर नहीं — अर्थात न्याय में विलंब संभव है, लेकिन अन्याय कभी स्थायी नहीं रहता।

35. प्रश्न: “ہے دنیا جس کا نانوں میاں” कविता में कवि का स्वर कैसा है?

उत्तर: इस कविता में कवि का स्वर हल्का व्यंग्यपूर्ण होते हुए भी गहरी सच्चाइयों को उजागर करने वाला है — उन्होंने जीवन के यथार्थ को हास्य और दर्शन के संग प्रस्तुत किया है।

36. प्रश्न: नज़ीर की कविताएँ जनता में क्यों लोकप्रिय हुईं?

उत्तर:  नज़ीर की कविताएँ इसलिए लोकप्रिय हुईं क्योंकि उन्होंने आम लोगों की ज़िंदगी, उनकी खुशियाँ, दुख, त्यौहार और संघर्ष को उसी सादी ज़बान में बयां किया जिसे हर कोई समझ सके।

37. प्रश्न: “آدمی نامہ” कविता में कवि ने क्या दिखाया है?

उत्तर: “آدمی نامہ” में कवि ने मनुष्य के अनेक रूपों और स्वभावों का चित्र खींचा है — कहीं भलमनसाहत है तो कहीं कपट, कहीं दया है तो कहीं स्वार्थ।

38. प्रश्न: नज़ीर की कविताएँ अन्य कवियों से कैसे भिन्न हैं?

उत्तर: नज़ीर की कविताएँ इसलिए अलग हैं क्योंकि उन्होंने दरबारी चमक-दमक से हटकर आम इंसान की ज़िंदगी, उसकी बोली और उसकी सच्चाई को कविता का विषय बनाया।

39. प्रश्न: नज़ीर की कविता में धर्म और नैतिकता का क्या स्थान है?

उत्तर: नज़ीर की कविताओं में धर्म और नैतिकता का गहरा संबंध है — वे यह संदेश देते हैं कि सच्चा धर्म इंसानियत है, जो भलाई, ईमानदारी और न्याय पर आधारित है।

40. प्रश्न: इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: इस कविता से यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में जो जैसा करता है, वैसा ही परिणाम पाता है; इसलिए इंसान को सच्चाई, भलाई और न्याय के मार्ग पर चलना चाहिए।


Answer by Mrinmoee