Chapter 1 

                                                     लोकतंत्र में समानता


1. दक्षिण अफ्रीका में रेल यात्रा के दौरान गांधी जी के साथ क्या हुआ और उनकी गरिमा कैसे आहत हुई?

उत्तर: दक्षिण अफ्रीका की रेल यात्रा में गांधी जी ने प्रथम श्रेणी का टिकट खरीद रखा था। इसके बावजूद वहाँ की नस्लभेदी व्यवस्था के कारण उन्हें ट्रेन के कर्मचारियों ने यह कहकर सीट छोड़ने को मजबूर किया कि प्रथम श्रेणी में केवल श्वेत लोग ही बैठ सकते हैं। जब गांधी जी ने शांतिपूर्वक अपना टिकट दिखाकर कहा कि वह यहीं बैठेंगे, तो कर्मचारियों ने न केवल उनका सामान बाहर फेंक दिया बल्कि उन्हें बलपूर्वक डिब्बे से नीचे उतार दिया।

यह घटना सिर्फ भेदभाव ही नहीं थी, बल्कि उनकी आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा पर सीधा प्रहार था। यही अपमानजनक अनुभव आगे चलकर उनके रंगभेद-विरोधी आंदोलन की शुरुआत का कारण बना।


2. ‘आपबीती’ में लेखक को किस तरह के अपमान का सामना करना पड़ा?

उत्तर: लेखक जब अपने एक सम्पन्न रिश्तेदार के विवाह में पहुँचा, तो वहाँ उसकी अत्यधिक उपेक्षा की गई। समारोह में जहाँ अन्य अतिथियों का स्वागत आदरपूर्वक किया जा रहा था, वहीं लेखक को न बैठने की उचित जगह दी गई, न ही भोजन के लिए बुलाया गया। पूरी रात वह बाहर मच्छरों से घिरा हुआ जागकर बिताने को मजबूर हुआ। इस प्रकार मिला अनादर और तिरस्कार लेखक के आत्मसम्मान को गहराई से आहत करता है।


3. रंगभेद की समस्या समाज में असमानता के किस रूप को दर्शाती है?

उत्तर: रंगभेद उस सामाजिक विषमता का प्रतीक है जिसमें लोगों को उनकी जाति, नस्ल और त्वचा के रंग के आधार पर अलग-थलग किया जाता है। इस भेदभाव में श्वेत और अश्वेत समुदायों के लिए अलग सुविधाएँ, नियम और स्थान निर्धारित किए जाते हैं। लंबे समय तक दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका जैसे देशों में अश्वेत लोगों को मूल नागरिक अधिकारों से वंचित रखा गया, जो मानव गरिमा और मानवाधिकारों का गंभीर अपमान था।


4. मध्याह्न भोजन योजना क्यों शुरू की गई और इसके क्या लाभ हुए?

उत्तर: मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत इसलिए की गई कि बच्चे भूखे पेट स्कूल न आएँ और उनकी पढ़ाई पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। इस पहल के चलते विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ी, पढ़ाई छोड़ने की समस्या कम हुई और विद्यार्थियों को आवश्यक पोषण भी मिलने लगा। इसके अलावा, सभी बच्चों का साथ बैठकर भोजन करना सामाजिक भेदभाव को घटाने में भी सहायक सिद्ध हुआ।


5. मध्याह्न भोजन योजना समानता को कैसे बढ़ाती है?

उत्तर: मध्याह्न भोजन योजना समानता इसलिए बढ़ाती है क्योंकि इसके तहत सभी विद्यार्थियों को बिना किसी जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति का भेद किए एक ही प्रकार का भोजन प्राप्त होता है। भोजन पकाने वाले कर्मियों के चयन में भी जातीय आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। इस तरह, बच्चे साथ बैठकर खाते हैं और उनके बीच समानता तथा आपसी सम्मान की भावना विकसित होती है।


6. वैवाहिक विज्ञापनों में क्या-क्या शब्द सामाजिक असमानता का संकेत देते हैं?

