Chapter 6

                                                  मीडिया और लोकतंत्र


 40 लम्बे प्रश्न-उत्तर (Long Question Answers)

1. मीडिया क्या है? इसका अर्थ और महत्व समझाइए।

उत्तर: मीडिया उन सभी साधनों और प्रणालियों को कहा जाता है जो लोगों तक खबरें, सूचनाएँ, विचार और घटनाओं की जानकारी पहुँचाने का काम करते हैं। जैसे—अखबार, पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविज़न, मोबाइल फोन, इंटरनेट आदि। मीडिया समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह हमें देश-दुनिया में हो रही घटनाओं से परिचित कराता है, लोगों को जागरूक बनाता है और कई सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक राय बनाने में भी मदद करता है। इस प्रकार, मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है जो ज्ञान, सूचना और जनचेतना के विकास में योगदान देता है।


2. जनसंचार माध्यम क्या होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: जनसंचार माध्यम वे साधन हैं जिनकी मदद से जानकारी, समाचार, मनोरंजन और संदेश कम समय में बहुत बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँचाए जा सकते हैं। इन माध्यमों की विशेषता यह है कि इनका प्रभाव व्यापक और तेज़ होता है। उदाहरण के लिए — समाचार पत्र करोड़ों पाठकों तक जानकारी पहुँचाते हैं, टेलीविज़न अपने कार्यक्रमों और समाचार प्रसारण के माध्यम से देश-दुनिया के दर्शकों को जोड़ता है, रेडियो दूरदराज के क्षेत्रों तक भी सूचना पहुँचाता है, वहीं मोबाइल और इंटरनेट तो कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक संदेश एवं खबरें पहुँचा देते हैं। इस प्रकार, जनसंचार माध्यम आधुनिक समाज में सूचना प्रसार का सबसे प्रभावशाली माध्यम हैं।


3. संचार तकनीक में आए बदलावों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: संचार तकनीक समय के साथ लगातार विकसित होती रही है। पुराने समय में संदेश पहुँचाने का तरीका धीमा और सीमित था, जहाँ संदेश पहुँचाने के लिए दूत, कबूतर, ढोल या गाँव में सूचना देने के लिए डुगडुगी का सहारा लिया जाता था। बाद के दौर में चिट्ठियाँ और टेलीग्राफ आए, जिनसे सूचना पहुँचाने में पहले की तुलना में आसानी हुई। इसके बाद रेडियो और टेलीफ़ोन ने लोगों को एक-दूसरे से तेज़ी से जोड़ना शुरू किया। टेलीविज़न के आगमन के साथ तस्वीरों और आवाज़ के रूप में समाचार और मनोरंजन सीधे घरों तक पहुँचना शुरू हुआ। आज मोबाइल और इंटरनेट के कारण संचार तकनीक एक नए दौर में पहुँच गई है जहाँ वीडियो कॉल, सोशल मीडिया, ईमेल और ऑनलाइन समाचार के माध्यम से जानकारी कुछ ही क्षणों में दुनिया के किसी भी कोने तक पहुँचाई जा सकती है। इस प्रकार संचार तकनीक में आए बदलावों ने पूरे विश्व को एक-दूसरे से जोड़कर "ग्लोबल विलेज" का रूप दे दिया है।


4. इलेक्ट्रॉनिक और छपे हुए संचार माध्यमों में अंतर बताइए।

उत्तर: छपे हुए संचार माध्यम वे होते हैं जिनमें जानकारी कागज़ पर लिखित रूप में प्रस्तुत की जाती है, जैसे — समाचार पत्र, पत्रिकाएँ और जर्नल। इनमें समाचार पढ़कर समझे जाते हैं और यह स्थायी रूप में संरक्षित रहते हैं।

इसके विपरीत इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में जानकारी ध्वनि, चित्र या वीडियो के रूप में प्राप्त होती है। इसमें टीवी, रेडियो, मोबाइल और इंटरनेट शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम तेज़ गति से सूचना प्रसारित करते हैं और एक ही समय में लाखों लोगों तक पहुँचने की क्षमता रखते हैं।
इस प्रकार दोनों माध्यम सूचना पहुँचाने का काम करते हैं, लेकिन एक मुद्रित रूप पर आधारित है जबकि दूसरा तकनीकी और डिजिटल प्रणाली पर आधारित है।


5. मीडिया हमारे रोज़मर्रा के जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

उत्तर: मीडिया हमारे दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है क्योंकि यह हमें लगातार विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ उपलब्ध कराता है। टीवी, मोबाइल, अखबार और इंटरनेट के माध्यम से हम देश-दुनिया की घटनाओं, खेल, मौसम, शिक्षा, मनोरंजन और राजनीति से हर पल जुड़े रहते हैं।

