Chapter 2 

                                                                     असली चित्र


1. कंजूस सेठ का स्वभाव कैसा था?


उत्तर:कंजूस सेठ अत्यंत धनवान था, लेकिन स्वभाव से बहुत कंजूस था। उसके पास अपार धन होने के बावजूद वह एक कौड़ी भी खर्च करने से डरता था। धन होते हुए भी वह दूसरों की मेहनत का मूल्य देने से बचने के उपाय खोजता रहता था।


2. सेठ चित्र बनवाने के लिए क्यों राजी हुआ?


उत्तर: सेठ अपने मित्रों के कहने पर चित्र बनवाने के लिए राजी हुआ। वह स्वयं तो खर्च करना नहीं चाहता था, लेकिन मित्रों के बार-बार समझाने और दबाव डालने के कारण उसने अनिच्छा से चित्र बनवाने की स्वीकृति दी।


3. चित्रकार सेठ से कितना मूल्य माँग रहा था और सेठ क्यों घबरा गया?


उत्तर: चित्रकार ने चित्र का मूल्य सौ स्वर्ण मुद्राएँ माँगी थीं। यह राशि सुनकर सेठ घबरा गया क्योंकि उसकी कंजूसी उसे इतना धन खर्च करने की अनुमति नहीं दे रही थी।


4. सेठ को “एक तरह का कलाकार” क्यों कहा गया है?


उत्तर: सेठ को कलाकार इसलिए कहा गया है क्योंकि वह अपने चेहरे की आकृति बदलने में माहिर था। वह अपनी कंजूसी छिपाने के लिए बार-बार चेहरा बदलकर चित्रकार को धोखा देता था।


5. सेठ ने चित्रकार को धोखा देने के लिए क्या चाल चली?


उत्तर: सेठ हर बार चित्रकार के आने से पहले अपना चेहरा बदल लेता था। जब चित्रकार चित्र दिखाता, तो सेठ कहता कि चित्र उसके चेहरे से मेल नहीं खाता।


6. चित्रकार की पहली प्रतिक्रिया क्या थी जब चित्र सेठ को पसंद नहीं आया?


उत्तर: पहली बार चित्र न मिलने पर चित्रकार निराश हो गया, लेकिन उसने अपनी गलती मानते हुए फिर से चित्र बनाने का निश्चय किया।


7. चित्रकार बार-बार असफल क्यों हो रहा था?


उत्तर: चित्रकार इसलिए असफल हो रहा था क्योंकि सेठ हर दिन अपना चेहरा बदल लेता था। चित्र सही होने पर भी चेहरा बदलने से चित्र मेल नहीं खाता था।


8. सेठ की इस चाल से चित्रकार पर क्या प्रभाव पड़ा?


उत्तर: इस चाल से चित्रकार अत्यंत शर्मिंदा और निराश हो गया। उसे अपनी कला पर संदेह होने लगा और वह मानसिक रूप से परेशान हो गया।


9. चित्रकार ने हार क्यों नहीं मानी?


उत्तर: चित्रकार ने हार इसलिए नहीं मानी क्योंकि उसने कई दिनों तक मेहनत की थी और वह अपनी मेहनत को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहता था।


10. चित्रकार को सेठ की चाल कैसे समझ में आई?


उत्तर: कई दिनों के अनुभव के बाद चित्रकार समझ गया कि सेठ जानबूझकर चेहरा बदलता है ताकि चित्र का पैसा न देना पड़े।


11. चित्रकार ने समाधान के लिए किससे मिलने का निर्णय लिया?


उत्तर: चित्रकार ने अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए तेनालीराम से मिलने का निर्णय लिया।


12. तेनालीराम से चित्रकार ने क्या प्रार्थना की?


उत्तर: चित्रकार ने तेनालीराम से प्रार्थना की कि वे उसकी समस्या का समाधान बताएं ताकि वह कंजूस सेठ से अपने परिश्रम का उचित मूल्य प्राप्त कर सके।


13. तेनालीराम ने चित्रकार को क्या सलाह दी?


उत्तर: तेनालीराम ने सलाह दी कि वह अगले दिन सेठ के पास एक आईना लेकर जाए और उसे उसका बिल्कुल सही चित्र बताकर दिखाए।


14. तेनालीराम की सलाह में बुद्धिमत्ता कैसे झलकती है?


उत्तर: तेनालीराम की सलाह में गहरी बुद्धिमत्ता थी क्योंकि आईना सेठ की हर बदली हुई सूरत को सही रूप में दिखा सकता था।


15. चित्रकार ने तेनालीराम की सलाह का पालन कैसे किया?


