Chapter 9
جہانگیر کا انصاف (ڈراما)
1. प्रश्न: इस पाठ का शीर्षक क्या है और इसका मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: इस पाठ का शीर्षक “जहाँगीर की अदल पसंदी” है। इसमें यह विचार प्रकट किया गया है कि मुगल बादशाह जहाँगीर न्याय करने में पूर्णतः निष्पक्ष थे। उन्होंने दिखाया कि सच्चा न्याय वही है जो अपने रिश्तों, भावनाओं और स्वार्थ से ऊपर उठकर किया जाए।
2. प्रश्न: डرامा (नाटक) क्या होता है?
उत्तर: नाटक एक साहित्यिक विधा है जिसमें किसी घटना या कहानी को कई पात्रों के संवादों और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इसमें बातचीत, हावभाव और दृश्यात्मक प्रस्तुति के द्वारा भावों को अभिव्यक्त किया जाता है।
3. प्रश्न: इस नाटक के माध्यम से लेखक क्या दिखाना चाहता है?
उत्तर: लेखक ने इस नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सच्चा न्याय वही होता है जिसमें राजा और प्रजा दोनों समान माने जाएँ। जहाँगीर ने यह साबित किया कि न्याय के समय अपने संबंध, भावना और पद को भुला देना ही सच्ची निष्पक्षता है।
4. प्रश्न: नाटक में मुख्य पात्र कौन-कौन हैं?
उत्तर: नाटक के प्रमुख चरित्र हैं — बादशाह जहाँगीर, नूरजहाँ, फरीादी और दरबारी। जहाँगीर न्यायप्रिय बादशाह हैं, नूरजहाँ उनकी पत्नी और अपराधिनी बनती हैं, फरीादी एक पीड़ित स्त्री है जो न्याय माँगने दरबार आती है, और दरबारी न्याय प्रक्रिया के साक्षी हैं।
5. प्रश्न: नूरजहाँ कौन थी?
उत्तर: नूरजहाँ मुगल सम्राट जहाँगीर की प्रिय पत्नी थीं। वे सौंदर्य, बुद्धि और व्यक्तित्व की दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली थीं। दरबार में उनका विशेष स्थान था, परंतु इस नाटक में उन्होंने एक भूलवश निर्दोष व्यक्ति की हत्या कर दी, जिससे उनकी मानवीय कमजोरी और पश्चाताप दोनों प्रकट होते हैं।
6. प्रश्न: फریादी عورت दरबार में क्यों आई थी?
उत्तर: फریादी عورت अत्यंत दुखी अवस्था में दरबार में पहुँची थी क्योंकि उसकी जिंदगी का सहारा — उसका पति — नूरजहाँ के तीर से मारा गया था। अपने बिखरे हुए जीवन और अनाथ बच्चों के लिए न्याय की गुहार लगाने वह सीधे बादशाह जहाँगीर के दरबार में आई थी।
7. प्रश्न: बादशाह जहाँगीर ने महिला की शिकायत सुनकर क्या किया?
उत्तर: बादशाह जहाँगीर ने धैर्यपूर्वक पूरी बात सुनी और बिना किसी पक्षपात के न्याय का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी ही पत्नी नूरजहाँ को दोषी ठहराया और न्याय की गरिमा बनाए रखने के लिए फریादी عورت को तलवार देते हुए कहा कि वह चाहें तो नूरजहाँ से अपने पति का बदला ले सकती है।
8. प्रश्न: नूरजहाँ ने किस पर तीर चलाया था?
उत्तर: नूरजहाँ ने गलती से एक साधारण गरीब व्यक्ति पर तीर चला दिया था। उसने सोचा कि वह व्यक्ति उसे घूर रहा है, इसलिए ग़लतफ़हमी में उसने उस पर तीर चला दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
9. प्रश्न: फریादी عورت ने बदला क्यों नहीं लिया?
उत्तर: फरीयादी औरत ने कहा कि बदला लेने से उसके पति की जान वापस नहीं आएगी। उसने उदारता और क्षमा का परिचय देते हुए नूरजहाँ और बादशाह दोनों को माफ कर दिया, क्योंकि उसके लिए इंसानियत और क्षमा ही सबसे बड़ा न्याय था।
10. प्रश्न: जहाँगीर ने महिला की उदारता पर क्या कहा?
उत्तर: जहाँगीर उसकी दया और सहानुभूति से अत्यंत प्रभावित हुआ। उसने अपने मंत्रियों से कहा कि “आज से यह महिला मेरी बहन है” और उसके रहने-सहने व जीवन के सभी खर्चों की जिम्मेदारी खुद उठाने का आदेश दिया।
11. प्रश्न: इस नाटक का नैतिक संदेश क्या है?
