Chapter 10 

                                                                भीष्म की प्रतिज्ञा


1. नाटक का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?


उत्तर: यह नाटक महाभारत काल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें हस्तिनापुर के राजा शान्तनु, युवराज देवव्रत (भीष्म), निषादों के राजा दाशराज और सत्यवती के जीवन की प्रमुख घटना को नाटकीय रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह नाटक त्याग, प्रतिज्ञा और राजनैतिक-सामाजिक संबंधों को उजागर करता है।


2. दाशराज कौन था और उसकी सामाजिक स्थिति क्या थी?


उत्तर: दाशराज निषादों का राजा था। निषाद जाति को समाज में निम्न समझा जाता था, फिर भी दाशराज एक स्वाभिमानी और दूरदर्शी शासक था, जो अपनी पुत्री के भविष्य को लेकर सजग था।


3. महाराज शान्तनु निषादपुरी क्यों आए?


उत्तर: महाराज शान्तनु निषादराज दाशराज से मित्रता को और दृढ़ करने तथा उसकी पुत्री सत्यवती से विवाह का प्रस्ताव रखने के लिए निषादपुरी आए थे।


4. शान्तनु सत्यवती से विवाह क्यों करना चाहते थे?


उत्तर: शान्तनु सत्यवती की सुंदरता, गुण और चरित्र से प्रभावित थे। साथ ही वे इस विवाह से दो जातियों—क्षत्रिय और निषाद—के बीच मित्रता और राज्य की शक्ति बढ़ाना चाहते थे।


5. दाशराज को इस विवाह में संकोच क्यों था?


उत्तर: दाशराज को भय था कि सत्यवती की संतान को हस्तिनापुर में दासता झेलनी पड़ेगी, क्योंकि पहले से युवराज देवव्रत राजगद्दी के उत्तराधिकारी थे।


6. दाशराज की शर्त क्या थी?


उत्तर: दाशराज की शर्त थी कि सत्यवती का पुत्र ही हस्तिनापुर की राजगद्दी पर बैठेगा, तभी वह अपनी पुत्री का विवाह शान्तनु से करेगा।


7. शान्तनु दाशराज की शर्त क्यों नहीं मान सके?


उत्तर: शान्तनु को यह शर्त अपने पुत्र देवव्रत के साथ अन्याय प्रतीत हुई, क्योंकि देवव्रत योग्य, वीर और प्रजा के प्रिय युवराज थे।


8. देवव्रत कौन थे?


उत्तर: देवव्रत हस्तिनापुर के युवराज, गंगा पुत्र और शान्तनु के सुपुत्र थे। वे वीरता, त्याग और धर्मपालन के प्रतीक थे।


9. देवव्रत निषादपुरी क्यों आए?


उत्तर: देवव्रत अपने पिता शान्तनु के दुःख का कारण जानने और सत्यवती को हस्तिनापुर ले जाने के लिए निषादपुरी आए।


10. दाशराज ने देवव्रत के सामने अपनी शर्त क्यों दोहराई?


उत्तर: दाशराज चाहते थे कि भविष्य में कोई विवाद न हो और सत्यवती की संतान सुरक्षित रहे, इसलिए उन्होंने शर्त स्पष्ट रूप से रखी।


11. देवव्रत ने पहली प्रतिज्ञा क्या ली?


उत्तर: देवव्रत ने प्रतिज्ञा ली कि वे हस्तिनापुर की राजगद्दी पर अधिकार नहीं करेंगे और सत्यवती का पुत्र राजा बनेगा।


12. दाशराज को यह प्रतिज्ञा पर्याप्त क्यों नहीं लगी?


उत्तर: दाशराज को भय था कि देवव्रत की संतान भविष्य में राजगद्दी का दावा कर सकती है, जिससे संघर्ष उत्पन्न हो सकता है।


13. देवव्रत ने दूसरी और महान प्रतिज्ञा क्या ली?


उत्तर: देवव्रत ने आजीवन ब्रह्मचारी रहने की प्रतिज्ञा ली, ताकि उनकी कोई संतान न हो और भविष्य में राजगद्दी को लेकर विवाद न हो।


14. देवव्रत की प्रतिज्ञा का स्वरूप कैसा था?


उत्तर: यह अत्यंत कठोर और अद्वितीय प्रतिज्ञा थी, जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत सुख का पूर्ण त्याग कर दिया।


15. देवव्रत की प्रतिज्ञा पर देवताओं की प्रतिक्रिया क्या थी?


उत्तर: आकाश से फूलों की वर्षा हुई और देववाणी हुई कि ऐसी प्रतिज्ञा न पहले किसी ने की थी, न भविष्य में कोई करेगा।


16. देवव्रत का नाम ‘भीष्म’ क्यों पड़ा?


