Chapter 3
आंतरिक बल एवं उससे बननेवाली भू-आकृतियाँ
प्र.1. भूकंप आने के मुख्य कारणों को विस्तार से समझाइए।
उत्तर: पृथ्वी का ऊपरी भाग कठोर चट्टानों की बड़ी-बड़ी प्लेटों से बना है जिन्हें लिथोस्फेरिक प्लेट कहा जाता है। ये प्लेटें पृथ्वी के मेंटल में मौजूद गर्म तथा प्रवाही पदार्थ पर तैरती रहती हैं, इसलिए इनमें निरंतर हलचल होती रहती है। जब दो प्लेटें आपस में भिड़ती हैं, एक-दूसरी से दूर जाती हैं, या एक-दूसरी के ऊपर-नीचे खिसकती हैं, तो उनकी सीमाओं पर जबरदस्त तनाव जमा होने लगता है। बहुत समय तक जमा यह तनाव अचानक फट पड़ता है और ऊर्जा झटके के रूप में बाहर निकलती है — यही ऊर्जा पृथ्वी की सतह को हिलाती है। इस प्रकार उत्पन्न कम्पन को भूकंप कहा जाता है।
प्लेटों के अचानक टूटने, फॉल्ट लाइनों के सरकने, ज्वालामुखी विस्फोटों और पृथ्वी के भीतर ऊर्जा के असंतुलन जैसे कारण भी भूकंप को जन्म देते हैं।
प्र.2. भूकंप का उद्गम केंद्र एवं अधिकेन्द्र क्या होता है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भूकंप की उत्पत्ति पृथ्वी के अंदर किसी विशेष स्थान से होती है। इस स्थान को उद्गम केंद्र (Focus) कहते हैं। यहीं से भूकंप की ऊर्जा और कम्पन तरंगें बाहर की ओर फैलती हैं।
उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर, यानी पृथ्वी की सतह पर जिस बिंदु पर यह कम्पन सबसे पहले महसूस होता है, उसे अधिकेन्द्र (Epicenter) कहा जाता है। अधिकेन्द्र पर भूकंप का प्रभाव सबसे तेज होता है और सतह से दूर जाने पर इसकी तीव्रता घटती जाती है।
उदाहरण: 2001 में गुजरात के भुज का भूकंप — भूकंप का उद्गम केंद्र जमीन के भीतर था, जबकि भूकंप की सबसे अधिक तीव्रता भुज शहर में महसूस हुई, जिसे अधिकेन्द्र कहा गया।
प्र.3. भूकंप की तीव्रता मापने वाले यंत्र और मापन पद्धति का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भूकंप के कंपन और उसकी तीव्रता को मापने के लिए सीस्मोग्राफ नामक यंत्र का उपयोग किया जाता है। यह यंत्र पृथ्वी की सतह पर आने वाली भूकंपी तरंगों को ग्राफ के रूप में रिकॉर्ड करता है।
प्र.4. जापान में भूकंप अधिक आने के बावजूद जान-माल की क्षति कम क्यों होती है?
