Chapter 22
परीक्षा
1. आचार्य चरक कौन थे और वे किस विद्या के महान जानकार थे?
उत्तर:आचार्य चरक प्राचीन भारत के महान आयुर्वेदाचार्य थे। उन्हें आयुर्वेद, जड़ी-बूटियों और चिकित्सा विज्ञान का गहन ज्ञान था। वे न केवल विद्वान थे, बल्कि एक कुशल गुरु भी थे, जो अपने शिष्यों को व्यवहारिक ज्ञान देना चाहते थे।
2. आचार्य चरक का आश्रम कहाँ स्थित था और इसका क्या महत्व था?
उत्तर:आचार्य चरक का आश्रम घने जंगल में स्थित था। जंगल में रहकर शिष्य सीधे प्रकृति से जुड़ते थे और वनस्पतियों को नज़दीक से पहचानते थे। यह स्थान आयुर्वेद के अध्ययन के लिए आदर्श था।
3. आचार्य चरक शिष्यों को वनस्पतियों का ज्ञान कैसे देते थे?
उत्तर:वे प्रतिदिन शिष्यों को पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों के गुण बताते थे। पूर्णिमा की रात उन्हें जंगल ले जाकर वनस्पतियों की पहचान कराते थे, क्योंकि कुछ जड़ी-बूटियाँ चाँदनी में ही पहचानी जा सकती थीं।
4. पूर्णिमा की रात जंगल जाने का क्या उद्देश्य था?
उत्तर:पूर्णिमा की रात चाँदनी होने के कारण कुछ विशेष वनस्पतियाँ स्पष्ट दिखाई देती थीं। इससे शिष्यों को सही पहचान और व्यावहारिक ज्ञान मिलता था।
5. जंगल में जाने से शिष्यों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था?
उत्तर:रात का अंधेरा, जंगली जानवरों का भय और डरावनी आवाजें वातावरण को भयावह बना देती थीं। इससे कई शिष्य डर जाते थे।
6. कुछ शिष्य पढ़ाई बीच में क्यों छोड़ देते थे?
उत्तर:डर और साहस की कमी के कारण कुछ शिष्य जंगल की परिस्थितियाँ सहन नहीं कर पाते थे और पढ़ाई छोड़कर चले जाते थे।
7. डरपोक शिष्यों के बारे में आचार्य चरक का क्या विचार था?
उत्तर:आचार्य चरक मानते थे कि डरपोक व्यक्ति अच्छा वैद्य नहीं बन सकता, क्योंकि वैद्य का काम मृत्यु से लड़ना होता है।
8. आचार्य चरक के अनुसार वैद्य का मुख्य कर्तव्य क्या है?
उत्तर:वैद्य का मुख्य कर्तव्य रोगों से लड़ना और रोगी की जान बचाना है, अर्थात मृत्यु पर विजय पाने का प्रयास करना।
9. आचार्य चरक परीक्षा कैसे लेते थे?
उत्तर:वे बहुत कड़ी और कठिन परीक्षा लेते थे, जिसमें सैकड़ों में से केवल कुछ ही विद्यार्थी उत्तीर्ण होते थे।
10. उत्तीर्ण विद्यार्थी समाज में क्या कार्य करते थे?
उत्तर:वे लोगों को विभिन्न रोगों से मुक्त करते थे और आचार्य चरक का यश चारों ओर फैलाते थे।
11. आचार्य चरक ने शिष्यों को क्या परीक्षा दी?
उत्तर:उन्होंने शिष्यों को 30 दिनों में जंगल से ऐसी वनस्पतियाँ लाने को कहा जिनका आयुर्वेद में कोई उपयोग न हो।
12. शिष्यों ने इस परीक्षा को कैसे लिया?
उत्तर:सभी शिष्य अलग-अलग दिशाओं में जंगल छानने निकल पड़े और अपनी समझ के अनुसार वनस्पतियाँ इकट्ठी करने लगे।
13. कुछ शिष्यों ने कौन-सी वनस्पतियाँ इकट्ठी कीं और क्यों?
उत्तर:कुछ ने घास-फूस और कँटीली झाड़ियाँ इकट्ठी कीं क्योंकि उन्हें वे बेकार लगीं।
14. अन्य शिष्यों ने क्या इकट्ठा किया?
उत्तर:कुछ ने पेड़ों की छालें, पत्तियाँ और ज़हरीले फल-तने इकट्ठे किए जिन्हें वे अनुपयोगी समझते थे।
15. अधिक परिश्रमी शिष्यों ने क्या किया?
उत्तर:कुछ शिष्यों ने गहराई से खोज कर जड़ें तक खोदकर इकट्ठी कीं।
16. बीस दिन बाद क्या हुआ?
