Chapter 16 

                                                   قدرتی آفات سے حفاظت ( مضمون )


1. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाएँ क्या होती हैं?

उत्तर:  प्राकृतिक आपदाएँ वे अनियंत्रित घटनाएँ होती हैं जो प्रकृति की शक्तियों जैसे—जल, वायु, पृथ्वी या अग्नि के असंतुलन के कारण उत्पन्न होती हैं। इनसे मनुष्य, पशु-पक्षी, फसलें और संपत्ति को गम्भीर हानि पहुँचती है। उदाहरण के लिए—भूकंप, बाढ़, चक्रवात, सूखा और जंगल की आग प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ हैं।

2. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं से हमें किस प्रकार का नुकसान होता है?

उत्तर:  प्राकृतिक आपदाएँ मानव जीवन और पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत विनाशकारी सिद्ध होती हैं। इनसे लोगों की जानें जाती हैं, पशु-पक्षी मारे जाते हैं, घर और फसलें नष्ट हो जाती हैं। सड़कों, पुलों, बिजली और संचार व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। कई बार पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था ठप पड़ जाती है।

3. प्रश्न: भूकंप क्या है और इसे क्यों खतरनाक कहा गया है?

उत्तर: भूकंप पृथ्वी की भीतरी सतह में स्थित चट्टानी प्लेटों के खिसकने या टकराने से उत्पन्न होने वाली तीव्र कंपनों की प्राकृतिक घटना है। यह घटना अचानक घटित होती है और इसके आने का समय पूर्वानुमानित नहीं किया जा सकता। इसके झटकों से इमारतें, पुल और सड़कें टूट जाती हैं, भूमि में दरारें पड़ जाती हैं और अनेक लोग मलबे के नीचे दबकर अपनी जान गंवा देते हैं।

4. प्रश्न: किन देशों में भूकंप अधिक आते हैं?

उत्तर: भूकंप सामान्यतः उन देशों या क्षेत्रों में आते हैं जो पृथ्वी की अस्थिर टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित हैं। इनमें जापान, इंडोनेशिया, चीन, नेपाल, और फिलीपींस जैसे देश प्रमुख हैं। भारत में भी उत्तर भारत, बिहार, असम, गुजरात और हिमालयी क्षेत्र भूकंप संभावित इलाकों में गिने जाते हैं, जहाँ अतीत में कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं।

5. प्रश्न: भूकंप से बचने के लिए घर बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: भूकंप से बचाव के लिए सबसे पहले भवन निर्माण के लिए मज़बूत और ठोस भूमि का चयन करना चाहिए। घर की नींव गहरी और मजबूत होनी चाहिए तथा डिज़ाइन ऐसा होना चाहिए जो झटकों का सामना कर सके। बहुत ऊँची इमारतें भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में नहीं बनानी चाहिए। साथ ही, लोहे और कंक्रीट का संतुलित उपयोग करना चाहिए ताकि भवन लचीला और सुरक्षित बना रहे।

6. प्रश्न: यदि भूकंप के झटके महसूस हों तो क्या करना चाहिए?

उत्तर: जब भूकंप के झटके महसूस हों, तो घबराने के बजाय तुरंत सुरक्षा के उपाय करने चाहिए। यदि आप घर के अंदर हैं, तो किसी मज़बूत मेज़, चारपाई या दीवार के कोने में झुककर बैठ जाएँ और सिर को किसी कठोर वस्तु या हाथों से ढक लें। बाहर जाने का अवसर मिले तो खुली जगह जैसे मैदान या सड़क पर पहुँच जाएँ, लेकिन बिजली के खंभों, पेड़ों और इमारतों से दूर रहें। लिफ्ट का उपयोग बिलकुल न करें।

7. प्रश्न: भूकंप के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

उत्तर: भूकंप के समय हमें किसी भी तरह की जल्दबाज़ी या घबराहट से बचना चाहिए। लिफ्ट का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि बिजली कभी भी चली जा सकती है। ऊँची इमारतों की छतों पर चढ़ना या बालकनी के पास जाना खतरनाक होता है। साथ ही, शीशों, अलमारियों और भारी वस्तुओं के पास खड़े होने से भी बचना चाहिए, क्योंकि वे गिरकर चोट पहुँचा सकती हैं। शांत रहकर सुरक्षित स्थान पर रहना ही सबसे अच्छा उपाय है।

8. प्रश्न: बाढ़ क्या है?

