Chapter 12
عاصم بہاری اور ان کے کارنامے (سوانح)
1. प्रश्न: आसिम बिहारी कौन थे और उनका जन्म कब हुआ?
उत्तर: आसिम बिहारी एक प्रसिद्ध समाजसेवी, स्वतंत्रता सेनानी और पिछड़े वर्गों के हितैषी थे। उनका पूरा नाम मौलवी अली हुसैन आसिम बिहारी था। उनका जन्म 15 अप्रैल 1889 को बिहार शरीफ़ के खासगंज मोहल्ले (जिला नालंदा) में हुआ था। वे एक साधारण और गरीब बुनकर परिवार से संबंध रखते थे, लेकिन अपने कर्म और समर्पण से उन्होंने समाज में अमिट छाप छोड़ी।
2. प्रश्न: उनके परिवार के बारे में विस्तार से बताइए।
उत्तर: आसिम बिहारी का परिवार धार्मिकता, विद्वता और देशभक्ति की परंपरा से जुड़ा हुआ था। उनके पिता मौलाना आसिफ़ हुसैन एक गहरे धार्मिक और शिक्षित व्यक्ति थे, जो ईमानदारी और सिद्धांतों के लिए जाने जाते थे। उनकी माता बीबी ज़ैनब ख़ातून एक स्नेही और संस्कारी गृहिणी थीं। वहीं उनके दादा मौलाना अब्दुल रहीम ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेज़ों के विरुद्ध सक्रिय भाग लिया और देशभक्ति के कारण अनेक कठिनाइयाँ भी झेलीं।
3. प्रश्न: आसिम बिहारी की प्रारंभिक शिक्षा कहाँ हुई?
उत्तर:आसिम बिहारी की प्रारंभिक शिक्षा बिहार शरीफ़ में हुई थी, जहाँ उन्होंने न केवल धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया बल्कि सामान्य शिक्षा के क्षेत्र में भी गहरी रुचि दिखाई। यही शिक्षा आगे चलकर उनके साहित्यिक और सामाजिक कार्यों की मजबूत नींव बनी।
4. प्रश्न: उन्हें कोलकाता क्यों जाना पड़ा?
उत्तर: पारिवारिक आर्थिक कठिनाइयों के चलते आसिम बिहारी को कम उम्र, मात्र बारह वर्ष की आयु में, अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर कोलकाता जाना पड़ा। वहाँ उन्हें जीविका चलाने के लिए नौकरी करनी पड़ी, जिससे उन्होंने अपने परिवार की सहायता की और संघर्षपूर्ण जीवन की शुरुआत की।
5. प्रश्न: कोलकाता में रहते हुए उन्होंने क्या किया?
उत्तर: कोलकाता में नौकरी करने के बावजूद आसिम बिहारी ने अपने अध्ययन का क्रम नहीं तोड़ा। वे हर खाली पल का उपयोग ज्ञान अर्जन में करते थे। उन्हें साहित्यिक पुस्तकों, समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को पढ़ने का गहरा शौक था, जिससे उनके विचारों में परिपक्वता और लेखन में गहराई आई।
6. प्रश्न: उस समय कोलकाता की क्या विशेषता थी?
उत्तर: उस समय कोलकाता न केवल भारत की राजधानी था, बल्कि देश के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र भी माना जाता था। यहाँ देशभर के बुद्धिजीवी, लेखक और क्रांतिकारी इकट्ठे होते थे, जिससे वातावरण में जागरूकता और राष्ट्रभक्ति की भावना व्याप्त थी।
7. प्रश्न: आसिम बिहारी को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
उत्तर: आसिम बिहारी ने अपने जीवन में गरीबी, बीमारी और बेरोज़गारी जैसी अनेक परेशानियाँ झेली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं खोई। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने आत्मसम्मान और संघर्ष का मार्ग चुना।
8. प्रश्न: वे स्वतंत्रता आंदोलन से कैसे जुड़े?
उत्तर: समाज के गरीब, मज़दूर और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते-लड़ते आसिम बिहारी धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता बन गए। उन्होंने जन-जागरण और राष्ट्रीय चेतना फैलाने में अहम भूमिका निभाई।
9. प्रश्न: उन्होंने अपनी नौकरी क्यों छोड़ी?
उत्तर: उन्होंने नौकरी इसलिए छोड़ दी क्योंकि वे अपनी पूरी ज़िंदगी देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित करना चाहते थे। इसके बाद उन्होंने आत्मनिर्भर बनने के लिए बीड़ी बनाने का काम शुरू किया ताकि आज़ादी की लड़ाई में आर्थिक रूप से स्वतंत्र रह सकें।
10. प्रश्न: उन्होंने कौन-सा अखबार निकाला और उसका संपादक कौन था?
