Chapter 14 

                                                           ایشیاء اور یورپ 


1. प्रश्न: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने यह पत्र किसे और कब लिखा था?

उत्तर: यह पत्र पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी बेटी इंदिरा गांधी को 8 जनवरी 1931 को लिखा था। इसे ‘एशिया और यूरोप’ नाम से जाना जाता है, और इसमें उन्होंने इतिहास, संस्कृति और मानव समाज के विकास के बारे में अपने विचार साझा किए हैं।

2. प्रश्न: नेहरू जी ने इतिहास को किस रूप में परिभाषित किया है?

उत्तर: नेहरू जी का कहना था कि इतिहास वह है जिसमें दुनिया में लगातार होने वाले बदलावों का वर्णन होता है। यदि संसार में बदलाव न होते तो इतिहास बहुत संक्षिप्त होता।


3. प्रश्न: नेहरू जी ने अपने विद्यालय के दिनों में किस प्रकार की इतिहास पढ़ी थी?

उत्तर: नेहरू जी ने बताया कि स्कूल में उन्हें इतिहास बहुत सीमित रूप में पढ़ाई गई थी—थोड़ी-सी भारत की और थोड़ी-सी इंग्लैंड की। भारत का इतिहास जो पढ़ाया गया, वह अक्सर विदेशी लेखकों द्वारा लिखा गया था, जो भारत को कम महत्व देने वाले दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते थे।


4. प्रश्न: नेहरू जी को इतिहास का गहन ज्ञान कब प्राप्त हुआ?

उत्तर: नेहरू जी को इतिहास का गहरा ज्ञान कॉलेज छोड़ने के बाद मिला, और विशेष रूप से जेल में रहने के दौरान उन्हें इतिहास को पढ़ने और समझने का अवसर मिला, जिससे उनका ज्ञान काफी बढ़ा।

5. प्रश्न: नेहरू जी ने भारतीय प्राचीन सभ्यता के बारे में क्या लिखा है?

उत्तर: नेहरू जी ने बताया कि भारत की प्राचीन सभ्यता अत्यंत महत्वपूर्ण और महान थी। आर्यों के आने से पहले यहाँ द्रविड़ लोग निवास करते थे, और आर्यों के आगमन ने भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा प्रदान की।


6. प्रश्न: मोहनजोदड़ो की खुदाई से क्या पता चला?

उत्तर: मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई के दौरान लगभग पाँच हजार साल पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले। ये सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया जैसी प्राचीन सभ्यताओं के समकक्ष थी।


7. प्रश्न: नेहरू जी ने यूरोप की स्थिति प्राचीन काल में कैसी बताई है?

उत्तर: नेहरू जी ने बताया कि प्राचीन काल में जब भारत और एशिया में सभ्यताएँ अपने शिखर पर थीं, उस समय यूरोप घने जंगलों से ढका हुआ था और वहां के लोग असभ्य और जंगली जीवन व्यतीत कर रहे थे।


8. प्रश्न: आज के यूरोप के प्रति एशियाई दृष्टिकोण पर नेहरू जी की क्या टिप्पणी है?

उत्तर: नेहरू जी ने कहा कि वर्तमान में यूरोप बहुत शक्तिशाली है और अक्सर एशिया को नीची नजर से देखता है। लेकिन उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक समय ऐसा भी था जब एशिया का प्रभाव पूरे यूरोप पर छाया हुआ था।


9. प्रश्न: यूरोप और एशिया की भौगोलिक तुलना नेहरू जी ने कैसे की है?

उत्तर: नेहरू जी ने बताया कि नक्शे में यूरोप बहुत छोटा दिखाई देता है और ऐसा लगता है जैसे वह एशिया के एक किनारे पर लटका हुआ हो, मानो यूरोप एशिया का ही हिस्सा हो।

10. प्रश्न: प्राचीन काल में एशियाई लोगों ने यूरोप पर क्या प्रभाव डाला था?

उत्तर:नेहरू जी के अनुसार, प्राचीन काल में एशियाई लोग बार-बार यूरोप पर आक्रमण करते थे, उसे जीतते थे और अपनी सभ्यता तथा संस्कृति का प्रभाव फैलाते थे। आर्य, हूण, अरब, मंगोल और तुर्क जैसी जातियाँ एशिया से ही यूरोप में आईं।


11. प्रश्न: नेहरू जी के अनुसार, यूरोप के लोग किनकी संतान हैं?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, आधुनिक यूरोपीय लोग उन एशियाई आक्रमणकारियों की वंशज हैं, जिन्होंने पहले यूरोप पर आक्रमण किया और उसे अपने प्रभाव में लिया।


12. प्रश्न: नेहरू जी ने एशिया की बनावट की तुलना किससे की है?

उत्तर: नेहरू जी ने कहा कि नक्शे में एशिया इस तरह फैला है जैसे कोई विशाल दैत्य करवट लेकर लेटा हो।


13. प्रश्न: नेहरू जी ने ‘बड़ाई’ का सही मापदंड क्या बताया है?

