Chapter 14
हमारे इतिहासकार
प्रश्न:1 काशी प्रसाद जयसवाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कहाँ प्राप्त की और उसका प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर कैसे पड़ा?
उत्तर: काशी प्रसाद जयसवाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने घर और लंदन मिशन हाई स्कूल (बाबूलाल जायसवाल हाई स्कूल) से प्राप्त की। उनके व्यक्तित्व पर भारतीय स्वाधीनता संग्राम का जबरदस्त प्रभाव पड़ा।
प्रश्न:2 काशी प्रसाद जयसवाल ने इंग्लैंड में किस विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और कौन-सी डिग्री प्राप्त की?
उत्तर: उन्होंने इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। इसके अगले वर्ष उन्होंने बैरिस्ट्री भी पास की।
प्रश्न:3 लंदन में जयसवाल का किस-किस क्रांतिकारी विचारक से संपर्क हुआ?
उत्तर: लंदन में उनका संपर्क श्याम जी कृष्ण वर्मा, लाला हरदयाल और सावरकर से हुआ।
प्रश्न:4 1910 ई० में स्वदेश लौटने के बाद जयसवाल ने कौन-सा कार्य किया?
उत्तर: 1910 में जयसवाल स्वदेश लौटकर कलकत्ता में वकालत शुरू की और आगे चलकर कलकत्ता विश्वविद्यालय में इतिहास पढ़ाने लगे।
प्रश्न:5 सरकार ने जयसवाल को पद त्यागने के लिए क्यों बाध्य किया?
उत्तर: जयसवाल के क्रांतिकारी विचारों के कारण सरकार ने उन्हें पद त्यागने के लिए बाध्य किया।
प्रश्न:6 जयसवाल ने पटना विश्वविद्यालय में किस पद का आग्रह स्वीकार किया और कब?
उत्तर: 1919 ई० में पटना विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें भारतीय पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग का ‘रीडर’ बनने का आग्रह किया गया।
प्रश्न:7 जयसवाल पुरालिपि और प्राचीन मुद्रा के क्षेत्र में कैसे ज्ञाता थे?
उत्तर: वे अपनी जेब में अनपढ़ा प्राचीन सिक्का रखते थे, ताकि फुर्सत में उसे पढ़ा जा सके। उन्होंने मनु और याज्ञवल्क्य स्मृति पर शोध कर हिन्दू कानून में मर्मज्ञता प्राप्त की।
प्रश्न:8 जयसवाल ने कौन-सी संस्थाओं की स्थापना की और उनमें क्या योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने बिहार एण्ड उड़ीसा रिसर्च सोसायटी की स्थापना की और इसके आजीवन सम्पादक रहे। उन्होंने पटना संग्रहालय की स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रश्न:9 जयसवाल ने इतिहास लेखन में किस दृष्टि का पालन किया?
उत्तर: वे परम्परावादी नहीं थे, उनका दृष्टिकोण वैज्ञानिक था। उन्होंने स्रोतों का तुलनात्मक अध्ययन कर निष्कर्ष निकाले।
प्रश्न:10 ‘हिन्दू पॉलिटी’ पुस्तक का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उत्तर: इस पुस्तक ने सिद्ध किया कि प्राचीन भारत में प्रजातांत्रिक व्यवस्था थी और निरंकुश राजतंत्र नहीं था।
प्रश्न:11 जयसवाल की ‘हिस्ट्री ऑफ इंडिया’ पुस्तक में किस काल पर प्रकाश डाला गया?
उत्तर: 150 ई० से 350 ई० तक के काल पर प्रकाश डाला गया, जिसमें कुषाण साम्राज्य का अंत और गुप्त साम्राज्य के पूर्व के इतिहास का विवेचन किया गया।
प्रश्न:12 जयसवाल ने मुद्रा शास्त्र में क्या योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने गंगा घाटी की मुद्राओं का अध्ययन किया और कुछ मुद्राओं को मौर्यों से जोड़ा, जिससे नए विचार का प्रतिपादन हुआ।
प्रश्न:13 जयसवाल ने अभिलेखों के अध्ययन में किस विवाद को सुलझाया?
उत्तर: खारवेल के अभिलेख संबंधी विवाद को सुलझाया और अशोक, समुद्रगुप्त, अयोध्या एवं भुवनेश्वर अभिलेखों का सम्पादन किया।
प्रश्न:14 जयसवाल ने इतिहास लेखन में अधिवक्ता की पद्धति का उपयोग कैसे किया?
उत्तर: वे ऐतिहासिक घटनाओं के सभी पक्षों एवं कारणों की समीक्षा के पश्चात् निष्कर्ष पर पहुँचते थे और साक्ष्यों का संतुलित उपयोग करते थे।
प्रश्न:15 जयसवाल के इतिहास लेखन में कौन-से प्रमुख विषय शामिल थे?
उत्तर: हिन्दू विचार, धर्म, शासन, गणराज्य, सामाजिक व्यवस्था, राष्ट्रीय स्वाभिमान और मौलिकता।
प्रश्न:16 डॉ. अनंत सदाशिव अल्तेकर किस विश्वविद्यालय में प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के संस्थापक अध्यक्ष बने?
उत्तर: पटना विश्वविद्यालय में।
प्रश्न:17 डॉ. अल्तेकर काशी प्रसाद जयसवाल शोध संस्थान में किस पद पर कार्यरत रहे?
उत्तर: संस्थापक निदेशक।
प्रश्न:18 डॉ. अल्तेकर ने वैशाली के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने के लिए कौन-सा शोध प्रस्तुत किया?
उत्तर: वैशाली का अंधकार युग पर शोध।
प्रश्न:19 डॉ. अल्तेकर ने वैशाली में किस महत्वपूर्ण अवशेष का प्रकाशन किया?