उत्तर: जापान भूकंप प्रवण क्षेत्र में आने के बावजूद वहाँ होने वाले नुकसान की मात्रा अपेक्षाकृत कम रहती है। इसके मुख्य कारण हैं:
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भूकंपरोधी निर्माण तकनीक: भवन और संरचनाएँ इस प्रकार बनाई जाती हैं कि वे झटकों को सहन कर सकें।
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जनता की जागरूकता और प्रशिक्षण: लोग भूकंप आने पर सुरक्षित व्यवहार, छिपने और बाहर निकलने की तकनीक अच्छी तरह जानते हैं।
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उन्नत चेतावनी प्रणाली: भूकंप के झटकों का पता लगाकर तुरंत लोगों को चेतावनी दी जाती है।
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सक्रिय प्रशासन और राहत कार्य: प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल तुरंत राहत कार्य और बचाव कार्य शुरू कर देते हैं।
इन तैयारियों और जागरूकता के कारण जापान में भूकंप के बावजूद जान-माल की अपेक्षाकृत कम हानि होती है।
प्र.5. भूकंप के समय लोगों को क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तर:भूकंप आने पर सुरक्षित रहने के लिए निम्न सावधानियाँ अपनानी चाहिए:
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घबराएँ नहीं: भय से निर्णय लेने से स्थिति और खतरनाक हो सकती है।
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मजबूत वस्तुओं के नीचे छिपें: जैसे टेबल, पलंग या चौकी, ताकि ऊपर से गिरने वाली चीजों से सुरक्षा मिले।
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खतरनाक स्थानों से दूर रहें: गैस सिलेंडर, आग, चिमनी, कमजोर दीवारों और छत से दूर रहें।
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बिजली उपकरणों को न छुएँ: शॉर्ट सर्किट और आग का खतरा होता है।
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खुले स्थान पर जाएँ: भवनों या ऊँची संरचनाओं के पास खड़े होने से खतरा रहता है।
इन सावधानियों का पालन करने से भूकंप के समय जीवन और संपत्ति की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है।
प्र.6. भारत में आए प्रमुख भूकंपों का विवरण लिखिए।
उत्तर: भारत में ऐतिहासिक रूप से कई भयंकर भूकंप आए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
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जनवरी 1934 – दरभंगा, बिहार: इस भूकंप ने बिहार के कई जिलों में भारी तबाही मचाई और अनेक जान-माल की हानि हुई।
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सितंबर 1993 – लातूर, महाराष्ट्र: यह भूकंप अचानक आया और लातूर क्षेत्र में व्यापक क्षति हुई।
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जनवरी 2001 – कच्छ और भुज, गुजरात: इस भूकंप ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई, हजारों लोग मारे गए और बड़ी संख्या में भवन ध्वस्त हुए।
इन भूकंपों ने यह स्पष्ट किया कि भूकंप संवेदनशील क्षेत्रों में उचित तैयारी और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
प्र.7. ज्वालामुखी क्या है और यह कैसे बनता है?
उत्तर:पृथ्वी के अंदर मैग्मा नामक पिघली हुई चट्टानें हमेशा गतिशील रहती हैं। जब पृथ्वी की परत किसी स्थान पर कमजोर हो जाती है, तो यह मैग्मा ऊपर की ओर उठता है।
यह मैग्मा सतह पर धुआँ, भाप, गैस, राख और लावा के रूप में बाहर निकलता है। इस प्रक्रिया को ज्वालामुखी विस्फोट कहते हैं।
ज्वालामुखी पृथ्वी के आंतरिक बलों और प्लेट विवर्तनिकी के कारण उत्पन्न होता है और यह भू-आकृति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्र.8. वलित पर्वत क्या होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: वलित पर्वत उन पर्वतों को कहते हैं जो तब बनते हैं जब पृथ्वी की परत पर दो विपरीत दिशाओं से संपीडन बल पड़ता है। इस बल के कारण चट्टानें मुड़कर वलन (Fold) बना देती हैं और धीरे-धीरे पर्वत का आकार ग्रहण कर लेती हैं।
उदाहरण: हिमालय पर्वत और रॉकी पर्वत वलित पर्वतों के प्रमुख उदाहरण हैं। ये पर्वत बड़े पैमाने पर संपीड़न बलों के प्रभाव से बने हैं और उनकी बनावट में मोड़ और तह दिखाई देते हैं।
प्र.9. भ्रंशोत्थ पर्वत का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर: भ्रंशोत्थ पर्वत तब बनते हैं जब पृथ्वी की पर्पटी में समानांतर दरारें (Faults) बनती हैं और इन दरारों के बीच का भू-भाग ऊपर उठ जाता है। यह ऊपर उठा हुआ भाग पर्वत के रूप में दिखाई देता है।
उदाहरण: भारत में सतपुड़ा पर्वत और यूरोप में ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत भ्रंशोत्थ पर्वत के प्रमुख उदाहरण हैं। ये पर्वत सीधे और ब्लॉक जैसी बनावट के लिए जाने जाते हैं।
प्र.10. संचयन पर्वत क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: संचयन पर्वत वे पर्वत हैं जो ज्वालामुखी गतिविधियों के परिणामस्वरूप बनते हैं। जब ज्वालामुखी से लावा, राख और अन्य पदार्थ सतह पर निकलते हैं और ठंडा होकर जम जाते हैं, तो इन पदार्थों का धीरे-धीरे संचय होने से पर्वत का आकार बनता है।
उदाहरण: जापान का फ्यूजियामा पर्वत और अफ्रीका का किलीमंजारो पर्वत संचयन पर्वतों के प्रसिद्ध उदाहरण हैं। ये पर्वत ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण बने हैं और इनकी बनावट में लावा की परतें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
प्र.11. अवशिष्ट पर्वत क्या होते हैं?
