Chapter 10
मानव पर्यावरण अन्तः क्रिया अपना प्रदेश बिहार
प्र.1: बिहार दिवस कब और कहाँ मनाया गया?
उत्तर: बिहार दिवस का भव्य आयोजन 22 मार्च को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में किया गया। इस समारोह में समूचे बिहार के विभिन्न जिलों से आए स्कूली छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और “बिहार को जानिए” विषय पर भाषण प्रतियोगिता हुई, जिससे पूरा मैदान उत्साह और जोश से भर उठा।
प्र.2: बिहार दिवस के अवसर पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इस प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य था कि स्कूली बच्चों की वाणी के माध्यम से बिहार की पहचान, यानी उसकी जलवायु, खेती-किसानी, उद्योग, संस्कृति, खान-पान, जीवन शैली और पर्यावरण जैसी विविधताओं को लोगों तक पहुँचाया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपने राज्य के गौरव और विशेषताओं को समझे और गर्व महसूस करे।
प्र.3: उद्घोषक ने भाषण कार्यक्रम की शुरुआत कैसे की?
उत्तर: कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उद्घोषक ने पूरे उत्साह के साथ उपस्थित दर्शकों को संबोधित किया, बिहार दिवस पर सभी का स्वागत किया और घोषणा की कि बच्चे क्रमवार मंच पर आकर अपने-अपने विषय पर विचार रखेंगे। साथ ही उन्होंने दर्शकों से अनुरोध किया कि हर प्रतिभागी का तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया जाए, जिससे पूरे मैदान में उमंग और जोश का माहौल बन गया।
प्र.4: नीलम कुमारी ने बिहार की भौगोलिक स्थिति के बारे में क्या बताया?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार मध्य गंगा के उपजाऊ मैदान पर बसा हुआ है। इसके उत्तर में नेपाल की हिमालयी तराइयाँ हैं, जबकि दक्षिण की ओर प्रायद्वीपीय पठार फैला है। राज्य की जीवनरेखा गंगा पश्चिम से पूर्व की दिशा में बहती है और गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, महानंदा, पुनपुन, सोन और फल्गू जैसी अनेक नदियाँ इसमें आकर मिलती हैं, जिससे प्रदेश की भू-आकृति और कृषि व्यवस्था समृद्ध होती है।
प्र.5: बिहार की जलवायु के बारे में नीलम ने क्या विशेषताएँ बताईं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार की जलवायु में तीन मुख्य ऋतुएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। जाड़े के समय यहाँ का तापमान काफ़ी नीचे चला जाता है, जहाँ दिन का अधिकतम तापमान लगभग 29° सेल्सियस रहता है, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 8° सेल्सियस तक गिर सकता है। गर्मियों में यहाँ तेज़ गर्मी पड़ती है और लू भी चलती है, जिससे तापमान अक्सर 40° सेल्सियस से ऊपर पहुँच जाता है। वर्षा का मुख्य स्रोत बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसूनी पवन है, जो राज्य में लगभग 100 से 150 सेंटीमीटर तक वर्षा कराता है।
प्र.6: बिहार में मैंगो शावर क्या हैं और उनका महत्व क्या है?
उत्तर: नीलम बताती है कि बिहार में अप्रैल और मई के महीनों में जो हल्की-हल्की बारिश होती है, उसे मैंगो शावर कहा जाता है। यह फुहारें आम के पेड़ों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती हैं, क्योंकि इनके कारण आम के फलों की बढ़वार तेज़ हो जाती है और वे अच्छे आकार में विकसित होते हैं। हालाँकि, कभी-कभी इस मौसम में तेज़ आंधियाँ भी चलती हैं, जिनसे आम के छोटे फल, यानी टिकोले, टूटकर गिर जाते हैं और इससे कुल पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
प्र.7: नीलम ने बिहार के जनसंख्या घनत्व और जलवायु क्षेत्र के बारे में क्या बताया?
