Chapter 11 

                                           عاصم بہاری اور ان کے کارنامے (سوانح)


1. प्रश्न: मौलवी अली हुसैन आसिम बिहारी कौन थे?

उत्तर: मौलवी अली हुसैन आसिम बिहारी भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और शिक्षाविद् थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की आज़ादी और पसमांदा समाज के उत्थान को समर्पित किया। उन्होंने “मोमिन कॉन्फ़्रेंस” की स्थापना करके सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

2. प्रश्न: आसिम बिहारी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: आसिम बिहारी का जन्म 15 अप्रैल 1889 को बिहार शरीफ़ (ज़िला नालंदा) के ख़ास गंज मोहल्ले में हुआ था। वे एक साधारण परिवार में पैदा हुए थे, लेकिन अपने संघर्ष, शिक्षा और समर्पण के बल पर उन्होंने समाज और राष्ट्र की सेवा में महान योगदान दिया।

3. प्रश्न: आसिम बिहारी के परिवार का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर: आसिम बिहारी के पिता मौलाना आसिफ़ हुसैन एक प्रतिष्ठित धार्मिक विद्वान थे, जबकि उनकी माता बीबी ज़ैनब ख़ातून एक संस्कारी और धर्मपरायण गृहिणी थीं। उनके दादा मौलाना अब्दुल रहीम ने 1857 की स्वतंत्रता क्रांति में अंग्रेजों के विरुद्ध सक्रिय भाग लेकर देशभक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया था।

4. प्रश्न: आसिम बिहारी की प्रारंभिक शिक्षा कहाँ हुई?

उत्तर: आसिम बिहारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिहार शरीफ़ में प्राप्त की। किंतु परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें मात्र 11 वर्ष की आयु में पढ़ाई बीच में छोड़कर रोज़गार की तलाश में कोलकाता जाना पड़ा, जहाँ से उनके संघर्षपूर्ण जीवन की शुरुआत हुई।

5. प्रश्न: आसिम बिहारी को अध्ययन का शौक़ किस प्रकार था?

उत्तर: आसिम बिहारी को बचपन से ही अध्ययन और ज्ञानार्जन का अत्यंत लगाव था। नौकरी करने के बाद भी वे अपने अवकाश के समय में किताबें, अख़बार और पत्रिकाएँ पढ़ते रहते थे। वे मानते थे कि शिक्षा ही व्यक्ति को जागरूक बनाती है और समाज सुधार का सबसे प्रभावी साधन है।

6. प्रश्न: कोलकाता उनके जीवन में क्यों महत्वपूर्ण था?

उत्तर:कोलकाता आसिम बिहारी के जीवन में इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि वहीँ उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन और सामाजिक सुधार के विचारों से निकटता प्राप्त की। उस समय कोलकाता देश की राजधानी और राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा बौद्धिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। वहाँ के वातावरण ने उनके भीतर देशप्रेम, सामाजिक न्याय और जागरूकता की भावना को प्रबल बनाया।

7. प्रश्न: आसिम बिहारी ने नौकरी क्यों छोड़ दी?

उत्तर: आसिम बिहारी ने नौकरी इसलिए छोड़ दी क्योंकि उनका मन केवल वेतन तक सीमित जीवन में नहीं रमता था। वे देश और समाज की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित करना चाहते थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र देकर स्वतंत्र रूप से काम करना शुरू किया और आत्मनिर्भरता के प्रतीक रूप में बीड़ी निर्माण का व्यवसाय आरंभ किया।

8. प्रश्न: बीड़ी बनाने के पेशे से उन्हें क्या लाभ मिला?

उत्तर: बीड़ी बनाने के कार्य ने आसिम बिहारी को आम जनता, विशेषकर मेहनतकश मजदूरों और गरीब तबकों के जीवन से सीधे जुड़ने का अवसर दिया। इसी संपर्क से उन्होंने समाज के वंचित वर्गों की वास्तविक कठिनाइयों को नज़दीक से समझा और आगे चलकर उनके अधिकारों, सम्मान और शिक्षा के लिए संघर्ष प्रारंभ किया।

9. प्रश्न: 1911 में उन्होंने कौन-सा अख़बार निकाला और क्यों?