उत्तर: अवशिष्ट पर्वत वे पर्वत होते हैं जो दीर्घकालिक अपरदन (erosion) के बाद बचते हैं। समय के साथ जल, हवा और अन्य प्राकृतिक शक्तियों से पर्वत के ऊँचे भाग धीरे-धीरे कट जाते हैं, और जो हिस्सा बचता है, वही अवशिष्ट पर्वत कहलाता है।
उदाहरण: भारत में अरावली पर्वत और पारसनाथ की पहाड़ी अवशिष्ट पर्वत के प्रमुख उदाहरण हैं। ये पर्वत पुराने और कटे-छंटे भूभाग के रूप में दिखाई देते हैं।
प्र.12. पठार किसे कहते हैं? उनके लक्षण लिखिए।
उत्तर: पठार वह भू-आकृति है जो सामान्य धरातल से ऊँची और विस्तृत होती है। इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं:
प्र.13. पठारों के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:पठार कई प्रकार के होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
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महाद्वीपीय पठार: ये पठार महाद्वीपों के स्थायी ऊँचे हिस्सों में पाए जाते हैं।
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शील्ड पठार: प्राचीन चट्टानों से बने पठार, जो लंबा समय भू-गर्भीय प्रक्रियाओं के बाद स्थिर हो चुके हैं।
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लावा निर्मित पठार: ज्वालामुखी गतिविधियों से निकले लावा के जमने से बने पठार।
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अंतर-पर्वतीय पठार: दो पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बने पठार।
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गिरिपद पठार: पहाड़ों के तल पर फैले पठार।
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निक्षेपित पठार: वायु या हिमनदी द्वारा अवसादित मिट्टी और चट्टानों से बने पठार।
उदाहरण: भारत का छोटानागपुर पठार निक्षेपित और महाद्वीपीय पठार का मिश्रित उदाहरण है।
प्र.14. मैदान किसे कहते हैं?
उत्तर: मैदान वह भूमि होती है जिसकी सतह समतल या बहुत हल्की ढाल वाली हो। यह भूमि अक्सर एकसमान मिट्टी से बनी होती है और खेती या बस्तियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
प्र.15. समुद्रतल बढ़ने का मैदानों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप तटीय और निम्नभूमि वाले मैदान धीरे-धीरे पानी में डूब सकते हैं। इससे:
प्र.16. बिहार के भूकंप क्षेत्रों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:बिहार को भूकंप की संवेदनशीलता के आधार पर तीन मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है:
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भूकंप क्षेत्र III: इसमें बक्सर, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, जहानाबाद, नवादा, अरवल, गया शामिल हैं।
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भूकंप क्षेत्र IV: इसमें पटना, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, नालंदा, बेगूसराय, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया आदि जिले आते हैं।
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भूकंप क्षेत्र V: इसमें मधुबनी, सुपौल, सीतामढ़ी, दरभंगा, अररिया, किशनगंज आदि जिले शामिल हैं।
विशेषता: क्षेत्र V सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है, जहाँ भूकंप की संभावना और तीव्रता अधिक रहती है।
प्र.17. पृथ्वी के आंतरिक बल क्या हैं? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: पृथ्वी के भीतर से उत्पन्न वे बल, जो धरातल और भू-आकृतियों को बदलते या निर्माण करते हैं, आंतरिक बल (Endogenic Forces) कहलाते हैं। ये शक्तियाँ पृथ्वी की सतह को ऊपर उठाने, दबाने या फाड़ने का कार्य करती हैं।
उदाहरण:
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पर्वत निर्माण: जैसे हिमालय और रॉकी पर्वत।