उत्तर:नीलम के अनुसार बिहार का अधिकांश भाग उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु क्षेत्र में स्थित है, जहाँ गर्मी, सर्दी और वर्षा—तीनों ऋतुएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। उसने यह भी बताया कि बिहार भारत के सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों में से एक है। यहाँ लोगों की संख्या भूमि क्षेत्रफल की तुलना में बहुत अधिक है, इसलिए इसे अत्यधिक सघन जनसंख्या वाला प्रदेश माना जाता है।
प्र.8: मनीष कुमार ने बिहार के मुख्य पेशे और उत्पादन के बारे में क्या जानकारी दी?
उत्तर: मनीष कुमार का कहना है कि बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर करती है, इसलिए इसे कृषि प्रधान राज्य माना जाता है। यहाँ अधिकांश लोग खेती-किसानी को ही अपना प्रमुख पेशा बनाए हुए हैं। राज्य में धान सबसे महत्त्वपूर्ण फसल है, जबकि इसके अलावा गेहूँ, मक्का, विभिन्न प्रकार की दलहन और तिलहन फसलें भी बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। साथ ही, गन्ना, जूट और कई तरह के मसाले भी बिहार के महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों में शामिल हैं।
प्र.9: बिहार के किन जिलों में तम्बाकू, केले, लीची और पान की खेती प्रचुर मात्रा में होती है?
उत्तर: नीलम के अनुसार उत्तर बिहार का प्रदेश इन विशेष फसलों के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है। यहाँ के कई जिलों में तम्बाकू, केले, लीची और पान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु इन फसलों की बढ़वार के लिए अनुकूल होने के कारण इनका उत्पादन यहाँ प्रचुर मात्रा में मिलता है।
प्र.10: बिहार में आम की पैदावार का विवरण दें।
उत्तर: नीलम बताती है कि बिहार में लगभग पूरे राज्य में आम की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यहाँ की मिट्टी तथा जलवायु आम के पौधों के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती है, जिसके कारण राज्य के विभिन्न जिलों में आम की पैदावार खूब होती है। इसी वजह से आम को बिहार की प्रमुख और विशेष फसलों में गिना जाता है।
प्र.11: बिहार में कुटीर उद्योग कौन-कौन से हैं?
उत्तर: मनीष के अनुसार बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के कुटीर उद्योग विकसित हुए हैं। भागलपुर अपने प्रसिद्ध रेशम (सिल्क) उद्योग के लिए जाना जाता है। पूर्णिया क्षेत्र में जूट से जुड़े उद्योग खूब चलते हैं। गया में सूती वस्त्रों से संबंधित कुटीर उद्योग प्रचलित हैं, जबकि पूर्वी चम्पारण में बटन बनाने का काम विशेष रूप से किया जाता है। इन सभी उद्योगों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी सहयोग मिलता है।
प्र.12: बिहार में बड़े उद्योगों का विवरण क्या है?
उत्तर: नीलम बताती है कि बिहार में कई महत्वपूर्ण बड़े उद्योग स्थापित हैं, जो राज्य के औद्योगिक विकास में बड़ा योगदान देते हैं। मुंगेर में सिगरेट निर्माण का प्रमुख कारखाना स्थित है। बरौनी औद्योगिक क्षेत्र में तेलशोधक संयंत्र तथा खाद (फर्टिलाइज़र) कारखाना संचालित होता है। रेलवे से संबंधित उद्योग भी बिहार में खास महत्व रखते हैं—मुजफ्फरपुर और मोकामा में रेलवे वैगन प्लांट लगाए गए हैं, जबकि जमालपुर अपनी पुरानी और बड़ी रेलवे कार्यशाला के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, राज्य में नए रेलवे और बारूद कारखानों के निर्माण की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।
प्र.13: बिहार में खनिज संपदा की स्थिति क्या है?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में खनिज संपदा बहुत सीमित पाई जाती है, इसलिए इसे खनिजों के मामले में अपेक्षाकृत निर्धन राज्य माना जाता है। दक्षिण बिहार के कुछ इलाकों में टिन और अभ्रक की खानें स्थित हैं, जहाँ से इन खनिजों का सीमित मात्रा में उत्खनन होता है। वहीं कैमूर की पहाड़ियों में चूना पत्थर, बालू पत्थर और पाइराइट जैसे खनिज पाए जाते हैं, जो स्थानीय उपयोग और निर्माण कार्यों में सहायक होते हैं।
प्र.14: मोहम्मद रिजवान ने बिहार की जीवन शैली के बारे में क्या बताया?