उत्तर:बीस दिन बाद शिष्यों ने अपनी-अपनी लाई वनस्पतियाँ गुरुजी को दिखाईं।
17. आचार्य चरक उन वनस्पतियों को देखकर संतुष्ट क्यों नहीं हुए?
उत्तर:क्योंकि शिष्य यह नहीं समझ पाए थे कि हर वनस्पति का कोई न कोई उपयोग होता है।
18. उनतीसवें दिन तक कितने शिष्य लौट आए थे?
उत्तर:उनतीसवें दिन तक सभी शिष्य लौट आए थे, केवल एक शिष्य शेष था।
19. अंतिम शिष्य कब लौटा और वह क्या लाया?
उत्तर:वह तीसवें दिन लौटा और वह खाली हाथ था।
20. अन्य शिष्यों ने अंतिम शिष्य का क्या मज़ाक उड़ाया?
उत्तर:वे उस पर हँसने लगे क्योंकि वह कुछ भी लेकर नहीं आया था।
21. अंतिम शिष्य ने गुरुजी से क्या कहा?
उत्तर:उसने कहा कि जंगल में उसे कोई भी ऐसी वनस्पति नहीं मिली जो आयुर्वेद के काम न आती हो।
22. आचार्य चरक ने किसे उत्तीर्ण घोषित किया?
उत्तर:आचार्य चरक ने उसी खाली हाथ लौटे शिष्य को उत्तीर्ण घोषित किया।
23. आचार्य चरक ने ऐसा निर्णय क्यों लिया?
उत्तर:क्योंकि उस शिष्य ने सही समझ दिखाई कि कोई भी वनस्पति बेकार नहीं होती।
24. आचार्य चरक के अनुसार किसी वनस्पति का अनुपयोगी लगना क्या दर्शाता है?
उत्तर:यह दर्शाता है कि हमारा ज्ञान अधूरा है, न कि वनस्पति बेकार है।
25. इस कथा का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर:ज्ञान की गहराई, धैर्य और सही दृष्टिकोण ही सच्ची सफलता दिलाते हैं।
26. परीक्षा का उद्देश्य क्या बताया गया है?
उत्तर:परीक्षा से केवल ज्ञान नहीं, बल्कि समझ और सोच की परख होती है।
27. यह कथा प्रकृति के बारे में क्या सिखाती है?
उत्तर:प्रकृति की हर चीज़ उपयोगी है और उसका सम्मान करना चाहिए।
28. अंतिम शिष्य अन्य शिष्यों से अलग क्यों था?
उत्तर:क्योंकि वह सतही ज्ञान पर नहीं, गहरी समझ पर विश्वास करता था।
29. इस पाठ से गुरु-शिष्य संबंध के बारे में क्या सीख मिलती है?
उत्तर:सच्चा गुरु शिष्य की सोच को परखता है, केवल उसके कार्य को नहीं।
30. आचार्य चरक का शिक्षण-पद्धति कैसी थी?
उत्तर:उनकी पद्धति व्यावहारिक, कठोर लेकिन ज्ञानवर्धक थी।
31. यह कथा आयुर्वेद की विशेषता को कैसे दर्शाती है?
उत्तर:यह बताती है कि आयुर्वेद प्रकृति पर आधारित संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है।
32. जंगल में रहकर पढ़ाई करने का क्या लाभ था?
उत्तर:इससे शिष्य प्रत्यक्ष अनुभव से सीखते थे।
33. इस पाठ में साहस का क्या महत्व बताया गया है?
उत्तर:बिना साहस के ज्ञान और सफलता संभव नहीं।
34. डर और ज्ञान का आपसी संबंध क्या बताया गया है?
उत्तर:डर ज्ञान के मार्ग में बाधा बनता है।
35. यह कथा आधुनिक शिक्षा के लिए क्या संदेश देती है?
उत्तर:केवल रटने से नहीं, समझने से शिक्षा पूर्ण होती है।
36. परीक्षा में सफल वही शिष्य क्यों हुआ जो खाली हाथ लौटा?
उत्तर:क्योंकि उसने सही सोच और दृष्टि का परिचय दिया।
37. इस पाठ में परिश्रम का क्या महत्व है?
उत्तर:सच्चा परिश्रम सोच और समझ में दिखाई देता है।
38. क्या हर असफलता वास्तव में असफलता होती है?
उत्तर:नहीं, सही समझ से देखी गई असफलता सफलता बन जाती है।
39. आचार्य चरक आदर्श गुरु क्यों कहलाते हैं?
उत्तर:क्योंकि वे ज्ञान के साथ-साथ दृष्टिकोण भी सिखाते थे।
40. पाठ का समापन किस विचार के साथ होता है?
उत्तर:इस विचार के साथ कि संसार में कुछ भी व्यर्थ नहीं है, बस हमें उसका सही उपयोग पहचानना आना चाहिए।
Answer by Mrinmoee