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ज्वालामुखी: लावा और राख के माध्यम से भू-आकृति का निर्माण।
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भूकंप: प्लेट टकराव से उत्पन्न कम्पन।
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भ्रंश: पृथ्वी की परत में दरारें और उनका ऊपरी भाग उठना या गिरना।
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भूस्खलन: ढलानों पर मिट्टी या चट्टानों का खिसकना।
इन आंतरिक बलों के कारण पृथ्वी की सतह पर लगातार परिवर्तन होते रहते हैं।
प्र.18. दीर्घकालीन भूसंचलन और आकस्मिक भूसंचलन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:पृथ्वी की सतह पर होने वाले भूसंचलन को दो प्रकारों में बाँटा जा सकता है:
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दीर्घकालीन भूसंचलन (Gradual/Long-term):
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यह परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे और लाखों वर्षों में होता है।
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मुख्य रूप से पर्वतों का निर्माण और पठारों का उठना इसी श्रेणी में आता है।
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उदाहरण: हिमालय पर्वत का निर्माण।
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आकस्मिक भूसंचलन (Sudden/Accidental):
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यह अचानक और अल्प समय में होता है।
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इसका प्रभाव तुरंत महसूस होता है और यह विनाशकारी भी हो सकता है।
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उदाहरण: भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट।
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सारांश: दीर्घकालीन भूसंचलन धीरे-धीरे भू-आकृतियाँ बनाता है, जबकि आकस्मिक भूसंचलन अचानक भू-स्थानिक बदलाव और विनाश लाता है।
प्र.19. महाद्वीपीय निर्माणकारी बल और पर्वत निर्माणकारी बल में अंतर समझाइए।
उत्तर:
महाद्वीपीय निर्माणकारी बल (Continental Forming Forces):
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यह बल महाद्वीपों की उत्पत्ति, उठान और खिसकाव जैसी लंबी अवधि की प्रक्रियाओं से संबंधित है।
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यह भूगर्भीय समय में धीरे-धीरे महाद्वीपों के आकार और स्थिति को बदलता है।
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पर्वत निर्माणकारी बल (Mountain Forming Forces):
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यह मुख्य रूप से पृथ्वी की परत पर संपीडन बल के कारण पर्वतों के निर्माण से संबंधित है।
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इसके प्रभाव से चट्टानें मुड़ती हैं और मोड़दार या वलित पर्वत बनते हैं।
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सारांश: महाद्वीपीय निर्माणकारी बल बड़े भू-आकृतिक पैमाने पर लंबी अवधि में काम करता है, जबकि पर्वत निर्माणकारी बल स्थानीय संपीड़न के माध्यम से पर्वत निर्माण करता है।
प्र.20. भूस्खलन क्या है? कारण व प्रभाव लिखिए।
उत्तर: भूस्खलन (Landslide): यह तब होता है जब पहाड़ी ढलानों से मिट्टी, चट्टान या मलबा अचानक नीचे की ओर खिसकता या गिरता है।
21. मैदान क्या होते हैं? विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: मैदान (Plains): वह भू-आकृति जिसमें सतह समतल या बहुत हल्की ढाल वाली हो और यह आसपास की भूमि की तुलना में अपेक्षाकृत नीची या समानांतर हो, मैदान कहलाती है।
22. गंगा का मैदान कैसे बना?