उत्तर: मोहम्मद रिजवान के अनुसार बिहार का दैनिक जीवन मुख्य रूप से खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है। यहाँ के लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है, जिसमें काम करने के लिए हल-बैल जैसे पारंपरिक साधनों के साथ-साथ आधुनिक कृषि मशीनों का भी उपयोग किया जाता है। भोजन की आदतों में चावल, गेहूँ, दालें, आलू और विभिन्न हरी सब्जियाँ मुख्य रूप से शामिल रहती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था अधिकतर कुओं और चापाकलों के माध्यम से होती है, जो आज भी लोगों का मुख्य जलस्रोत बने हुए हैं।
प्र.15: बिहार के लोगों के पहनावे के बारे में क्या बताया गया?
उत्तर: नीलम बताती है कि बिहार में लोगों का पहनावा सरल और पारंपरिक शैली से जुड़ा हुआ है। पुरुषों के सामान्य वस्त्रों में धोती, कुर्ता, गमछा, लुंगी के साथ-साथ शर्ट-पैंट और पायजामा भी शामिल हैं। दूसरी ओर, महिलाओं की मुख्य पोशाक साड़ी होती है, जबकि कई स्थानों पर महिलाएँ सलवार-कमीज़ भी पहनती हैं। इन वस्त्रों में क्षेत्रीय संस्कृति और लोकपरंपरा की झलक साफ दिखाई देती है।
प्र.16: बिहार में यातायात की सुविधा कैसी है?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में आवागमन की सुविधाएँ काफ़ी विकसित हैं। राज्य में पक्की और कच्ची—दोनों तरह की सड़कें अच्छी संख्या में मौजूद हैं, साथ ही रेलवे नेटवर्क भी काफ़ी सघन है, जिससे अधिकांश शहर और कस्बे रेलमार्ग से जुड़े हुए हैं। वायु-यात्रा की दृष्टि से पटना और गया महत्वपूर्ण केंद्र हैं, जहाँ से देश के विभिन्न भागों के लिए हवाई सेवाएँ उपलब्ध रहती हैं। नदी-आधारित नौवहन भी यहाँ परिवहन का एक उपयोगी साधन है। विशेषकर उत्तर बिहार में आज भी कई क्षेत्रों में नावों का उपयोग मुख्य यातायात साधन के रूप में किया जाता है।
प्र.17: गाँवों में निवास और मकानों की स्थिति कैसी है?
उत्तर: नीलम बताती है कि बिहार के गाँवों में रहने की व्यवस्था मिश्रित प्रकार की होती है। कई परिवार पक्के मकानों में रहते हैं, जबकि कुछ घर कच्चे स्वरूप के होते हैं, जिनमें मिट्टी और लकड़ी का उपयोग अधिक दिखता है। गाँव के टोलों और दुरस्थ इलाकों में अभी भी फूस से बने छप्पर वाली झोपड़ियाँ आमतौर पर देखने को मिल जाती हैं। इस तरह, ग्रामीण क्षेत्र में मकानों की बनावट सामाजिक और आर्थिक स्थिति के अनुसार भिन्न-भिन्न दिखाई देती है।
प्र.18: बिहार के प्रमुख खाद्य पदार्थ कौन-कौन से हैं?
उत्तर:नीलम के अनुसार बिहार के पारंपरिक भोजन में मौसम के अनुसार विशेष व्यंजन प्रमुखता से खाए जाते हैं। बरसात के दिनों में लिट्टी-चोखा लोगों की पसंदीदा डिश होती है। गर्मियों के मौसम में सत्तू का उपयोग बहुत बढ़ जाता है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देता है। इसके अलावा चूड़ा-दही भी गर्मियों में प्रायः हर घर में खाया जाता है और इसे साधारण तथा पौष्टिक भोजन माना जाता है।
प्र.19: सिमरन ने बिहार के कौन-कौन से पर्व और उत्सव बताए?