उत्तर: नेहरू जी ने बताया कि किसी भी महाद्वीप या देश की महानता केवल उसकी भौगोलिक आकार या विस्तार से नहीं तय होती, बल्कि उसके ज्ञान, विज्ञान, कला और संस्कृति के योगदान से आंकी जानी चाहिए।

14. प्रश्न: यूरोप के छोटे होने के बावजूद वह महान क्यों है?

उत्तर: यूरोप आकार में छोटा होने के बावजूद इसलिए महान है क्योंकि वहाँ विज्ञान, अनुसंधान, कला, साहित्य और तकनीक के क्षेत्र में असाधारण प्रगति हुई है, जिसने मानव सभ्यता को आगे बढ़ाया।


15. प्रश्न: यूरोप ने मानव सभ्यता को क्या योगदान दिया है?

उत्तर: यूरोप ने मानव सभ्यता को विज्ञान में अनुसंधान, तकनीकी आविष्कार और जीवन को सुविधाजनक बनाने वाले कई उपकरण और साधन प्रदान किए, जिनके कारण पूरी दुनिया में सामाजिक और तकनीकी परिवर्तन आया।


16. प्रश्न: नेहरू जी ने एशिया की महानता के विषय में क्या कहा है?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, एशिया की महानता केवल उसके भूगोल या आकार में नहीं है, बल्कि इसकी संस्कृति, दार्शनिक सोच और धार्मिक गहराई में निहित है। एशिया ने विश्व को ज्ञान और आध्यात्मिकता का मूल्यवान योगदान दिया है।


17. प्रश्न: एशिया में कौन-कौन से महान धार्मिक नेता और दार्शनिक जन्मे?

उत्तर: एशिया की धरती पर कई महान धार्मिक और दार्शनिक व्यक्तित्व जन्मे, जिनमें कृष्ण, बुद्ध, जरथुस्त्र, ईसा मसीह, पैगंबर मुहम्मद, कन्फ्यूशियस और लाओ-त्से शामिल हैं।


18. प्रश्न: विश्व के प्रमुख धर्मों की उत्पत्ति कहाँ हुई?

उत्तर:विश्व के प्रमुख धर्म—हिंदू, बौद्ध, पारसी, यहूदी, ईसाई और इस्लाम—सभी की उत्पत्ति एशिया महाद्वीप में हुई थी।

19. प्रश्न: एशिया के लोगों ने संसार को क्या दिया?

उत्तर: एशिया के लोगों ने संसार को धर्म, दार्शनिक विचार, कला, नैतिकता और अध्यात्मिक ज्ञान दिया। उन्होंने मानवता को जीवन का गहन और वास्तविक अर्थ समझाया।


20. प्रश्न: नेहरू जी के अनुसार इतिहास में परिवर्तन कैसे आता है?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, आम तौर पर इतिहास धीरे-धीरे बदलता है, लेकिन कभी-कभी परिस्थितियों की तीव्रता के कारण अचानक बड़े बदलाव या क्रांति आती है, जिससे इतिहास तेजी से बदल जाता है।


21. प्रश्न: वर्तमान में एशिया में किस प्रकार का परिवर्तन हो रहा है?

उत्तर:नेहरू जी के अनुसार, उनके समय में एशिया लंबे समय की नींद से जाग रहा था और तेजी से अपने सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में बढ़ रहा था।

22. प्रश्न: नेहरू जी के अनुसार, एशिया के पुनर्जागरण का क्या संकेत है?

उत्तर: नेहरू जी ने बताया कि आज दुनिया की सभी नजरें एशिया पर टिकी हुई हैं, क्योंकि आने वाले भविष्य में एशिया का बहुत बड़ा प्रभाव और योगदान होने वाला है।


23. प्रश्न: नेहरू जी ने एशिया के लोगों को किस बात की चेतावनी दी?

उत्तर: नेहरू जी ने एशिया के लोगों को यह चेतावनी दी कि वे यूरोप की आधुनिक चमक-धमक में खो न जाएँ और अपने गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक महानता को हमेशा याद रखें।


24. प्रश्न: नेहरू जी ने यूरोप की सफलता का रहस्य क्या बताया?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, यूरोप की सफलता का रहस्य उसकी वैज्ञानिक खोजों, तकनीकी प्रगति और ज्ञान के प्रति गहन लगन में निहित है, जिसने उसे वैश्विक शक्ति बना दिया।


25. प्रश्न: एशिया के पतन का कारण क्या बताया गया है?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, एशिया अपने गौरवशाली अतीत और ज्ञान-संस्कृति की परंपरा को भूल गया था, जिसके कारण वह धीरे-धीरे पिछड़ता चला गया।


26. प्रश्न: नेहरू जी के अनुसार, एशिया को फिर से महान कैसे बनाया जा सकता है?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, यदि एशिया के लोग शिक्षा, विज्ञान, और सामूहिक एकता के मार्ग पर लगातार प्रयास करें, तो वे अपनी प्राचीन महानता को पुनः स्थापित कर सकते हैं।


27. प्रश्न: पत्र के माध्यम से नेहरू जी अपनी पुत्री को क्या सिखाना चाहते हैं?