उत्तर: गंगा का मैदान मुख्य रूप से नदी-निर्मित मैदान है। हिमालय से बहती गंगा और उसकी सहायक नदियाँ अपनी धारा में मिट्टी और अन्य अवसाद लेकर आती हैं। ये अवसाद धीरे-धीरे नदी के तट और निचले क्षेत्रों में जमा होते हैं। इसी सतत निक्षेपण की प्रक्रिया के कारण समय के साथ यह विशाल और उपजाऊ मैदान बना।
विशेषता: गंगा का मैदान भारत के सबसे उपजाऊ और घनी आबादी वाले क्षेत्र में आता है, जो कृषि और जीवनयापन के लिए अत्यंत अनुकूल है।
23. ग्लोबल वार्मिंग का मैदानों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर: ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। इसका प्रभाव विशेषकर मैदानों पर इस प्रकार पड़ रहा है:
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निम्नभूमि वाले मैदान धीरे-धीरे जलमग्न होने लगे हैं।
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तटीय क्षेत्र और बस्तियाँ समुद्र के पानी में डूबने के खतरे में हैं।
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कृषि योग्य भूमि का नुकसान होने की संभावना बढ़ रही है।
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मानव जीवन और अवसंरचना पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
इस प्रकार, ग्लोबल वार्मिंग से मैदानों की स्थिरता और उपयोगिता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
24. भूस्खलन क्या है?
उत्तर: भूस्खलन (Landslide) वह घटना है जिसमें पहाड़ी या ढलानी क्षेत्रों से मिट्टी, चट्टान या मलबा अचानक नीचे की ओर खिसकता या गिरता है।
25. अपरदन और निक्षेपण में अंतर बताइए।
उत्तर:
26. पृथ्वी पर होने वाले आकस्मिक भूसंचलन क्या हैं?
उत्तर: आकस्मिक भूसंचलन (Sudden Earth Movements) वे भू-घटनाएँ हैं जो अचानक होती हैं और आमतौर पर भारी विनाश पैदा करती हैं।
मुख्य प्रकार:
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भूकंप (Earthquake): प्लेटों के टकराने या खिसकने से उत्पन्न कम्पन।
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ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption): मैग्मा, लावा, राख और गैस का अचानक बाहर निकलना।
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भूस्खलन (Landslide): पहाड़ी या ढलानी क्षेत्रों से मिट्टी, चट्टान या मलबे का नीचे गिरना।
इन आकस्मिक भूसंचलनों का प्रभाव मनुष्य, जानवर और अवसंरचना पर तुरंत और गंभीर रूप से पड़ता है।
27. वायवीय बल क्या हैं?
उत्तर:वायवीय बल (Aeolian Forces) वे प्राकृतिक बल हैं जो हवा की क्रियाशीलता के कारण भूमि की सतह को कटाव, परिवहन और निक्षेपण में बदलते हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
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मिट्टी, रेत और छोटे कण हवा के माध्यम से स्थानांतरित होते हैं।
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ये बल मरुस्थलीय भू-आकृतियाँ जैसे टीलों, रेगिस्तान के पठार और रेतीले मैदान बनाते हैं।
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वायवीय बल लंबी अवधि में भूमि की सतह को आकार देने में सक्षम होते हैं।
उदाहरण: थार का रेगिस्तान और रेतीले टीले।
28. ऋतु क्षय क्या है?
उत्तर:ऋतु क्षय (Weathering by Temperature Changes) वह प्रक्रिया है जिसमें चट्टानों पर लगातार तापमान परिवर्तन पड़ने से वे धीरे-धीरे फैलती और सिकुड़ती हैं।
इस लगातार फैलाव और संकुचन के कारण चट्टान दरारें पड़ने लगती हैं और टूटती हैं।
मुख्य बिंदु:
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दिन और रात के तापमान में अंतर अधिक होने पर प्रभाव तेज होता है।
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यह चट्टानों को छोटे टुकड़ों में तोड़कर मिट्टी बनाने में सहायक होता है।
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यह प्राकृतिक अपरदन की प्रारंभिक प्रक्रिया है।
उदाहरण: मरुस्थलीय क्षेत्रों की चट्टानें।
29. महाद्वीपीय बल क्या हैं?
