Chapter-- 1 प्रेरणा
१. प्रश्न: नवाश्मयुगीन मणि बनाने की प्रक्रिया में कौन-कौन से चरण होते हैं?
उत्तर: मणि बनाने की प्रक्रिया में मुख्यतः चार चरण होते हैं। पहले चरण में मणि बनाने के लिए उपयुक्त पत्थर या शंख का चयन किया जाता है। दूसरे चरण में उस स्थान से कच्चा माल प्राप्त किया जाता है। तीसरे चरण में इसे कार्यस्थल तक पहुँचाया जाता है। चौथे और अंतिम चरण में इसे गाढ़ा और नियमित आकार देकर मणि तैयार किया जाता है। इन सभी चरणों का ज्ञान कारिगर को होना आवश्यक था।
२. प्रश्न: नवाश्मयुग में मणि बनाने वाले कारीगर को कौन-कौन सी क्षमताएँ आवश्यक थीं?
उत्तर: कारीगर को कच्चा माल पहचानने, मणि बनाने की तकनीक जानने, उपकरणों का प्रयोग करने, उत्पादन की गुणवत्ता की जांच करने और मणि के आकार के नियमों का पालन करने का ज्ञान होना आवश्यक था।
३. प्रश्न: भारतीय उपमहाद्वीप में मिट्टी के बर्तन बनाने की शुरुआत कब हुई?
उत्तर: मिट्टी के बर्तन निर्माण की प्रक्रिया दो चरणों में हुई। पहला चरण इस्वी पूर्व लगभग 7000–6000 में और दूसरा चरण इस्वी पूर्व लगभग 6000–4500 में हुआ।
४. प्रश्न: जम्मू-काश्मीर में नवाश्मयुगीन गांव बसाहत की शुरुआत कब हुई?
उत्तर: जम्मू-काश्मीर के करमीर में बुझान और गुफक्राल में इस्वी पूर्व लगभग 2500 में नवाश्मयुगीन गांव बसाहत की शुरुआत हुई।
५. प्रश्न: उत्तर प्रदेश में नवाश्मयुगीन स्थलों के उदाहरण कौन से हैं?
उत्तर: उत्तर प्रदेश में चोपनी मांडो, कोलडिवा और महागरा में इस्वी पूर्व लगभग 6000 में नवाश्मयुगीन गांव बसाहत शुरू हुई।
६. प्रश्न: बिहार में नवाश्मयुगीन गांव बसाहत कब शुरू हुई?
उत्तर: बिहार के चिरांड और सेनुवार में इस्वी पूर्व लगभग 2000 में नवाश्मयुगीन गांव बसाहत शुरू हुई।
७. प्रश्न: ईशान्य भारत में नवाश्मयुगीन प्रमाण कहाँ मिले?
उत्तर: आसाम में दाओजाली और हाडिंग में उत्खनन से नवाश्मयुगीन प्रमाण प्राप्त हुए। यहाँ की गांव बसाहत इस्वी पूर्व लगभग 2700 में शुरू हुई।
८. प्रश्न: दक्षिण भारत में नवाश्मयुगीन स्थल कौन-कौन से हैं?
उत्तर: कर्नाटक में संगणकल्लू, मस्की, ब्रह्मगिरी, टेक्कलकोटा, पिकलीहाळ; आंध्र प्रदेश में नागार्जुनीकोडा; तमिलनाडु में पय्यमफ्ली में नवाश्मयुगीन स्थापत्य चौथी से तीसरी शताब्दी ईस्वी पूर्व में शुरू हुआ।
९. प्रश्न: नवाश्मयुग में मणि के लिए कच्चा माल क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर: यदि उपयुक्त पत्थर या शंख उपलब्ध न हो तो मणि बनाना संभव नहीं था। कच्चा माल स्थानीय या दूरस्थ स्रोत से लाया जाता था।
१०. प्रश्न: नवाश्मयुग में उत्पादन क्षेत्र में कार्य विभाजन क्यों हुआ?
उत्तर: क्योंकि प्रत्येक उत्पादन कार्य में अलग कौशल की आवश्यकता होती थी, जैसे मणि बनाना, मिट्टी के बर्तन बनाना, हथियार बनाना। इससे समाज में कारीगरों के विशेष वर्ग का निर्माण हुआ।
११. प्रश्न: नवाश्मयुग में कृषि संबंधी पूरक उत्पादन की प्रक्रिया कैसी थी?
उत्तर: कृषि के लिए औजार, मिट्टी के बर्तन, मणि और हथियार स्थानीय स्तर पर बनाए जाते थे। प्रत्येक वस्तु निर्माण के अलग-अलग चरण और कौशल की मांग करती थी।
१२. प्रश्न: नवाश्मयुग में व्यापार का मुख्य साधन क्या था?
उत्तर: प्रारंभ में लोग वस्तुओं का आदान-प्रदान करते थे। प्राणी सामान ले जाने के लिए उपयोग किए जाते थे क्योंकि पहिये का आविष्कार अभी नहीं हुआ था।
१३. प्रश्न: नवाश्मयुग में पेड़ काटने के लिए कौन-से उपकरण प्रयोग में लाए जाते थे?