उत्तर: सिमरन के अनुसार बिहार में विभिन्न समुदायों के अनेक पर्व-त्योहार उत्साह और सामूहिकता के साथ मनाए जाते हैं। इनमें छठ पर्व सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय माना जाता है। इसके अतिरिक्त सिखों के गुरु गोविन्द सिंह जी का जन्मोत्सव भी बड़े सम्मान से मनाया जाता है। मुस्लिम समाज ईद मनाता है, वहीं ईसाई समुदाय बड़ा दिन (क्रिसमस) हर्षोल्लास के साथ मनाता है। साथ ही, होली और दीपावली जैसे प्रमुख हिन्दू त्योहार भी पूरे राज्य में बेहद उमंग के साथ मनाए जाते हैं।
प्र.20: बिहार की लोक कला और संस्कृति के बारे में क्या बताया गया?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार की लोक कला और संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविध है। यहाँ की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग कला में प्राकृतिक रंगों और विभिन्न प्रतीकों का उपयोग किया जाता है, जो इसे विशिष्ट और आकर्षक बनाता है। इस कला के माध्यम से न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का भी साधन बनती है। इसके अलावा, बिहार की संस्कृति में धार्मिकता, परस्पर सहयोग और मिलनसार प्रवृत्ति साफ दिखाई देती है, जो समाज में सामूहिकता और भाईचारे को बढ़ावा देती है।
प्र.21: बिहार के प्रमुख फलों का वर्णन करें।
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में विभिन्न क्षेत्रों में कई प्रसिद्ध और स्वादिष्ट फल उगाए जाते हैं। लीची राज्य की एक प्रमुख फसल है। आम की कई किस्में हैं, जिनमें जर्दालु आम विशेष रूप से लोकप्रिय है। बक्सर क्षेत्र में चौसा आम की खेती होती है, जबकि बेतिया का डंका और दीघा का दूधिया मालदह भी अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं। ये फल न केवल स्थानीय लोगों के लिए प्रिय हैं, बल्कि राज्य की कृषि और आर्थिक पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्र.22: बिहार के लोग पर्यावरणीय कठिनाइयों का सामना कैसे करते हैं?
उत्तर: नीलम बताती है कि बिहार के लोग प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और सूखा जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना साहस और धैर्य के साथ करते हैं। ये लोग अपने परिश्रम, बुद्धिमत्ता और दृढ़ निश्चय के माध्यम से इन समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं और राज्य की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।
प्र.23: बिहार के लोगों की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार के लोग अपनी विशिष्ट सामाजिक और सांस्कृतिक गुणों के लिए जाने जाते हैं। यहाँ के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं और सामूहिकता में विश्वास रखते हैं। वे मिलनसार, धैर्यशील और कठिन परिस्थितियों में भी जीवटपूर्ण रहते हैं। इसके अलावा, बिहारवासी हमेशा आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं और चुनौतियों का सामना सकारात्मक सोच के साथ करते हैं।
प्र.24: बिहार में जीवन और रोज़गार का मुख्य आधार क्या है?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और रोजगार के मुख्य स्रोत विविध हैं। इनमें प्रमुख रूप से कृषि और पशुपालन शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसके अलावा, बड़े उद्योग, कुटीर उद्योग और स्थानीय उत्पाद भी रोजगार और जीवन यापन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सभी माध्यमों से राज्य के लोगों को आय और आजीविका के अवसर प्राप्त होते हैं।
प्र.25: बिहार की कृषि में कौन-कौन सी फसलें प्रमुख हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार की कृषि में धान सबसे महत्वपूर्ण फसल है, जिसे राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में उगाया जाता है। इसके अलावा गेहूँ, मकई, विभिन्न प्रकार की दलहन और तिलहन फसलें भी प्रमुखता से उगाई जाती हैं। साथ ही गन्ना, जूट और मसाले जैसी फसलें भी बिहार की कृषि व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं और किसान की आय का एक स्थायी स्रोत बनी रहती हैं।
प्र.26: बिहार में उद्योग और व्यापार की स्थिति कैसी है?
