Chapter 13
शक्ति और क्षमा
1. पाठ में किससे प्रारंभिक प्रशंसा की गई है?
उत्तर: पाठ में क्षमा, दया, तप, त्याग और मनोबल जैसी गुणों को सहारा बताया गया है, और नर-व्याघ्र, सुयोधन (राम) की वीरता और अद्भुत पराक्रम की प्रशंसा की गई है।
2. पाठ में ‘नर-व्याघ्र, सुयोधन’ किसके लिए प्रयुक्त हैं?
उत्तर: ‘नर-व्याघ्र, सुयोधन’ भगवान राम के लिए प्रयुक्त शब्द हैं, जो उनके वीरता, साहस और पराक्रम को दर्शाते हैं।
3. पाठ में किस प्रकार की क्षमा का उल्लेख है?
उत्तर: पाठ में क्षमा की विशेषता बताई गई है कि यह केवल शक्ति और विजय के साथ पूज्य होती है। बलहीन, सरल और दंतहीन व्यक्ति की क्षमा का कोई मूल्य नहीं होता।
4. पाठ में ‘तीन दिवस तक पंथ माँगते रघुपति’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह अयोध्यापति राम की धैर्यशीलता और न्यायप्रियता को दर्शाता है। तीन दिन तक उन्होंने प्रतिपक्ष से शांति और समाधान की आशा की।
5. पाठ में सागर के सामने कोई नाद न उठने का क्या संकेत है?
उत्तर: इसका संकेत यह है कि समुद्र भी शांत था और किसी ने कोई आवाज़ नहीं उठाई। इसका अर्थ है कि सभी निश्चल और प्रतीक्षा में थे, लेकिन राम की वीरता और शक्ति अंततः प्रकट हुई।
6. ‘उठी अधीर धधक पौरुष की आग राम के शर से’ का भावार्थ क्या है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि जब समय आया तो राम की शक्ति और वीरता प्रकट हुई और अधीरता, साहस और वीरता की आग जग में फैल गई।
7. पाठ में सिन्धु ने किस प्रकार की प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: सिन्धु ने त्राहि-त्राहि करते हुए राम के शरण में आश्रय लिया। इसका अर्थ है कि शक्तिशाली वीरता और शौर्य के सामने दुश्मनों की हार निश्चित थी।
8. पाठ में ‘शरण में गिरा, चरण पूज, दासता ग्रहण की’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह बताता है कि प्रतिद्वंद्वी ने राम के चरणों में गिरकर शरण ली, उनका सम्मान किया और अपने को उनके अधीन स्वीकार किया।
9. पाठ में ‘सच पूछो, तो शर में ही वसती है दीप्ति विनय की’ का क्या संदेश है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि विनय और भक्ति की दीप्ति केवल उस व्यक्ति में होती है जो शक्ति और साहस के साथ संयम और विनम्रता भी रखता है।
10. पाठ में ‘संधि-वचन संपूज्य उसी का जिसमें शक्ति विजय की’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति शक्ति और विजय प्राप्त करता है, उसकी संधि और वचन का सम्मान किया जाता है।
11. पाठ में सहनशीलता, क्षमा और दया को क्यों पूज्य बताया गया है?
उत्तर: क्योंकि यह गुण समाज और जगत में स्थायित्व और सम्मान देते हैं। केवल बल ही पर्याप्त नहीं है; सहनशीलता और दया के साथ बल की महत्ता बढ़ती है।
12. बल का दर्प चमकने का क्या भावार्थ है?
उत्तर: यह दर्शाता है कि जब व्यक्ति के अंदर शक्ति और साहस होते हैं और वह उन्हें उचित तरीके से प्रयोग करता है, तब उसकी महिमा और प्रतिष्ठा जगत में प्रकट होती है।
13. पाठ में राम की वीरता किस प्रकार प्रदर्शित हुई?
उत्तर: राम की वीरता समुद्र और दुश्मनों के सामने उनके शर और पौरुष की आग के रूप में प्रकट होती है। उन्होंने अपने साहस और पराक्रम से विपरीत परिस्थितियों में विजय प्राप्त की।
14. ‘त्राहि-त्राहि करता आ गिरा शरण में’ में किन भावों का मिश्रण है?
उत्तर: इसमें भय, विनम्रता और आत्मसमर्पण के भाव प्रकट हैं। विरोधी राम के साहस और शक्ति के सामने हार स्वीकार करते हैं।
15. पाठ में शक्ति और विनम्रता का संबंध किस रूप में दिखाया गया है?
उत्तर: पाठ में यह दिखाया गया है कि शक्ति और विजय के साथ विनम्रता और क्षमा का होना आवश्यक है; केवल बल के साथ विनम्रता न हो तो उसका प्रभाव कम होता है।
16. पाठ में संधि और वचन का महत्व कैसे दिखाया गया है?
उत्तर: पाठ में बताया गया है कि वही व्यक्ति सम्माननीय होता है जिसका बल और विजय हो। उसके संधि और वचन को सभी मानते हैं।
17. राम के शर का क्या महत्व है?
उत्तर: राम का शर शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक है। इसका प्रयोग अधीरता और दुष्टों को पराजित करने के लिए किया गया।
18. पाठ में समुद्र का शांत रहना किसका प्रतीक है?
उत्तर: यह प्रतीक है कि प्रकृति और जगत भी वीरता और पराक्रम के सामने सम्मान और प्रतीक्षा की स्थिति में रहते हैं।
19. पाठ में ‘अधीर धधक पौरुष की आग’ से क्या सिखने को मिलता है?
