Chapter 19 

                                                                  अँधेर नगरी


प्रश्न:1. गोवर्धनदास ने अँधेर नगरी का नाम और राजा का नाम सुनकर क्या कहा?

उत्तर: गोवर्धनदास ने कहा, "अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।"


प्रश्न:2. गोवर्धनदास ने सात पैसे भिक्षा में लेकर कितनी मिठाई मोल ली?

उत्तर: गोवर्धनदास ने सात पैसे में साढ़े तीन सेर मिठाई मोल ली।


प्रश्न:3. महंतजी ने गोवर्धनदास को अँधेर नगरी में रहने से क्यों मना किया?

उत्तर: महंतजी ने कहा कि ऐसी नगरी में रहना उचित नहीं है जहाँ टके सेर भाजी और खाजा मिलता है, क्योंकि यह नगर अनुचित और अराजक है।


प्रश्न:4. राजा ने फरियादी को बुलाने के बाद सबसे पहले किसे पकड़ा?

उत्तर: राजा ने सबसे पहले कल्लू बनिए को पकड़ा।


प्रश्न:5. कल्लू बनिए ने बकरी मरने का दोष किस पर डाला?

उत्तर: कल्लू ने कहा कि कारीगर की गलती से दीवार गिर गई, इसलिए बकरी मर गई।


प्रश्न:6. कारीगर ने बकरी मरने की घटना का दोष किस पर डाला?

उत्तर: कारीगर ने कहा कि चूनेवाले ने खराब चूना दिया, इसलिए दीवार गिर गई।


प्रश्न:7. चूनेवाले ने भिश्ती को दोषी क्यों बताया?

उत्तर: चूनेवाले ने कहा कि भिश्ती ने चूने में पानी अधिक डाल दिया, जिससे चूना कमजोर हो गया।


प्रश्न:8. भिश्ती ने अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब क्या दिया?

उत्तर: भिश्ती ने कहा कि कसाई ने बड़ी मश्क बनाई, इसलिए पानी ज्यादा आ गया, मेरा कोई कसूर नहीं।


प्रश्न:9. कसाई ने अपने ऊपर लगे आरोप का उत्तर क्या दिया?

उत्तर: कसाई ने कहा कि गड़ेरिए ने बहुत बड़ी भेड़ बेची, इसलिए मश्क बड़ी बन गई।


प्रश्न:10. गड़ेरिए ने दोष किस पर डाला?

उत्तर: गड़ेरिए ने कहा कि कोतवाल की सवारी आने की भीड़-भाड़ के कारण गलती हुई, मेरा कोई कसूर नहीं।


प्रश्न:11. कोतवाल ने अपने दोष को कैसे बताया?

उत्तर: कोतवाल ने कहा कि उसने कोई गलती नहीं की।


प्रश्न:12. राजा ने कोतवाल के बारे में क्या निर्णय लिया?

उत्तर: राजा ने कहा कि उसे फाँसी दी जाए।


प्रश्न:13. गोवर्धनदास को फाँसी देने का कारण क्या था?

उत्तर: गोवर्धनदास को इसलिए फाँसी दी जानी थी क्योंकि कोतवाल की फाँसी के लिए कोई मोटा व्यक्ति चाहिए था।


प्रश्न:14. गोवर्धनदास ने फाँसी दिए जाने पर क्या कहा?

उत्तर: उसने कहा कि यह नाहक सजा है, उसने कोई अपराध नहीं किया।


प्रश्न:15. महंतजी ने गोवर्धनदास को फाँसी पर चढ़ने से पहले क्या समझाया?

उत्तर: महंतजी ने कहा कि चिंता मत करो, नारायणदास समर्थ है और सभी व्यवस्थाएँ संभाल लेगा।


प्रश्न:16. गोवर्धनदास और महंतजी ने फाँसी पर चढ़ने के लिए झगड़ा क्यों किया?

उत्तर: गोवर्धनदास चाहता था कि वह चढ़े, महंतजी चाहते थे कि वे चढ़ें क्योंकि यह शुभ घड़ी है।


प्रश्न:17. राजा और मंत्री ने फाँसी पर चढ़ने का निर्णय क्यों लिया?

उत्तर: महंतजी ने कहा कि इस समय शुभ घड़ी है, इसलिए जो मरेगा, सीधा स्वर्ग जाएगा।


प्रश्न:18. गोवर्धनदास ने गुरुजी को देखकर क्या कहा?