मीडिया न केवल जानकारी देता है बल्कि हमारी सोच, रुचियों, व्यवहार और निर्णयों को भी प्रभावित करता है — हम क्या पहनना पसंद करते हैं, कौन-सी फ़िल्म या खेल पसंद करते हैं, किस मुद्दे पर राय बनाते हैं — इन सब पर मीडिया का असर दिखाई देता है। इस प्रकार मीडिया हमारे रोज़मर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है।


6. मीडिया की तकनीक बदलने से शिक्षा के क्षेत्र में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर: मीडिया तकनीक के विकास का शिक्षा पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पहले पढ़ाई केवल स्कूल, पुस्तकों और शिक्षकों तक सीमित थी तथा परीक्षा परिणाम जैसी सूचनाएँ पाने के लिए अखबार आने तक लंबा इंतज़ार करना पड़ता था। लेकिन अब तकनीकी प्रगति की वजह से विद्यार्थी कुछ ही क्षण में इंटरनेट के माध्यम से अपने परिणाम देख लेते हैं।

इसके अलावा ऑनलाइन कक्षाएँ, डिजिटल पुस्तकालय, शैक्षणिक एप, ऑडियो–वीडियो लेक्चर और वर्चुअल क्लासरूम जैसी सुविधाओं ने पढ़ाई को अधिक आधुनिक, रोचक और पहुँच योग्य बना दिया है। अब शिक्षा किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीक की मदद से हर छात्र तक आसानी से पहुँच रही है।


7. मीडिया लोगों में जनजागरूकता कैसे फैलाता है?

उत्तर: मीडिया आम लोगों तक आवश्यक जानकारियाँ पहुँचाकर समाज में जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य करता है। टीवी, रेडियो, समाचार पत्र और इंटरनेट के माध्यम से वह स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, महिला अधिकार, पर्यावरण संरक्षण तथा सरकारी योजनाओं के बारे में संदेश प्रसारित करता है।

जब कोई सामाजिक समस्या, अन्याय या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो मीडिया उसे लोगों के बीच मुद्दा बनाकर चर्चा के केंद्र में लाता है। इससे जनता अपने अधिकारों के प्रति सजग होती है और समस्याओं के समाधान के लिए आवाज़ उठाने लगती है। इस तरह मीडिया सामाजिक चेतना को मजबूत बनाने का काम करता है और लोकतंत्र को अधिक सक्रिय और ज़िम्मेदार बनाता है।


8. मनरेगा कार्यक्रम से संबंधित समाचार में मीडिया की क्या भूमिका थी?

उत्तर: मनरेगा की खबर में मीडिया ने निगरानी और जन–हित संरक्षक की भूमिका निभाई। जब ग्रामीणों का हक छीना जा रहा था और मजदूरों की जगह मशीनों से काम करवाकर पैसे बाँटे जा रहे थे, तब स्थानीय मीडिया ने इस अनियमितता को खोजकर सार्वजनिक किया।

खबरें प्रसारित होते ही प्रशासन सक्रिय हुआ, अधिकारी गाँव पहुँचे, काम रुकवाया गया और पूरी जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई की गई। अंततः मजदूरों को उनका अधिकार मिला।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि मीडिया जब ईमानदारी से काम करे तो वह आम लोगों की आवाज़ बनकर भ्रष्टाचार रोकने और न्याय दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।


9. लोकतंत्र में मीडिया की क्या भूमिका होती है?

उत्तर: लोकतंत्र में मीडिया को “चौथा स्तंभ” कहा जाता है क्योंकि यह शासन और जनता के बीच सेतु का काम करता है। मीडिया सत्ता में बैठे लोगों पर निगरानी रखता है और सरकारी कार्यों की सच्चाई जनता के सामने लाता है—फिर चाहे वह उपलब्धियाँ हों या कमियाँ।

जनहित के मुद्दों को उजागर कर, बहसों को जन्म देकर और नागरिक अधिकारों से जुड़ी जानकारी फैलाकर मीडिया समाज में जागरूक माहौल तैयार करता है। जब लोग सूचित होते हैं तो वे सही फैसले ले पाते हैं और लोकतंत्र अधिक मजबूत बनता है।
इस प्रकार, मीडिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी और जनता–केन्द्रित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।


10. कभी-कभी मीडिया हमारे सामान्य जीवन से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान क्यों नहीं देता?