उत्तर: वैवाहिक विज्ञापनों में प्रायः ऐसे वाक्य दिखाई देते हैं जैसे— “उच्च जाति की वधु वांछित”, “ब्राह्मण परिवार से हो”, “विशेष समुदाय को प्राथमिकता”, “समान गोत्र अनिवार्य” आदि। इस प्रकार की अभिव्यक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि समाज में विवाह के क्षेत्र में भी जातिगत भेदभाव दृढ़ता से मौजूद है और लोगों की सोच में असमानता अभी भी गहराई से बसती है।


7. दलित और महादलित शब्दों का क्या अर्थ है?

उत्तर: ‘दलित’ शब्द उन जातियों के लिए प्रयोग होता है जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक उपेक्षा, भेदभाव और अत्याचार सहने पड़े। वहीं ‘महादलित’ उन समूहों को कहा जाता है जो दलित समुदाय के भीतर भी सबसे अधिक वंचित रहे—अर्थात जिनकी सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति अत्यधिक कमजोर रही। दोनों शब्द समाज में असमानता की गहरी परतों को उजागर करते हैं।


8. गरीबी और बेरोजगारी कैसे असमानता का सबसे बड़ा स्वरूप हैं?

उत्तर: गरीबी और बेरोजगारी ऐसी स्थितियाँ हैं जो इंसान को सबसे बुनियादी आवश्यकताओं से भी दूर कर देती हैं। जब लोगों के पास पर्याप्त आय या नियमित काम नहीं होता, तो वे ठीक से खाना, पढ़ाई, इलाज और रहने की सुविधा तक नहीं जुटा पाते। विशेषकर खेतिहर मजदूर और दलित समुदाय इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उन्हें सालभर काम नहीं मिलता और उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर रहती है। इस तरह आर्थिक कमजोरी सामाजिक असमानता को और गहरा करती है।


9. पूनम की कहानी कैसे शिक्षा में असमानता को उजागर करती है?

उत्तर: पूनम की कहानी यह दिखाती है कि आर्थिक स्थिति किस तरह बच्चों की शिक्षा तय करती है। उसकी बेटी रमा इसलिए पढ़ने नहीं जा पाती क्योंकि उनका परिवार निजी विद्यालय की फीस नहीं भर सकता और सरकारी स्कूल उनके घर से काफी दूर है। दूसरी ओर शालिनी जैसी बच्चियाँ, जिनके परिवार की स्थिति बेहतर है, आराम से अच्छी शिक्षा प्राप्त कर लेती हैं। दोनों की तुलना से स्पष्ट होता है कि गरीबी शिक्षा के अधिकार पर गहरा असर डालती है और यह भी कि आर्थिक असमानता ही शैक्षणिक असमानता का मुख्य कारण बनती है।

10. बाल संसद की चुनाव प्रक्रिया समानता को कैसे दर्शाती है?

उत्तर: बाल संसद की चुनाव प्रक्रिया बच्चों को वास्तविक लोकतंत्र का अनुभव कराती है। यहाँ हर छात्र को बिना किसी भेदभाव के मतदान और चुनाव लड़ने का अधिकार दिया जाता है। सभी के वोट की समान महत्ता होती है। इस तरह यह प्रक्रिया छात्रों को बराबरी, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों के महत्व को समझने में मदद करती है।

11. यदि बाल संसद में प्रतिनिधि शिक्षक द्वारा नियुक्त किए जाएँ तो क्या फर्क पड़ेगा?