उत्तर: सन् 1911 में उन्होंने “तारीख़-उल-अनवाल” नाम से एक अख़बार प्रकाशित किया, जिसका संपादन मौलाना अब्दुस्सलाम मुबारकपुरी ने किया। यह अख़बार सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना फैलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।
11. प्रश्न: इस अखबार का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इस अख़बार का मुख्य उद्देश्य समाज के दबे-कुचले और बुनकर वर्ग की आवाज़ को सामने लाना था। इसके ज़रिए उन्होंने उनकी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जनता को जागरूक किया।
12. प्रश्न: अंग्रेज़ सरकार ने बुनकरों के साथ कैसा व्यवहार किया?
उत्तर: अंग्रेज़ सरकार ने भारतीय बुनकरों के साथ बहुत अन्यायपूर्ण व्यवहार किया। उन्होंने विदेशी मशीन से बने कपड़ों को भारत में बेचने की अनुमति दी, जिससे देशी बुनकरों का व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया और उनकी आजीविका संकट में पड़ गई।
13. प्रश्न: आसिम बिहारी ने अंग्रेज़ी सरकार की नीति के विरुद्ध क्या किया?
उत्तर: आसिम बिहारी ने अंग्रेज़ी सरकार की शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध खुलकर आवाज़ उठाई। उन्होंने बुनकरों को एकजुट किया, सभाएँ कीं और आंदोलनों के माध्यम से उनके हक़ की लड़ाई लड़ी।
14. प्रश्न: उन्होंने गांधीजी की किस योजना से प्रेरणा ली?
उत्तर: आसिम बिहारी महात्मा गांधी की “हरिजन सेवा” और “स्वावलंबन” की विचारधारा से गहराई से प्रभावित हुए। उन्होंने इन्हीं सिद्धांतों को अपनाकर मुस्लिम पसमांदा समाज को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने की दिशा में कार्य किया।
15. प्रश्न: उन्होंने कौन-सी संस्था की स्थापना की?
उत्तर: आसिम बिहारी ने समाज के उत्थान के उद्देश्य से “मुमिन अंसार पार्टी” की नींव रखी। बाद में यही संस्था विस्तार पाकर “ऑल इंडिया मुमिन कॉन्फ्रेंस” के नाम से प्रसिद्ध हुई, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़े मुस्लिम वर्गों के अधिकारों के लिए काम किया।
16. प्रश्न: उनकी संस्था का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर:इस संस्था का प्रमुख उद्देश्य बुनकरों और पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक तथा शैक्षिक स्थिति को सुधारना था। साथ ही यह संस्था उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनाने के लिए प्रयासरत रही।
17. प्रश्न: विदेशी इतिहासकार ने उनकी प्रशंसा कैसे की?
उत्तर: अंग्रेज़ इतिहासकार वालफ्रेड की कॉवेल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “मॉडर्न इस्लाम इन इंडिया” में आसिम बिहारी की संस्था की सराहना करते हुए लिखा कि उन्होंने मुस्लिम बुनकरों और पिछड़े तबकों के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया।
18. प्रश्न: मुमिन कॉन्फ्रेंस ने क्या भूमिका निभाई?
उत्तर: मुमिन कॉन्फ्रेंस ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसने गरीबों और पिछड़े वर्गों को एकजुट कर उनके भीतर राजनीतिक जागरूकता और आत्मसम्मान की भावना जगाई।
19. प्रश्न: उन्होंने किन-किन स्थानों का दौरा किया?
उत्तर: उन्होंने देश के कई हिस्सों जैसे गोरखपुर, इलाहाबाद, बनारस, मुरादाबाद, कानपुर, दिल्ली और पंजाब का भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने पसमांदा समाज को संगठित और शिक्षित करने का कार्य किया।
20. प्रश्न: मुमिन कॉन्फ्रेंस का पहला अधिवेशन कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: मुमिन कॉन्फ्रेंस का पहला ऐतिहासिक अधिवेशन सन् 1928 में कोलकाता शहर में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के बुनकरों और पसमांदा मुसलमानों ने भाग लिया।
21. प्रश्न: इसके बाद अन्य अधिवेशन कहाँ हुए?
उत्तर:पहले अधिवेशन के बाद दूसरा अधिवेशन 1929 में इलाहाबाद में आयोजित हुआ, तीसरा 1931 में दिल्ली में, चौथा लाहौर में और पाँचवाँ 1932 में बिहार के गया नगर में संपन्न हुआ।
22. प्रश्न: मुमिन कॉन्फ्रेंस की शाखाएँ कहाँ-कहाँ बनीं?
उत्तर: मुमिन कॉन्फ्रेंस की शाखाएँ न केवल भारत के विभिन्न राज्यों में बनीं बल्कि विदेशों में भी इसके केंद्र स्थापित किए गए ताकि आंदोलन का संदेश व्यापक रूप से फैल सके।
23. प्रश्न: 1935 के बाद की राजनीतिक परिस्थिति क्या थी?
उत्तर: 1935 के बाद भारतीय राजनीति में बड़े परिवर्तन आए, और इसी दौर में अंग्रेज़ सरकार ने आसिम बिहारी तथा उनके संगठन की गतिविधियों पर निगरानी रखनी शुरू की और उन पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए।
24. प्रश्न: उन्होंने कठिन परिस्थितियों में क्या किया?
