Chapter 12

                                                            रहीम के दोहे



प्रश्न 1.“जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग” दोहे का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।


उत्तर :इस दोहे में रहीमदास कहते हैं कि जो व्यक्ति स्वभाव से उत्तम और नेक होता है, उस पर बुरी संगति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे चंदन का वृक्ष चाहे जितने भी विषैले साँपों से घिरा हो, फिर भी उसमें विष नहीं समाता। उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति बुरी संगति में रहते हुए भी अपने अच्छे गुण नहीं छोड़ता।


प्रश्न 2.इस दोहे में कवि ने चंदन और साँप का उदाहरण क्यों दिया है?


उत्तर :कवि ने चंदन और साँप का उदाहरण देकर यह समझाया है कि अच्छाई अपनी प्रकृति नहीं बदलती। चंदन सुगंध देता है, चाहे उसके आसपास विषैले साँप हों। उसी तरह अच्छे व्यक्ति कुसंग के बावजूद अपने सद्गुण बनाए रखते हैं।


प्रश्न 3.इस दोहे से हमें क्या शिक्षा मिलती है?


उत्तर :इस दोहे से यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने चरित्र को मजबूत बनाना चाहिए। यदि व्यक्ति का स्वभाव अच्छा हो तो बुरी संगति भी उसे बिगाड़ नहीं सकती।


प्रश्न 4.“उत्तम प्रकृति” से कवि का क्या आशय है?


उत्तर :“उत्तम प्रकृति” से कवि का आशय है—अच्छा चरित्र, सदाचार, सत्य, दया, परोपकार और नैतिकता से युक्त स्वभाव।


प्रश्न 5.आज के समाज में इस दोहे की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।


उत्तर :आज के समय में जब बुरी संगति आसानी से मिल जाती है, तब यह दोहा हमें सिखाता है कि यदि व्यक्ति आत्मबल और नैतिक मूल्यों से जुड़ा हो, तो वह गलत रास्ते पर नहीं जाएगा।


प्रश्न 6.“रहीमन निज मन की व्यथा” दोहे का भावार्थ लिखिए।


उत्तर :इस दोहे में रहीम कहते हैं कि मन की पीड़ा मन में ही रखनी चाहिए। लोगों को बताने पर वे दुख बाँटते नहीं, बल्कि मज़ाक उड़ाते हैं और पीड़ा को और बढ़ा देते हैं।


प्रश्न 7.कवि ने मन की व्यथा छिपाकर रखने की सलाह क्यों दी है?


उत्तर :कवि इसलिए सलाह देते हैं क्योंकि दुनिया में सच्ची सहानुभूति बहुत कम लोग देते हैं। अधिकतर लोग दूसरों के दुख का उपहास उड़ाते हैं।


प्रश्न 8.यह दोहा मानव स्वभाव के किस पक्ष को उजागर करता है?


उत्तर :यह दोहा मानव स्वभाव की स्वार्थी और असंवेदनशील प्रवृत्ति को उजागर करता है।


प्रश्न 9.इस दोहे से क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?


उत्तर :इस दोहे से यह शिक्षा मिलती है कि हमें आत्मसंयम रखना चाहिए और अपनी निजी समस्याएँ हर किसी से साझा नहीं करनी चाहिए।


प्रश्न 10.क्या आज भी यह दोहा सार्थक है? कारण सहित बताइए।


उत्तर :हाँ, आज भी यह दोहा पूर्णतः सार्थक है क्योंकि आज के समाज में भी लोग दूसरों के दुख को समझने के बजाय उनका उपहास करते हैं।


प्रश्न 11.“रहीमन धागा प्रेम का” दोहे का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।


उत्तर :इस दोहे में रहीम कहते हैं कि प्रेम का बंधन बहुत नाजुक होता है। यदि वह एक बार टूट जाए, तो फिर जुड़ भी जाए तो उसमें गाँठ पड़ जाती है और पहले जैसी मधुरता नहीं रहती।


प्रश्न 12.प्रेम को धागे से क्यों तुलना की गई है?


उत्तर :प्रेम को धागे से इसलिए तुलना की गई है क्योंकि दोनों ही कोमल और नाजुक होते हैं तथा आसानी से टूट सकते हैं।


प्रश्न 13.इस दोहे से संबंधों के बारे में क्या संदेश मिलता है?


उत्तर :यह दोहा हमें सिखाता है कि संबंधों को बहुत संभालकर रखना चाहिए, क्योंकि टूटे रिश्ते दोबारा पहले जैसे नहीं बनते।


प्रश्न 14.“गाँठ पड़ जाना” प्रतीकात्मक रूप से क्या दर्शाता है?


उत्तर :गाँठ पड़ जाना रिश्तों में अविश्वास, कड़वाहट और संदेह को दर्शाता है।


प्रश्न 15.इस दोहे की सामाजिक उपयोगिता बताइए।


उत्तर :यह दोहा समाज में प्रेम, विश्वास और सौहार्द बनाए रखने की प्रेरणा देता है।


4. दोहा 4 के आधार पर प्रश्न–उत्तर


प्रश्न 16.“तरुवर फल नहिं खात है” दोहे का भावार्थ लिखिए।


उत्तर :इस दोहे में कवि कहते हैं कि पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और तालाब अपना पानी स्वयं नहीं पीते। इसी प्रकार सज्जन लोग अपनी संपत्ति दूसरों के भले के लिए संचित करते हैं।


प्रश्न 17.इस दोहे में कवि किस गुण की प्रशंसा करता है?