उत्तर: उनकी भयानक और कठोर प्रतिज्ञा के कारण देवताओं ने उन्हें ‘भीष्म’ नाम दिया।


17. दाशराज पर भीष्म की प्रतिज्ञा का क्या प्रभाव पड़ा?


उत्तर: दाशराज अवाक् रह गए और अत्यंत प्रसन्न होकर विवाह के लिए सहमत हो गए।


18. इस नाटक में त्याग का आदर्श किसने प्रस्तुत किया?


उत्तर: भीष्म ने त्याग का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत किया।


19. सत्यवती का नाटक में क्या महत्व है?


उत्तर: सत्यवती इस पूरे घटनाक्रम की केंद्रबिंदु हैं, जिनके विवाह के कारण यह महान प्रतिज्ञा संभव हुई।


20. भीष्म ने व्यक्तिगत जीवन का त्याग क्यों किया?


उत्तर: उन्होंने पिता के सुख और राज्य की स्थिरता के लिए अपने जीवन का त्याग किया।


21. नाटक में पिता-पुत्र संबंध कैसे दिखाए गए हैं?


उत्तर: शान्तनु और देवव्रत का संबंध प्रेम, सम्मान और कर्तव्य पर आधारित दिखाया गया है।


22. दाशराज का चरित्र कैसा है?


उत्तर: दाशराज स्वाभिमानी, दूरदर्शी और अपनी पुत्री के भविष्य के प्रति सजग पिता हैं।


23. शान्तनु का चरित्र कैसे उभरता है?


उत्तर: शान्तनु न्यायप्रिय, संवेदनशील और पुत्र-प्रेम से भरे राजा के रूप में उभरते हैं।


24. इस नाटक में सामाजिक समानता का संदेश कैसे मिलता है?


उत्तर: क्षत्रिय और निषाद जाति के विवाह से सामाजिक समरसता का संदेश मिलता है।


25. भीष्म की प्रतिज्ञा को महान क्यों कहा गया?


उत्तर: क्योंकि उसमें आजीवन ब्रह्मचर्य और राजसत्ता का त्याग शामिल था।


26. नाटक का केंद्रीय विषय क्या है?


उत्तर: त्याग, कर्तव्य और पिता-भक्ति।


27. देवव्रत का आदर्श युवराज रूप कैसे दिखता है?


उत्तर: वे राज्य और परिवार के हित को व्यक्तिगत सुख से ऊपर रखते हैं।


28. दाशराज की चिंता व्यावहारिक क्यों थी?


उत्तर: वे भविष्य के सत्ता संघर्ष से बचना चाहते थे।


29. नाटक में देवताओं की भूमिका क्या है?


उत्तर: देवता भीष्म की प्रतिज्ञा के साक्षी बनते हैं और उसे मान्यता देते हैं।


30. भीष्म की प्रतिज्ञा का हस्तिनापुर पर क्या प्रभाव पड़ा?


उत्तर: इससे राज्य में स्थिरता और शान्ति बनी रही।


31. यह नाटक किस प्रकार प्रेरणादायक है?


उत्तर: यह त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन की प्रेरणा देता है।


32. नाटक में संवादों की विशेषता क्या है?


उत्तर: संवाद गंभीर, प्रभावशाली और भावपूर्ण हैं।


33. भीष्म का चरित्र क्यों अमर माना जाता है?


उत्तर: उनके त्याग और धर्मनिष्ठा के कारण।


34. दाशराज ने अंत में विवाह की अनुमति क्यों दी?


उत्तर: भीष्म की महान प्रतिज्ञा से संतुष्ट होकर।


35. सत्यवती का मौन भी महत्वपूर्ण क्यों है?


उत्तर: वह त्याग और मर्यादा का प्रतीक है।


36. नाटक में कर्तव्यबोध कैसे प्रकट होता है?


उत्तर: भीष्म के निर्णयों के माध्यम से।


37. इस नाटक से क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?


उत्तर: निजी सुख से बड़ा कर्तव्य और समाज का हित होता है।


38. भीष्म की प्रतिज्ञा आज भी प्रासंगिक क्यों है?


उत्तर: क्योंकि यह त्याग और नैतिक मूल्यों की मिसाल है।


39. दाशराज और शान्तनु का संवाद क्या दर्शाता है?


उत्तर: राजनीतिक समझदारी और सामाजिक चिंता।


40. पूरे नाटक का निष्कर्ष क्या है?


उत्तर: सच्चा महान वही है जो अपने कर्तव्य और दूसरों के सुख के लिए स्वयं का त्याग कर सके।

Answer by Mrinmoee