उत्तर: महाद्वीपीय बल (Continental Forces) वे आंतरिक भू-बल हैं जो महाद्वीपों के निर्माण, उठान और खिसकाव के लिए जिम्मेदार होते हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
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यह बल भू-पर्पटी की प्लेटों के टकराव और खिसकाव से उत्पन्न होता है।
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इन बलों के कारण महाद्वीपों का आकार और स्थिति धीरे-धीरे बदलती है।
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यह लंबी अवधि में भू-आकृति निर्माण और परिवर्तन में योगदान देता है।
उदाहरण: हिमालय और रोकी पर्वत श्रृंखला का निर्माण महाद्वीपीय बलों के कारण हुआ।
30. पर्वत मानव जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर:पर्वत (Mountains) मानव जीवन पर कई प्रकार से प्रभाव डालते हैं:
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जलवायु नियंत्रण: पर्वत क्षेत्रों की ऊँचाई और संरचना स्थानीय और क्षेत्रीय मौसम को प्रभावित करती है।
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नदियों का स्रोत: अनेक प्रमुख नदियाँ पर्वतों से निकलती हैं, जो जलापूर्ति और कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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खनिज और प्राकृतिक संसाधन: पर्वत खनिज संपदा जैसे कोयला, तांबा, सोना आदि प्रदान करते हैं।
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पर्यटन एवं औषधीय पौधे: पर्वत पर्यटन के लिए आकर्षक हैं और औषधीय पौधों का प्राकृतिक आवास हैं।
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प्राकृतिक अवरोध: पर्वत मार्ग और क्षेत्रों में मानव गतिविधियों और आक्रमणों के लिए प्राकृतिक सीमा का कार्य करते हैं।
इस प्रकार पर्वत मानव जीवन और आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
31. पठार मानव जीवन में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर:पठार (Plateaus) मानव जीवन के लिए कई दृष्टियों से लाभकारी हैं:
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खनिज संसाधन: पठारों में कोयला, लौह, मैंगनीज और अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
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जलविद्युत उत्पादन: पठारों की ऊँचाई और जल स्रोतों से विद्युत उत्पादन की सुविधा मिलती है।
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चरागाह और कृषि: पठारों पर पशुपालन और सीमित कृषि संभव है।
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औद्योगिक विकास: खनिज और जल संसाधन उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस प्रकार, पठार आर्थिक गतिविधियों और जीवनयापन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
32. मैदानों में जनसंख्या घनत्व अधिक क्यों होता है?
उत्तर:मैदान (Plains) में जनसंख्या घनत्व अधिक होने के मुख्य कारण हैं:
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समतल और हल्की ढाल वाली भूमि: बसावट और निर्माण कार्य के लिए आसान।
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उपजाऊ मिट्टी: कृषि के लिए अत्यंत अनुकूल।
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सिंचाई की सुविधा: नदियों और नहरों से जल की उपलब्धता।
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परिवहन और संपर्क: सड़क, रेल और अन्य यातायात सुविधाओं का विकास।
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आर्थिक अवसर: उद्योग, व्यापार और रोजगार के अधिक अवसर।
इन कारणों से मैदानों में मानव बस्तियाँ अधिक सघन रूप से विकसित होती हैं।
33. सीस्मोलॉजी क्या है?
