Chapter 17

                                                                  सोना


1. प्रश्न: सोना की शारीरिक विशेषताएँ और शिशु अवस्था में उसकी नाजुकता कैसे वर्णित की गई है?
उत्तर: सोना का शरीर कोमल और लघु था, सुनहरे रेशमी लच्छों की तरह। उसका छोटा मुँह, बड़ी पानीदार आँखें, लंबे कान और पतली सुडौल टाँगें थीं। उसकी सरल शिशु रूप से सभी प्रभावित हुए और उसका नाम सोना, सुवर्णा, स्वर्णलेखा पड़ा।

2. प्रश्न: मानव समाज में सोना के आगमन के पीछे क्या कारण था?
उत्तर: सोना मानव समाज में इसलिए आई क्योंकि उसकी माता शिकारियों से बचते हुए मृग-समूह में अपनी संतान सुरक्षित नहीं रख सकी। मानव की निष्ठुर मनोरंजनप्रियता के कारण वह अपने अरण्य परिवेश और स्वजाति से दूर आ गई।

3. प्रश्न: हिरन के प्रति मानव की निष्ठुरता और मनोरंजनप्रियता पाठ में कैसे दर्शाई गई है?
उत्तर: पाठ में बताया गया कि मनुष्य पक्षी और हिरन जैसी निर्दोष प्राणियों को केवल मनोरंजन के लिए मारता है। उनके सुंदर और गतिमय सौंदर्य का आनंद लेने के बजाय उन्हें चोट पहुँचाना, हत्या करना मानव की निष्ठुरता को दर्शाता है।

4. प्रश्न: सोना को पालने में लेखक को कौन-कौन सी चुनौतियाँ आईं?
उत्तर: सोना का मुख छोटा था और उसे दूध पीना नहीं आता था। उसे बोतल से दूध पिलाना, कच्ची सब्ज़ी खिलाना और उसकी सामान्य देखभाल करना कठिन था। उसे अँधेरे में पलंग के पास बैठना और साफ-सफाई की आदत डालना भी प्रशिक्षण मांगता था।

5. प्रश्न: सोना के विद्यार्थियों और छात्रावास के बच्चों के साथ संबंध किस प्रकार का था?
उत्तर: सोना विद्यार्थियों के लिए पहले कौतुक का कारण बनी, पर कुछ दिनों में उनकी प्रिय मित्र बन गई। बच्चों के साथ खेलती, उनके ऊपर से छलाँग लगाती और चौकड़ी भरती। बच्चों का उत्साह और प्रेम उसे आनंदित करता था।

6. प्रश्न: सोना के भोजन की आदतें और पसंद-नापसंद कैसी थीं?
उत्तर: सोना बिस्कुट को छोड़कर अधिकांश खाद्य पदार्थ कम पसंद करती थी। उसे कच्ची सब्ज़ियाँ अधिक भाती थीं। वह भोजन समय में अपने पालक के पास आकर सटकर खड़ी रहती और उसकी उपस्थिति में ही भोजन करती थी।

7. प्रश्न: सोना की स्नेही प्रवृत्ति और पालक के प्रति उसकी अभिव्यक्ति कैसे होती थी?
उत्तर: सोना अपने पालक के पास आकर शरीर रगड़ती, साड़ी का छोर मुँह में भर लेती और चोटी चबाती। जब डाँट पड़ती, तो उसकी गोल और चकित आँखों में जिज्ञासा भरकर वह अनिर्वचनीय भाव व्यक्त करती।

8. प्रश्न: सोना अन्य प्राणियों और बच्चों के प्रति कैसी थी?
उत्तर: सोना बच्चों के साथ खेलना पसंद करती थी और छोटे जीवों के प्रति उसकी दृष्टि में विस्मय और चकित भाव झलकता था। वह फ्लोरा के बच्चों को भी अपने पीछे चलने देती और उन्हें संरक्षण प्रदान करती थी।

9. प्रश्न: हिरन और मानव के स्नेह संबंध में पाठ में क्या अंतर बताया गया है?
उत्तर: पाठ में कहा गया कि कुत्ता, स्वामी और सेवक स्नेह और क्रोध की भाषा पहचानता है, जबकि हिरन केवल स्नेह पहचानता है। यदि हिरन पर क्रोध किया जाए, तो वह विस्मय और प्रश्नात्मक दृष्टि से सामने खड़ा रहता है।

10. प्रश्न: सोना की आँखों और दृष्टि की विशेषताएँ वर्षभर में कैसे विकसित हुईं?
उत्तर: सोना हिरनी बनने के बाद उसकी आँखों के चारों ओर खिंची कज्जलकोर में नीले गोलक बने और दृष्टि में नीलम के बल्बों जैसी उजली विद्युत का स्फुरण दिखाई दिया।

11. प्रश्न: सोना का विद्यार्थियों के साथ खेल किस प्रकार का था?
उत्तर: सोना बच्चों के ऊपर से छलाँग लगाकर दूसरी ओर कूदती, चारों पैरों से संतुलन बनाए रखती और घंटों तक सरकस जैसा खेल करती।