उत्तर: जब लगातार वर्षा या नदी के जल स्तर में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण पानी अपने किनारों को पार कर आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है, तो उसे बाढ़ कहा जाता है। बाढ़ आने से खेत, घर, सड़कें और पुल जलमग्न हो जाते हैं। इससे न केवल लोगों के घर और संपत्ति नष्ट हो जाती है, बल्कि भोजन, पानी और बीमारियों की समस्या भी बढ़ जाती है। कई बार तो लोग अपने प्रियजनों से भी बिछड़ जाते हैं और लंबे समय तक पुनर्वास की कठिनाई झेलनी पड़ती है।

9. प्रश्न: भारत के कौन से राज्य बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं?

उत्तर:भारत के उत्तरी और पूर्वोत्तर भागों में बाढ़ की समस्या सबसे अधिक होती है। विशेष रूप से बिहार, असम, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य हर वर्ष बाढ़ की मार झेलते हैं। बिहार में गंगा, कोसी, गंडक जैसी नदियाँ बरसात के मौसम में उफान पर आ जाती हैं, जिससे हजारों गाँव जलमग्न हो जाते हैं। असम में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इन राज्यों में फसलों का नाश, घरों का टूटना और लोगों का पलायन आम बात हो जाती है।

10. प्रश्न: बाढ़ से बचने के लिए कौन-कौन से स्थायी कदम उठाने चाहिए?

उत्तर: बाढ़ से बचाव के लिए सबसे पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि नदियों या समुद्र के किनारों पर घर या बस्तियाँ न बसाई जाएँ। मकान हमेशा जलस्तर से ऊँचे स्थान पर बनाए जाएँ ताकि पानी का असर कम पड़े। नालियों और जल निकास की व्यवस्था ऐसी हो कि बारिश या नदियों के बढ़े हुए पानी का बहाव रुक न सके। नदियों के किनारे बाँध या तटबंध बनाए जाएँ, जिससे बाढ़ का पानी आबादी वाले इलाकों में न घुसे। इसके अलावा, पूरे गाँव या कस्बे को ऊँचाई पर बसाना और पेड़-पौधे लगाना भी बाढ़ से स्थायी सुरक्षा के उपाय हैं।

11. प्रश्न: बाढ़ के समय तत्काल क्या उपाय करने चाहिए?

उत्तर: जब बाढ़ की आशंका हो, तो सबसे पहले आवश्यक वस्तुओं जैसे टॉर्च, दियासलाई, दवाइयों की पेटी, सूखा भोजन, पीने का स्वच्छ पानी, कुछ कपड़े, और ईंधन आदि को एक जगह इकट्ठा कर लेना चाहिए। साथ ही, रेडियो या मोबाइल के माध्यम से लगातार समाचार सुनते रहें ताकि समय रहते जानकारी मिल सके। जैसे ही बाढ़ आने की सूचना मिले, तो निचले या तटीय इलाकों को तुरंत खाली कर देना चाहिए और ऊँचे स्थानों या सुरक्षित भवनों, जैसे — स्कूल, मंदिर, या मस्जिद की ऊपरी मंज़िल पर चले जाना चाहिए। बच्चों, बुज़ुर्गों और विकलांग व्यक्तियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

12. प्रश्न: बाढ़ के दौरान किन लोगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: बाढ़ के समय सबसे पहले उन लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए जो स्वयं अपनी रक्षा नहीं कर सकते — जैसे छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और दिव्यांग व्यक्ति। ऐसे लोगों को सुरक्षित और ऊँचे स्थानों पर पहुँचाने की ज़िम्मेदारी परिवार और समाज दोनों की होती है। इनकी देखभाल के लिए पहले से व्यवस्था करनी चाहिए ताकि आपदा के समय कोई असुविधा या नुकसान न हो।

13. प्रश्न: तूफ़ान क्या है और यह कहाँ सबसे अधिक आता है?

