Chapter 6
जीवन के विभिन्न आयाम
1. प्रश्न: ऋग्वैदिक काल में आर्यों का मुख्य पेशा क्या था?
उत्तर: ऋग्वैदिक काल में आर्यों का मुख्य पेशा पशुपालन था। वे अपने पशुओं के लिए चरागाह ढूंढ़ते हुए अलग-अलग स्थानों पर रहते थे।
2. प्रश्न: ऋग्वैदिक काल में आर्य स्थायी रूप से क्यों नहीं बसते थे?
उत्तर: स्थायी रूप से नहीं बसने के कारण वे खेती नहीं करते थे और अपने पशुओं के लिए चरागाह ढूंढ़ते हुए आवागमन करते रहते थे।
3. प्रश्न: ऋग्वैदिक काल में जौ (यव) की खेती क्यों की जाती थी?
उत्तर: जौ की फसल कम समय में तैयार हो जाती थी और उगाने में आसान थी। इसलिए आर्य इसे प्राथमिक फसल के रूप में उगाते थे।
4. प्रश्न: ऋग्वैदिक आर्य स्थानीय निवासियों से किस प्रकार व्यापार करते थे?
उत्तर: आर्य स्थानीय निवासियों से गेहूँ और अन्य फसल प्राप्त करते थे और बदले में उन्हें दूध, घी और अन्य उत्पाद देते थे।
5. प्रश्न: आर्यों के पशुपालन में कौन-कौन से जानवर शामिल थे?
उत्तर: आर्यों के पशुपालन में गाय, भेड़, बकरी और धौड़े शामिल थे।
6. प्रश्न: ऋग्वैदिक कालीन समाज में वर्गीकरण किस प्रकार था?
उत्तर: आर्यों को तीन मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया था – योद्धा, पुरोहित और साधारण जन। हालांकि, इस काल में वर्ण व्यवस्था पूरी तरह से स्थापित नहीं थी।
7. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में आर्यों का मुख्य पेशा क्या था?
उत्तर: उत्तरवैदिक काल में आर्यों ने पशुपालन के स्थान पर कृषि को मुख्य पेशा बनाया और एक स्थान पर स्थायी रूप से रहने लगे।
8. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में लौह युग का आरंभ क्यों महत्वपूर्ण था?
उत्तर: लौह तकनीक का प्रयोग युद्ध के अस्त्रों और धीरे-धीरे कृषि एवं अन्य आर्थिक कार्यों में होने लगा।
9. प्रश्न: उत्तरवैदिक कालीन मकानों की विशेषता क्या थी?
उत्तर: लोग कच्चे मकानों में रहते थे, जिनकी छत फूस और सरकंडों से बनी होती थी।
10. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में मिट्टी के बर्तन किस प्रकार के पाए गए हैं?
उत्तर: इन बर्तनों पर चित्रकारी की गई थी, जो सरल रेखाओं और ज्यामितीय आकृतियों के रूप में होती थी।
11. प्रश्न: ऋग्वैदिक काल में छोटे कबीले कैसे बड़े जनपद में विलीन हुए?
उत्तर: छोटे-छोटे कबीले एक-दूसरे में मिलकर बड़े जनपदों का निर्माण करते थे, जैसे-पुरु और भरत जन मिलकर कुरु जनपद बने।
12. प्रश्न: अश्वमेध यज्ञ का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: अश्वमेध यज्ञ में एक घोड़े को स्वतंत्र रूप से घूमने दिया जाता था। यदि कोई अन्य राजा उसे रोकता, तो युद्ध करना पड़ता। इससे यज्ञ करने वाले राजा की शक्ति का पता चलता था।
13. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में राजा की शक्ति में वृद्धि का क्या परिणाम हुआ?
उत्तर: राजा की शक्ति बढ़ने के साथ-साथ सभा और समिति जैसी सामुदायिक संस्थाएँ कमजोर पड़ गईं और केवल राजा की परामर्श देने वाली संस्था बन गईं।
14. प्रश्न: उपहार और नजराना में क्या अंतर था?
उत्तर: उपहार नियमित रूप से इकट्ठा किए जाते थे, जबकि नजराना अनियमित रूप से, जब भी संभव हो, लिया जाता था।
15. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में समाज के कौन-कौन से समूह थे?
उत्तर: समाज में पुरोहित, योद्धा, कृषक, पशुपालक, व्यापारी, शिल्पकार, श्रमिक, शिकारी और मछली पकड़ने वाले लोग शामिल थे।
16. प्रश्न: पुरोहितों का जीवन कैसा था?
उत्तर: पुरोहितों का जीवन वैभवशाली था और वे यज्ञ तथा धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करते थे।
17. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में वर्ण व्यवस्था किस प्रकार थी?
उत्तर: वर्ण व्यवस्था में चार वर्ग थे – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र।
18. प्रश्न: ब्राह्मण वर्ग का मुख्य कार्य क्या था?
उत्तर: ब्राह्मणों का मुख्य कार्य वेदों का अध्ययन-आध्यापन और यज्ञ करना था।
19. प्रश्न: क्षत्रिय वर्ग का मुख्य कार्य क्या था?