उत्तर:नीलम के अनुसार बिहार में उद्योग और व्यापार की स्थिति मिश्रित है। छोटे पैमाने के कुटीर उद्योग जैसे सिल्क उद्योग, जूट उत्पादन, सूती वस्त्र और बटन बनाने के काम यहाँ प्रमुख हैं। बड़े उद्योगों में मुंगेर का सिगरेट कारखाना, बरौनी का तेलशोधक कारखाना, मुजफ्फरपुर और मोकामा में रेलवे वैगन प्लांट तथा जमालपुर की रेलवे कार्यशालाएँ शामिल हैं। इन उद्योगों से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं।
प्र.27: बिहार की भौगोलिक विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार का भौगोलिक स्वरूप मुख्य रूप से मैदानी है और यह उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में स्थित है। राज्य के उत्तरी हिस्से में हिमालय की तलहटी है, जबकि दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार फैला हुआ है। गंगा नदी राज्य के मध्य भाग से बहती है और इसकी सहायक नदियाँ पूरे प्रदेश में जल और कृषि के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
प्र.28: बिहार की वर्षा और जलवायु की विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार की जलवायु उपोष्ण कटिबंधीय है, जिसमें तीन प्रमुख ऋतुएँ दिखाई देती हैं। राज्य में औसत वार्षिक वर्षा 100 से 150 सेंटीमीटर के बीच होती है, जो मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसूनी पवनों के कारण होती है। गर्मियों में यहाँ लू चलती है और तापमान 40° सेल्सियस तक पहुँच सकता है, जबकि सर्दियों में दिन का अधिकतम तापमान लगभग 29° सेल्सियस और रात का न्यूनतम 8° सेल्सियस तक रहता है।
प्र.29: बिहार में जल संसाधनों और पेयजल की स्थिति कैसी है?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में पेयजल का मुख्य स्रोत कुएँ और चापाकल हैं, जिनसे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति होती है। सिंचाई के लिए राज्य में नहरों, ट्यूबवेल और रहट जैसी पारंपरिक तथा आधुनिक विधियों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि कृषि के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके और फसलें समय पर सिंचित की जा सकें।
प्र.30: बिहार में परिवहन के अन्य साधन क्या हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में आवागमन के लिए विभिन्न प्रकार के साधन उपलब्ध हैं। राज्य में पक्की और कच्ची दोनों तरह की सड़कें मौजूद हैं, जो शहरों और गाँवों को जोड़ती हैं। इसके अलावा, रेलवे लाइनों का सघन जाल राज्य के अधिकांश हिस्सों में परिवहन को सुविधाजनक बनाता है। नदी मार्गों के माध्यम से नावों का उपयोग आज भी कुछ क्षेत्रों में मुख्य साधन के रूप में होता है। वायु मार्ग से भी पटना और अन्य प्रमुख शहर देश के अन्य भागों से जुड़े हुए हैं।
प्र.31: बिहार की प्रमुख लोक कला और शिल्प क्या हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार की लोक कला और शिल्प बहुत समृद्ध और विविध हैं। यहाँ की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग कला में प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक प्रतीकों का उपयोग होता है। इसके अलावा, सिल्क उद्योग, जूट उत्पादन, बटन बनाने के कुटीर उद्योग और सूती वस्त्र निर्माण राज्य की प्रमुख शिल्प गतिविधियाँ हैं, जो न केवल सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान करती हैं।
प्र.32: बिहार के प्रमुख त्योहार और पर्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में विभिन्न धर्मों और समुदायों के कई त्योहार और पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं—छठ पर्व, जो राज्य का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण त्योहार है; सिख समुदाय का गुरु गोविन्द सिंह जी का जन्मोत्सव; मुस्लिम समुदाय का ईद; ईसाई समुदाय का बड़ा दिन (क्रिसमस); और हिन्दू त्योहार होली तथा दीपावली। ये सभी पर्व बिहार की सांस्कृतिक विविधता और सामूहिक उत्साह को दर्शाते हैं।