उत्तर: तूफ़ान एक तीव्र गति से चलने वाली वायु की प्राकृतिक आपदा है, जो अक्सर समुद्र में उत्पन्न होती है और जब यह तटवर्ती इलाकों से टकराती है तो भारी तबाही मचाती है। इसकी तेज़ हवाएँ, मूसलाधार वर्षा और समुद्री लहरें घरों, पेड़ों और फसलों को नष्ट कर देती हैं। यह आपदा अधिकतर तटीय राज्यों — जैसे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल — में देखी जाती है, जहाँ समुद्र के पास बसे गाँव और शहर इसकी चपेट में आते हैं।

14. प्रश्न: सूनामी क्या है?

उत्तर: सूनामी एक भयंकर समुद्री आपदा है, जिसमें समुद्र की गहराइयों में भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट होने से विशाल लहरें उत्पन्न होती हैं। ये लहरें अत्यंत तेज़ गति से किनारों की ओर बढ़ती हैं और तटीय क्षेत्रों को पूरी तरह डुबो देती हैं। सूनामी के कारण घर, पेड़, खेत, सड़कें सब बह जाते हैं और हजारों लोगों की जान चली जाती है। 2004 में हिंद महासागर में आई सूनामी इसका एक विनाशकारी उदाहरण है।

15. प्रश्न: तूफ़ान आने पर क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?

उत्तर: तूफ़ान आने पर सबसे पहले घबराना नहीं चाहिए। यदि आप खुले मैदान में हैं, तो तुरंत ज़मीन पर झुककर लेट जाएँ ताकि तेज़ हवाओं से संतुलन न बिगड़े। यदि घर में हैं, तो दरवाज़े और खिड़कियाँ अच्छी तरह बंद कर लें और घर के भीतर ही रहें। समुद्र या नदी के किनारे हों तो जितनी जल्दी हो सके ऊँचे और सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ। इसके अलावा, बिजली के उपकरणों का प्रयोग बंद कर देना चाहिए और समाचार प्रसारण के माध्यम से स्थिति की जानकारी लेते रहना चाहिए।

16. प्रश्न: आग लगने की घटनाएँ किन कारणों से होती हैं?

उत्तर: आग लगने की घटनाएँ कई वजहों से घटित होती हैं। सबसे सामान्य कारण बिजली की शॉर्ट सर्किट है, जब तारों में अधिक भार या खराबी के कारण चिंगारी उठ जाती है। इसके अलावा रसोई में लापरवाही, जैसे गैस बर्नर बंद करना भूल जाना या तेल से भरे बर्तन का गरम होना भी आग का कारण बनता है। ज्वलनशील पदार्थों जैसे पेट्रोल, डीज़ल या मिट्टी के तेल का असावधानी से प्रयोग और जंगलों में सूखी घास या पत्तियों का जलना भी अक्सर बड़ी आग का रूप ले लेता है।

17. प्रश्न: आग लगने पर सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए?

उत्तर: आग लगने की स्थिति में सबसे पहले अपनी और दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। तुरंत उस स्थान को छोड़कर खुले और सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाना चाहिए। आस-पास के लोगों को सावधान करें ताकि वे भी वहाँ से दूर हट जाएँ। इसके बाद अग्निशमन विभाग या फायर ब्रिगेड को फ़ोन कर आग लगने की सूचना दें ताकि राहत दल तुरंत पहुँच सके और नुकसान कम किया जा सके।

18. प्रश्न: यदि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी हो तो क्या करना चाहिए?

उत्तर: यदि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लग जाए, तो सबसे पहले बिजली की मुख्य सप्लाई को बंद करना आवश्यक है ताकि करंट का प्रवाह रुक जाए। उसके बाद आग बुझाने के लिए केवल सूखी लकड़ी, रबर या रेत का प्रयोग करें। पानी या गीले हाथों से तार या स्विच को छूना बेहद ख़तरनाक होता है, इसलिए सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

19. प्रश्न: यदि आग तेल या पेट्रोल से लगी हो तो उसे कैसे बुझाया जाए?