उत्तर: सीस्मोलॉजी (Seismology) वह विज्ञान है जो भूकंप और उससे संबंधित घटनाओं का अध्ययन करता है।
मुख्य विषय:
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भूकंपी तरंगें: उनकी उत्पत्ति, गति और प्रभाव।
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पृथ्वी की संरचना: पर्पटी और आंतरिक परतों का अध्ययन।
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भूकंप के कारण और परिणाम: प्लेटों की गति, तनाव, अधिकेन्द्र और उद्गम केंद्र का विश्लेषण।
इस अध्ययन से भूकंप की भविष्यवाणी और विनाश को कम करने के उपायों का पता लगाया जाता है।
34. भूकंप आने पर हमें क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
उत्तर:भूकंप के दौरान सुरक्षा के उपाय:
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शांत रहें: घबराएँ नहीं और समझदारी से काम लें।
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सुरक्षित आश्रय: मजबूत मेज, पलंग या चौकी के नीचे छिपें।
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खतरनाक वस्तुओं से दूर रहें: आग, गैस, चिमनी, कमजोर छत और दीवारों से हटें।
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लिफ्ट का उपयोग न करें।
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खुली जगह में निकलें: भवनों और पेड़ों से दूर रहें।
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विद्युत और गैस बंद करें: संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए।
इन सावधानियों का पालन करने से जान-माल की हानि कम की जा सकती है।
35. ज्वालामुखी विस्फोट का वातावरण पर प्रभाव बताइए।
उत्तर:ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruption) के परिणामस्वरूप वातावरण पर कई प्रभाव पड़ते हैं:
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वायुमंडल में राख और धूल का फैलाव: आसमान धुँधला हो जाता है।
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सौर प्रकाश में कमी: सूर्य की किरणें भूमि तक पहुँचने में कम प्रभावशाली होती हैं।
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अम्लीय वर्षा: गैसों के कारण वर्षा अम्लीय हो सकती है, जो पौधों और जल स्रोतों को प्रभावित करती है।
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तापमान में गिरावट: धूल और गैसें सूरज की गर्मी को रोकती हैं, जिससे स्थानीय और कभी-कभी वैश्विक तापमान घट सकता है।
इस प्रकार ज्वालामुखी विस्फोट का पर्यावरण और जलवायु पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
36. पर्वत निर्माण की प्रक्रियाओं को समझाइए।
उत्तर:पर्वत (Mountains) निर्माण की मुख्य प्रक्रियाएँ:
37. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत क्या है?
उत्तर: प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) का सिद्धांत कहता है कि पृथ्वी की पर्पटी कई बड़ी और छोटी कठोर प्लेटों में बंटी हुई है, जो पृथ्वी की अंतःस्थलीय परत (मैग्मा) पर तैरती हैं और लगातार हिलती-डुलती रहती हैं।
इन प्लेटों की गति के कारण:
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महाद्वीपों का स्थान बदलता है।
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पर्वत और घाटियाँ बनती हैं।
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भूकंप और ज्वालामुखी जैसी घटनाएँ होती हैं।
इस सिद्धांत से पृथ्वी पर होने वाली भौगोलिक गतिविधियों और भू-आकृतियों को समझा जाता है।
38. पृथ्वी के अंदर मैग्मा कैसे गतिशील रहता है?
उत्तर: पृथ्वी की आंतरिक परत में ताप और दाब अत्यधिक होने के कारण चट्टानें पिघली हुई होती हैं, जिसे मैग्मा कहते हैं।
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इस मैग्मा में संवहन धाराएँ (Convection Currents) लगातार बनती और चलती रहती हैं।
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ये धाराएँ ऊपर-नीचे की गति करती हैं, जिससे मैग्मा गतिशील रहता है।
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इसी गति के कारण प्लेटें भी खिसकती, टकराती और घुमती रहती हैं, जिससे भू-आकृतियों और भूसंचलन घटनाओं का निर्माण होता है।
इस प्रकार, ताप और दाब के कारण मैग्मा का लगातार हिलना-पुलना पृथ्वी की सतह पर गतिविधियों का मूल कारण है।
39. भूकंप सतह पर सबसे तेज कहाँ महसूस होता है? क्यों?
उत्तर: भूकंप की तीव्रता सतह पर सबसे अधिक अधिकेन्द्र (Epicenter) पर महसूस होती है।
40. शंभू के मन में उठे प्रश्नों का शिक्षक ने क्या उत्तर दिया?
उत्तर: शिक्षक ने शंभू को समझाया कि पृथ्वी की आंतरिक शक्तियाँ (Internal Forces) सतत काम करती रहती हैं और इसके कारण भू-आकृतियों में परिवर्तन होता रहता है।
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पृथ्वी की सतह प्लेटों में बंटी हुई है।
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पृथ्वी के अंदर मैग्मा लगातार गतिशील रहता है।
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जहां सतह कमजोर होती है, वहाँ से मैग्मा ऊपर निकलता है, जिससे ज्वालामुखी, पर्वत और अन्य भू-आकृतियाँ बनती हैं।
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इस तरह, आंतरिक बल सतत भू-पर्पटी को बदलते और नया आकार देते रहते हैं