प्र.33: बिहार के फल और कृषि उत्पाद कौन-कौन से हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में कई प्रकार के स्वादिष्ट फल और कृषि उत्पाद उगाए जाते हैं। प्रमुख फलों में लीची और विभिन्न प्रकार के आम शामिल हैं, जैसे जर्दालु आम, चौसा आम, बेतिया का डंका और दीघा का दूधिया मालदह। ये फल न केवल स्वाद में विशेष हैं, बल्कि राज्य की कृषि और आर्थिक पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्र.34: बिहार के लोगों की जीवन शैली कैसी है?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार के लोग मुख्यतः कृषि पर निर्भर हैं और उनका जीवन खेती-किसानी के इर्द-गिर्द घूमता है। यहाँ के लोग मेहनती और जीवट होते हैं तथा मुश्किल परिस्थितियों में भी आशावादी रहते हैं। उनकी जीवन शैली में पारंपरिक खान-पान, वस्त्र और रहन-सहन की प्रथाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जो स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतिबिंब हैं।
प्र.35: बिहार के लोग अपनी जीवन शैली में पर्यावरण के अनुसार क्या अनुकूलन करते हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार के लोग अपने जीवन और कार्यों में मौसम, जलवायु और पर्यावरण के अनुसार समायोजन करते हैं। वे खेती के तरीकों, भोजन की आदतों, पहनावे, उद्योगों और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को इसी अनुसार ढालते हैं, ताकि प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल जीवन यापन और आर्थिक गतिविधियाँ सुचारू रूप से चलती रहें।
प्र.36: बिहार में शिक्षा और जन चेतना पर भाषण प्रतियोगिता का क्या महत्व था?
उत्तर: नीलम के अनुसार इस भाषण प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों के माध्यम से बिहार की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक जानकारियों को साझा करना था। इसके साथ ही, यह प्रतियोगिता लोगों में जन चेतना बढ़ाने, ज्ञानवर्धन करने और समाज में जागरूकता फैलाने का भी एक प्रभावी माध्यम साबित हुई।
प्र.37: बिहार के लोक कला और संस्कृति से रोजगार का क्या संबंध है?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार की लोक कला और शिल्प, जैसे मधुबनी पेंटिंग, सिल्क उद्योग, जूट उत्पादन और बटन बनाने के कुटीर उद्योग, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के महत्वपूर्ण साधन हैं। इन कलाओं और उद्योगों के माध्यम से न केवल सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित किया जाता है, बल्कि लोगों की आजीविका और आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ किया जाता है।
प्र.38: बिहार के लोग बाढ़ और सुखाड़ जैसी कठिनाइयों में कैसे जीवट रहते हैं?
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार के लोग प्राकृतिक आपदाओं, जैसे बाढ़ और सूखे, जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना साहस, मेहनत, बुद्धिमत्ता और धैर्य के साथ करते हैं। वे विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते और अपनी सामूहिक मेहनत और सूझबूझ से राज्य की प्रगति और विकास में सक्रिय योगदान देते हैं।
प्र.39: बिहार की प्रमुख जलनदियाँ और उनके प्रभाव का वर्णन करें।
उत्तर: नीलम के अनुसार बिहार में कई महत्वपूर्ण नदियाँ बहती हैं, जिनमें गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, महानंदा, सोन और फल्गू प्रमुख हैं। ये नदियाँ राज्य की सिंचाई और कृषि के लिए जीवनदायिनी हैं। हालांकि, हिमालय से बहकर आने वाली वर्षा का जल कभी-कभी इन नदियों में बाढ़ का कारण बन जाता है, जिससे कुछ जिलों में जनजीवन प्रभावित होता है और कृषि तथा स्थानीय आवासों को नुकसान पहुँचता है।
प्र.40: बिहार दिवस आयोजन से बच्चों और जनता को क्या संदेश मिला?
उत्तर:नीलम के अनुसार बिहार दिवस के आयोजन के माध्यम से बच्चों और जनता को राज्य की जीवन शैली, लोक परंपराएँ, कृषि और उद्योग, सांस्कृतिक धरोहर, प्रमुख त्योहार और प्राकृतिक परिस्थितियों के प्रति जागरूक किया गया। इसके साथ ही, इस आयोजन ने लोगों को बिहार की गौरवशाली परंपराओं और ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराते हुए राष्ट्रीय और सामाजिक पहचान को भी मजबूत किया।
Answer by Mrinmoee