उत्तर: अगर आग तेल या पेट्रोल जैसी ज्वलनशील वस्तुओं से लगी हो, तो उसे कभी भी पानी डालकर नहीं बुझाना चाहिए, क्योंकि पानी आग को फैलाता है। ऐसी स्थिति में आग पर तुरंत मिट्टी, रेत या फोम (हॉलोकार्बन गैस) डालना चाहिए, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाए और आग स्वतः बुझ जाए।

20. प्रश्न: यदि कोई व्यक्ति आग से झुलस जाए तो क्या करें?

उत्तर: यदि किसी व्यक्ति के शरीर में आग लग जाए और वह झुलस जाए, तो सबसे पहले उसे आग से अलग करके किसी मोटे कम्बल या चादर में लपेटें ताकि आग बुझ सके। उसके बाद जले हुए हिस्से पर ठंडा पानी डालें या उसे कुछ देर ठंडे पानी में रखें ताकि जलन कम हो जाए। फिर उस स्थान को साफ सूती कपड़े से ढक दें, तंग कपड़े या गहने तुरंत उतार दें, और बिना देरी किए डॉक्टर या अस्पताल की मदद लें।

21. प्रश्न: आग लगने पर क्या नहीं करना चाहिए?

उत्तर:आग लगने की स्थिति में घबराना या बिना सोचे-समझे कोई कदम उठाना नहीं चाहिए। जले हुए स्थान पर तेल, मक्खन, बर्फ या कोई मरहम तुरंत नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, यदि कपड़े शरीर से चिपक गए हों, तो उन्हें खींचकर निकालने की कोशिश न करें — इससे त्वचा को और नुकसान हो सकता है।

22. प्रश्न: सूखा क्या है?

उत्तर:जब किसी क्षेत्र में बहुत लंबे समय तक वर्षा नहीं होती, मिट्टी में नमी कम हो जाती है, नदियाँ और तालाब सूख जाते हैं, तथा पेड़-पौधों और फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तब उस स्थिति को सूखा कहा जाता है। सूखे के कारण खेती, पशुपालन और मानव जीवन सभी बुरी तरह प्रभावित होते हैं।

23. प्रश्न: भूस्खलन क्या होता है?

उत्तर:भूस्खलन वह प्राकृतिक घटना है जिसमें पहाड़ों या ढलानों की मिट्टी, पत्थर और चट्टानें अचानक नीचे की ओर खिसकने लगती हैं। यह ज़्यादातर तेज़ बारिश, भूकंप, जंगलों की कटाई या ज़मीन की अस्थिरता के कारण होता है, जिससे सड़कों, घरों और लोगों को भारी नुकसान पहुँचता है।

24. प्रश्न: भूस्खलन से बचने के उपाय क्या हैं?

उत्तर: भूस्खलन से बचने के लिए पहाड़ी इलाकों में वृक्षारोपण बढ़ाना चाहिए ताकि मिट्टी को मजबूती मिल सके। ढलानों पर निर्माण कार्य सोच-समझकर करना चाहिए और बरसात के मौसम में अस्थिर पहाड़ियों या चट्टानों के पास जाने से परहेज़ करना चाहिए। साथ ही, सरकार द्वारा लगाए गए चेतावनी संकेतों का पालन करना भी अत्यंत आवश्यक है।

25. प्रश्न: लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूक क्यों रहना चाहिए?

उत्तर:  लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति जागरूक रहना इसलिए आवश्यक है क्योंकि समय पर सतर्कता और सही जानकारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। जब लोग आपदा से पहले और बाद की तैयारी के तरीके जानते हैं, तो वे अपने और दूसरों के जीवन की रक्षा कर सकते हैं। जागरूक नागरिक समाज को सुरक्षित और सशक्त बनाते हैं।

26. प्रश्न: मीडिया प्राकृतिक आपदाओं के समय क्या भूमिका निभाता है?

उत्तर:प्राकृतिक आपदाओं के समय मीडिया एक सेतु का काम करता है। यह लोगों को आपदा से जुड़ी ताज़ा जानकारी और चेतावनी संदेश समय पर पहुँचाता है ताकि वे सुरक्षित स्थान पर जा सकें। साथ ही, मीडिया राहत और बचाव कार्यों की स्थिति बताकर सरकार और प्रशासन को जनता की वास्तविक ज़रूरतों से अवगत कराता है।

27. प्रश्न: ‘डेंजर ज़ोन’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: ‘डेंजर ज़ोन’ उन इलाकों को कहा जाता है जहाँ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़, तूफ़ान या भूस्खलन की संभावना अधिक होती है। ऐसे स्थानों पर रहना या निर्माण कार्य करना जोखिमपूर्ण होता है, क्योंकि किसी भी समय वहाँ बड़ी दुर्घटना या जनहानि हो सकती है।

28. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं से पहले तैयारी क्यों आवश्यक है?