उत्तर: कई बार मीडिया उन विषयों को नज़रअंदाज़ कर देता है जो आम लोगों की मुश्किलों से सीधे जुड़े होते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि आज अधिकांश मीडिया संस्थान दर्शकों की संख्या, विज्ञापनों और आर्थिक लाभ को ज़्यादा महत्व देते हैं। इसलिए वे वही खबरें चुनते हैं जो जल्दी लोकप्रिय बनें — जैसे फ़िल्मी दुनिया, खेल, मशहूर व्यक्तियों की निजी ज़िन्दगी और विवाद।

इसके विपरीत बेहद गंभीर और ज़रूरी मुद्दे — जैसे गरीब परिवारों के लिए सुविधाओं की कमी, बेरोज़गारी, पानी और स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतें — प्रायः कम प्रकाश में आते हैं क्योंकि ये TRP या कमाई नहीं बढ़ाते।

इस तरह लाभ कमाने की प्रवृत्ति के कारण कई महत्वपूर्ण सामाजिक समस्याएँ मीडिया की प्राथमिकता सूची से बाहर चली जाती हैं और लोग पूरे सच से वंचित रह जाते हैं।


11. आल वूमेन न्यूज़ नेटवर्क (अप्पन समाचार) क्या है? इसके उद्देश्य बताइए।

उत्तर: आल वूमेन न्यूज़ नेटवर्क, जिसे स्थानीय लोग अप्पन समाचार के नाम से जानते हैं, ग्रामीण महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला एक अनोखा संचार माध्यम है। इस समूह की महिलाएँ कैमरा और माइक्रोफ़ोन लेकर गाँव–गाँव जाती हैं और वहाँ की वास्तविक परिस्थितियों को अपने वीडियो समाचारों में दर्ज करती हैं।

वे उन मुद्दों को सामने लाती हैं जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया अक्सर महत्व नहीं देता — जैसे किसानों की परेशानी, पंचायत में गड़बड़ी, गरीबों को मिलने वाली योजनाओं में अनियमितता, पानी-बिजली की कठिनाइयाँ तथा सामाजिक बुराइयाँ।

इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य सिर्फ़ ख़बर दिखाना नहीं, बल्कि

  • गाँव वालों को जागरूक बनाना,

  • समस्याओं पर खुलकर चर्चा करवाना, और

  • लोगों में बदलाव लाने की प्रेरणा जगाना है।

इस प्रकार अप्पन समाचार ग्रामीण समाज के लिए ऐसी आवाज़ बन गया है जो उनकी तकलीफ़ों और अधिकारों को सामने लाने में मदद करती है।


12. अप्पन समाचार प्रारंभ करने में महिलाओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

उत्तर: अप्पन समाचार शुरू करने की यात्रा महिलाओं के लिए बिल्कुल आसान नहीं थी। सबसे पहले तो घरवालों को यह विश्वास दिलाना पड़ा कि कैमरा उठाकर ख़बरें इकट्ठा करना भी एक सम्मानजनक और ज़रूरी कार्य है। इसके बाद पत्रकारिता की समझ हासिल करना और कैमरे के संचालन जैसे तकनीकी पहलुओं को सीखना उनके लिए एक नई चुनौती थी।

जब ये महिलाएँ गाँव में समाचार रिकॉर्ड करने निकलीं, तो कई लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया, टिप्पणियाँ कीं और उन्हें रोकने की कोशिश भी की। ऊपर से बिजली और संचार सुविधा नहीं होने के कारण रिपोर्ट तैयार करने और दिखाने में अतिरिक्त कठिनाइयाँ पेश आईं।

इन सब बाधाओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और निरंतर प्रयास से अप्पन समाचार को गाँव की आवाज़ में बदल दिया।


13. बारिश से संबंधित दोनों समाचारों के विषय में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बारिश पर प्रकाशित दोनों समाचारों में विषय चयन और दृष्टिकोण एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।

पहली रिपोर्ट “न्यूज़ ऑफ बिहार” में बारिश को एक सकारात्मक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया गया है — काले बादलों का उमड़ना, बिजली की चमक, ओलों के साथ बरसात और उसके कारण लोगों को भीषण गर्मी से मिली राहत इसका मुख्य केंद्र है। यह रिपोर्ट मौसम के सुहावने बदलाव और लोगों की खुशी पर आधारित है।

इसके विपरीत दूसरी रिपोर्ट “बिहार रोज़ाना” में बारिश के बाद उत्पन्न समस्याओं पर ध्यान दिया गया है। थोड़ी-सी वर्षा के बाद सड़कों पर पानी भरना, नालों का गंदा पानी बहकर कॉलोनियों में जमा होना, जाम लगना और नगर निगम की सफाई व्यवस्था की विफलता — यह खबर प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था को उजागर करती है।

इस प्रकार दोनों समाचार एक ही घटना — बारिश — पर आधारित होने के बावजूद, एक में आराम और खुशी, जबकि दूसरे में कठिनाइयों और समस्याओं को प्रमुखता मिली है।


14. बारिश की खबरों के उदाहरण में हमें मीडिया के बारे में क्या सीख मिलती है?

