Chapter 11
सरजू भैया
1. लेखक ने शुरुआत में “सरजू मैया नहीं, सरजू भैया” क्यों कहा है?
उत्तर: लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि गाँवों में स्त्री–पुरुष के नाम अक्सर नदियों या देवी-देवताओं के नाम पर रखे जाते हैं। सरजू भैया का नाम सुनकर भ्रम हो सकता है कि वह स्त्री हैं, इसलिए लेखक शुरुआत में ही स्पष्ट करता है कि सरजू भैया पुरुष हैं। इससे ग्रामीण संस्कृति की विशेषता भी सामने आती है।
2. सरजू भैया का घर और उसका परिवेश कैसा है?
उत्तर: सरजू भैया का घर अत्यंत साधारण और जर्जर अवस्था में है। चारों ओर कच्चे मकान, मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और झोंपड़ियाँ हैं। यह परिवेश उनकी आर्थिक दुर्दशा को दर्शाता है, जबकि उनके स्वभाव की उदारता इसके विपरीत है।
3. लेखक और सरजू भैया के बीच कैसा संबंध है?
उत्तर: लेखक और सरजू भैया में खून का रिश्ता नहीं है, फिर भी दोनों ने आपसी स्नेह से भाई-भाई का रिश्ता बना लिया है। लेखक उन्हें बड़ा भाई मानता है और सरजू भैया उसे छोटे भाई की तरह प्रेम देते हैं।
4. सरजू भैया का शारीरिक वर्णन पाठ में किस प्रकार किया गया है?
उत्तर: सरजू भैया लंबे, दुबले-पतले, साँवले रंग के व्यक्ति हैं। उनकी पसलियाँ दिखती हैं, नसें उभरी हुई हैं और शरीर हड्डियों का ढाँचा-सा लगता है। यह वर्णन उनके त्याग और परिश्रम का प्रतीक है।
5. सरजू भैया देखने में दुबले होने पर भी जीवंत कैसे हैं?
उत्तर: यद्यपि उनका शरीर कमजोर दिखता है, लेकिन उनका मन अत्यंत जीवंत है। वे हँसमुख, मिलनसार और मजाकिया हैं। वे दिल खोलकर हँसते हैं और दूसरों की सेवा में आनंद पाते हैं।
6. लेखक ने सरजू भैया को ‘जिन्दादिल’ क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि सरजू भैया हर परिस्थिति में प्रसन्न रहते हैं, दूसरों की मदद करते हैं और दुखों के बावजूद जीवन से प्रेम करते हैं। उनकी हँसी और सेवा-भाव उन्हें ‘जिन्दादिल’ बनाता है।
7. सरजू भैया की आर्थिक स्थिति कमजोर होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: उनकी आर्थिक दुर्दशा का मुख्य कारण उनका अत्यधिक परोपकारी स्वभाव है। वे दूसरों की मदद में अपना धन और समय लगा देते हैं और बदले में कुछ नहीं माँगते।
8. सरजू भैया सूदखोर क्यों नहीं बन सके?
उत्तर: क्योंकि उनके भीतर मानवीय संवेदना बहुत प्रबल थी। वे किसी दुखी व्यक्ति से कठोरता नहीं कर सकते थे। इसलिए वे लेन-देन में भी उदार बने रहे और सूदखोर नहीं बन सके।
9. लेखक ने सूदखोरी की तुलना ‘चीलर’ से क्यों की है?
उत्तर: लेखक बताता है कि सूदखोरी धीरे-धीरे खून चूसने वाली प्रक्रिया है, जैसे चीलर बिना महसूस कराए खून चूस लेता है। यह तुलना सूदखोरी की क्रूरता को उजागर करती है।
10. सरजू भैया का लेन-देन क्यों चौपट हो गया?
उत्तर: वे समय पर पैसे वसूल नहीं करते थे और जरूरतमंदों पर दया करके ऋण माफ कर देते थे। इसी कारण उनका लेन-देन बिगड़ गया।
11. बाढ़ और भूकम्प ने सरजू भैया को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर: बाढ़ और भूकम्प ने उनकी खेती और घर को नष्ट कर दिया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई।
12. सरजू भैया आलसी क्यों नहीं कहे जा सकते?
उत्तर: वे अत्यंत मेहनती, फुर्तीले और कार्यशील हैं। दिन-रात दूसरों के कामों में लगे रहते हैं।
13. गाँव के लोग सरजू भैया पर कैसे निर्भर रहते हैं?
उत्तर: कोई बीमार हो, कोई सामान लाना हो, कोई खबर पहुँचानी हो—हर काम के लिए गाँव वाले सरजू भैया को ही पुकारते हैं।
14. सरजू भैया का सेवा-भाव किस स्तर का है?
उत्तर: उनका सेवा-भाव इतना व्यापक है कि वे अपने काम छोड़कर भी दूसरों के काम पहले करते हैं। उनका दरवाजा हमेशा खुला रहता है।
15. लेखक सरजू भैया को ‘नर-रत्न’ क्यों कहता है?
उत्तर: क्योंकि सरजू भैया मानवीय मूल्यों, करुणा और त्याग का जीवंत उदाहरण हैं। ऐसे लोग समाज में दुर्लभ होते हैं।
16. कुछ लोग सरजू भैया को ‘सुधुवा’ क्यों समझते हैं?