उत्तर: 1911 में आसिम बिहारी ने “तारीख़-उल-अनवाल” नामक अख़बार प्रकाशित किया, जिसके संपादक मौलाना अब्दुस्सलाम मुबारकपुरी थे। इस पत्र का उद्देश्य समाज के उपेक्षित वर्गों, विशेष रूप से पसमांदा मुसलमानों और बुनकर समुदाय की दयनीय परिस्थितियों को सामने लाना तथा उनके अधिकारों और उत्थान के लिए जनजागृति फैलाना था।

10. प्रश्न: अंग्रेजी हुकूमत के प्रति आसिम बिहारी का दृष्टिकोण क्या था?

उत्तर:आसिम बिहारी का अंग्रेजी हुकूमत के प्रति रुख़ पूरी तरह विरोध का था। वे ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों और शोषण के विरुद्ध खुलकर आवाज़ उठाते थे। उन्होंने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी उद्योगों के समर्थन का आह्वान किया, क्योंकि वे मानते थे कि अंग्रेजी शासन ने भारतीय बुनकरों और मज़दूरों की आजीविका छीन ली थी।

11. प्रश्न: उन्होंने किन लोगों की सहायता के लिए कार्य किया?

उत्तर: आसिम बिहारी ने समाज के उपेक्षित और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों, विशेषकर मुस्लिम बुनकरों, मेहनतकश मज़दूरों और पसमांदा समुदाय के लोगों की उन्नति के लिए निरंतर कार्य किया। उन्होंने उनके सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा को अपना जीवन उद्देश्य बना लिया था।

12. प्रश्न: उन्होंने गांधीजी की किस आंदोलन से प्रेरणा ली?

उत्तर: आसिम बिहारी ने गांधीजी के हरिजन कल्याण आंदोलन से गहरी प्रेरणा प्राप्त की। गांधीजी की तरह ही उन्होंने समाज के पिछड़े और वंचित मुस्लिम वर्गों के उत्थान का कार्य प्रारंभ किया। वे मानते थे कि जैसे गांधीजी ने अस्पृश्यता मिटाने और समानता लाने का प्रयास किया, वैसे ही मुसलमानों के पसमांदा तबकों को भी शिक्षा, सम्मान और अधिकार दिलाना आवश्यक है।

13. प्रश्न: “मोमिन अंसार पार्टी” क्या थी?

उत्तर: “मोमिन अंसार पार्टी” एक सामाजिक और राजनीतिक संगठन था, जिसकी स्थापना आसिम बिहारी ने समाज के पसमांदा मुसलमानों की उन्नति और अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की थी। इस संस्था का मुख्य लक्ष्य था आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक समानता और शैक्षिक प्रगति को बढ़ावा देना। यही संगठन आगे चलकर “ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ़्रेंस” के रूप में विकसित हुआ।

14. प्रश्न: मोमिन कॉन्फ़्रेंस का उद्देश्य क्या था?

उत्तर: मोमिन कॉन्फ़्रेंस का मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाना था। इस संगठन ने आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक समानता, शिक्षा के प्रसार और सांस्कृतिक जागरण को अपने कार्यक्षेत्र का केंद्र बनाया। आसिम बिहारी चाहते थे कि पसमांदा मुसलमान आत्मगौरव और एकता के साथ समाज में अपना उचित स्थान प्राप्त करें।

15. प्रश्न: यूरोपीय इतिहासकार वाल्फ्रेड केबल ने उनके बारे में क्या लिखा?

उत्तर: प्रसिद्ध यूरोपीय इतिहासकार वाल्फ्रेड केबल ने अपनी पुस्तक “Modern Islam in India” में आसिम बिहारी और उनकी “मोमिन कॉन्फ़्रेंस” की विशेष प्रशंसा की है। उन्होंने लिखा कि आसिम बिहारी ने मुसलमानों के पिछड़े तबकों में नई चेतना, आत्मसम्मान और संगठन की भावना जाग्रत की, जो उस समय के भारतीय समाज में एक उल्लेखनीय सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक था।

16. प्रश्न: आसिम बिहारी का देशप्रेम किस प्रकार प्रकट होता है?