उत्तर: अगर बाल संसद के प्रतिनिधि चुनने की बजाय शिक्षक सीधे उन्हें नियुक्त करने लगें, तो बच्चों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने और उसमें सक्रिय रूप से भाग लेने का मौका नहीं मिलेगा। इससे छात्रों में नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी निभाने की आदत और समान भागीदारी की भावना कमजोर पड़ जाएगी, क्योंकि निर्णय उनका न होकर शिक्षकों का हो जाएगा।


12. ‘एक व्यक्ति एक मत’ का सिद्धांत लोकतंत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: ‘एक व्यक्ति, एक मत’ का सिद्धांत इसलिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि समाज का हर सदस्य समान अधिकारों के साथ निर्णय प्रक्रिया में भाग ले सके। इससे किसी भी प्रकार का सामाजिक, आर्थिक या लैंगिक भेदभाव प्रभाव नहीं डाल पाता और सभी के मत को समान महत्व मिलता है। यही सिद्धांत लोकतंत्र को निष्पक्ष, संतुलित और सभी के लिए न्यायपूर्ण बनाता है।


13. रोज़ा पार्क्स की घटना ने अमेरिका में कौन-सा बड़ा परिवर्तन लाया?

उत्तर: रोज़ा पार्क्स की गिरफ्तारी ने पूरे देश में गुस्सा और विरोध को जन्म दिया। यह घटना धीरे-धीरे एक व्यापक जनसंघर्ष में बदल गई, जिसे नागरिक अधिकार आंदोलन के रूप में जाना जाता है। इसी आंदोलन के दबाव के चलते अमेरिकी सरकार ने 1964 में ‘सिविल राइट्स एक्ट’ पारित किया, जिसने नस्ल और रंग के आधार पर होने वाले हर प्रकार के भेदभाव को कानूनन प्रतिबंधित कर दिया। यह अमेरिकी समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।

14. रोज़ा पार्क्स ने किस तरह अन्याय के खिलाफ साहस दिखाया?

उत्तर: रोज़ा पार्क्स ने बस में बैठी अपनी सीट छोड़ने से यह कहते हुए मना कर दिया कि केवल रंगभेद के आधार पर किसी को उठाया जाना अन्याय है। वे जानती थीं कि ऐसा करने पर उन्हें दंड भी मिल सकता है, परंतु फिर भी उन्होंने अन्याय के आगे झुकने से इनकार किया। गिरफ्तारी के समय भी उन्होंने शांत रहकर अपने अधिकारों पर दृढ़ता बनाए रखी। उनका यह अडिग रुख असमानता के विरुद्ध एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया।

15. लोकतंत्र में समानता क्यों अनिवार्य मानी जाती है?

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल आधार यह है कि समाज के हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार और अवसर मिले। यदि लोगों के बीच जाति, धन, शिक्षा या सामाजिक स्थिति के आधार पर असमानताएँ बनी रहें, तो लोकतंत्र अपना वास्तविक अर्थ खो देता है। इसलिए समानता को लोकतंत्र का आवश्यक सिद्धांत माना गया है, क्योंकि यही नागरिकों को न्याय, सम्मान और भागीदारी का भरोसा देता है।


16. लोग असमानता से संघर्ष कैसे करते हैं? कुछ तरीके बताइए।

उत्तर: असमानता का सामना करने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं। वे अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखते हैं, समूह बनाकर चर्चाएँ करते हैं, शांति पूर्ण विरोध या रैलियाँ आयोजित करते हैं और विभिन्न सामाजिक संगठनों या अदालतों की मदद लेते हैं। इन प्रयासों के माध्यम से वे अपने अधिकारों की रक्षा करते हैं और समाज में बराबरी लाने की कोशिश करते हैं।

17. समाज में जाति व्यवस्था असमानता को कैसे बढ़ाती है?

उत्तर: जाति व्यवस्था समाज को विभिन्न स्तरों में विभाजित कर देती है, जिससे कुछ समूह विशेषाधिकार पाते हैं जबकि दूसरे लोग उपेक्षित रह जाते हैं। इस विभाजन का असर शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और रोज़मर्रा के व्यवहारों में दिखाई देता है। परिणामस्वरूप कई लोगों को बराबरी के अवसर नहीं मिल पाते, जिससे असमानता और भी गहराई से स्थापित हो जाती है।

18. विद्यालय शिक्षा समिति ने भोजन बनाने वालों की जाति को लेकर विवाद कैसे सुलझाया?