उत्तर: प्राकृतिक आपदाएँ बिना चेतावनी के भी आ सकती हैं, इसलिए पहले से की गई तैयारी जीवनरक्षक सिद्ध होती है। यदि घर में आवश्यक वस्तुएँ जैसे प्राथमिक उपचार किट, पीने का पानी, सूखा भोजन, टॉर्च और रेडियो उपलब्ध हों, तो संकट की स्थिति में हम जल्दी और सुरक्षित ढंग से प्रतिक्रिया दे सकते हैं तथा बड़े नुकसान से बच सकते हैं।

29. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए सरकार क्या कदम उठा सकती है?

उत्तर:प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार को बहुआयामी कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले, मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाया जाए ताकि लोगों को समय रहते जानकारी मिल सके। दूसरे, जोखिम वाले क्षेत्रों में बाढ़-रोधी बांध और तटबंध बनाए जाएँ। साथ ही, राहत एवं बचाव दलों को प्रशिक्षित कर हर जिले में आपदा प्रबंधन केंद्र स्थापित किए जाएँ ताकि आपदा के समय तुरंत सहायता पहुँच सके।

30. प्रश्न: ‘नशर-ओ-अशाअत’ शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तर: ‘नशर-ओ-अशाअत’ का मतलब है किसी विचार, संदेश या जानकारी को व्यापक रूप से लोगों तक पहुँचाना। यह शब्द अक्सर समाचार, ज्ञान या सामाजिक संदेशों के प्रचार और प्रसार के संदर्भ में प्रयोग किया जाता है, ताकि समाज में जागरूकता फैले और सही जानकारी सभी तक पहुँचे।

31. प्रश्न: सूनामी के दौरान लोगों को क्या करना चाहिए?

उत्तर: सूनामी की चेतावनी मिलते ही लोगों को बिना देर किए समुद्र तट और निचले इलाकों से तुरंत दूर हट जाना चाहिए। सुरक्षित ऊँचे स्थानों या मजबूत इमारतों की ऊपरी मंज़िल पर शरण लेनी चाहिए। किसी भी स्थिति में समुद्र की लहरें देखने या तट के पास जाने की गलती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सूनामी की लहरें बहुत तेज़ी से लौटकर भारी तबाही मचा सकती हैं।

32. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में शिक्षा की क्या भूमिका है?

उत्तर:शिक्षा लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की समझ और तत्परता प्रदान करती है। इसके माध्यम से व्यक्ति यह जान पाता है कि आपदा आने पर कैसे सुरक्षित रहना है, दूसरों की सहायता कैसे करनी है और घबराहट से कैसे बचना है। विद्यालयों में आपदा प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण और अभ्यास कराए जाने चाहिए ताकि विद्यार्थी वास्तविक परिस्थितियों में भी समझदारी और साहस से काम ले सकें।

33. प्रश्न: “आग की वजह से झुलसे व्यक्ति” की प्राथमिक सहायता क्या है?

उत्तर:  यदि कोई व्यक्ति आग से झुलस जाए, तो सबसे पहले उसके शरीर पर जलती हुई आग को तुरंत बुझाएँ — इसके लिए कम्बल या चादर का प्रयोग करें। इसके बाद जले हुए हिस्से को ठंडे पानी में कुछ समय तक रखें ताकि जलन कम हो जाए। फिर उस स्थान को साफ और सूखे सूती कपड़े से ढक दें। किसी भी हालत में तेल, मक्खन या बर्फ का प्रयोग न करें। अंत में तुरंत डॉक्टर या नज़दीकी अस्पताल से चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

34. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाएँ हमें क्या सिखाती हैं?