उत्तर: आसिम बिहारी का देशप्रेम उनके कार्यों और विचारों दोनों में स्पष्ट झलकता है। उन्होंने गरीबों, बुनकरों और मजदूरों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा तथा उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक राष्ट्रवादी चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे मानते थे कि सच्चा देशप्रेम तब ही संभव है जब समाज के सबसे कमजोर वर्ग भी आज़ादी और सम्मान के हक़दार बनें।

17. प्रश्न: उन्होंने किन क्षेत्रों में कार्य किया?

उत्तर: आसिम बिहारी ने अपने समाज सुधार और जनजागरण के अभियान को बिहार से प्रारंभ किया और धीरे-धीरे इसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, गोरखपुर, इलाहाबाद, बनारस तथा कानपुर जैसे अनेक क्षेत्रों तक विस्तारित किया। इन स्थानों पर उन्होंने पसमांदा समाज को संगठित किया, शिक्षा और स्वावलंबन के संदेश को फैलाया तथा राष्ट्रीय एकता के लिए आंदोलन खड़े किए।

18. प्रश्न: मोमिन कॉन्फ़्रेंस का पहला सत्र कब और कहाँ हुआ?

उत्तर: मोमिन कॉन्फ़्रेंस का पहला ऐतिहासिक अधिवेशन 18 अप्रैल 1928 को कोलकाता में संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में देशभर से प्रतिनिधियों ने भाग लिया और पसमांदा मुसलमानों की शिक्षा, स्वाभिमान तथा सामाजिक सुधार के लिए ठोस कार्यक्रम तैयार किए गए, जिसने आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

19. प्रश्न: दूसरा और तीसरा अधिवेशन कहाँ हुए?

उत्तर: मोमिन कॉन्फ़्रेंस का दूसरा अधिवेशन वर्ष 1929 में इलाहाबाद में आयोजित किया गया, जहाँ संगठन के विस्तार और शिक्षा के प्रसार पर विशेष चर्चा हुई। तीसरा अधिवेशन 1931 में दिल्ली में संपन्न हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय, राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक स्वावलंबन को आंदोलन के प्रमुख उद्देश्यों के रूप में स्वीकार किया गया।

20. प्रश्न: पाँचवाँ अधिवेशन कहाँ हुआ?

उत्तर: मोमिन कॉन्फ़्रेंस का पाँचवाँ अधिवेशन वर्ष 1932 में बिहार के गया नगर में आयोजित किया गया। इस अधिवेशन में बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने भाग लिया और पसमांदा समाज की राजनीतिक एकता, आर्थिक विकास तथा शिक्षा के प्रसार को आंदोलन की मुख्य दिशा के रूप में निर्धारित किया गया।

21. प्रश्न: मोमिन कॉन्फ़्रेंस की शाखाएँ कहाँ-कहाँ खोली गईं?

उत्तर: मोमिन कॉन्फ़्रेंस की शाखाएँ केवल भारत के विभिन्न प्रांतों में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी स्थापित की गईं। इन शाखाओं का उद्देश्य था—स्वतंत्रता आंदोलन की भावना, सामाजिक सुधार और समानता का संदेश देश-विदेश के पसमांदा मुसलमानों तक पहुँचाना ताकि वे एकता, शिक्षा और आत्मसम्मान के मार्ग पर अग्रसर हों।

22. प्रश्न: अंग्रेजी शासन ने आसिम बिहारी की गतिविधियों पर क्या प्रतिक्रिया दी?

उत्तर: अंग्रेजी शासन आसिम बिहारी की बढ़ती लोकप्रियता और उनके आंदोलनों से चिंतित हो उठा। ब्रिटिश सरकार ने उन पर कई बार दबाव डाला, उनके संगठनों पर नज़र रखी और आंदोलनों को रोकने के प्रयास किए। बावजूद इसके, आसिम बिहारी ने निर्भय होकर अपने मिशन को जारी रखा और अन्याय व अत्याचार के विरुद्ध डटे रहे।

23. प्रश्न: 1935–36 के काल में क्या परिवर्तन हुआ?