उत्तर: बारिश की खबरों के उदाहरण से स्पष्ट होता है कि मीडिया किसी भी घटना को अपने चयन और दृष्टिकोण के अनुसार प्रस्तुत करता है। एक ही परिस्थिति को कहीं सकारात्मक रूप में दिखाया गया, तो दूसरी रिपोर्ट ने उसी घटना की अव्यवस्थाएँ उजागर कीं। इससे सीख मिलती है कि समाचार हमेशा वास्तविकता का केवल एक हिस्सा दिखाते हैं, पूरा चित्र नहीं। इसलिए खबर पढ़ते समय हमें केवल उसी दृष्टिकोण पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि घटना के और कौन-से पहलू अनदेखे रह गए हो सकते हैं। इसी आलोचनात्मक समझ के साथ पाठक एक संतुलित राय बना पाता है।


15. क्यों कहा जाता है कि पाठक को खबरों का विश्लेषण करने की जरूरत है?

उत्तर: यह कहा जाता है कि पाठक को समाचारों का विश्लेषण करना चाहिए क्योंकि हर खबर पूरी सच्चाई नहीं बताती। मीडिया किसी विषय के कुछ पहलुओं को आगे रखकर बाकी को पीछे कर सकता है, जिससे घटना का एकतरफा चित्र बन जाता है। यदि पाठक बिना सोचे-समझे खबरों पर भरोसा कर ले, तो उसकी समझ गलत दिशा में जा सकती है। इसलिए आवश्यक है कि पाठक खबर पढ़ते समय यह भी सोचे कि — किन बातों का ज़िक्र नहीं किया गया, किस विषय पर ज़्यादा जोर है और इस खबर से किसकी राय या सोच प्रभावित हो सकती है। इसी आलोचनात्मक दृष्टि से हम सच्चाई के अधिक करीब पहुँच पाते हैं।


16. मीडिया और व्यापार का संबंध क्या है और इसका समाचारों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: आज के समय में मीडिया केवल सूचना देने का साधन नहीं, बल्कि एक बड़ा व्यवसाय भी बन गया है। टीवी चैनल, अख़बार और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म अपनी आय का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से प्राप्त करते हैं। जब मीडिया की आर्थिक निर्भरता बाज़ार और विज्ञापनदाताओं पर बढ़ जाती है, तो अक्सर समाचारों की दिशा और प्राथमिकताएँ भी उनसे प्रभावित होने लगती हैं। कई बार ऐसी ख़बरें प्रमुखता से दिखाई जाती हैं जो अधिक दर्शक आकर्षित करें या व्यावसायिक लाभ पहुँचाएँ, जबकि जनहित के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। इस प्रकार व्यापारिक हित मीडिया की निष्पक्षता और संतुलन पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकते हैं।


17. इंटरनेट आधारित मीडिया ने समाज पर क्या प्रभाव डाला?

उत्तर: इंटरनेट आधारित मीडिया ने संचार और सूचना के आदान-प्रदान के तरीके में बड़ा परिवर्तन ला दिया है। आज लोग समाचार, शिक्षा, मनोरंजन और आवश्यक जानकारी कुछ ही सेकंड में प्राप्त कर सकते हैं। ऑनलाइन क्लास, डिजिटल मीटिंग, वेबिनार और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ने लोगों को दुनिया के किसी भी कोने से जोड़ दिया है।

हालाँकि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ एक नकारात्मक पक्ष भी उभरा है — बिना जाँच-परख के खबरें और अफवाहें तेजी से फैलती हैं, जिससे भ्रम और गलतफहमी की स्थिति पैदा हो जाती है।


18. मीडिया से नागरिकों की भागीदारी कैसे बढ़ती है?

उत्तर: मीडिया नागरिकों को सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं से लगातार जोड़कर सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। जब मीडिया किसी समस्या, अन्याय या जनहित के मुद्दे को उजागर करता है, तो लोग अपनी आवाज़ उठाने, चर्चा करने और समाधान की मांग करने के लिए आगे आते हैं।

टीवी, अखबार, रेडियो और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से नागरिक अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं, जनहित याचिकाएँ और अभियान चला सकते हैं तथा सरकार के फैसलों की समीक्षा कर सकते हैं। इस तरह मीडिया जनता और शासन के बीच संवाद बढ़ाकर लोकतंत्र को अधिक सशक्त बनाता है।


19. मीडिया लोगों की सोच और व्यवहार को कैसे बदलता है?