उत्तर: यह सिखाता है कि जब समय और अवसर आता है तो साहस, वीरता और शक्ति का उचित प्रयोग करना चाहिए।
20. पाठ में हनुमान या अन्य पात्रों का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
उत्तर: पाठ का फोकस केवल राम के साहस, शक्ति और क्षमा पर है। अन्य पात्रों का उल्लेख न करके राम की महिमा को मुख्य रखा गया है।
21. पाठ में क्षमा और वीरता का संतुलन कैसे दिखाया गया है?
उत्तर: पाठ में दिखाया गया है कि केवल क्षमा होना पर्याप्त नहीं है, बल और साहस के साथ क्षमा और दया का होना आवश्यक है।
22. पाठ में ‘त्राहि-त्राहि’ शब्द का भाव क्या है?
उत्तर: यह शब्द भय, संकट और विनम्रता के मिश्रित भाव को प्रकट करता है, जब दुश्मन राम की शक्ति के सामने हार मानते हैं।
23. पाठ में रघुपति का कौन-सा गुण विशेष रूप से प्रदर्शित हुआ?
उत्तर: रघुपति की धैर्यशीलता, वीरता और न्यायप्रियता विशेष रूप से प्रदर्शित हुई। तीन दिन तक वे शांति की आशा रखते हैं।
24. पाठ में संदेश क्या है कि शक्ति का प्रयोग कब शोभा देता है?
उत्तर: शक्ति का प्रयोग तभी शोभा देता है जब उसे विनम्रता, सहनशीलता और न्याय के साथ किया जाए।
25. पाठ में शरणागति का क्या महत्व है?
उत्तर: यह दिखाता है कि असत्य और अन्याय के सामने सत्य और वीरता के प्रति सम्मान और आत्मसमर्पण करना आवश्यक है।
26. पाठ में दया और क्षमा का सामाजिक महत्व क्या बताया गया?
उत्तर: दया और क्षमा से समाज में स्थायित्व, सम्मान और आदर्श स्थापित होता है। केवल शक्ति से नहीं।
27. पाठ में ‘दीप्ति विनय की वसती है शर में’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि वीरता और शक्ति में जो सुंदरता और प्रभाव है, वह तभी पूर्ण होता है जब उसमें विनम्रता और शिष्टाचार हो।
28. पाठ में राम की शक्ति का नैतिक पक्ष कैसे दिखाया गया है?
उत्तर: राम की शक्ति का नैतिक पक्ष यह है कि वे केवल शत्रु पर विजय पाने के लिए नहीं, बल्कि न्याय और धर्म की रक्षा के लिए शक्ति का प्रयोग करते हैं।
29. पाठ में शक्ति और विजय के बीच का संबंध क्या है?
उत्तर: विजय तभी सार्थक होती है जब उसे उचित बल, साहस और नैतिकता के साथ अर्जित किया जाए।
30. पाठ में वीरता और साहस के प्रदर्शन का उदाहरण क्या है?
उत्तर: तीन दिन तक शांत रहने के बाद राम के शर से पौरुष की आग का प्रकट होना, और सिन्धु का त्राहि-त्राहि करना।
31. पाठ में दुष्टों का कौन-सा चरित्र दिखाया गया?
उत्तर: पाठ में कौरवों का चरित्र दिखाया गया है, जो राम को कायर समझते हैं लेकिन अंततः हार मानते हैं।
32. पाठ में सहनशीलता का महत्व किस प्रकार बताया गया है?
उत्तर: सहनशीलता के बिना शक्ति का उचित उपयोग नहीं हो सकता। राम ने धैर्य दिखाते हुए तीन दिन शांतिपूर्वक इंतजार किया।
33. पाठ में विजय के लिए किन गुणों का होना आवश्यक बताया गया है?
उत्तर: साहस, शक्ति, वीरता, सहनशीलता, दया और क्षमा।
34. पाठ में ‘बल का दर्प’ किसके पीछे चमकता है?
उत्तर: बल का दर्प उस व्यक्ति के पीछे चमकता है जो शक्ति और विजय के साथ सहनशील और दयालु हो।
35. पाठ में वीरता और विनम्रता का संतुलन कैसे समझाया गया?
उत्तर: वीरता और शक्ति तभी पूज्य और प्रभावी होती है जब विनम्रता और क्षमा उसके साथ जुड़ी हो।
36. पाठ में राम की शक्ति का प्रतीक क्या है?
उत्तर: राम का शर शक्ति और वीरता का प्रतीक है।
37. पाठ में समुद्र और पौरुष की आग का प्रतीकात्मक महत्व क्या है?
उत्तर: समुद्र का शांत रहना प्रतीक है कि प्रकृति भी वीरता के सामने शांत रहती है। पौरुष की आग शक्ति और साहस की प्रकट होती शक्ति को दिखाती है।
38. पाठ में पौरुष और क्षमा के बीच क्या संदेश है?
उत्तर: पौरुष और क्षमा दोनों साथ होने चाहिए। केवल पौरुष या केवल क्षमा पर्याप्त नहीं है।
39. पाठ में त्राहि-त्राहि करते सिन्धु की स्थिति का नैतिक संदेश क्या है?
उत्तर: यह दिखाता है कि न्याय और वीरता के सामने अहंकार और अन्याय का अंत होना निश्चित है।
40. संपूर्ण पाठ से क्या सीख मिलती है?
उत्तर: यह पाठ सिखाता है कि शक्ति, वीरता और साहस के साथ सहनशीलता, क्षमा और दया होना चाहिए। सत्य और धर्म के लिए वीरता का प्रयोग हमेशा सम्मान और विजय दिलाता है।
Answer by Mrinmoee