उत्तर: 1935–36 के दौरान देश की राजनीति में बड़े बदलाव हुए — प्रांतीय स्वशासन की शुरुआत और विभिन्न दलों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी। इन परिस्थितियों में भी आसिम बिहारी ने “मोमिन कॉन्फ़्रेंस” की एकता, स्वतंत्र पहचान और जनसेवा की भावना को मज़बूती से बनाए रखा। उन्होंने संगठन को राजनीतिक उतार-चढ़ाव से ऊपर उठाकर सामाजिक सुधार के मार्ग पर स्थिर रखा।

24. प्रश्न: उनके आंदोलन की लोकप्रियता का कारण क्या था?

उत्तर: आसिम बिहारी के आंदोलन की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनका निःस्वार्थ सेवा भाव और जनहित के प्रति समर्पण था। उन्होंने गरीबों, मजदूरों और पसमांदा समाज के अधिकारों के लिए बिना किसी निजी लाभ की इच्छा के संघर्ष किया। उनकी सादगी, त्याग और जनता के दुख-दर्द को अपनी ज़िम्मेदारी समझने की भावना ने उन्हें लोगों के हृदयों में स्थान दिलाया।

25. प्रश्न: उनकी आर्थिक स्थिति कैसी थी?

उत्तर:आसिम बिहारी की आर्थिक स्थिति अत्यंत साधारण और कठिन थी। उन्होंने जीवनभर समाज और देश की सेवा में अपना समय और साधन समर्पित कर दिए, जिसके कारण वे स्वयं गरीबी में रहे। बीमारी के समय उनके पास उपचार के लिए भी पर्याप्त धन नहीं था, फिर भी उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और जनसेवा के मार्ग से विचलित नहीं हुए।

26. प्रश्न: उन्होंने अपनी बीमारी में भी क्या कार्य किया?

उत्तर: गंभीर रूप से टी.बी. और हृदय रोग से ग्रस्त होने के बावजूद आसिम बिहारी ने अपने कर्तव्य से मुँह नहीं मोड़ा। वे लगातार लेखन, भाषण और पत्राचार के माध्यम से जनता में जागरूकता फैलाते रहे। उनकी बीमारी ने उनके शरीर को कमजोर किया, परंतु राष्ट्र और समाज के प्रति उनका उत्साह और समर्पण कभी कम नहीं हुआ।

27. प्रश्न: शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान क्या था?

उत्तर: आसिम बिहारी का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था। उन्होंने बिहार सहित कई राज्यों में मदरसे और विद्यालयों की स्थापना की, जहाँ धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों की पढ़ाई को भी प्रोत्साहित किया गया। उनका मानना था कि समाज की प्रगति का मूल आधार शिक्षा है, इसलिए उन्होंने गरीब और पसमांदा वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षा को सुलभ और आवश्यक बनाने का सतत प्रयास किया।

28. प्रश्न: वे आधुनिक शिक्षा को क्यों आवश्यक मानते थे?

उत्तर:आसिम बिहारी का दृढ़ विश्वास था कि आधुनिक शिक्षा ही वह साधन है, जिसके माध्यम से मुसलमान समाज अज्ञानता और गरीबी से मुक्त होकर देश की प्रगति में समान रूप से भाग ले सकता है। वे मानते थे कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक और आधुनिक ज्ञान का प्रसार समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाता है।

29. प्रश्न: उन्होंने अपने नाम के साथ “बिहारी” क्यों जोड़ा?

उत्तर: आसिम ने अपने नाम के साथ “बिहारी” शब्द इसलिए जोड़ा क्योंकि उन्हें अपने जन्मस्थान बिहार पर गहरा गर्व था। वे मानते थे कि व्यक्ति को अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपने प्रदेश से जुड़ाव नहीं भूलना चाहिए। “बिहारी” शब्द उनके आत्मसम्मान, क्षेत्रीय पहचान और देशभक्ति की भावना का प्रतीक बन गया था।

30. प्रश्न: उनका निधन कब और कहाँ हुआ?