उत्तर: कठिन परिस्थितियों और सरकारी दबावों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि संगठन की एकता और उद्देश्यों को मज़बूती से कायम रखा।
25. प्रश्न: मुमिन कॉन्फ्रेंस ने चुनावों में क्या सफलता प्राप्त की?
उत्तर:मुमिन कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवारों ने विधान सभा के चुनावों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, जो संगठन की बढ़ती प्रतिष्ठा और जनसमर्थन का प्रमाण था।
26. प्रश्न: आसिम बिहारी की लोकप्रियता का कारण क्या था?
उत्तर: आसिम बिहारी की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनका निस्वार्थ जीवन, सरल स्वभाव और समाज के प्रति समर्पण था। उन्होंने लोगों के हित में बिना किसी लालच के कार्य किया।
27. प्रश्न: उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में क्या योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने बिहार सहित विभिन्न राज्यों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए मदरसों और विद्यालयों की स्थापना की और धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा को भी आवश्यक बताया।
28. प्रश्न: वे आधुनिक शिक्षा को क्यों आवश्यक मानते थे?
उत्तर: उनका विश्वास था कि आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने से ही मुसलमान समाज आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बन सकता है और देश की उन्नति में समान भागीदारी निभा सकता है।
29. प्रश्न: उन्होंने अपने नाम के साथ “बिहारी” क्यों जोड़ा?
उत्तर: उन्होंने अपने नाम के साथ “बिहारी” शब्द इसलिए जोड़ा क्योंकि वे अपने प्रदेश बिहार से गहरा प्रेम करते थे और उसे अपनी पहचान और गर्व का प्रतीक मानते थे।
30. प्रश्न: उनका निधन कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: 2 दिसंबर 1953 को इलाहाबाद में उनका देहांत हुआ, जहाँ उन्हें सम्मानपूर्वक सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।
31. प्रश्न: उनकी मृत्यु के समय उनकी स्थिति कैसी थी?
उत्तर:अपने जीवन के अंतिम दिनों में वे दमा और हृदय रोग से पीड़ित थे तथा आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत संकटपूर्ण स्थिति में थे।
32. प्रश्न: उन्होंने समाज को क्या संदेश दिया?
उत्तर: उनका संदेश था कि समाज की उन्नति तभी संभव है जब लोग आपसी भेदभाव छोड़कर शिक्षा, मेहनत और आत्मनिर्भरता को अपनाएँ।
33. प्रश्न: उनका सबसे बड़ा योगदान क्या था?
उत्तर: उनका सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में निम्न वर्ग और मज़दूरों को सक्रिय रूप से जोड़ा और आंदोलन को जनजागरण का रूप दिया।
34. प्रश्न: उन्होंने किन मूल्यों पर बल दिया?
उत्तर: उन्होंने अपने जीवन में समानता, परिश्रम, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रप्रेम जैसे उच्च मूल्यों को सबसे अधिक महत्व दिया।
35. प्रश्न: मुमिन कॉन्फ्रेंस ने समाज को क्या दिया?
उत्तर: इस संगठन ने पिछड़े और वंचित वर्गों में आत्मसम्मान की भावना जगाई और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग तथा राजनीतिक रूप से जागरूक बनाया।
36. प्रश्न: उनका जीवन किस प्रकार प्रेरणादायक था?
उत्तर: उन्होंने जीवनभर गरीबी, बीमारी और अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए भी अपने उद्देश्य से कभी विचलित नहीं हुए। उनका सम्पूर्ण जीवन त्याग, संघर्ष और समाजसेवा की प्रेरणा देता है।
37. प्रश्न: उनकी लोकप्रियता का रहस्य क्या था?
उत्तर:उनकी सादगी, ईमानदारी, निःस्वार्थ सेवा और हर वर्ग के लोगों से अपनापन ही उनकी लोकप्रियता का असली रहस्य था।
38. प्रश्न: उन्होंने महिलाओं के उत्थान के लिए क्या किया?
उत्तर: उन्होंने महिलाओं की तरक्की के लिए विशेष रूप से शिक्षा पर ज़ोर दिया, उनके लिए अलग शिक्षण संस्थान स्थापित किए और समाज में उनके समान अधिकारों की वकालत की।
39. प्रश्न: उनका नाम इतिहास में क्यों अमर रहेगा?
उत्तर: क्योंकि उन्होंने निःस्वार्थ सेवा, शिक्षा के प्रसार और समाज सुधार के कार्यों से ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो हमेशा इतिहास में उन्हें अमर बनाए रखेगा।
40. प्रश्न: उनके जीवन से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: हमें यह प्रेरणा मिलती है कि जीवन का असली अर्थ दूसरों की भलाई में है। निस्वार्थ सेवा, शिक्षा का प्रसार और समानता की भावना ही सच्चे जीवन के आदर्श हैं।
Answer by Mrinmoee