उत्तर :कवि परोपकार और दानशीलता की प्रशंसा करता है।


प्रश्न 18.सज्जन व्यक्ति की पहचान क्या बताई गई है?


उत्तर :सज्जन व्यक्ति वही है जो अपनी संपत्ति का उपयोग दूसरों की सहायता के लिए करता है।


प्रश्न 19.इस दोहे से हमें जीवन में क्या अपनाना चाहिए?


उत्तर :हमें परोपकार, दया और उदारता को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।


प्रश्न 20.आज के समाज में इस दोहे का महत्व बताइए।


उत्तर :आज जब स्वार्थ बढ़ रहा है, तब यह दोहा समाज में सेवा और परोपकार की भावना को बढ़ाता है।


प्रश्न 21.“रहीम देखि बड़ेन को” दोहे का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।


उत्तर :इस दोहे में रहीम कहते हैं कि बड़े लोगों को देखकर छोटे लोगों को तुच्छ नहीं समझना चाहिए, क्योंकि छोटी वस्तु भी समय पर बहुत काम आती है।


प्रश्न 22.सुई और तलवार का उदाहरण क्यों दिया गया है?


उत्तर :यह उदाहरण यह बताने के लिए दिया गया है कि हर वस्तु का अपना महत्व होता है।


प्रश्न 23.इस दोहे से क्या सामाजिक संदेश मिलता है?


उत्तर :यह दोहा समानता, सम्मान और विनम्रता का संदेश देता है।


प्रश्न 24.इस दोहे की आज के संदर्भ में उपयोगिता बताइए।


उत्तर :आज समाज में छोटे लोगों को उपेक्षित किया जाता है, यह दोहा हमें उनका सम्मान करना सिखाता है।


प्रश्न 25.इस दोहे से व्यक्तित्व विकास की कौन-सी शिक्षा मिलती है?


उत्तर :यह दोहा हमें अहंकार छोड़ने और सभी को सम्मान देने की शिक्षा देता है।


6. दोहा 6, 7, 8 के आधार पर प्रश्न–उत्तर


प्रश्न 26.“रहीमन वे नर मर चुके” दोहे का भावार्थ लिखिए।


उत्तर :जो लोग माँगने जाते हैं, वे पहले ही आत्मसम्मान खो चुके होते हैं। उससे भी पहले वे मर चुके हैं जिनके मुख से याचना निकलती है।


प्रश्न 27.कवि यहाँ किस मूल्य पर बल देता है?


उत्तर :कवि आत्मसम्मान और स्वाभिमान पर बल देता है।


प्रश्न 28.“यो रहीम सुख होत हैं” दोहे का भावार्थ लिखिए।


उत्तर :कवि कहते हैं कि उपकार करने वाले को जो सुख मिलता है, वह मेहंदी के रंग की तरह दूसरों को बाँटने से और गहरा हो जाता है।


प्रश्न 29.उपकार करने से सुख क्यों बढ़ता है?


उत्तर :क्योंकि सेवा और सहायता से आत्मिक संतोष मिलता है।


प्रश्न 30.“कारज धीरे होत है” दोहे का भावार्थ लिखिए।


उत्तर :हर कार्य समय पर ही पूरा होता है। अधीर होने से कुछ नहीं मिलता, जैसे पेड़ समय आने पर ही फल देते हैं।


प्रश्न 31.इस दोहे में धैर्य का महत्व कैसे बताया गया है?


उत्तर :कवि ने पेड़ और फल का उदाहरण देकर धैर्य का महत्व समझाया है।


प्रश्न 32.इस दोहे से जीवन में क्या सीख मिलती है?


उत्तर :हमें धैर्य रखना चाहिए और सही समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए।


प्रश्न 33.रहीम के दोहों की भाषा-शैली पर टिप्पणी कीजिए।


उत्तर :रहीम की भाषा सरल, सहज और लोकप्रचलित है, जिसमें गहन जीवन-सत्य छिपा है।


प्रश्न 34.रहीम के दोहों में उदाहरणों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।


उत्तर :उदाहरणों के माध्यम से कठिन विचारों को सरल बनाया गया है।


प्रश्न 35.रहीम के दोहों की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।


उत्तर :संक्षिप्तता, गूढ़ अर्थ, नैतिक शिक्षा और लोक जीवन से जुड़े उदाहरण।


प्रश्न 36.रहीम के दोहे समाज सुधार में कैसे सहायक हैं?


उत्तर :वे नैतिकता, करुणा, धैर्य और परोपकार को बढ़ावा देते हैं।


प्रश्न 37.इन दोहों में मानवीय मूल्यों का वर्णन कैसे हुआ है?


उत्तर :इन दोहों में प्रेम, आत्मसम्मान, सहनशीलता और सेवा जैसे मूल्यों का वर्णन है।


प्रश्न 38.रहीम को नीति कवि क्यों कहा जाता है?


उत्तर :क्योंकि उनके दोहे जीवन के व्यवहारिक और नैतिक सिद्धांत सिखाते हैं।


प्रश्न 39.रहीम के दोहों से विद्यार्थी क्या सीख सकते हैं?


उत्तर :विद्यार्थी संयम, धैर्य, विनम्रता और परिश्रम सीख सकते हैं।


प्रश्न 40.रहीम के दोहों की आज की पीढ़ी के लिए उपयोगिता लिखिए।


उत्तर :आज की पीढ़ी के लिए ये दोहे जीवन को संतुलित, नैतिक और सफल बनाने का मार्ग दिखाते हैं।

Answer by Mrinmoee