उत्तर: मीडिया बार-बार दिखाए और सुनाए जाने वाले विचारों के माध्यम से लोगों के मन और जीवनशैली पर गहरा प्रभाव छोड़ता है। समाचार, धारावाहिक, विज्ञापन और सोशल प्लेटफ़ॉर्म के संदेश यह तय करने लगते हैं कि लोग क्या खरीदें, क्या पहनें, किसे पसंद करें, किन मुद्दों का समर्थन करें और समाज को किस नज़र से देखें।

धीरे-धीरे यह प्रभाव आदतों, विश्वासों और सामाजिक मूल्यों में बदलाव पैदा करता है, इसी वजह से मीडिया को जनसाधारण की सोच को दिशा देने वाली शक्ति भी माना जाता है।


20. क्या मीडिया के बिना लोकतंत्र संभव है? अपने मत लिखिए।

उत्तर: लोकतंत्र के सुचारू संचालन के लिए मीडिया अत्यंत आवश्यक है। यदि नागरिकों तक सरकारी निर्णयों, सामाजिक घटनाओं और सार्वजनिक मुद्दों की जानकारी ही न पहुँचे तो वे सही निर्णय नहीं ले पाएँगे। मीडिया जनता की आवाज़ को सरकार तक और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाने वाला माध्यम है। यह अन्याय, भ्रष्टाचार और गलत नीतियों को उजागर करके प्रशासन को जवाबदेह बनाता है। इसलिए मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और इसके बिना लोकतंत्र कमजोर पड़ जाएगा।


🔻 शेष 20 प्रश्न-उत्तर भी नीचे दिए जा रहे हैं (21–40)

21. क्या मीडिया हमेशा सही खबरें प्रसारित करता है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: मीडिया हर बार पूरी तरह सटीक और तथ्यपूर्ण समाचार नहीं देता। कई मौकों पर चैनल या अख़बार बिना पर्याप्त जाँच-पड़ताल के खबरें जारी कर देते हैं — जैसे किसी घटना को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना, अधूरी जानकारी देना या पहले स्थान पर आने की होड़ में गलत तथ्यों को प्रसारित कर देना। ऐसी स्थिति में दर्शकों के बीच डर, भ्रम या गलत धारणा बन सकती है। इसलिए किसी भी समाचार को सच मान लेने से पहले विभिन्न स्रोतों से उसकी पुष्टि करना समझदारी है।


22. वैकल्पिक मीडिया की आवश्यकता क्यों पड़ी?

उत्तर: जब पारंपरिक या मुख्यधारा मीडिया ने अपनी प्राथमिकता मनोरंजन, विज्ञापन तथा व्यावसायिक घटनाओं पर केंद्रित कर दी, तब समाज के असली और जमीनी मुद्दे—जैसे गरीब मजदूरों की स्थिति, किसानों की परेशानी, ग्रामीण विकास की समस्याएँ, और सरकारी योजनाओं में अनियमितताएँ—समाचारों से लगभग गायब होने लगे। ऐसे उपेक्षित विषयों को आवाज देने और समाज के सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए सामुदायिक रेडियो, वीडियो जर्नलिज्म, स्थानीय समाचार पत्र और हस्तलिखित पत्रिकाओं जैसे वैकल्पिक मीडिया की शुरुआत हुई।


23. सामुदायिक रेडियो क्या होता है? लाभ लिखिए।

उत्तर:सामुदायिक रेडियो वह प्रसारण सेवा है, जिसे किसी क्षेत्र के लोग खुद अपनी भाषा, संस्कृति और आवश्यकताओं के अनुरूप चलाते हैं। यह रेडियो सरकार या बड़े मीडिया घरानों द्वारा नहीं बल्कि स्थानीय समुदाय द्वारा संचालित होता है।

सामुदायिक रेडियो के लाभ:

  • गाँवों और कस्बों की वास्तविक समस्याएँ और ज़रूरतें सीधे प्रसारण में स्थान पाती हैं।

  • स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, सरकारी योजनाएँ तथा सामाजिक मुद्दों पर लोगों को उपयोगी जानकारी मिलती है।

  • स्थानीय कलाकारों, छात्रों और प्रतिभाशाली व्यक्तियों को मंच मिलता है और पहचान बढ़ती है।

  • सामुदायिक संवाद बढ़ता है और समाज में सहभागिता तथा जागरूकता मजबूत होती है।


24. संचार माध्यम से सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कैसे होता है?

