Chapter 11 

                                                   कबीर के दोहे


1. ‘काल्ह करे सो आज कर, आज करे सो अब’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: कबीर कहते हैं कि जीवन बहुत अस्थिर है। जो कार्य कल पर टालते हैं, वह कभी पूरा नहीं होता। इसलिए जो करना है, उसे तुरंत करना चाहिए। समय की अनिश्चितता का बोध कराते हुए वे सक्रियता और तत्परता का संदेश देते हैं।

2. ‘पल में परलै होयगी बहुरि करेगा कब’ में कबीर जीवन के किस पहलू की ओर संकेत कर रहे हैं?

उत्तर: यह जीवन की क्षणभंगुरता का बोध कराता है। कबीर कहते हैं कि मृत्यु और प्रलय अचानक आ सकती है, इसलिए काम टालना व्यर्थ है। प्रत्येक पल का सदुपयोग आवश्यक है।

3. ‘साँईं इतना दीजिए जामे कुटुम समाय’ से कबीर किस मूल्य का संदेश देते हैं?

उत्तर: यह संतोष, संयम और दानशीलता का संदेश है। कबीर चाहते हैं कि जितना आवश्यक है, वही दिया जाए ताकि परिवार और जरूरतमंद दोनों संतुष्ट रहें।

4. ‘मैं भी भूखा ना रहूँ, साधु न भूखा जाय’ से सामाजिक दृष्टिकोण क्या स्पष्ट होता है?

उत्तर: कबीर समाज सेवा, मानवता और अतिथि सत्कार को महत्व देते हैं। यह बताता है कि व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर दूसरों की भूख मिटाना और सहयोग करना धर्म है।

5. ‘निंदक नियरे राखिए’ का क्या तात्पर्य है?

उत्तर: निंदक हमारे दोषों को स्पष्ट करता है। उसे पास रखना चाहिए क्योंकि वह हमारी आत्म-सुधार की प्रेरणा है। कबीर बताते हैं कि आलोचना भी लाभकारी हो सकती है।

6. ‘बिन साबुन पानी बिना, निरमल करे सुभाय’ का क्या संदेश है?

उत्तर: आलोचना बिना किसी कठोरता के व्यक्ति को भीतर से शुद्ध और सुधरने का अवसर देती है। जैसे साबुन और पानी शरीर को साफ करते हैं, वैसे ही निंदक व्यक्ति के चरित्र को निर्मल बनाते हैं।

7. ‘जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान’ से कबीर किस सामाजिक रूढ़िवाद की आलोचना करते हैं?

उत्तर: कबीर जातिवाद और भौतिक भेदभाव का विरोध करते हैं। वे कहते हैं कि व्यक्ति की असली पहचान उसकी जाति या परिवार से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, सद्गुण और चरित्र से होती है।

8. ‘मोल करो तलवार का पड़ा, रहन दो म्यान’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि मूल्य वस्तु के वास्तविक गुण और उपयोगिता के अनुसार तय करें। जैसे तलवार की कीमत उसके ब्लेड से तय होती है, म्यान नहीं। यानी इंसान को उसके ज्ञान, गुण और कार्य के आधार पर आंका जाना चाहिए।

9. ‘सोना, सज्जन, साधुजन टूटे जुरै सौ बार’ का अर्थ क्या है?

उत्तर: यह बताता है कि अच्छे लोग और सज्जन अनेक कठिनाइयों और संघर्षों का सामना कर सकते हैं। वे बार-बार प्रयास करते हैं और कमजोर नहीं पड़ते।

10. ‘दुर्जन, कुंभ-कुम्हार कै, एकै धका दरार’ का संदेश क्या है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि दुराचारी और कमजोर लोग एक छोटे प्रयास से भी टूट सकते हैं। यहां कबीर अच्छाई और बुराई की तुलना कर रहे हैं।

11. ‘पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय’ से कबीर किस शिक्षा को उजागर करते हैं?

उत्तर: केवल किताबें पढ़ लेने से विद्वान नहीं बनते। ज्ञान को अनुभव, समझ और प्रेम के साथ जोड़ना आवश्यक है।

12. ‘ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय’ का संदेश क्या है?

उत्तर: प्रेम और भक्ति में गहरा ज्ञान है। जो व्यक्ति प्रेम की सच्चाई समझता है, वही वास्तविक पंडित है।

13. ‘बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: कबीर कहते हैं कि जब वे बुराई देखने गए, तो उन्हें कोई बुरा नहीं मिला। यह दर्शाता है कि बुराई बाहरी नहीं, बल्कि हमारे अंदर होती है।

14. ‘जो दिल खोजा आपनो, मुझ सा बुरा न कोय’ से कबीर क्या समझाना चाहते हैं?

उत्तर: व्यक्ति की सबसे बड़ी बुराई उसका अपना अहंकार, लालच और दोष है। बाहरी दुनिया में दोष तलाशने से पहले आत्म-निरीक्षण जरूरी है।

15. कबीर ने जीवन में समय की अनिश्चितता पर जोर क्यों दिया?

उत्तर: जीवन क्षणभंगुर है। विलंब से कार्य करना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए कार्य को तत्क्षण करना चाहिए।

16. संतोष और साधुता के संदर्भ में कबीर का दृष्टिकोण क्या है?

उत्तर: कबीर कहते हैं कि आवश्यकतानुसार भोजन और जीवनयापन पर्याप्त है। अत्यधिक लालच या भौतिक सुखों के पीछे भागना मूर्खता है।

17. आलोचना को पास रखने की सलाह कबीर क्यों देते हैं?

