Chapter 11
सुदूर-प्रदेशों से सम्पर्क
1. प्रश्न: मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत में राजनीतिक स्थिति कैसी थी?
उत्तर: मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद भारत की राजनीतिक एकता समाप्त हो गई। मगध और अन्य क्षेत्रों में कई छोटे-छोटे राज्य बने। केंद्रीय शक्ति कमजोर होने के कारण विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में प्रवेश किया और कुछ ने स्थायी रूप से शासन स्थापित किया।
2. प्रश्न: मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद मगध में कौन-सा नया वंश आया?
उत्तर: मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद मगध में शुंग वंश की स्थापना हुई। इस वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था।
3. प्रश्न: पुष्यमित्र शुंग कौन था और उसने सत्ता कैसे प्राप्त की?
उत्तर: पुष्यमित्र शुंग अंतिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ का सेनापति था। उसने बृहद्रथ की हत्या कर सत्ता पर अधिकार किया और शुंग वंश की स्थापना की।
4. प्रश्न: शुंग वंश का शासन क्यों अधिक समय तक नहीं टिक सका?
उत्तर: शुंग वंश का शासन अधिक समय तक नहीं टिक सका क्योंकि भारत की सीमाओं पर विदेशी आक्रमण बढ़ गए। विदेशी विजेताओं ने धीरे-धीरे अपनी सत्ता स्थापित कर ली।
5. प्रश्न: मौर्योत्तर काल में कौन-कौन से विदेशी शासक भारत आए?
उत्तर: मौर्योत्तर काल में प्रमुख विदेशी शासक थे:
बैक्ट्रिया के यूनानी (यवन/इंडो-ग्रीक) शासक, जैसे मिनान्हर (मिलिन्दर)।
शक (सीथियन) शासक, जैसे रुद्रदामन।
कुषाण वंश के शासक, जैसे कनिष्क।
6. प्रश्न: मिनान्हर (मिलिन्दर) कौन था और उसका योगदान क्या था?
उत्तर: मिनान्हर बैक्ट्रिया का प्रसिद्ध यूनानी शासक था। बौद्ध साहित्य में उसे मिलिन्द कहा गया। बौद्ध भिक्षु नागसेन के साथ संवाद के बाद वह बौद्ध धर्म का अनुयायी बन गया। उसकी राजधानी सियालकोट (साकत) शिक्षा का प्रमुख केन्द्र थी।
7. प्रश्न: यवन शासकों का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: यवन शासकों ने भारत में चिकित्सा, विज्ञान, ज्योतिष, सिक्का निर्माण और कला में परिवर्तन किया। धर्म और दर्शन के क्षेत्र में भी उनका प्रभाव पड़ा, विशेषकर बौद्ध धर्म को संरक्षण मिला।
8. प्रश्न: शक शासक कौन थे और उनका मूल निवास कहाँ था?
उत्तर: शक या सीथियन शासक मूलतः मध्य एशिया के निवासी थे। उन्होंने उत्तरी भारत के कुछ भागों पर शासन किया।
9. प्रश्न: उज्जैन के शक क्षत्रपों का महत्व क्या था?
उत्तर: उज्जैन के शक क्षत्रप एक प्रमुख शाखा थे। रुद्रदामन सबसे प्रसिद्ध राजा था। उसके जूनागढ़ अभिलेख से दक्षिण भारत के सातवाहन और कुषाणों के साथ उनके संघर्ष की जानकारी मिलती है।
10. प्रश्न: कुषाण वंश के प्रमुख शासक कौन थे?
उत्तर: कुषाण वंश के प्रमुख शासक थे:
कुडुल कडफिसस – काबुल और कश्मीर में सत्ता स्थापित की।
कनिष्क – सबसे महान शासक, जिसने अफगानिस्तान, सिंध, बेक्ट्रिया और पार्थिया तक अपने साम्राज्य का विस्तार किया।
11. प्रश्न: कनिष्क का महत्व भारतीय इतिहास में क्यों है?
उत्तर: कनिष्क ने मौर्य साम्राज्य के बाद भारत में पहली बार विशाल साम्राज्य स्थापित किया। उसने रेशम मार्ग और अन्य व्यापारिक मार्गों को नियंत्रित किया। उसका शासन व्यापार और संस्कृति दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहा।
12. प्रश्न: कनिष्क ने शिक्षा और धर्म में क्या योगदान दिया?