उत्तर: यह नाटक सिखाता है कि सच्चा न्याय वही है जो अपने रिश्तों और भावनाओं से ऊपर हो, और सच्ची महानता क्षमा में है। जहाँगीर ने निष्पक्ष न्याय का उदाहरण दिया, जबकि फरीयादी महिला ने दया और क्षमा का।
12. प्रश्न: जहाँगीर को किस कारण प्रसिद्धि मिली?
उत्तर: जहाँगीर अपनी अद्भुत न्यायप्रियता और समान दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। वे न्याय करते समय अपने संबंधों, भावनाओं और पद को भी भूल जाते थे।
13. प्रश्न: “عدل” शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर:“عدل” शब्द का तात्पर्य है — न्याय करना, सबके साथ समान व्यवहार रखना और सच्चाई के आधार पर निर्णय लेना।
14. प्रश्न: नाटक में भावनात्मक चरम दृश्य कौन-सा है?
उत्तर: नाटक का सबसे भावनात्मक दृश्य वह है जब फरियादी स्त्री बदले में तलवार उठाने के बाद भी जहाँगीर को क्षमा कर देती है। यही क्षण उसके उदार हृदय और सच्चे न्याय की भावना को प्रकट करता है।
15. प्रश्न: “جہانگیر” नाम का क्या अर्थ है?
उत्तर: “जहाँगीर” नाम का अर्थ है “विश्वविजेता” या “संसार को जीतने वाला व्यक्ति”। यह नाम उसके साम्राज्य की शक्ति और वैभव का प्रतीक है।
16. प्रश्न: जहाँगीर ने अपने शासन में न्याय कैसे स्थापित किया?
उत्तर:जहाँगीर ने “इंसाफ की घंटी” लगवाई थी, जिससे कोई भी पीड़ित व्यक्ति सीधे बादशाह तक अपनी शिकायत पहुँचा सकता था। इस प्रणाली ने उसके शासन को न्यायप्रिय और जनता के हितैषी बना दिया।
17. प्रश्न: इस कहानी में स्त्री के कौन से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर: इस कहानी में उस स्त्री की महानता, क्षमाशीलता, करुणा, और मानवता के उच्च आदर्श उजागर होते हैं, जो उसे असाधारण बनाते हैं।
18. प्रश्न: नूरजहाँ ने उस महिला का धन्यवाद क्यों किया?
उत्तर:नूरजहाँ ने उस महिला का आभार इसलिए माना क्योंकि उसने प्रतिशोध न लेकर उन्हें क्षमा किया, जिससे नूरजहाँ और जहाँगीर दोनों अपमान और पश्चाताप से बच गए।
19. प्रश्न: दरबारी लोग बादशाह के निर्णय को देखकर क्या बोले?
उत्तर:दरबारियों ने बादशाह के न्यायपूर्ण निर्णय की सराहना करते हुए कहा — “जहाँपना का इक़बाल बुलंद रहे”, यानी बादशाह की प्रतिष्ठा और सम्मान सदा ऊँचा रहे।
20. प्रश्न: “فریادی” शब्द का अर्थ बताइए।
उत्तर:“फरीादी” उस व्यक्ति को कहा जाता है जो किसी अन्याय के विरुद्ध न्याय की याचना लेकर दरबार या शासक के पास पहुँचता है।
21. प्रश्न: नूरजहाँ ने गलती से क्या किया?
उत्तर:
22. प्रश्न: नाटक में कौन-सा प्रसंग न्यायप्रियता का श्रेष्ठ उदाहरण है?
उत्तर: वह दृश्य सबसे प्रभावशाली है जब बादशाह जहाँगीर निष्पक्ष रहकर अपनी पत्नी नूरजहाँ को दोषी ठहराता है और पीड़ित महिला को स्वयं न्याय करने का अधिकार देता है।
23. प्रश्न: जहाँगीर ने फریादी عورت को क्या कहा?
उत्तर: जहाँगीर ने भावुक होकर कहा — “आज से यह स्त्री मेरी बहन के समान है” और आदेश दिया कि उसके जीवनयापन का सारा खर्च दरबार से उठाया जाएगा।
24. प्रश्न: न्यायप्रियता के अलावा जहाँगीर के कौन से गुण दिखाई देते हैं?
उत्तर: जहाँगीर के स्वभाव में दया, करुणा, सहानुभूति, विनम्रता तथा धर्म के प्रति गहरा आस्था भाव दिखाई देता है, जो उन्हें एक आदर्श शासक बनाता है।
25. प्रश्न: फریादी عورت की प्रतिक्रिया ने दरबार में क्या प्रभाव डाला?
उत्तर: जब उसने बदला लेने के बजाय क्षमा का मार्ग चुना, तो पूरा दरबार उसकी उदारता और मानवता से प्रभावित होकर भावविभोर हो उठा और सबने उसकी सराहना की।
26. प्रश्न: नाटक से स्त्री-चरित्र की क्या छवि बनती है?