उत्तर: उनकी सरलता और भोलेपन के कारण कुछ लोग उन्हें मूर्ख समझकर ठगने की कोशिश करते हैं।
17. लेखक के साथ सरजू भैया ने क्या उपकार किया?
उत्तर: लेखक को जब पैसों की आवश्यकता थी, सरजू भैया ने बिना कुछ पूछे उसे पैसे दे दिए।
18. सरजू भैया लेखक से पैसे वापस क्यों नहीं माँगते?
उत्तर: उन्हें संकोच होता है और वे सामने वाले की परिस्थिति समझते हैं। इसलिए माँगना उन्हें उचित नहीं लगता।
19. महाजन ने सरजू भैया के साथ क्या छल किया?
उत्तर: महाजन ने कागज पर अंगूठा लगवाकर उनसे जबरन सबूत बनवा लिया और बाद में कानूनी धमकी देने लगा।
20. सरजू भैया की प्रतिक्रिया उस छल पर कैसी थी?
उत्तर: वे लाचार और विवश थे, पर फिर भी किसी के प्रति कटुता नहीं रखते थे।
21. सरजू भैया के कितने बच्चे थे और उनकी स्थिति क्या थी?
उत्तर: उनकी पाँच बेटियाँ थीं। उनका बेटा नहीं था, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी।
22. उनकी पत्नी का स्वभाव कैसा था?
उत्तर: वे कद में छोटी थीं, पर गुणों में सरजू भैया जैसी ही त्यागी और सरल थीं।
23. पत्नी की मृत्यु का सरजू भैया पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: पत्नी की मृत्यु के बाद उनका जीवन और भी सूना हो गया, पर उन्होंने धैर्य नहीं खोया।
24. लेखक को सरजू भैया के भविष्य को लेकर चिंता क्यों है?
उत्तर: क्योंकि उनकी बेटियाँ विवाह के बाद चली जाएँगी और उनके बाद कोई निशानी नहीं बचेगी।
25. समाज सरजू भैया की कद्र क्यों नहीं करता?
उत्तर: समाज अक्सर त्यागी और सरल लोगों के मूल्य को नहीं समझता और उनका शोषण करता है।
26. लेखक के अनुसार सरजू भैया पूजनीय क्यों हैं?
उत्तर: क्योंकि वे निस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता के प्रतीक हैं।
27. सरजू भैया की हँसी का वर्णन कैसे किया गया है?
उत्तर: उनकी हँसी में पूरा शरीर हिलने लगता है और उनके छोटे दाँत चमक उठते हैं।
28. सरजू भैया का जीवन किस प्रकार का संदेश देता है?
उत्तर: यह संदेश देता है कि सच्ची संपत्ति धन नहीं, बल्कि मानवीय गुण हैं।
29. लेखक स्वयं को सरजू भैया के सामने छोटा क्यों महसूस करता है?
उत्तर: क्योंकि सरजू भैया का चरित्र और त्याग लेखक को नैतिक रूप से झुका देता है।
30. सरजू भैया का व्यक्तित्व समाज के लिए क्यों आदर्श है?
उत्तर: क्योंकि वे सेवा, सहानुभूति और परोपकार की मिसाल हैं।
31. सरजू भैया के जीवन में सबसे बड़ी त्रासदी क्या है?
उत्तर: उनकी अच्छाई का अनुचित लाभ उठाया जाना।
32. लेखक ने इस पाठ के माध्यम से क्या सामाजिक समस्या दिखाई है?
उत्तर: समाज में अच्छे लोगों का शोषण और स्वार्थी लोगों का वर्चस्व।
33. सरजू भैया का नाम गाँव में सम्मान से क्यों लिया जाता है?
उत्तर: उनकी सेवा भावना और निःस्वार्थता के कारण।
34. सरजू भैया की कमजोरी क्या कही जा सकती है?
उत्तर: उनका अत्यधिक भोला और विश्वासपूर्ण स्वभाव।
35. लेखक सरजू भैया को देखकर क्यों भावुक हो जाता है?
उत्तर: क्योंकि वह उनकी अच्छाई और समाज की उदासीनता का विरोधाभास देखता है।
36. सरजू भैया का जीवन सुखी क्यों नहीं है?
उत्तर: क्योंकि त्याग के बदले उन्हें दुःख और अभाव मिले।
37. पाठ में ग्रामीण जीवन की कौन-सी विशेषताएँ दिखाई गई हैं?
उत्तर: पारस्परिक सहायता, सरलता, गरीबी और मानवीय संबंध।
38. लेखक ने पाठ का अंत हल्के हास्य में क्यों किया है?
उत्तर: ताकि गंभीर विषय के बीच जीवन की सहजता बनी रहे।
39. सरजू भैया का चरित्र किन मूल्यों पर आधारित है?
उत्तर: करुणा, त्याग, सेवा, प्रेम और मानवता।
40. ‘सरजू भैया’ पाठ का केंद्रीय संदेश क्या है?
उत्तर: सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए जीता है, चाहे उसे स्वयं कितना भी कष्ट क्यों न सहना पड़े।
Answer by Mrinmoee