उत्तर: विद्यालय शिक्षा समिति ने यह समझाया कि रसोइयों की नियुक्ति में जाति का सवाल उठाना अनुचित है। उन्होंने बताया कि भोजन पकाने का काम किसी भी समुदाय का व्यक्ति कर सकता है और योग्यता ही चयन का आधार होना चाहिए। इस निर्णय ने स्कूल के वातावरण में बराबरी और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत किया।


19. क्या आर्थिक असमानता शिक्षा के अवसरों को प्रभावित करती है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: हाँ, आर्थिक असमानता सीधे तौर पर शिक्षा के अवसरों को सीमित कर देती है। जिन परिवारों की आय कम होती है, वे महँगे स्कूल, कोचिंग, किताबें या यात्रा खर्च वहन नहीं कर पाते। उदाहरण के लिए—पूनम अपनी बेटी रमा को पास के प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा पाती क्योंकि शुल्क अत्यधिक है, जबकि संपन्न परिवार आसानी से अपने बच्चों को बेहतर सुविधाओं वाले विद्यालयों में भेज देते हैं। इससे दोनों के बीच शैक्षिक अंतर बढ़ता ही जाता है।


20. गांधी जी की घटना और रोज़ा पार्क्स की घटना में क्या समानता है?

उत्तर: गांधी जी और रोज़ा पार्क्स की घटनाओं में समानता यह है कि दोनों को ही त्वचा के रंग और नस्ल के आधार पर अन्याय का सामना करना पड़ा। गांधी जी को प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद केवल अश्वेत होने के कारण ट्रेन से उतार दिया गया, जबकि रोज़ा पार्क्स को गोरे यात्री के लिए सीट खाली न करने पर गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों की घटनाएँ अन्याय के विरुद्ध बड़े आंदोलनों की प्रेरणा बनीं और समानता की लड़ाई को नई दिशा दी।


21. रमा के स्कूल न जा पाने के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर:रमा के स्कूल न जा पाने के पीछे मूल रूप से दो तरह की बाधाएँ थीं। पहली, सरकारी स्कूल इतनी दूर था कि रोजाना वहाँ पहुँचना उसके लिए संभव नहीं था। दूसरी ओर, नज़दीक का निजी स्कूल उसकी माता पूनम की आर्थिक क्षमता से बाहर था, क्योंकि उसकी फीस वे वहन नहीं कर सकती थीं। इसी भौगोलिक दूरी और आर्थिक तंगी ने मिलकर रमा की पढ़ाई का रास्ता रोक दिया।


22. बाल संसद के लिए चुनाव करवाना क्यों आवश्यक है?

उत्तर:बाल संसद में चुनाव कराना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इससे बच्चों को लोकतंत्र के वास्तविक सिद्धांतों का अनुभव होता है। मतदान के माध्यम से वे समझते हैं कि प्रतिनिधि चुनने का अधिकार सभी के लिए समान होता है। चुनावी प्रक्रिया उन्हें नेतृत्व, ज़िम्मेदारी उठाने, विचार-विमर्श करने और समूह में काम करने जैसी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर देती है। इस तरह यह अभ्यास उन्हें समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित कराता है।


23. यदि शिक्षक ही प्रतिनिधि मनोनीत कर देते तो क्या अंतर पड़ता?

उत्तर:यदि शिक्षक स्वयं ही प्रतिनिधियों का चयन कर देते, तो इसका नकारात्मक प्रभाव छात्रों पर पड़ता। सबसे पहले, बच्चों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं मिलता, जिससे उनकी लोकतांत्रिक समझ विकसित नहीं हो पाती। दूसरा, चयन प्रक्रिया में पक्षपात महसूस होने की संभावना बढ़ जाती। तीसरा, छात्रों में नेतृत्व, जिम्मेदारी और समान अधिकारों के अभ्यास का अनुभव नहीं बन पाता। इसलिए चुनाव न होना समानता और सहभागिता—दोनों को कमजोर कर देता।

24. क्या बाल संसद में ‘एक व्यक्ति एक मत’ का सिद्धांत लागू होता है?