उत्तर: आसिम बिहारी का निधन 2 दिसंबर 1953 को इलाहाबाद में हुआ। लम्बे समय तक बीमारी से संघर्ष करने के बाद उन्होंने वहीं अंतिम साँस ली और उसी धरती में उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। उनके निधन के साथ एक ऐसे सच्चे देशभक्त, समाज सुधारक और शिक्षाविद् का युग समाप्त हुआ जिसने अपना जीवन जनता की सेवा और समानता के लिए समर्पित कर दिया।

31. प्रश्न: उनकी मृत्यु के समय उनकी स्थिति क्या थी?

उत्तर: मृत्यु के समय आसिम बिहारी शारीरिक रूप से अत्यंत दुर्बल और आर्थिक रूप से कमजोर थे। वे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे, फिर भी उनकी आत्मा में अदम्य साहस और कलम में वही पुरानी ताक़त बनी रही। उन्होंने जीवन के अंतिम क्षणों तक समाज और देश की भलाई के लिए चिंतन और लेखन जारी रखा।

32. प्रश्न: उन्होंने समाज को कौन-सा बड़ा संदेश दिया?

उत्तर: आसिम बिहारी ने अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज की उन्नति जात-पात, ऊँच-नीच और वर्गभेद को मिटाकर ही संभव है। उन्होंने लोगों को शिक्षा, परिश्रम और आत्मनिर्भरता को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी। उनका मानना था कि जब हर व्यक्ति ज्ञान और श्रम के बल पर आगे बढ़ेगा, तभी सच्ची समानता और सामाजिक न्याय स्थापित होगा।

33. प्रश्न: आसिम बिहारी का सबसे बड़ा योगदान क्या था?

उत्तर: आसिम बिहारी का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को केवल शिक्षित वर्ग या नेताओं तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे गरीबों, मजदूरों और पसमांदा समाज तक पहुँचाया। उन्होंने आम जनता में राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और एकता की भावना जगाई, जिससे स्वतंत्रता संग्राम को जन-आंदोलन का स्वरूप मिला।

34. प्रश्न: उन्होंने किन मूल्यों पर बल दिया?

उत्तर: उन्होंने जीवन में परिश्रम, समान अधिकार, ज्ञान की रोशनी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रप्रेम जैसे मूल्यों को सर्वोपरि माना।

35. प्रश्न: मोमिन कॉन्फ़्रेंस ने भारतीय समाज को क्या दिया?

उत्तर: इस संगठन ने पसमांदा वर्गों में आत्मगौरव की भावना और सामाजिक-राजनीतिक जागरूकता जगाई, जिसके परिणामस्वरूप वे स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हुए।

36. प्रश्न: आसिम बिहारी का जीवन किस प्रकार प्रेरणादायक है?

उत्तर: उन्होंने कठिन हालात, आर्थिक तंगी और अस्वस्थता के बावजूद अपने उद्देश्य से कभी विचलित नहीं हुए। उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की मिसाल प्रस्तुत करता है।

37. प्रश्न: उनकी लोकप्रियता का रहस्य क्या था?

उत्तर:  उनकी लोकप्रियता का कारण था उनका निस्वार्थ स्वभाव, सरल जीवन और जनसेवा के प्रति गहरा समर्पण। वे अपने कर्म और विनम्रता से लोगों के दिलों में बस गए थे।

38. प्रश्न: उन्होंने महिलाओं के uplift के लिए क्या किया?

उत्तर:  उन्होंने महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा साधन माना। उन्होंने लड़कियों की तालीम के लिए संस्थाएँ स्थापित कीं और समाज में उनके अधिकारों की वकालत की।

39. प्रश्न: आसिम बिहारी का नाम इतिहास में क्यों अमर रहेगा?

उत्तर: उनका नाम इसलिए अमर रहेगा क्योंकि उन्होंने अपने निःस्वार्थ सेवा भाव, राष्ट्रप्रेम और समाज सुधार की भावना से ऐसे कार्य किए जो समय की सीमाओं से परे हैं और आज भी लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।

40. प्रश्न: उनके जीवन से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?

उत्तर: उनके जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि सच्ची महानता सेवा, त्याग और समर्पण में निहित है। उन्होंने दिखाया कि शिक्षा और समानता के माध्यम से ही समाज में सच्चा परिवर्तन लाया जा सकता है।

Answer by Mrinmoee