उत्तर: सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रसारित करने में संचार माध्यम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टीवी, रेडियो, अखबार, इंटरनेट, पोस्टर और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्मों पर विज्ञापन, विशेष कार्यक्रम, साक्षात्कार, प्रेस कॉन्फ्रेंस और समाचार रिपोर्टों के ज़रिए योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुँचाई जाती है। इससे लोगों को यह पता चलता है कि कौन-सी योजना किसके लिए है और उसका लाभ कैसे लिया जा सकता है।

सरकार को भी प्रतिक्रिया, सुझाव और आलोचना मिलती है, जिससे योजनाओं में सुधार करने में सहायता मिलती है।


25. मीडिया बच्चों और युवाओं पर क्या प्रभाव डालता है?

उत्तर: मीडिया बच्चों और युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण में बड़ा योगदान देता है। शैक्षिक कार्यक्रम, वैज्ञानिक जानकारी, करियर मार्गदर्शन, खेल-कूद और प्रेरणादायक कहानियाँ उनके आत्मविश्वास और ज्ञान में वृद्धि करती हैं। इससे सीखने की रुचि, रचनात्मकता और लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा मिलती है।

लेकिन दूसरी ओर, मीडिया पर दिखाई जाने वाली हिंसा, नशा, फैशन पर अत्यधिक ध्यान और अवास्तविक जीवनशैली जैसे विषय बच्चों के मन और व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। आकर्षक लेकिन भ्रम पैदा करने वाले विज्ञापन भी गलत आदतों और अपेक्षाओं को जन्म दे सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि परिवार और शिक्षक बच्चों व युवाओं को संतुलित और समझदारी से मीडिया का उपयोग करना सिखाएँ।


26. मोबाइल और इंटरनेट सूचना के तेज़ माध्यम क्यों कहलाते हैं?

उत्तर: मोबाइल और इंटरनेट ने सूचना प्राप्त करने की गति को बेहद तेज़ बना दिया है। किसी भी घटना, समाचार या जानकारी को प्रकाशित होने के कुछ सेकंड के भीतर दुनिया के हर कोने में उपयोगकर्ता देख सकते हैं। लाइव स्ट्रीमिंग, त्वरित मैसेजिंग, ई-मेल, ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के द्वारा जानकारी लगातार अपडेट होती रहती है।

इन माध्यमों ने समय और दूरी की बाधाएँ समाप्त कर दी हैं — न अखबार छपने का इंतज़ार, न टीवी के कार्यक्रम का समय। बस मोबाइल हाथ में और इंटरनेट उपलब्ध हो, तो पढ़ाई, समाचार, मनोरंजन, सरकारी सेवाएँ और शिक्षण सामग्री तुरंत प्राप्त की जा सकती है। इसी कारण मोबाइल और इंटरनेट को आज सबसे तीव्र और प्रभावी सूचना वाहक माना जाता है।


27. पत्रकारिता में नैतिकता का क्या महत्व है?

उत्तर: पत्रकारिता तभी सार्थक मानी जाती है जब वह सचाई, निष्पक्षता और विश्वसनीयता के आधार पर काम करे। पत्रकार समाज और जनता के भरोसे का प्रतिनिधि होता है, इसलिए उससे उम्मीद की जाती है कि वह किसी व्यक्ति, संस्था या विचारधारा के दबाव में आए बिना तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

यदि समाचारों में अतिरंजना, अफवाह फैलाना, द्वेषपूर्ण भाषा या झूठी जानकारी शामिल हो जाए तो लोगों के बीच गलतफहमियाँ, सामाजिक तनाव और अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसके विपरीत नैतिक पत्रकारिता जनता के विश्वास को बनाए रखती है, समाज में शांति और जागरूकता को बढ़ावा देती है और लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

इसी कारण पत्रकारिता में ईमानदारी, जिम्मेदारी और नैतिक आचरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।


28. मीडिया की निष्पक्षता क्यों जरूरी है?

उत्तर: मीडिया की निष्पक्षता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समाज को वास्तविक और संपूर्ण जानकारी तभी मिलती है जब समाचार किसी के पक्ष या विरोध में झुके बिना प्रस्तुत किए जाएँ। अगर मीडिया किसी राजनीतिक दल, संस्था या व्यक्ति के प्रभाव में आकर खबरें दिखाए, तो सच विकृत हो जाता है और लोग भ्रमित हो सकते हैं।

जब मीडिया तथ्य आधारित और संतुलित रिपोर्टिंग करता है, तब नागरिक घटनाओं को सही रूप में समझ पाते हैं और सोच-समझकर अपने निर्णय ले सकते हैं। यह जनमत को स्वस्थ दिशा देता है और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखता है।

अतः लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और समाज में विश्वास कायम रखने के लिए मीडिया की निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है।


29. सूचना तकनीक के बढ़ते उपयोग से जीवन में क्या बदलाव आए?