उत्तर: क्षत्रियों का मुख्य कार्य युद्ध करना और लोगों की रक्षा करना था।
20. प्रश्न: वैश्य वर्ग में कौन-कौन शामिल थे?
उत्तर: वैश्य वर्ग में कृषक, पशुपालक और व्यापारी आते थे।
21. प्रश्न: शूद्र वर्ग का कार्य क्या था?
उत्तर: शूद्रों का कार्य अन्य तीन वर्गों की सेवा करना था।
22. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में कृषि के लिए किन उपकरणों का प्रयोग हुआ?
उत्तर: लोहे के फाल का प्रयोग जुताई के लिए हुआ और लोग बुआई, कटाई, ओसाई आदि जानते थे।
23. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती थीं?
उत्तर: धान, गेहूँ, जौ, दालें, गन्ना, कपास, तिल और सरसों उगाई जाती थीं।
24. प्रश्न: उत्तरवैदिक काल में धार्मिक जीवन की मुख्य धाराएँ कौन-कौन सी थीं?
उत्तर: एक धारा कर्म (यज्ञ) पर आधारित थी और दूसरी धारा ज्ञान (उपनिषदों) पर आधारित थी।
25. प्रश्न: यज्ञ का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: यज्ञ का उद्देश्य देवताओं को प्रसन्न करना, कृषि उत्पादन बढ़ाना और राजा की सत्ता स्थापित करना था।
26. प्रश्न: उपनिषदों में किस विषय का अध्ययन किया गया?
उत्तर: उपनिषदों में आत्मा, परमात्मा, मृत्यु जैसे गूढ़ विषयों का अध्ययन किया गया।
27. प्रश्न: वैदिक शिक्षा किस प्रकार दी जाती थी?
उत्तर: वैदिक शिक्षा मौखिक रूप से दी जाती थी और विद्यार्थियों को वेदों के मूल पाठ कंठस्थ करवाए जाते थे।
28. प्रश्न: वैदिक शिक्षा में किन विषयों की शिक्षा दी जाती थी?
उत्तर: वेदों के अलावा गणित और व्याकरण की शिक्षा दी जाती थी।
29. प्रश्न: विद्यार्थी कितने समय तक गुरु के आश्रम में रहते थे?
उत्तर: विद्यार्थियों को गुरु के आश्रम में 12 वर्षों तक रहकर शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती थी।
30. प्रश्न: गुरु-शिष्य परंपरा क्या थी?
उत्तर: गुरु-शिष्य परंपरा में विद्यार्थी आश्रम में रहते और गुरु से वेद, गणित, व्याकरण आदि सीखते थे तथा आश्रम के कार्यों में सहायता करते थे।
31. प्रश्न: आरुणि का किस प्रकार का साहस दिखाया गया?
उत्तर: वर्षा के दौरान खेत की मेड़ पर लेटकर उसने पानी को रोककर फसल को बचाया, जिससे उसका शरीर ठंड से शिथिल हो गया।
32. प्रश्न: आरुणि बाद में कौन बने?
उत्तर: आरुणि बड़ा होकर वेदों और शास्त्रों के ज्ञाता बने और उद्दालक ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुए।
33. प्रश्न: इनामगाँव कहाँ स्थित था?
उत्तर: इनामगाँव, महाराष्ट्र राज्य में घोड नदी के तट पर स्थित ताम्रपाषाण बस्ती थी।
34. प्रश्न: इनामगाँव की संस्कृति का समय काल कौन सा था?
उत्तर: इनामगाँव की संस्कृति 1600 ई.पू. से 700 ई.पू. तक विकसित रही।
35. प्रश्न: इनामगाँव के लोग किस प्रकार के घरों में रहते थे?
उत्तर: मिट्टी की बनी झोपड़ियों में रहते थे, जिनकी छत फूस से बनी होती थी और गारे से ढकी होती थी।
36. प्रश्न: इनामगाँव के लोग कौन-कौन सी फसलें उगाते थे?
उत्तर: जौ, गेहूँ, मटर, मसूर और धान उगाते थे।
37. प्रश्न: इनामगाँव में पालतू पशु कौन-कौन से थे?
उत्तर: गाय, बैल, भेड़, बकरी, कुत्ता और घोड़ा पाले जाते थे।
38. प्रश्न: इनामगाँव में मृतकों को कैसे दफनाया जाता था?
उत्तर: मृतकों को मकान के आँगन में मिट्टी के बने संदूक में दफनाया जाता था और उनके साथ औजार, हथियार और खाने-पीने की वस्तुएँ रखी जाती थीं।
39. प्रश्न: इनामगाँव की मिट्टी की बर्तनों की विशेषता क्या थी?
उत्तर: मिट्टी के बर्तन नारंगी रंग के होते थे, जिनपर काले रंग में ज्यामितीय आकृतियाँ बनी होती थीं।
40. प्रश्न: इनामगाँव के लोग अपने पशुओं का उपयोग किस लिए करते थे?
उत्तर: पशुओं का उपयोग मुख्य रूप से भोजन, कृषि कार्य और अन्य दैनिक कार्यों के लिए किया जाता था।
Answer by Mrinmoee