उत्तर:हाँ, बाल संसद में पूरी तरह से ‘एक व्यक्ति, एक मत’ का नियम अपनाया जाता है। प्रत्येक छात्र को बराबर मताधिकार मिलता है—किसी की सामाजिक पृष्ठभूमि, पढ़ाई, उम्र या किसी अन्य आधार पर कोई भेद नहीं किया जाता। इस प्रक्रिया के माध्यम से बच्चे समझते हैं कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति का वोट समान मूल्य रखता है और निर्णय समान अधिकारों के आधार पर लिए जाते हैं।


25. ‘एक व्यक्ति एक मत’ के सिद्धांत से समाज में क्या लाभ होते हैं?

उत्तर:‘एक व्यक्ति, एक मत’ का सिद्धांत समाज में कई सकारात्मक परिवर्तन लाता है। इससे हर नागरिक अपने को समान अधिकारों वाला महसूस करता है और निर्णय प्रक्रिया में सबकी भागीदारी सुनिश्चित होती है। कुछ चुनिंदा लोगों के हाथ में सत्ता केंद्रीकृत नहीं रहती, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था संतुलित रहती है। इस सिद्धांत से सामाजिक भेदभाव घटता है और न्याय तथा बराबरी की भावना मजबूत होती है, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और अधिक गहरी होती हैं।


26. दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी की गरिमा को किस तरह ठेस पहुँची?

उत्तर:दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी की गरिमा को गंभीर चोट तब पहुँची जब प्रथम श्रेणी का वैध टिकट होने के बावजूद केवल उनकी त्वचा के रंग के कारण उन्हें तृतीय श्रेणी में जाने का आदेश दिया गया। उन्होंने नियमों का उल्लंघन किए बिना शांतिपूर्वक इसका प्रतिवाद किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें जबरन डिब्बे से बाहर निकाल दिया गया। उनका सामान भी बाहर फेंक दिया गया और उन्हें कड़कड़ाती ठंड में पूरी रात स्टेशन पर बैठकर गुज़ारनी पड़ी। यह घटना उनकी मानव-गरिमा और आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार थी।


27. गांधी जी के साथ हुए व्यवहार का विश्व-इतिहास में क्या महत्व है?

उत्तर:गांधी जी के साथ घटित यह अपमानजनक घटना विश्व-इतिहास में इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसी ने रंगभेद जैसी अमानवीय व्यवस्था के विरुद्ध वैश्विक प्रतिरोध की नींव मज़बूत की। इस अनुभव ने उनके भीतर अन्याय, भेदभाव और असमानता के खिलाफ शांतिपूर्ण एवं सत्य आधारित संघर्ष की दिशा को स्पष्ट किया। आगे चलकर यही विचारधारा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे बड़ी शक्ति और प्रेरणा बनी।


28. आपबीती के लेखक को विवाह समारोह में किन बातों से ठेस पहुँची?

उत्तर:विवाह समारोह में लेखक की आत्मसम्मान को इसलिए ठेस लगी क्योंकि न तो उन्हें बैठने की उचित जगह दी गई, न ही भोजन के लिए बुलाया गया। सामाजिक दर्जे के आधार पर की गई यह उपेक्षा उन्हें भीतर तक आहत कर गई। इतना ही नहीं, उन्हें रातभर मच्छरों से भरे स्थान पर अकेला छोड़ दिया गया। इन सभी अनुभवों ने समाज में मौजूद आर्थिक और सामाजिक विषमता को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया।

29. विवाह विज्ञापनों में कौन-से शब्द जाति आधारित असमानता को दर्शाते हैं?