उत्तर: नाटक में स्त्री-चरित्र को सहृदय, क्षमाशील, विवेकशील और महान आदर्शों वाली नारी के रूप में दिखाया गया है, जो प्रतिशोध के स्थान पर करुणा और मानवता का मार्ग चुनती है।
27. प्रश्न: जहाँगीर के न्याय में क्या विशेषता थी?
उत्तर: जहाँगीर का न्याय पूरी तरह धर्म, सत्य और समानता पर टिका था। वह चाहे अपराधी उसका अपना परिजन ही क्यों न हो, निर्णय हमेशा निष्पक्ष और न्यायसंगत देता था।
28. प्रश्न: “جہانگیر کی عدل پسندی” हमें क्या सिखाती है?
उत्तर: इस नाटक से हमें यह सीख मिलती है कि न्याय करते समय इंसान को अपने संबंध, भावना या पद की परवाह नहीं करनी चाहिए। सच्चा न्याय वही है जो सत्य और धर्म के आधार पर किया जाए।
29. प्रश्न: इस पाठ में किस प्रकार की भाषा प्रयोग हुई है?
उत्तर:इस नाटक की भाषा सहज, प्रभावशाली और संवादप्रधान है। इसमें उर्दू और हिंदी शब्दों का संतुलित प्रयोग किया गया है, जिससे संवाद स्वाभाविक और भावनात्मक बन जाते हैं।
30. प्रश्न: “ایثار و قربانی کی جیتی جاگتی تصویر” से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका आशय उस स्त्री से है जिसने अपने पति की मृत्यु के दुख के बावजूद नूरजहाँ को क्षमा किया। वह स्त्री त्याग, क्षमा और मानवता की सच्ची प्रतीक बन गई।
31. प्रश्न: नाटक का वातावरण कैसा है?
उत्तर: नाटक का वातावरण गंभीर और प्रभावशाली है। इसमें दरबार की गरिमा, भावनाओं की गहराई और न्याय की महत्ता का संगम दिखाई देता है।
32. प्रश्न: इस नाटक में धार्मिक भावना कैसे प्रकट होती है?
उत्तर:नाटक में यह भावना स्पष्ट होती है कि न्याय और करुणा ईश्वर की सच्ची उपासना हैं। जहाँगीर और फریादी عورت दोनों के कर्म यह दिखाते हैं कि सच्चा धर्म इंसानियत और न्याय में निहित है।
33. प्रश्न: “سلطنت” शब्द का अर्थ बताइए।
उत्तर:“सल्तनत” शब्द का अर्थ है – वह क्षेत्र या शासन जहाँ किसी बादशाह या सुल्तान का अधिकार होता है; अर्थात राजा का राज्य या शासन-व्यवस्था।
34. प्रश्न: नाटक का चरम बिंदु कौन-सा है?
उत्तर: वह क्षण जब फरीादी عورت अपने पति की मृत्यु का बदला लेने के बजाय नूरजहाँ को माफ कर देती है, नाटक का सबसे प्रभावशाली और चरम बिंदु है।
35. प्रश्न: क्या नूरजहाँ को सजा मिलनी चाहिए थी? क्यों?
उत्तर: नूरजहाँ को सजा नहीं मिलनी चाहिए थी क्योंकि उसका अपराध जानबूझकर नहीं था; वह अनजाने में हुई गलती थी, और उसने सच्चे मन से पछतावा भी किया था।
36. प्रश्न: जहाँगीर की पत्नी नूरजहाँ का व्यक्तित्व कैसा था?
उत्तर: नूरजहाँ का व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली दिखाया गया है — वह रूपवती होने के साथ-साथ बुद्धिमान, दयालु और गलती होने पर पश्चाताप करने वाली संवेदनशील स्त्री है।
37. प्रश्न: फریादी عورت का निर्णय भारतीय संस्कृति को कैसे दर्शाता है?
उत्तर: उसका निर्णय यह दिखाता है कि भारतीय संस्कृति में बदले से अधिक महत्व क्षमा, दया और मानवीयता को दिया गया है — यही उसकी सभ्यता और नैतिकता की पहचान है।
38. प्रश्न: न्याय के प्रति जहाँगीर का दृष्टिकोण कैसा था?
उत्तर:
39. प्रश्न: इस नाटक में कौन-सी शिक्षा निहित है?
उत्तर: यह नाटक हमें सिखाता है कि सच्चा इंसान वही है जो न्याय के मार्ग पर अडिग रहे, दूसरों के प्रति दया रखे और क्षमा को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बनाए।
40. प्रश्न: इस नाटक का प्रभाव पाठक या दर्शक पर क्या पड़ता है?
उत्तर:यह नाटक दर्शक के हृदय में सच्चे न्याय, क्षमा और इंसानियत की भावना को जागृत करता है। यह सिखाता है कि सच्ची महानता दूसरों को माफ करने और निष्पक्ष रहने में है।
Answer by Mrinmoee