उत्तर: चित्रकार अगले दिन आईना लेकर सेठ के पास गया और उसे बताया कि यह उसका बिल्कुल सही चित्र है।


16. सेठ ने आईना देखकर क्या प्रतिक्रिया दी?


उत्तर: सेठ आईना देखकर झुंझला गया और बोला कि यह चित्र नहीं बल्कि आईना है।


17. चित्रकार ने सेठ को क्या उत्तर दिया?


उत्तर: चित्रकार ने कहा कि आईना के सिवा उसकी असली सूरत कोई नहीं बना सकता।


18. चित्रकार ने इस बार कितनी राशि माँगी और क्यों?


उत्तर: चित्रकार ने एक हजार स्वर्ण मुद्राएँ माँगी क्योंकि उसने कई दिनों तक मेहनत की थी और सेठ ने उसे बार-बार धोखा दिया था।


19. सेठ को कैसे समझ में आया कि यह तेनालीराम की योजना है?


उत्तर: सेठ को समझ में आ गया कि इतनी चतुराई केवल तेनालीराम ही कर सकते हैं।


20. अंत में सेठ ने क्या किया?


उत्तर: सेठ ने बिना देरी किए एक हजार स्वर्ण मुद्राएँ चित्रकार को दे दीं।


21. राजा कृष्णदेव राय ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?


उत्तर: राजा कृष्णदेव राय ने यह घटना सुनकर बहुत हँसी की और तेनालीराम की बुद्धिमत्ता की प्रशंसा की।


22. कहानी में कंजूसी का चित्रण कैसे हुआ है?


उत्तर: कहानी में कंजूसी को हास्य और चालाकी के माध्यम से दिखाया गया है।


23. चित्रकार की मेहनत का क्या महत्व है?


उत्तर: चित्रकार की मेहनत यह दिखाती है कि सच्चा परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता।


24. तेनालीराम का चरित्र कैसा है?


उत्तर: तेनालीराम बुद्धिमान, न्यायप्रिय और हास्यबोध से भरपूर व्यक्ति हैं।


25. सेठ के चरित्र की कौन-सी कमजोरियाँ उजागर होती हैं?


उत्तर: सेठ की कंजूसी, स्वार्थ और चालाकी उजागर होती है।


26. कहानी में हास्य तत्व कहाँ दिखाई देता है?


उत्तर: आईना दिखाने के प्रसंग में हास्य उत्पन्न होता है।


27. कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?


उत्तर: कहानी सिखाती है कि बुद्धि और सूझ-बूझ से हर समस्या हल की जा सकती है।


28. कहानी में न्याय कैसे स्थापित हुआ?


उत्तर: चित्रकार को उसका मेहनताना मिल गया, जिससे न्याय स्थापित हुआ।


29. चित्रकार के धैर्य का क्या महत्व है?


उत्तर: धैर्य ने ही उसे समाधान तक पहुँचाया।


30. तेनालीराम को विद्वान क्यों माना जाता है?


उत्तर: क्योंकि वे कठिन समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान निकालते हैं।


31. कहानी में चालाकी किसकी अधिक है?


उत्तर: अंत में तेनालीराम की चालाकी सेठ पर भारी पड़ती है।


32. कहानी समाज को क्या संदेश देती है?


उत्तर: यह कहानी ईमानदारी और परिश्रम का सम्मान करना सिखाती है।


33. सेठ का अंत कैसे हास्यपूर्ण बनता है?


उत्तर: आईने के सामने उसकी चालाकी बेकार हो जाती है।


34. चित्रकार को सफलता कब मिली?


उत्तर: जब उसने तेनालीराम की सलाह मानी।


35. कहानी में अनुभव का क्या महत्व है?


उत्तर: अनुभव से चित्रकार ने सच्चाई को समझा।


36. कहानी का शीर्षक उपयुक्त क्यों है? (यदि हो)


उत्तर: कहानी की घटना से शीर्षक का भाव मेल खाता है।


37. कहानी में बुद्धि बल का उदाहरण कैसे है?


उत्तर: तेनालीराम ने बिना बल प्रयोग के समस्या हल की।


38. सेठ की हार क्यों हुई?


उत्तर: उसकी कंजूसी और छल उसके विरुद्ध चली गई।


39. चित्रकार का चरित्र क्या सिखाता है?


उत्तर: धैर्य और परिश्रम का महत्व सिखाता है।


40. इस कहानी से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?


उत्तर: यह कहानी सिखाती है कि बुद्धिमत्ता, धैर्य और सही मार्गदर्शन से हर समस्या का समाधान संभव है।

Answer by Mrinmoee