12. प्रश्न: सोना अपने पालक के अनुपस्थित रहने पर कैसी रहती थी?
उत्तर: सोना पालक की अनुपस्थिति में अस्थिर और जिज्ञासु हो जाती थी। वह कुछ खोजती-सी घूमती और कभी-कभी कंपाउंड से बाहर निकल जाती थी।

13. प्रश्न: फ्लोरा का सोना के प्रति व्यवहार कैसे था?
उत्तर: फ्लोरा सोना की अहिंसक और स्नेही प्रवृत्ति से परिचित हो गई थी। वह अपने बच्चों को सोना के संरक्षण में छोड़कर स्वतंत्र रूप से घूमने चली जाती।

14. प्रश्न: सोना अपने पालक के प्रति क्या प्रकार का प्रेम और विश्वास दिखाती थी?
उत्तर: सोना केवल स्नेह पहचानती थी। यदि उसे प्रेम व्यक्त करना होता, तो वह पालक के सिर पर छलाँग लगाती, उसके आसपास घूमती और उसकी उपस्थिति में ही आनंद व्यक्त करती।

15. प्रश्न: सोना के पालन-पोषण में लेखक ने कौन-कौन सी चीज़ें उपलब्ध कराईं?
उत्तर: लेखक ने दूध पिलाने की शीशी, ग्लूकोज, बकरी का दूध आदि एकत्र किए और कठिन अनुष्ठान आरंभ किया ताकि सोना को सही ढंग से पाल सकें।

16. प्रश्न: सोना अपने पर्यावरण के प्रति कैसे प्रतिक्रिया देती थी?
उत्तर: सोना पर्यावरण के प्रति संवेदनशील थी। छोटे जीवों और बच्चों को देखकर चकित होती, खेल में उनके साथ सम्मिलित होती और प्रकृति में सक्रिय रहती।

17. प्रश्न: सोना के जीवन में मानव के आने और जाने का क्या प्रभाव था?
उत्तर: मानव की उपस्थिति से सोना आनंदित होती थी। अनुपस्थिति में वह अस्थिर और जिज्ञासु हो जाती थी। उसे सुरक्षा और स्नेह की आवश्यकता रहती थी।

18. प्रश्न: सोना के पालक की यात्रा के दौरान उसके अन्य पालतू जीवों का व्यवहार कैसा था?
उत्तर: हेमंत और वसंत, यात्रा के दौरान फ्लोरा के पास रहते और उसके आसपास दौड़ते। वे भौंकते और क्रंदन की ध्वनियों से उपालंभदेने का भाव व्यक्त करते।

19. प्रश्न: सोना के पालन-पोषण से पाठ में क्या सामाजिक और भावनात्मक शिक्षा मिलती है?
उत्तर: पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि प्राणी मात्र स्नेह, सुरक्षा और उचित देखभाल से ही विकसित होते हैं। मानव समाज में उनका संरक्षण और संवेदनशीलता आवश्यक है।

20. प्रश्न: सोना के सिर पर छलाँग लगाने के व्यवहार से क्या स्पष्ट होता है?
उत्तर: यह स्पष्ट होता है कि सोना अपने प्रेम और स्नेह को व्यक्त करने में उत्साही है, और उसका व्यवहार पूरी तरह से भरोसे और सहज विश्वास पर आधारित है।

21. प्रश्न: सोना के प्रति मानव समाज की प्रतिक्रिया किस प्रकार दिखाई दी?
उत्तर: मानव समाज में उसे पालने और खिलाने वाले लोग थे, लेकिन अधिकांश लोग उसकी संवेदनशीलता नहीं समझते थे। इसके बावजूद कुछ लोग उसे प्रेम और देखभाल प्रदान करते थे।

22. प्रश्न: सोना की दृष्टि और आँखों का विकास हिरनी बनने पर कैसे हुआ?
उत्तर: हिरनी बनने पर सोना की आँखों में गहरी दृष्टि, नीले गोलक और विद्युत जैसे चमकदार स्फुरण दिखाई देने लगा। यह उसकी सुंदरता और संवेदनशीलता को बढ़ाता है।

23. प्रश्न: सोना के शारीरिक और मानसिक विकास में वर्षभर के अनुभवों का क्या योगदान था?
उत्तर: वर्षभर के अनुभवों ने सोना को शारीरिक रूप से मजबूत और सुडौल बनाया। मानसिक रूप से वह बच्चों और छोटे जीवों के प्रति सहानुभूति और स्नेहशील बनी

24. प्रश्न: फ्लोरा और सोना के बीच का संबंध कैसे विकसित हुआ?
उत्तर: फ्लोरा ने सोना की अहिंसक और स्नेही प्रवृत्ति को समझा और उसे अपने बच्चों के संरक्षण में स्वतंत्र रूप से रहने दिया। दोनों के बीच विश्वास और सहयोग का संबंध बन गया।

25. प्रश्न: सोना के खेल और आनंद का पर्यावरण पर क्या प्रभाव था?
उत्तर: सोना के खेल और आनंद से छात्रावास का वातावरण जीवंत और आनंदमय हो गया। बच्चों और पालतू जीवों के साथ उसका खेल आनंद और उत्साह फैलाता था।