उत्तर: कनिष्क ने अपनी राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) में बड़े-बड़े विद्वानों को रखा। अश्वघोष, पार्श्व वसुमित्र और नागार्जुन उसके राजसभा के विद्वान थे। वह बौद्ध धर्म का अनुयायी बन गया और इसे राजकीय संरक्षण प्रदान किया।
13. प्रश्न: मौर्योत्तर काल में बौद्ध धर्म की प्रमुख शाखाएं कौन-कौन सी थीं?
उत्तर: बौद्ध धर्म दो शाखाओं में बंट गया:
हीनयान – मूल बुद्ध की शिक्षाओं में विश्वास करता था।
महायान – बुद्ध को ईश्वर के रूप में मानता और बोधिसत्व के आदर्श प्रस्तुत करता था।
14. प्रश्न: महायान बौद्ध धर्म में मक्ति की अवधारणा कैसे विकसित हुई?
उत्तर: महायान बौद्ध धर्म में बुद्ध को एक ईश्वरीय उपदेशक माना गया। उनकी मूर्तियां बनाई गईं और पूजा का अभ्यास शुरू हुआ। इस प्रक्रिया से मोक्ष और मक्ति की अवधारणा विकसित हुई।
15. प्रश्न: मौर्योत्तर काल में बौद्ध धर्म को किसने समर्थन दिया?
उत्तर: बौद्ध धर्म को विदेशी शासकों ने संरक्षण दिया। यवन शासकों ने सिक्कों पर बौद्ध चिन्ह अंकित किए और कुषाणों ने बौद्ध विहारों का दान किया। व्यापारियों ने भी विहारों का निर्माण कराया।
16. प्रश्न: बौद्ध धर्म का प्रचार व्यापारिक मार्गों के माध्यम से कैसे हुआ?
उत्तर: व्यापारिक मार्गों के माध्यम से भारतीय व्यापारी पश्चिम और मध्य एशिया के क्षेत्रों में गए। उन्होंने काशगर, खोतान, तुरफान आदि जगहों पर बौद्ध धर्म के प्रचारक भेजे और मठ स्थापित किए।
17. प्रश्न: मौर्योत्तर काल में कला और स्थापत्य का विकास क्यों हुआ?
उत्तर: आर्थिक समृद्धि, व्यापारिक विकास और धर्म के संरक्षण के कारण कला और स्थापत्य में प्रगति हुई। स्तूप, चैत्य, गुहा मंदिर और बौद्ध विहारों का निर्माण हुआ।
18. प्रश्न: भरहुत और सांची के स्तूप किस शैली के उदाहरण हैं?
उत्तर: ये स्तूप शुंग शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। स्तूप के चारों ओर तोरण द्वार बनाए गए और जातक कथाओं, नागों और अप्सराओं की मूर्तियों से सजाया गया।
19. प्रश्न: गांधार शैली का विकास कहाँ हुआ और इसे क्या कहा जाता है?
उत्तर: गांधार शैली का विकास भारत के पश्चिमोत्तर प्रदेशों में हुआ। इसे इण्डो-ग्रीक शैली भी कहा जाता है। इसकी अधिकांश मूर्तियां बुद्ध के जीवन यात्रा से संबंधित हैं।
20. प्रश्न: गांधार शैली का भारत और विदेशों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: गांधार शैली की मूर्तियां न केवल भारत में बल्कि एशिया के अन्य देशों में भी प्रभावशाली रही। लाहौर और पेशावर के संग्रहालयों में इसकी मूर्तियां सुरक्षित हैं।
21. प्रश्न: मथुरा शैली में क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर: मथुरा शैली में बुद्ध, हिन्दू और जैन मूर्तियां बनाई गईं। इसमें स्थानीय लाल बलुआ पत्थर का उपयोग होता था और कला पूरी तरह भारतीय परंपरा के अनुसार विकसित हुई।
22. प्रश्न: मथुरा से कौन-सी महत्वपूर्ण मूर्ति मिली है?
उत्तर: मथुरा से कनिष्क की एक सिर रहित मूर्ति मिली है, जो कला की दृष्टि से उच्च कोटि की मानी जाती है।
23. प्रश्न: अमरावती शैली कहाँ विकसित हुई?
उत्तर: अमरावती शैली आंध्र प्रदेश के अमरावती (गुन्दुर जिला) में विकसित हुई।
24. प्रश्न: अमरावती शैली की विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर: इसमें संगमरमर की पट्टिकाएँ थीं, जिनपर बुद्ध के जीवन से जुड़े दृश्य चित्रित थे। पशु और पुष्प चित्रों का भी उपयोग किया गया। यह शैली विदेशी प्रभाव से मुक्त थी।
25. प्रश्न: मौर्योत्तर काल में बौद्ध धर्म का प्रसार किन देशों में हुआ?