उत्तर: सूचना तकनीक ने हमारे दैनिक जीवन की रूपरेखा ही बदल दी है। अब बहुत-सी गतिविधियाँ, जिनके लिए पहले घर से बाहर जाना पड़ता था, मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से मिनटों में पूरी हो जाती हैं। पढ़ाई के लिए ऑनलाइन कक्षाएँ, डॉक्टर से परामर्श के लिए टेलीमेडिसिन, घर बैठे बैंकिंग और बिल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी तथा मनोरंजन के असीम विकल्प — इन सबने जीवन को सरल, तेज़ और सुविधाजनक बना दिया है।

इसके साथ ही डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं के ऑनलाइन होने से समय की बचत होती है और कामों में पारदर्शिता बढ़ी है। कुल मिलाकर सूचना तकनीक ने जीवनशैली को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी बना दिया है।


30. मीडिया सरकारी गलतियों या भ्रष्टाचार को उजागर करने में कैसे मदद करता है?

उत्तर: जब सरकारी कामकाज में अनियमितता या भ्रष्टाचार होता है, तो मीडिया उसे जनता के सामने लाने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाता है। संवाददाता जाँच पड़ताल करके, अधिकारियों और पीड़ितों से बातचीत करके तथा स्थल पर किए गए वीडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़ों को प्रमाण के रूप में पेश करके सच्चाई को उजागर करते हैं।

खबर प्रसारित होते ही मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन जाता है, जिसके दबाव में प्रशासन को घटनास्थल की जाँच करनी पड़ती है और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू होती है। इसी तरह मनरेगा योजना की गड़बड़ी पर रिपोर्ट सामने आने के बाद मजदूरों को उनका हक मिला — यह स्पष्ट करता है कि मीडिया भ्रष्टाचार रोकने और जनता के पक्ष में न्याय दिलाने की दिशा में मजबूत भूमिका निभाता है।


31. मौसम संबंधी खबरों का लोगों की दैनिक गतिविधियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: मौसम की रिपोर्टें सीधे-सीधे लोगों की दिनचर्या और कार्य योजनाओं को प्रभावित करती हैं। जब समाचारों में भारी वर्षा, प्रचंड गर्मी, घने कोहरे या तूफान जैसी जानकारी दी जाती है, तो आम लोग अपने कामकाज का समय बदल देते हैं, खेतों में बुवाई-कटाई जैसे कृषि कार्यों की योजना पुनः बनाते हैं और यात्रा एवं परिवहन से जुड़े निर्णय संभलकर लेते हैं।

इसी प्रकार, स्कूल, कार्यालय, प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग भी मौसम चेतावनियों के आधार पर आवश्यक सावधानियाँ अपनाते हैं। इसलिए मौसम से जुड़ी खबरें सिर्फ सूचना नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और योजनाओं के समुचित संचालन के लिए मार्गदर्शक की तरह काम करती हैं।


32. खेल और सिनेमा आधारित समाचार लोगों को क्यों आकर्षित करते हैं?

उत्तर: खेल और सिनेमा से जुड़ी खबरें लोगों का ध्यान इसलिए अपनी ओर खींचती हैं क्योंकि ये दैनिक तनाव से राहत और मनोरंजन का एहसास कराती हैं। पसंदीदा खिलाड़ियों की जीत-हार और प्रिय कलाकारों की नई फिल्मों, गीतों या निजी जीवन की जानकारी लोगों में उत्सुकता और भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती है।

इसके साथ-साथ मीडिया भी जानता है कि खेल और फिल्मों से जुड़ी खबरों को अधिक दर्शक मिलते हैं, इसलिए दर्शक संख्या और लोकप्रियता बनाए रखने के लिए ऐसे विषयों को प्राथमिकता देकर बार-बार प्रसारित किया जाता है।


33. समाचार शीर्षक का पाठक पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: समाचार का शीर्षक पाठक के मन में सबसे पहले जिज्ञासा या रूचि उत्पन्न करता है। यदि शीर्षक प्रभावशाली, चौंकाने वाला या भावनात्मक हो, तो पाठक तुरंत पूरी खबर पढ़ने की ओर आकर्षित होता है। कई बार केवल शीर्षक पढ़कर ही लोग पूरी घटना के बारे में मत बना लेते हैं। इसलिए मीडिया समाचार शीर्षकों को ऐसा बनाता है कि वे तुरंत ध्यान खींचें और पाठक को आगे पढ़ने के लिए प्रेरित करें।