26. प्रश्न: सोना और बच्चों के बीच खेल किस प्रकार का था और उसका महत्व क्या था?
उत्तर: खेल में सोना बच्चों के ऊपर से छलाँग लगाती, चौकड़ी भरती और घंटों तक उनका मनोरंजन करती। यह बच्चों और सोना दोनों के लिए आनंद और सामाजिक सहभागिता का माध्यम था।

27. प्रश्न: सोना के पालक की अनुपस्थिति में उसका व्यवहार क्या दर्शाता है?
उत्तर: अनुपस्थिति में सोना अस्थिर और जिज्ञासु हो जाती थी। यह दर्शाता है कि उसके लिए स्नेह और सुरक्षा की निरंतर आवश्यकता थी।

28. प्रश्न: सोना अपने पालक की यात्रा के समय किस प्रकार प्रतिक्रिया देती थी?
उत्तर: सोना उदास होती थी, कुछ खोजती रहती थी और फ्लोरा तथा अन्य पालतू जीवों के साथ अपने स्नेह और सुरक्षा की आवश्यकता व्यक्त करती थी।

29. प्रश्न: सोना के पालन-पोषण में लेखक की प्रतिबद्धता कैसे दिखाई देती है?
उत्तर: लेखक ने दूध, ग्लूकोज और देखभाल के अन्य साधन जुटाए, कठिन अनुष्ठान अपनाया और सोना को पालने में पूर्ण समर्पण दिखाया।

30. प्रश्न: सोना की प्राकृतिक प्रवृत्ति और मानव समाज में उसके अनुभवों के बीच क्या अंतर है?
उत्तर: सोना प्राकृतिक रूप से स्वतंत्र और अहिंसक थी, पर मानव समाज में उसे सुरक्षा, भोजन और स्नेह की आवश्यकता थी। यह अंतर उसकी सहजता और संवेदनशीलता को दर्शाता है

31. प्रश्न: सोना के जीवन में सुरक्षा और स्नेह का महत्व क्यों था?
उत्तर: सोना निर्दोष और नाजुक थी। मानव समाज में उसकी सुरक्षा और स्नेह के बिना उसका जीवन असुरक्षित और असंतुलित था।

32. प्रश्न: सोना के पालन-पोषण से बच्चों और पालतू जीवों को क्या लाभ हुआ?
उत्तर: सोना के साथ खेलकर और उसकी देखभाल में शामिल होकर बच्चों और पालतू जीवों ने सामाजिकता, सहयोग और संवेदनशीलता का अनुभव किया।

33. प्रश्न: सोना के सिर पर छलाँग लगाने का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?
उत्तर: यह व्यवहार स्नेह, उत्साह और विश्वास को दर्शाता है। सोना अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए यह करतब करती थी।

34. प्रश्न: सोना के पालन-पोषण में कितनी मेहनत और धैर्य की आवश्यकता थी?
उत्तर: सोना को दूध पिलाना, बोतल पहचानाना, साफ-सफाई और आदतें डालना कठिन था। इसके लिए लेखक को धैर्य और मेहनत से लगातार पालन-पोषण करना पड़ा।

35. प्रश्न: सोना और फ्लोरा के बच्चों के बीच का व्यवहार कैसा था?
उत्तर: सोना ने बच्चों को अपने पीछे घूमने दिया और उनका संरक्षण किया। बच्चों के प्रति उसकी प्रवृत्ति स्नेही और सहानुभूतिपूर्ण थी।

36. प्रश्न: सोना के पालन-पोषण में लेखक की उपस्थिति क्यों महत्वपूर्ण थी?
उत्तर: सोना की सहज चेतना में पालक की अनुपस्थिति से अस्थिरता और जिज्ञासा पैदा होती थी। लेखक की उपस्थिति उसके आनंद और सुरक्षा के लिए आवश्यक थी।

37. प्रश्न: सोना के व्यवहार से प्राणी और मानव के बीच संवेदनशीलता का क्या उदाहरण मिलता है?
उत्तर: सोना केवल स्नेह को पहचानती थी, उसकी प्रतिक्रिया और व्यवहार दिखाते थे कि प्राणी भी मानवीय स्नेह और विश्वास के प्रति संवेदनशील होते हैं।

38. प्रश्न: सोना का समाजिक और शारीरिक विकास कैसे हुआ?
उत्तर: सोना हिरनी बनने के बाद सुडौल टाँगों, चमकदार खुरों, लचीली ग्रीवा और विद्युत जैसे दृष्टि स्फुरण के साथ विकसित हुई।

39. प्रश्न: सोना के पालन-पोषण का पाठक या बच्चे के लिए क्या नैतिक संदेश है?
उत्तर: यह पाठ यह सिखाता है कि प्राणी की देखभाल में स्नेह, धैर्य, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी आवश्यक है।

40. प्रश्न: सोना के जीवन और उसके अनुभवों से मानवता के प्रति क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: सोना के जीवन से शिक्षा मिलती है कि निर्दोष प्राणी मात्र मनोरंजन का साधन नहीं हैं; उन्हें सुरक्षा, स्नेह और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है।


Answer by Mrinmoee