उत्तर: बौद्ध धर्म श्रीलंका, बर्मा (म्यांमार), चीन, मध्य एशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड तक फैला।
26. प्रश्न: श्रीलंका में बौद्ध धर्म कब पहुँचा और किसने प्रचार किया?
उत्तर: श्रीलंका में बौद्ध धर्म अशोक के समय में पहुँचा। वहाँ आज भी बौद्ध धर्म के अनुयायी काफी संख्या में हैं।
27. प्रश्न: बर्मा में किस रूप का बौद्ध धर्म विकसित हुआ?
उत्तर: बर्मा में धेरवाद (थेरवाद) बौद्ध धर्म विकसित हुआ।
28. प्रश्न: अफगानिस्तान में बौद्ध धर्म का प्रचार किसके समय हुआ?
उत्तर: कुषाण शासकों के समय अफगानिस्तान में बौद्ध धर्म का प्रचार हुआ।
29. प्रश्न: बामियान की विशाल मूर्ति का महत्व क्या है?
उत्तर: बामियान की विशाल मूर्ति गौतम बुद्ध की है। यह पहाड़ को काटकर बनाई गई और मौर्योत्तर कालीन बौद्ध कला का अद्भुत उदाहरण है।
30. प्रश्न: मौर्योत्तर काल में बौद्ध धर्म के दो मुख्य मत क्या थे?
उत्तर:हीनयान – बुद्ध की मूल शिक्षाओं में विश्वास।
महायान – बुद्ध को ईश्वर के रूप में मानना और बोधिसत्व की पूजा।
31. प्रश्न: व्यापार और बौद्ध धर्म का क्या संबंध था?
उत्तर: व्यापारियों ने बौद्ध विहारों का निर्माण कराया और व्यापारिक मार्गों के माध्यम से धर्म का प्रसार किया। इससे बौद्ध धर्म पश्चिमी और मध्य एशिया में पहुँचा।
32. प्रश्न: शुंग शैली में स्तूप और तोरण की विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर: शुंग शैली में स्तूप के चारों ओर ऊँची चहारदीवारी और चार तोरण द्वार बनाए जाते थे। इन्हें जातक कथाओं, नाग और अप्सरा की मूर्तियों से सजाया जाता था।
33. प्रश्न: गांधार शैली में मूर्तियों की विषयवस्तु क्या थी?
उत्तर: गांधार शैली की अधिकांश मूर्तियां बुद्ध के जीवन यात्रा से संबंधित थीं।
34. प्रश्न: मथुरा शैली में किस प्रकार की मूर्तियों का निर्माण हुआ?
उत्तर: मथुरा शैली में बुद्ध, हिन्दू और जैन मूर्तियों का निर्माण हुआ।
35. प्रश्न: अमरावती शैली की मूर्तियों की सामग्री क्या थी?
उत्तर: अमरावती शैली में मूर्तियों और पट्टिकाओं के निर्माण में मुख्य रूप से संगमरमर का उपयोग हुआ।
36. प्रश्न: भारतीय कला का प्रसार किन माध्यमों से हुआ?
उत्तर: व्यापार और धर्म प्रचार दोनों माध्यमों से भारतीय कला का प्रसार एशिया के विभिन्न देशों में हुआ।
37. प्रश्न: बौद्ध धर्म का प्रसार दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में कैसे हुआ?
उत्तर: व्यापारियों और धर्म प्रचारकों ने कम्बोडिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड में मठ और बौद्ध विहार स्थापित किए।
38. प्रश्न: बौद्ध धर्म के प्रसार में विदेशी शासकों का क्या योगदान था?
उत्तर: यवन और कुषाण शासकों ने बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया। कुषाणों ने विहारों और स्तूपों का दान किया।
39. प्रश्न: बामियान की मूर्ति किस शैली का उदाहरण है?
उत्तर: बामियान की विशाल मूर्ति बौद्ध स्थापत्य और मौर्योत्तर काल की पहाड़ी मूर्ति कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
40. प्रश्न: मौर्योत्तर काल में धर्म, कला और व्यापार का आपस में क्या संबंध था?
उत्तर: मौर्योत्तर काल में धर्म, कला और व्यापार आपस में गहराई से जुड़े थे। आर्थिक समृद्धि ने कला और स्थापत्य को बढ़ावा दिया। व्यापार ने बौद्ध धर्म के प्रसार में मदद की और विदेशी संपर्क से कला में नवीन शैली विकसित हुई।
Answer by Mrinmoee