उत्तर: भगवान बुद्ध के शरीरावशेष स्तूप को दुनिया के सामने लाया।
प्रश्न:20 डॉ. अल्तेकर का बिहार थू द एजेज में योगदान क्या रहा?
उत्तर: उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे बिहार की गरिमा रेखांकित हुई।
प्रश्न:21 डॉ. अल्तेकर का छात्र जीवन कैसा था?
उत्तर: वे प्रतिभा संपन्न, मेधावी और उत्कृष्ट छात्र थे।
प्रश्न:22 डॉ. अल्तेकर ने कौन-सी प्रमुख पदक और स्कॉलरशिप प्राप्त की?
उत्तर: बम्बई विश्वविद्यालय से चांसलर मेडल और एल.एल.बी. के लिए लारेन्स जेकिन्स स्कॉलरशिप।
प्रश्न:23 डॉ. अल्तेकर ने अपने शोध प्रबंध में किस विषय का अध्ययन किया?
उत्तर: राष्ट्रकूटों का इतिहास, जो डी.आर. बनर्जी के निर्देशन में डी.लिट् की उपाधि के लिए किया गया।
प्रश्न:24 डॉ. अल्तेकर ने कितनी पुस्तकें और शोध पत्र प्रकाशित किए?
उत्तर: 21 पुस्तकें और लगभग 200 शोध पत्र।
प्रश्न:25 डॉ. अल्तेकर ने पटना विश्वविद्यालय को किस क्षेत्र में समृद्ध किया?
उत्तर: गुप्तकालीन स्वर्णमुद्राओं के अध्ययन और मुद्रा शास्त्र में।
प्रश्न:26 डॉ. अल्तेकर को बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् ने किस कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किया?
उत्तर: प्राचीन भारतीय शासन पद्धति पर उनकी पुस्तक के लिए एक हजार मुद्रा का पुरस्कार।
प्रश्न:27 डॉ. अल्तेकर ने अपने ग्रंथ क्यों भारत में ही प्रकाशित करवाए?
उत्तर: उन्होंने राष्ट्रीयता के भाव से संकल्प लिया था कि उनकी पुस्तकें देशी रूप में प्रकाशित हों।
प्रश्न:28 डॉ. अल्तेकर को ‘हड़बड़िया’ क्यों कहा जाता था?
उत्तर: क्योंकि वे प्रत्येक क्षण व्यस्त रहने में विश्वास करते थे और पांडुलिपि तैयार होते ही उसे प्रकाशित कर देते थे।
प्रश्न:29 डॉ. अल्तेकर का शोध आधार क्या था?
उत्तर: मुख्य रूप से साहित्यिक स्रोत, लेकिन पुराभिलेख और मुद्रा शास्त्र के ज्ञाता भी थे।
प्रश्न:30 डॉ. अल्तेकर का दृष्टिकोण रूढ़िवादी था या उदार?
उत्तर: वे रूढ़िवादी नहीं थे और महिलाओं के प्रति उदार दृष्टिकोण रखते थे।
प्रश्न:31 डॉ. अल्तेकर ने महिलाओं के अधिकारों पर क्या सिद्ध किया?
उत्तर: उन्होंने साबित किया कि वेद पढ़ने का अधिकार स्त्रियों और शूद्रों को भी है।
प्रश्न:32 डॉ. अल्तेकर ने पं. राहुल सांकृत्यान की पाण्डुलिपियों के प्रकाशन में किसकी सहायता प्राप्त की?
उत्तर: बलदेव मिश्र की सहायता।
प्रश्न:33 डॉ. अल्तेकर ने विदेश में कहाँ व्याख्यान दिए?
उत्तर: 1954 में अमेरिका और वेस्टइंडीज में भारतीय संस्कृति पर व्याख्यान।
प्रश्न:34 डॉ. अल्तेकर के जीवन का मूल मंत्र क्या था?
उत्तर: व्यस्त रहना और पुस्तक की पांडुलिपि तैयार होते ही उसे प्रकाशित करना।
प्रश्न:35 डॉ. अल्तेकर ने अपने शोध में क्या प्राथमिकता दी?
उत्तर: साहित्यिक स्रोतों के आधार पर पुरातत्व और मुद्रा शास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन।
प्रश्न:36 डॉ. अल्तेकर की राष्ट्रभक्ति के उदाहरण क्या हैं?
उत्तर: खादी पहनना, पुस्तकें भारत में ही प्रकाशित करना और हिंदी भाषा की सेवा।
प्रश्न:37 डॉ. अल्तेकर का योगदान बिहार के इतिहास लेखन में किस प्रकार महत्वपूर्ण है?
उत्तर: उन्होंने बिहार के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति का अध्ययन किया और वैशाली सहित अन्य स्थलों का प्रकाशन कराया।
प्रश्न:38 डॉ. अल्तेकर ने महिलाओं और समाज के अधिकारों पर किस घटना से प्रेरणा ली?
उत्तर: अपने गाँव में घटित सती की घटना और बीएचयू में पढ़ाई करने वाली शूद्र लड़की।
प्रश्न:39 डॉ. अल्तेकर ने अपने जीवन में शोध के साथ-साथ क्या मूल्य अपनाए?
उत्तर: साधारण जीवन, राष्ट्रभक्ति, और शोध में लगन।
प्रश्न:40 डॉ. अल्तेकर का योगदान न्यूमिस्मेटिक सोसाइटी में किस रूप में देखा गया?
उत्तर: वे अध्यक्ष और सदस्य रहे, और उनके योगदान को सम्मान देते हुए सोसाइटी ने भवन का नाम ‘अल्तेकर भवन’ रखा।
Answer by Mrinmoee