Chapter 4
लेन-देन का बदलता स्वरूप
1. प्रश्न: अभिषेक और अंकिता अपने गाँव जाने पर क्यों खुश थे?
उत्तर: अभिषेक और अंकिता कई सालों बाद अपने गाँव चकरी जा रहे थे। गाँव पहुँचने और पुराने परिवेश को देखने की खुशी उन्हें बहुत उत्साहित कर रही थी।
2. प्रश्न: सुबह चार बजे अभिषेक और अंकिता क्यों जागे?
उत्तर: सुबह चार बजे अभिषेक का अलार्म बजा। अलार्म की आवाज सुनकर अभिषेक जागा और अपनी बहन अंकिता को भी उठाया।
3. प्रश्न: गाँव पहुँचने के बाद बच्चों और परिवार की स्थिति कैसी थी?
उत्तर: गाँव पहुँचते-पहुँचते शाम हो गई थी और सभी काफी थक चुके थे। उन्होंने खाना खाया और जल्दी सो गए।
4. प्रश्न: अंकिता ने अपनी दादी को क्या करते हुए देखा?
उत्तर: अंकिता ने देखा कि उसकी दादी एक महिला से दही ले रही थीं और बदले में उस महिला को दो किलो गेहूँ दिया।
5. प्रश्न: अंकिता को दादी का व्यवहार देखकर आश्चर्य क्यों हुआ?
उत्तर: अंकिता ने अब तक केवल पैसे से ही सामान खरीदा देखा था। दही के बदले गेहूँ देने की प्रक्रिया देखकर वह हैरान हुई।
6. प्रश्न: दही और गेहूँ के लेन-देन का कौन सा प्रकार है?
उत्तर: यह वस्तु विनिमय या बट्टा-व्यापार का उदाहरण है, जिसमें पैसों के बजाय वस्तु के बदले वस्तु लेन-देन की जाती है।
7. प्रश्न: भोंपू की आवाज पर अभिषेक का ध्यान क्यों गया?
उत्तर: अभिषेक घर में पढ़ाई कर रहा था कि भोंपू की आवाज सुनकर उसका ध्यान आइसक्रीम बेचने वाले व्यक्ति पर गया।
8. प्रश्न: आइसक्रीम बेचने वाला किस प्रकार का व्यापार करता है?
उत्तर: वह छोटे पैमाने पर खुद का व्यवसाय करता है, बच्चों से वस्तु के बदले वस्तु (गेहूँ के बदले आइसक्रीम) लेता है।
9. प्रश्न: बच्चों से आइसक्रीम बेचते समय आइसक्रीम वाला क्या नियम लागू करता है?
उत्तर: बच्चों से लगभग 100 ग्राम गेहूँ लेकर उन्हें एक आइसक्रीम दी जाती है।
10. प्रश्न: अंकिता ने मूँगफली और सोनपापड़ी किस प्रकार खरीदी?
उत्तर: अंकिता ने मूँगफली और सोनपापड़ी गेहूँ के बदले खरीदी। उसे इसके लिए पैसे की आवश्यकता नहीं पड़ी।
11. प्रश्न: वस्तु विनिमय प्रणाली का मुख्य लाभ क्या था?
उत्तर: इसमें किसी वस्तु के बदले दूसरी वस्तु प्राप्त की जा सकती थी, और पैसे की आवश्यकता नहीं थी।
12. प्रश्न: वस्तु विनिमय प्रणाली में मूल्य निर्धारण में क्या कठिनाई होती थी?
उत्तर: अलग-अलग वस्तुओं का मूल्य तय करना मुश्किल होता था, क्योंकि दोनों पक्षों को आपसी सहमति बनानी पड़ती थी।
13. प्रश्न: वस्तु विनिमय प्रणाली में संचय (संग्रह) क्यों कठिन था?
उत्तर: वस्तुओं को लंबे समय तक रखने पर सड़ने-गलने का खतरा रहता था। पशु-मूलक वस्तुएँ बीमार पड़ने या मरने पर नष्ट हो जाती थीं।
14. प्रश्न: वस्तु विनिमय प्रणाली में मूल्य का हस्तांतरण कठिन क्यों था?
उत्तर: अगर किसी व्यक्ति ने वस्तु जैसे मकान या बड़े पशु के बदले मूल्य प्राप्त किया, तो उसे दूसरे स्थान पर ले जाना कठिन होता था।
15. प्रश्न: वस्तु विनिमय प्रणाली की इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए क्या समाधान निकला?
उत्तर: इसके लिए ऐसी वस्तु का चुनाव किया गया जिसे लेन-देन में आसानी से प्रयोग किया जा सके। इसे मुद्रा कहा गया।
16. प्रश्न: मुद्रा के प्रयोग से व्यापार में क्या सुविधा आई?
उत्तर: मुद्रा के प्रयोग से मूल्य का निर्धारण आसान हुआ, लेन-देन तेज हुआ, और वस्तुओं को स्थानांतरित करना सरल हो गया।
17. प्रश्न: प्रारंभिक मुद्रा का स्वरूप क्या था?
उत्तर: प्राचीन काल में वस्तु मुद्रा के रूप में जानवरों का खाल, पशु या अनाज प्रयोग किया जाता था।
18. प्रश्न: वस्तु मुद्रा में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ थीं?