उत्तर: उसने कहा, "गुरुजी, दीवार के नीचे बकरी दब गई, जिसके लिए मुझे फाँसी दी जा रही है। बचाओ!"


प्रश्न:19. राजा ने सिपाहियों को गोवर्धनदास पर क्या आदेश दिया?

उत्तर: राजा ने कहा कि गोवर्धनदास को फाँसी पर चढ़ाओ।


प्रश्न:20. महंतजी ने सिपाहियों से क्या कहा?

उत्तर: महंतजी ने सिपाहियों से कहा कि वे किनारे हट जाएँ ताकि वह शिष्य को अंतिम उपदेश दे सकें।


प्रश्न:21. टका शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तर: टका ताँबे/चाँदी का पुराना सिक्का होता है, जो दो पैसे के बराबर था।


प्रश्न:22. कसूर का अर्थ क्या है?

उत्तर: कसूर का अर्थ है दोष या गलती।


प्रश्न:23. नाहक शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: नाहक का अर्थ है बिना कारण या व्यर्थ।


प्रश्न:24. विनती शब्द का अर्थ बताइए।

उत्तर: विनती का अर्थ है प्रार्थना करना।


प्रश्न:25. हुज्जत शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तर: हुज्जत का अर्थ है बहस या झगड़ा।


प्रश्न:26. सबब शब्द का अर्थ क्या है?

उत्तर: सबब का अर्थ है कारण।


प्रश्न:27. मश्क शब्द का अर्थ बताइए।

उत्तर: मश्क एक चमड़े का थैला होता है, जिसमें भिश्ती पानी ढोते हैं।


प्रश्न:28. भिश्ती का कार्य क्या होता है?

उत्तर: भिश्ती पानी ढोने और घरों में पानी पहुँचाने का काम करता है।


प्रश्न:29. फरियादी कौन होता है?

उत्तर: फरियादी वह व्यक्ति होता है जो शिकायत करता है।


प्रश्न:30. “अँधेर नगरी” का संदेश क्या है?

उत्तर: यह कहानी न्याय की अराजकता और शासन में अनुचित निर्णयों को दर्शाती है।


प्रश्न:31. यदि आप अँधेर नगरी के नागरिक होते तो आप क्या करते?

उत्तर: मैं न्याय और अनुचित फैसलों के खिलाफ विरोध करता और सत्य को उजागर करता।


प्रश्न:32. अँधेर नगरी में क्यों सभी लोग भ्रमित रहते हैं?

उत्तर: क्योंकि यहाँ न्याय की व्यवस्था उल्टी है और दोषियों को पकड़ने का तरीका अजीब है।


प्रश्न:33. गोवर्धनदास की प्रतिक्रिया क्यों महत्वपूर्ण थी?

उत्तर: उसने साहस दिखाया और गुरुजी के कहने पर भी डरते हुए न्याय की वास्तविकता को समझाया।


प्रश्न:34. महंतजी ने अपने शिष्य को क्यों समझाया?

उत्तर: ताकि गोवर्धनदास सुरक्षित रहे और फँसे बिना समझदारी से निर्णय ले।


प्रश्न:35. इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर: न्याय में अराजकता और अधूरी समझ के कारण बेगुनाहों को नुकसान हो सकता है।


प्रश्न:36. राजा की अराजकता किस प्रकार दिखती है?

उत्तर: राजा दोषी नहीं होने पर भी लोगों को फाँसी दे देता है और किसी पर निर्णय बिना जांच पड़ताल के करता है।


प्रश्न:37. क्या गोवर्धनदास का भय स्वाभाविक था?

उत्तर: हाँ, क्योंकि उसे नाहक फाँसी दी जानी थी, इसलिए उसका डर स्वाभाविक था।


प्रश्न:38. आप इस कहानी में महंतजी के चरित्र के बारे में क्या कहेंगे?

उत्तर: महंतजी समझदार, धैर्यशील और शिष्य की सुरक्षा के लिए चतुर हैं।


प्रश्न:39. अँधेर नगरी में न्याय की व्यवस्था क्यों विफल है?

उत्तर: क्योंकि यहाँ दोष का पता लगाने का तरीका उल्टा है और सभी निर्णय बिना तर्क के किए जाते हैं।


प्रश्न:40. यदि आप इस कहानी के पात्र होते तो किस तरह न्याय करते?

उत्तर: मैं दोषियों की सही जांच कर न्याय करता और बेगुनाहों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता।

Answer by Mrinmoee