उत्तर: प्राकृतिक आपदाएँ हमें यह सिखाती हैं कि मनुष्य चाहे कितना भी विकसित क्यों न हो जाए, प्रकृति की शक्ति उससे कहीं अधिक महान है। ये आपदाएँ हमें विनम्र बनाती हैं और यह याद दिलाती हैं कि हमें पर्यावरण का शोषण नहीं, बल्कि उसका संरक्षण करना चाहिए। पेड़ लगाना, जल स्रोतों की रक्षा करना, और प्रदूषण कम करना — ये सभी कार्य हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

35. प्रश्न: आपदा प्रबंधन क्या होता है?

उत्तर: आपदा प्रबंधन वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत किसी भी प्राकृतिक या मानवीय आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से तैयारी, बचाव, राहत और पुनर्वास के कार्य किए जाते हैं। इसमें आपदा से पहले चेतावनी प्रणाली तैयार करना, राहत सामग्री एकत्र करना, आपदा के समय प्रभावित लोगों को सहायता देना और आपदा के बाद क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना शामिल है।

36. प्रश्न: ‘मकानों की प्लिंथ लेवल’ ऊँची रखने का क्या कारण है?

उत्तर: मकानों की प्लिंथ लेवल ऊँची रखने का मुख्य कारण यह है कि बाढ़ या वर्षा का पानी घर के अंदर न घुसे। जब नींव ज़मीन से ऊँची होती है, तो घर का फर्श जलस्तर से ऊपर रहता है, जिससे पानी दीवारों या कमरों में नहीं भर पाता। यह न केवल भवन को सुरक्षित रखता है, बल्कि उसमें रहने वालों की जान-माल की हानि भी रोकता है।

37. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं से बचने में विज्ञान और तकनीक कैसे मदद कर सकती है?

उत्तर: विज्ञान और तकनीक प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सैटेलाइट, रडार और सेंसर जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से भूकंप, तूफ़ान, सूनामी और बाढ़ की समय रहते चेतावनी दी जा सकती है। इससे लोगों को पहले से सतर्क किया जा सकता है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सकता है। इसके अलावा, ड्रोन और जीपीएस प्रणाली से राहत कार्यों की निगरानी और बचाव दल का समन्वय अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

38. प्रश्न: आग बुझाने के कौन-कौन से उपाय प्रभावी हैं?

उत्तर: आग बुझाने के उपाय उसकी प्रकृति पर निर्भर करते हैं। यदि आग लकड़ी, कागज़ या कपड़े जैसी सामान्य वस्तुओं में लगी हो, तो उस पर पानी डालना प्रभावी होता है। लेकिन यदि आग तेल, पेट्रोल या गैस से लगी हो, तो पानी डालने से वह और फैल सकती है — ऐसी स्थिति में मिट्टी, रेत या फोम (हॉलोकार्बन गैस) का प्रयोग किया जाता है। वहीं, यदि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी हो, तो सबसे पहले बिजली की मुख्य सप्लाई बंद करनी चाहिए और फिर रेत या ड्राई पाउडर एक्सटिंग्विशर से आग बुझानी चाहिए।

39. प्रश्न: प्राकृतिक आपदाओं के समय घबराना क्यों नहीं चाहिए?

उत्तर: प्राकृतिक आपदा के समय घबराना स्थिति को और अधिक गंभीर बना देता है, क्योंकि घबराहट में व्यक्ति सही निर्णय नहीं ले पाता और गलत कदम उठाने से जान-माल दोनों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में शांत रहना, दूसरों की सहायता करना, और प्रशासन या विशेषज्ञों के निर्देशों का पालन करना ही सबसे सुरक्षित उपाय होता है। संयम और समझदारी से किया गया प्रत्येक कार्य जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

40. प्रश्न: इस पूरे पाठ से हमें क्या संदेश मिलता है?

उत्तर:  इस पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को प्रकृति की शक्ति का सम्मान करना चाहिए और उसके साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना चाहिए। आपदाएँ जब भी आती हैं, वे हमें यह याद दिलाती हैं कि सावधानी, एकता और समझदारी ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि हम पहले से तैयार रहें, दूसरों की मदद करें और पर्यावरण की रक्षा करें, तो किसी भी प्राकृतिक आपदा के सामने डटकर खड़े रह सकते हैं।


Answer by Mrinmoee