उत्तर विवाह विज्ञापनों में कई ऐसे वाक्य मिलते हैं जो सीधे-सीधे जाति के आधार पर भेदभाव की ओर संकेत करते हैं, जैसे— “ब्राह्मण परिवार की वधू वांछित”, “राजपूत जाति के युवक ही संपर्क करें”, “सिर्फ सवर्ण समुदाय के लिए”, या “जातिगत प्राथमिकता दी जाएगी।” ऐसे शब्द स्पष्ट करते हैं कि विवाह जैसे निजी संबंधों में भी जाति की दीवारें आज तक बनी हुई हैं, और यही मानसिकता सामाजिक असमानता को मजबूती देती है।


10. मध्याह्न भोजन योजना क्यों शुरू की गई? विस्तृत रूप से समझाएँ।

उत्तर:मध्याह्न भोजन योजना लागू करने के पीछे कई उद्देश्य थे। पहले, कई बच्चे खाली पेट स्कूल आते थे, जिससे उनकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं लग पाता था। इसके अलावा, कुछ बच्चे आधी छुट्टी में भोजन करने घर चले जाते थे और वापस स्कूल नहीं आते थे। गरीब परिवारों के बच्चों की स्कूल उपस्थिति कम थी और माताओं को काम छोड़कर बच्चों के लिए भोजन तैयार करने आना पड़ता था। इसी तरह, इस योजना का एक उद्देश्य बच्चों के बीच जातिगत और सामाजिक भेदभाव को भी कम करना था।

इस योजना से बच्चों की उपस्थिति बढ़ी, उनकी सीखने की क्षमता में सुधार हुआ और सभी बच्चों के बीच सामाजिक समरसता का वातावरण भी मजबूत हुआ।


31. मध्याह्न भोजन योजना सामाजिक दूरी कम करने में कैसे सहायक है?


उत्तर:मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के बीच सामाजिक दूरी घटाने में मदद करती है क्योंकि सभी बच्चे एक ही प्रकार का भोजन एक साथ खाते हैं। भोजन बनाने वाले रसोई कर्मचारी किसी भी जाति या वर्ग के हो सकते हैं, जिससे जातिगत भेदभाव कम होता है। साथ ही, साझा भोजन से बच्चों में मित्रता, सहयोग और समानता की भावना विकसित होती है, जिससे स्कूल में एक समरस और बराबरी वाला माहौल बनता है।


32. दलित और महादलित शब्दों का अर्थ क्या है?

उत्तर:दलित: ऐसे समुदाय जिनके साथ समाज में लंबे समय से भेदभाव और अपमान हुआ है, जिन्हें दबाया और उपेक्षित किया गया।

महादलित: दलित समुदाय के उन उपसमूहों को कहा जाता है जो सबसे अधिक पिछड़े, गरीब और समाज से बहिष्कृत रहे हैं। बिहार सरकार ने सबसे पहले इस वर्गीकरण को आधिकारिक मान्यता दी।

33. गरीबी और बेरोजगारी किस प्रकार असमानता का सबसे विकराल रूप है?

उत्तर:गरीबी और बेरोजगारी असमानता का सबसे विकराल रूप हैं क्योंकि गरीबी लोगों को बुनियादी आवश्यकताओं—जैसे भोजन, कपड़ा, घर, शिक्षा और स्वास्थ्य—से वंचित कर देती है। बेरोजगारी के कारण आय नहीं होती, जिससे जीवनयापन कठिन हो जाता है। अधिकांश खेतिहर मजदूर दलित समुदाय से संबंधित होते हैं, इसलिए वे न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक असमानता का भी सामना करते हैं। इस प्रकार यह समस्या समाज में गहरी विषमता और विभाजन पैदा करती है।


34. रोज़ा पार्क्स की घटना विश्व-इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?