34. समाचार रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया समझाइए।

उत्तर: समाचार रिपोर्ट बनाने के लिए सबसे पहले रिपोर्टर उस घटना या विषय से जुड़े सभी तथ्यों को एकत्रित करता है। इसके बाद वह घटना स्थल पर मौजूद लोगों, विशेषज्ञों या प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत कर अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करता है। फिर उपलब्ध तस्वीरें, वीडियो और प्रमाण जुटाकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी तथ्य गलत या अपुष्ट न हो। सारी सामग्री की पुष्टि होने पर समाचार को सरल, स्पष्ट और निष्पक्ष भाषा में लिखा जाता है। अंत में तैयार रिपोर्ट को अखबार, टीवी चैनल या ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर प्रकाशित या प्रसारित किया जाता है ताकि सूचना जनता तक पहुँच सके।


35. सूचना प्राप्त करने में मोबाइल और टीवी में क्या अंतर है?

उत्तर: टीवी एक सामूहिक सूचना माध्यम है, जो निर्धारित समय पर तैयार कार्यक्रम और खबरें दर्शकों को एक साथ उपलब्ध कराता है। इसके विपरीत, मोबाइल व्यक्ति को अपनी सुविधा और रुचि के अनुसार सूचना प्राप्त करने की स्वतंत्रता देता है। मोबाइल के जरिए कोई भी समाचार, वीडियो, शैक्षिक सामग्री या लाइव स्ट्रीम कहीं भी और किसी भी समय देखा जा सकता है। इसलिए मोबाइल अधिक व्यक्तिगत, लचीला और तुरंत उपलब्ध होने वाला माध्यम माना जाता है।


36. मीडिया सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में कैसे मदद करता है?

उत्तर: मीडिया समाज में फैली हानिकारक प्रथाओं के खिलाफ लोगों को सचेत करता है। उदाहरण के लिए बाल विवाह, दहेज प्रथा, महिलाओं पर अत्याचार, शराब की लत और अंधविश्वास जैसी समस्याओं को उजागर करके जागरूकता बढ़ाई जाती है। रिपोर्ट्स, डॉक्यूमेंट्री, समाचार और वीडियो अभियान के माध्यम से लोग इन कुरीतियों के खिलाफ अपने नजरिए बदलते हैं। अप्पन समाचार जैसी पहल ग्रामीण स्तर पर इस प्रकार की सामाजिक सुधार की दिशा में कार्य करती है।


37. क्या मीडिया लोगों को प्रेरित भी करता है? उदाहरण सहित बताइए।

उत्तर: हां, मीडिया लोगों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रेरक खबरें, सफलता की कहानियाँ और समाजसेवी या विशेषज्ञों के कार्यों की रिपोर्ट देखकर दर्शक अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा पाते हैं। उदाहरण के तौर पर, खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ, वैज्ञानिकों की खोजें, सैनिकों की बहादुरी और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अभियान युवाओं और आम लोगों में उत्साह, मेहनत और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जगाते हैं।


38. मीडिया की स्वतंत्रता क्यों आवश्यक है?

उत्तर: मीडिया की स्वतंत्रता इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे वह किसी भी बाहरी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना सच्ची और निष्पक्ष खबरें प्रस्तुत कर सकता है। यदि मीडिया स्वतंत्र न हो, तो सरकार या प्रभावशाली समूह अपनी मर्जी से जनता को अधूरी या भ्रामक जानकारी दे सकते हैं। स्वतंत्र मीडिया समाज को वास्तविकता दिखाने और नागरिकों की आवाज़ बनने में अहम भूमिका निभाता है।


39. डिजिटल मीडिया के लाभ और हानियाँ लिखिए।

उत्तर:लाभ: डिजिटल मीडिया से जानकारी तुरंत और कम लागत में प्राप्त होती है। यह लोगों को दुनिया भर से जोड़ता है, शिक्षा और ज्ञान के नए अवसर देता है, ऑनलाइन सेवाओं को सुलभ बनाता है और संचार को तेज़ और आसान बनाता है।

हानियाँ: इसके माध्यम से कभी-कभी झूठी या अपुष्ट खबरें फैल सकती हैं। साइबर अपराध, मोबाइल और इंटरनेट की लत, और निजी डेटा की चोरी जैसे खतरे भी बढ़ जाते हैं।

निष्कर्ष: इसलिए डिजिटल मीडिया का उपयोग समझदारी और सावधानी से करना आवश्यक है।


40. आप क्यों मानते हैं कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है?

उत्तर: न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के साथ-साथ मीडिया भी लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला है। यह भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर ध्यान देता है, जनता की समस्याएँ और सुझाव सरकार तक पहुँचाता है, नागरिक अधिकारों की रक्षा करता है और समाज में जागरूकता फैलाता है। इस सक्रिय भूमिका के कारण मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है।


Answer by Mrinmoee