उत्तर: नेहरू जी इस पत्र के माध्यम से अपनी पुत्री को यह सिखाना चाहते हैं कि संसार में परिवर्तन लगातार होते रहते हैं, और जो लोग अपने इतिहास और संस्कृति को समझते हैं, वही आने वाले समय में महान बनते हैं।

28. प्रश्न: नेहरू जी के अनुसार सभ्यता का आरंभ कहाँ से हुआ था?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, सभ्यता की शुरुआत एशिया से हुई थी, और यहीं से मानव समाज ने संस्कृति, ज्ञान और धार्मिक दृष्टिकोण में प्रगति की।


29. प्रश्न: नेहरू जी के अनुसार, एशिया की सभ्यता कितनी पुरानी है?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा जैसी सभ्यताएँ लगभग पाँच हजार साल पुरानी हैं, जो एशिया की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं।


30. प्रश्न: यूरोप की उपेक्षा करना क्यों गलत है?

उत्तर:नेहरू जी के अनुसार, यूरोप ने विज्ञान, अनुसंधान और ज्ञान के माध्यम से मानव सभ्यता को बहुत आगे बढ़ाया है। उसकी इन उपलब्धियों को नकारना बुद्धिमानी के खिलाफ होगा।


31. प्रश्न: एशिया और यूरोप में मूल अंतर क्या है?

उत्तर: नेहरू जी के अनुसार, एशिया मुख्यतः अध्यात्म और सांस्कृतिक ज्ञान का केंद्र है, जबकि यूरोप विज्ञान, तकनीक और शोध का। दोनों महाद्वीपों ने मिलकर मानव सभ्यता के विकास में योगदान दिया है।


32. प्रश्न: एशिया के किन देशों का उल्लेख नेहरू जी ने किया?

उत्तर: नेहरू जी ने अपने पत्र में भारत, चीन, जापान, बर्मा, ईरान, अरब और मक्का जैसे एशियाई देशों का उल्लेख किया है।

33. प्रश्न: नेहरू जी ने धर्मों की समानता कैसे दिखलाई?

उत्तर:नेहरू जी ने बताया कि सभी प्रमुख धर्म—चाहे हिंदू, बौद्ध, पारसी, यहूदी, ईसाई या इस्लाम—एशिया में उत्पन्न हुए और सभी ने मानवता, शांति और प्रेम का संदेश फैलाया।


34. प्रश्न: इतिहास से मनुष्य क्या सीख सकता है?

उत्तर: इतिहास से मनुष्य यह सीख सकता है कि परिवर्तन संसार का नियम है, और केवल वे सभ्यताएँ दीर्घकाल तक जीवित रहती हैं जो अपने ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखती हैं।

35. प्रश्न: नेहरू जी ने किस शब्द को 'सबसे छोटी महानता का मापदंड' कहा?

उत्तर:नेहरू जी के अनुसार, किसी महाद्वीप या देश की भौगोलिक आकार या विस्तार को महानता का सबसे कम मापदंड माना जा सकता है; वास्तविक महानता उसके ज्ञान, संस्कृति और योगदान में निहित होती है।


36. प्रश्न: पत्र में नेहरू जी ने किस लहजे का प्रयोग किया है?

उत्तर: नेहरू जी ने अपने पत्र में स्नेहपूर्ण, शिक्षाप्रद और प्रेरक लहजे का प्रयोग करते हुए अपनी पुत्री को मार्गदर्शन और ज्ञान प्रदान किया है।

37. प्रश्न: नेहरू जी ने एशिया के किन गुणों की प्रशंसा की है?

उत्तर: नेहरू जी ने बताया कि एशिया में धर्म, दार्शनिक विचार, कला, साहित्य और आध्यात्मिकता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो इसकी महानता और विशिष्टता को प्रदर्शित करते हैं।


38. प्रश्न: ‘एशिया और यूरोप’ पत्र का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: इस पत्र का मुख्य संदेश यह है कि एशिया को अपने गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक धरोहर से प्रेरणा लेकर पुनः प्रगति करनी चाहिए और विश्व में अपना उचित और सम्मानजनक स्थान स्थापित करना चाहिए।


39. प्रश्न: नेहरू जी के अनुसार, यूरोप और एशिया दोनों से क्या सीखा जा सकता है?

उत्तर:नेहरू जी के अनुसार, यूरोप से हम विज्ञान, अनुसंधान और अनुशासन सीख सकते हैं, जबकि एशिया से हम अध्यात्म, नैतिकता और जीवन के गहरे मूल्य सीख सकते हैं; दोनों का मिश्रण मानव जीवन को संतुलित और समृद्ध बनाता है।


40. प्रश्न: यह पत्र हमें क्या प्रेरणा देता है?

उत्तर:यह पत्र हमें यह प्रेरणा देता है कि इतिहास, संस्कृति और विज्ञान का गहन अध्ययन करके हम अपने देश और दुनिया को उन्नत बना सकते हैं। साथ ही, यह हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व महसूस करने और भविष्य के निर्माण के लिए कठिन परिश्रम करने की शिक्षा भी देता है।


Answer by Mrinmoee