उत्तर:रोज़ा पार्क्स ने बस में अपनी सीट नहीं छोड़कर नस्लीय अन्याय के खिलाफ साहस और शांतिपूर्ण विरोध का उदाहरण पेश किया। उनकी गिरफ्तारी ने पूरे अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन की शुरुआत की। इसके परिणामस्वरूप 1964 में नागरिक अधिकार अधिनियम पारित हुआ, जिसने नस्लीय भेदभाव को अवैध घोषित कर दिया। इस घटना को समानता और मानवाधिकारों के लिए विश्वव्यापी संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।


35. रोज़ा पार्क्स की घटना का शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:रोज़ा पार्क्स की घटना ने शिक्षा क्षेत्र में भी समानता को प्रभावित किया। पहले अश्वेत बच्चों के लिए अलग-अलग स्कूल बनाए गए थे, जिन्हें बाद में बंद कर दिया गया। अब उन्हें किसी भी स्कूल में नामांकन का अधिकार मिला। फिर भी आर्थिक असमानता के कारण कई अश्वेत बच्चे उन्हीं स्कूलों में पढ़ने को विवश हैं जहाँ पहले उन्हें अलग रखा जाता था। इसका मतलब है कि कानूनी समानता होने के बावजूद आर्थिक असमानता शिक्षा में अब भी बनी हुई है।


36. लोकतंत्र में असमानता क्यों चुनौती बन जाती है?

उत्तर:लोकतंत्र की नींव समानता पर टिकी होती है। जब समाज में जाति, लिंग, रंग, आर्थिक स्थिति या सामाजिक वर्ग के आधार पर भेदभाव होता है, तो लोकतंत्र की वास्तविकता कमजोर पड़ जाती है। सभी को समान अवसर और अधिकार न मिलने पर लोकतंत्र केवल कागज़ पर ही सीमित रह जाता है। इस तरह असमानता लोकतंत्र की स्थिरता और मूल्यों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है।


37. लोग असमानता के खिलाफ किस प्रकार संघर्ष करते हैं?

उत्तर:लोग असमानता के खिलाफ कई तरीकों से संघर्ष करते हैं—

  • सवाल पूछकर और अपनी आवाज़ उठाकर,

  • स्कूल, पंचायत या सरकार में शिकायत करके,

  • शांतिपूर्ण विरोध और आंदोलनों के माध्यम से,

  • समूह गोष्ठियों और चर्चाओं में भाग लेकर,

  • सामाजिक अभियानों के जरिए जागरूकता फैलाकर,

  • वोट और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उपयोग कर बदलाव लाकर।

इन सभी प्रयासों से समाज में समानता और न्याय स्थापित करने में मदद मिलती है।


38. अपने आसपास के तीन समानता दर्शाने वाले व्यवहार बताइए।

उत्तर:अपने आस-पास के तीन समानता दर्शाने वाले व्यवहार निम्न हैं—

  1. स्कूल में सभी बच्चों को समान रूप से कक्षाओं और गतिविधियों में शामिल किया जाना।

  2. खेल-कूद में हर बच्चे को बराबरी का अवसर देना।

  3. शिक्षक द्वारा सभी छात्रों को समान ध्यान, मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करना।


39. अपने आसपास के तीन असमानता दर्शाने वाले व्यवहार लिखें।

उत्तर:अपने आस-पास के तीन असमानता दर्शाने वाले व्यवहार निम्न हैं—

  1. बच्चों के साथ जाति, धर्म या भाषा के आधार पर भेदभाव करना।

  2. आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को स्कूल या कार्यक्रमों में कम महत्व देना।

  3. लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग नियम और अवसर निर्धारित करना।

40. यदि आप रोज़ा पार्क्स की जगह होतीं/होते तो क्या करते?

उत्तर:यदि मैं रोज़ा पार्क्स की जगह होता/होती, तो मैं शांतिपूर्ण तरीके से अन्याय के खिलाफ विरोध करता/करती। अपने अधिकारों और गरिमा की रक्षा करते हुए कानून का पालन करता/करती। साथ ही, प्रशासन और समाज का ध्यान इस असमानता की ओर आकर्षित करने का प्रयास करता/करती।


Answer by  Mrinmoee