उत्तर: इसमें संचय कठिन था, मूल्य का स्थानांतरण कठिन था और वस्तु का विभाजन मुश्किल था।
19. प्रश्न: धातु मुद्रा कब और किसे प्रयोग किया गया?
उत्तर: वस्तु मुद्रा के बाद लोहा, तांबा, पीतल, सोना और चाँदी की धातु मुद्रा का प्रयोग शुरू हुआ।
20. प्रश्न: धातु मुद्रा में क्या कठिनाइयाँ थीं?
उत्तर: यह भारी होती थी और वजन तथा शुद्धता की जाँच कठिन होती थी।
21. प्रश्न: भारत में सर्वप्रथम धातु सिक्के किसने चलाए?
उत्तर: भारत में दिल्ली के शेरशाह सूरी ने चाँदी का सिक्का चलाया, जिसे रुपया कहा गया।
22. प्रश्न: उत्तर भारत में मुगल काल में मुद्रा के स्वरूप क्या थे?
उत्तर: सोने की मुहर, चाँदी का रुपया और तांबे का बना दाम चलता था।
23. प्रश्न: दक्षिण भारत में उस समय कौन-कौन सी मुद्राएँ प्रचलित थीं?
उत्तर: वहाँ सोने के बने सिक्के हुण और पणम् चलते थे।
24. प्रश्न: वर्तमान समय में मुद्रा किस धातु से बनी है?
उत्तर: आज सिक्के एल्यूमीनियम और निकिल से बनते हैं।
25. प्रश्न: पत्र मुद्रा या कागजी मुद्रा क्यों शुरू हुई?
उत्तर: सिक्कों को ले जाने में परेशानी और उनका घिस जाना, इस कारण कागजी मुद्रा शुरू की गई।
26. प्रश्न: भारत में कागजी मुद्रा जारी करने का अधिकार किसे है?
उत्तर: केवल भारतीय रिजर्व बैंक को है।
27. प्रश्न: कागजी मुद्रा के कौन-कौन से नोट चलन में हैं?
उत्तर: 2, 5, 10, 20, 50, 100, 500 और 1000 रुपये।
28. प्रश्न: मुद्रा का लेन-देन क्यों आसान और सुरक्षित है?
उत्तर: पैसा सभी स्वीकार करते हैं, मूल्य तय करना सरल है, संग्रह करना आसान है और ले जाना सुविधाजनक है।
29. प्रश्न: रचित ने मुद्रा का प्रयोग कैसे किया?
उत्तर: रचित ने 50 रुपये का नोट देकर किताब, कॉपी, पेंसिल और रबड़ खरीदी।
30. प्रश्न: दुकानदार को रचित से क्या लाभ हुआ?
उत्तर: दुकानदार को बिक्री से प्राप्त रुपये से आगे का व्यापार करना आसान हुआ और परिवार की जरूरतें पूरी हुई।
31. प्रश्न: मुद्रा विनिमय में कौन-कौन से कार्य दिखाई दिए?
उत्तर: भुगतान, लेन-देन और बचत के कार्य।
32. प्रश्न: बैंक का उद्देश्य मुद्रा के सुरक्षित संग्रह में क्या है?
उत्तर: बैंक ग्राहकों के रुपये सुरक्षित रखता है और लेन-देन की सुविधाएँ देता है।
33. प्रश्न: चेक द्वारा लेन-देन कैसे होता है?
उत्तर: चेक एक लिखित आदेश है, जिसमें बैंक से किसी को रुपये देने का निर्देश होता है।
34. प्रश्न: एटीएम-सह-डेबिट कार्ड क्या है?
उत्तर: यह प्लास्टिक मुद्रा है, जिससे बैंक में जमा रुपये के आधार पर वस्तु खरीदी जा सकती है।
35. प्रश्न: एटीएम कार्ड के प्रयोग में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर: पिन को गोपनीय रखना चाहिए और किसी को कार्ड न देना चाहिए।
36. प्रश्न: मुद्रा के विकास के कारण बाजार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर: बाजार में व्यापार का दायरा बढ़ा, विक्रेता और खरीदार की संख्या बढ़ी, और खरीद-बिक्री का स्वरूप बदला।
37. प्रश्न: वस्तु विनिमय में मूल्य निर्धारण कठिन क्यों होता था?
उत्तर: वस्तुओं के मूल्य की तुलना करना कठिन था और आपसी सहमति बनाना समय-साध्य था।
38. प्रश्न: वस्तु विनिमय में संचय कठिन क्यों था?
उत्तर: वस्तुएँ सड़ सकती थीं और पशु-मूलक धन बीमार पड़ने या मरने पर नष्ट हो जाता था।
39. प्रश्न: धातु मुद्रा ने कौन-कौन से लाभ दिए?
उत्तर: मूल्य तय करना आसान हुआ और सिक्कों की स्थायित्व बढ़ी।
40. प्रश्न: मुद्रा के प्रचलन ने व्यापार में क्या सुविधा दी?
उत्तर: मुद्रा ने व्यापार में लेन-देन को सरल, तेज और सुरक्षित बनाया, जिससे बाजार का विकास हुआ।
Answer by Mrinmoee