उत्तर: आलोचना व्यक्ति की आत्म-चिंतन और सुधार की प्रेरणा देती है। बिना आलोचना के कोई भी व्यक्ति स्वयं को सुधार नहीं सकता।

18. जातिवाद पर कबीर की दृष्टि क्या है?

उत्तर: जाति, वर्ग या जन्म से व्यक्ति की महानता नहीं निर्धारित होती। असली मूल्य उसके ज्ञान, कर्म और आचरण में होता है।

19. ‘तलवार का पड़ा’ और ‘म्यान’ के उदाहरण से कबीर ने क्या दर्शाया?

उत्तर: वास्तविक मूल्य और उपयोगिता को पहचाना जाए। दिखावे, बाहरी आवरण या सामाजिक पद से नहीं।

20. सज्जन और दुरजन की तुलना कबीर ने क्यों की?

उत्तर: यह अच्छाई और बुराई के स्थायित्व को दर्शाने के लिए है। अच्छाई मजबूत, बुराई कमजोर होती है।

21. ज्ञान और पुस्तकों के संबंध में कबीर की शिक्षा क्या है?

उत्तर: केवल पढ़ाई से विद्वान नहीं बनते। ज्ञान अनुभव, समझ और प्रेम के साथ होना चाहिए।

22. प्रेम को ज्ञान से जोड़ने का कबीर का अर्थ क्या है?

उत्तर: प्रेम में आत्मीयता और सत्य का अनुभव होता है। प्रेम को समझने वाला व्यक्ति ही वास्तविक ज्ञानी होता है।

23. बुराई की तलाश करने पर कबीर ने किस प्रकार आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता बताई?

उत्तर: बाहरी दोषों को देखने से पहले व्यक्ति को अपने भीतर की बुराई को पहचानना चाहिए।

24. कबीर के दोहों में मानव जीवन के प्रमुख उद्देश्य क्या बताए गए हैं?

उत्तर: संतोष, प्रेम, ज्ञान, समय की कदर, और दूसरों के प्रति सहानुभूति जीवन के उद्देश्य हैं।

25. बुराई का मूल कबीर के अनुसार कहाँ है?

उत्तर: बुराई व्यक्ति के अपने हृदय और मन में है, बाहरी दुनिया में नहीं।

26. कबीर ने सादगी और संयम पर कैसे जोर दिया?

उत्तर: ‘साँईं इतना दीजिए’ में दिखाया गया कि आवश्यकता से अधिक नहीं चाहिए। यह संतोष और संयम की शिक्षा है।

27. दोहों में समय और कर्म का संबंध कैसे बताया गया?

उत्तर: कार्य को कल पर टालना व्यर्थ है। समय अनिश्चित है और हर पल मूल्यवान है।

28. आलोचना से आत्म-सुधार का क्या संबंध है?

उत्तर: आलोचना व्यक्ति को अपने दोष पहचानने और सुधारने का अवसर देती है।

29. जातिवाद और ज्ञान की तुलना कबीर के अनुसार कैसे की गई?

उत्तर: जाति मायावी है, असली मूल्य ज्ञान और कर्म में है।

30. अच्छाई और बुराई की तुलना में कबीर का मूल संदेश क्या है?

उत्तर: अच्छाई दृढ़ और टिकाऊ है, बुराई क्षणिक और कमजोर।

31. प्रेम को पढ़ने की महत्ता क्यों बताई गई?

उत्तर: प्रेम में जीवन का सार और अनुभव छिपा है। केवल प्रेम से ही वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है।

32. ‘बुरा जो देखन मैं चला’ से आत्म-निरीक्षण का संदेश क्या मिलता है?

उत्तर: बाहरी दोषों के बजाय अपने भीतर झाँकना अधिक महत्वपूर्ण है।

33. दोहों में संतोष का महत्व कैसे व्यक्त हुआ?

उत्तर: आवश्यकतानुसार ही संतोष करना और अतिव्यापी लालच से दूर रहना।

34. मानव जीवन में दूसरों के प्रति दया कबीर के अनुसार क्यों जरूरी है?

उत्तर: यह समाज में मेलजोल और भाईचारा बनाए रखता है। भूखे को भोजन देना सर्वोच्च धर्म है।

35. समय की अनिश्चितता से कौन-सी शिक्षा मिलती है?

उत्तर: कार्य को टालना व्यर्थ है। वर्तमान में तत्पर रहना चाहिए।

36. निंदक को मित्र बनाने का क्या लाभ है?

उत्तर: व्यक्ति को सुधारने और दोष दूर करने की प्रेरणा मिलती है।

37. ज्ञान और विद्वत्ता में क्या अंतर कबीर बताते हैं?

उत्तर: केवल पढ़ाई से विद्वान नहीं बनते। अनुभव और प्रेम से वास्तविक ज्ञान आता है।

38. बाहरी बुराई की तलाश की बजाय आत्मनिरीक्षण क्यों जरूरी है?

उत्तर: व्यक्ति की सबसे बड़ी बुराई उसका अपना अहंकार और दोष है।

39. कबीर के दोहों से जीवन के कौन-कौन से मूल्य सिखते हैं?

उत्तर: प्रेम, संतोष, ज्ञान, समय की कदर, दूसरों की सेवा, आत्मनिरीक्षण और समाज सेवा।

40. संपूर्ण पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: जीवन की क्षणभंगुरता को समझें, प्रेम और ज्ञान को अपनाएँ, दूसरों की सेवा करें, बाहरी भेदभाव और दोषों की बजाय आत्मनिरीक्षण करें।


Answer by Mrinmoee