उत्तर: कुन्हाड़ी, तसण्या, छिन्न्वा और अन्य हथियारों का प्रयोग करके पेड़ काटे जाते थे।
१४. प्रश्न: नवाश्मयुग में पहिये का उपयोग कब शुरू हुआ?
उत्तर: लकड़ी के गोलाकार टुकड़ों से पहिये बनाए गए, जिससे उन्हें आसानी से गति दी जा सकती थी।
१५. प्रश्न: मिट्टी के बर्तन को पहिये पर बनाना क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर: पहिये पर बर्तन बनाने से उत्पादन की गति बढ़ी, मात्रा अधिक हुई और व्यापार के लिए वस्तुएँ आसानी से तैयार हो सकीं।
१६. प्रश्न: यदि कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न हो तो क्या किया जाता था?
उत्तर: कच्चा माल दूरस्थ स्थानों से लाया जाता था और तैयार उत्पाद को वहाँ भेजा जाता था जहाँ इसकी मांग थी।
१७. प्रश्न: नवाश्मयुग में कारीगरी के वर्ग कैसे बने?
उत्तर: विशिष्ट कौशल वाले लोगों का अलग वर्ग बन गया। मणि बनाने, बर्तन बनाने और हथियार बनाने वाले कारीगर अपने कौशल के आधार पर समाज में अलग वर्ग बनाते थे।
१८. प्रश्न: उत्पादन और कौशल का समाज में क्या संबंध था?
उत्तर: प्रत्येक वस्तु निर्माण के लिए अलग कौशल की आवश्यकता थी। इस कारण समाज में कार्य विभाजन और विशेष कारीगर वर्ग का निर्माण हुआ।
१९. प्रश्न: नवाश्मयुग में उत्पादन बढ़ाने के लिए कौन-से उपकरण महत्वपूर्ण थे?
उत्तर: पहिया, कच्चा माल, कुशल कारीगर और तकनीकी ज्ञान उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण थे।
२०. प्रश्न: नवाश्मयुग में व्यापार कैसे बढ़ा?
उत्तर: पहिये के प्रयोग से वस्तुओं की आवाजाही सरल हुई, दूरस्थ स्थानों से कच्चा माल लाया गया और उत्पादित वस्तुएँ अन्यत्र भेजी गई।
२१. प्रश्न: मणि और बर्तन बनाने की तकनीक कैसे विकसित हुई?
उत्तर: साधनों में सुधार, पहिये पर घड़ाई, कच्चा माल की पहचान और कारीगरी के कौशल से तकनीक विकसित हुई।
२२. प्रश्न: उत्पादन प्रक्रिया में तकनीकी योगदान क्या था?
उत्तर: पहिये, उपकरण और कुशल कारीगरों ने उत्पादन प्रक्रिया में क्रांति ला दी।
२३. प्रश्न: नवाश्मयुगीन समाज में कार्य विभाजन क्यों आवश्यक था?
उत्तर: क्योंकि हर वस्तु निर्माण के लिए अलग कौशल चाहिए था, इसलिए कार्य विभाजन अपरिहार्य था।
२४. प्रश्न: मिट्टी के बर्तन का बड़े पैमाने पर उत्पादन कैसे संभव हुआ?
उत्तर: पहिये पर बर्तन बनाने से उत्पादन तेज और मात्रा में बढ़ा।
२५. प्रश्न: यदि स्थानीय कच्चा माल उपलब्ध न हो तो समाज क्या करता?
उत्तर: कच्चा माल दूरस्थ स्थानों से लाया जाता था और उत्पाद को वहाँ भेजा जाता था जहाँ इसकी मांग होती।
२६. प्रश्न: कारीगरी का महत्व उत्पादन में क्या था?
उत्तर: कारीगरी गुणवत्ता, आकार, मात्रा और बाजार मूल्य सुनिश्चित करती थी।
२७. प्रश्न: नवाश्मयुग में व्यापार और परिवहन के मुख्य साधन क्या थे?
उत्तर: प्रारंभ में प्राणी, बाद में पहिये से वस्तुओं का तेज और आसान परिवहन।
२८. प्रश्न: नवाश्मयुग में हथियारों का उपयोग कैसे हुआ?
उत्तर: कुन्हाड़ी, तसण्या, छिन्न्वा से पेड़ काटने, लकड़ी और कृषि कार्य को सरल बनाया।
२९. प्रश्न: उत्पादन बढ़ने का परिणाम क्या हुआ?
उत्तर: कुशल कारीगरी, पहिये, कच्चा माल और तकनीक से उत्पादन और व्यापार दोनों में वृद्धि हुई।
३०. प्रश्न: इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: नवाश्मयुग में उत्पादन, कारीगरी, कौशल, व्यापार और परिवहन का विकास हुआ। कार्य विभाजन और कौशल आधारित वर्ग निर्माण से उत्पादन और व्यापार अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हुए।
Answer by Dimpee Bora