Chapter 18

                                                        हुएनत्सांग की भारत यात्रा 


1. प्रश्न: हुएनत्सांग ने पतझड़ के मौसम में सुमेरु पर्वत को देखकर क्या अनुभव किया और उसे कैसे देखा?
उत्तर: हुएनत्सांग ने सुमेरु पर्वत को सोना, चांदी, रत्न और जवाहरातों से निर्मित विशाल एवं सुंदर पर्वत के रूप में देखा। उन्होंने इसे दैवी और आकाशीय मानकर आनंदित महसूस किया।

2. प्रश्न: सुमेरु पर्वत तक पहुँचने में उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर: सुमेरु पर्वत तक पहुँचने में उन्हें भयंकर समुद्र की ऊँची लहरों, पाषाण-कमल की अस्थिरता और स्वप्न में आने वाले तेज बवंडर जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

3. प्रश्न: पाषाण-कमल ने उन्हें पर्वत तक पहुँचाने में किस प्रकार मदद की?
उत्तर: पाषाण-कमल बार-बार दिखाई देता और गायब होता, जिससे हुएनत्सांग उस पर कदम रखते हुए धीरे-धीरे पवित्र पर्वत तक पहुँच सके।

4. प्रश्न: स्वप्न के अनुभव के बाद हुएनत्सांग ने क्या निर्णय लिया?
उत्तर: स्वप्न को शुभ शगुन मानकर हुएनत्सांग ने बुद्ध की जन्मभूमि, भारत की तीर्थ यात्रा प्रारंभ करने का निर्णय लिया।

5. प्रश्न: चीन से भारत जाने में किन बाधाओं का सामना हुआनत्सांग को करना पड़ा?
उत्तर: उन्हें कानूनी प्रतिबंध, पांच सिग्नल टावर, रेगिस्तान, हमी की सीमाएँ, और रास्तों में रेत के तूफान, नर-पिशाचों और लू-लपट जैसी प्राकृतिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

6. प्रश्न: लिएंग चाउ ने हुएनत्सांग की योजना के बारे में क्या किया और इसका प्रभाव क्या पड़ा?
उत्तर: लिएंग चाउ के जासूसों ने गवर्नर को जानकारी दी कि भिक्षु चीन से बाहर जा रहे हैं। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा।

7. प्रश्न: ज्ञानियों ने हुएनत्सांग को पश्चिमी रास्तों के बारे में क्या चेतावनी दी?
उत्तर: उन्हें बताया गया कि पश्चिमी रास्ते कठिन और खतरनाक हैं, रेत के तूफान और आंधियों से जीवन जोखिम में पड़ सकता है, और अकेले जाना खतरनाक है।

8. प्रश्न: हुएनत्सांग ने इन चेतावनियों के बावजूद क्या संकल्प लिया?
उत्तर: उन्होंने शपथ ली कि जब तक वे बुद्ध के देश नहीं पहुँचते, कभी चीन की ओर नहीं लौटेंगे और अगर रास्ते में मृत्यु हो जाए तो उसकी भी चिंता नहीं करेंगे।

9. प्रश्न: हुएनत्सांग ने भारत में पहले कहाँ ठहराव किया?
उत्तर: उन्होंने भारत में बोध गया में आठ या नौ दिन ठहरकर मार्गदर्शन और अध्ययन के अवसर प्राप्त किए।

10. प्रश्न: बोध गया में हुएनत्सांग ने किस प्रकार के लोगों से संपर्क किया?
उत्तर: वहाँ उन्होंने लगभग एक हजार ब्राह्मण परिवारों से संपर्क किया, जिन्हें ऋषियों की संतानों के रूप में पूजनीय माना जाता था।

11. प्रश्न: नालंदा मठ से हुएनत्सांग को क्यों चार भिक्षु लेने आए?
उत्तर: उन्होंने नालंदा के प्रसिद्ध विद्वान शीलभद्र से योगशास्त्र पर अध्ययन और चर्चा करने हेतु आए थे।

12. प्रश्न: नालंदा मठ की विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर: मठ चार मंजिले कक्ष, ईंटों की दीवारें, रोशनदान, चमकदार फर्श, खम्भों पर उकेरी गई बेल-बूटियाँ, तालाबों में नील कमल और रक्ताभ कनक पुष्प जैसी सुंदरता से युक्त था।

13. प्रश्न: नालंदा के भिक्षुओं का अनुशासन और अध्ययन का तरीका कैसा था?
उत्तर: सभी भिक्षु कठोर नियमों का पालन करते थे, सुबह से शाम तक अध्ययन-अध्यापन करते थे, युवा और वृद्ध एक दूसरे की सहायता करते थे। शास्त्रार्थ में भाग लेने के लिए द्वारपाल प्रश्न पूछते और योग्य ही प्रवेश पाते।

14. प्रश्न: हुएनत्सांग ने नालंदा में किन ग्रंथों का अध्ययन किया?
उत्तर: उन्होंने बौद्ध और ब्राह्मण ग्रंथों का सूक्ष्म अध्ययन किया और भाषा, दर्शन, और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का गहन अध्ययन किया।

15. प्रश्न: शीलभद्र के स्वप्न का महत्व क्या था?
उत्तर: शीलभद्र ने देखा कि तीन देव आए और कहा कि चीन से एक भिक्षु आ रहा है जिसे शिक्षा ग्रहण करनी है। इससे शीलभद्र ने अपने जीवन को नया उद्देश्य दिया और हुएनत्सांग को शिक्षा देने का संकल्प लिया।

16. प्रश्न: हुएनत्सांग ने शीलभद्र के चरणों के सम्मुख कैसे सम्मान व्यक्त किया?
उत्तर: उन्होंने घुटनों के बल बैठकर चरणों का चुम्बन किया और भूमि पर सिर रखकर श्रद्धापूर्वक नम्रता दिखाई।

17. प्रश्न: हुएनत्सांग ने नालंदा में अध्ययन के दौरान किस प्रकार के विद्वानों से संवाद किया?
उत्तर: उन्होंने नालंदा के विद्वानों से भाषाई, दर्शन और धार्मिक विषयों पर वार्तालाप करके गहन ज्ञान प्राप्त किया।

18. प्रश्न: नालंदा में शास्त्रार्थ में भाग लेने की प्रक्रिया कैसी थी?
उत्तर: द्वारपाल प्रत्येक प्रतिभागी से प्रश्न पूछते, जिनका उत्तर न देने पर उन्हें प्रवेश नहीं मिलता। प्रतिभागियों को पूर्व में पुस्तकों का अध्ययन आवश्यक था।

19. प्रश्न: नालंदा मठ का भोजन और जीवनशैली किस प्रकार की थी?
उत्तर: भिक्षु सुबह से शाम तक अध्ययन करते और नियमों का पालन करते। युवा और वृद्ध एक-दूसरे की सहायता करते, और जीवन संयम एवं अनुशासन में व्यतीत होता।

20. प्रश्न: हुएनत्सांग ने भारत में कितने समय तक अध्ययन किया?
उत्तर: उन्होंने कई वर्ष नालंदा में अध्ययन और शेष भारत की यात्रा में बिताए।

21. प्रश्न: हुएनत्सांग की बुद्धि और क्षमता का अध्ययन में कैसे लाभ हुआ?
उत्तर: उनकी कुशाग्र बुद्धि ने उन्हें भाषा, दर्शन, और ग्रंथों का गहन अध्ययन करने में मदद की।

22. प्रश्न: नालंदा में शिक्षा प्राप्त करने वाले अन्य विद्यार्थियों के लिए नियम क्या थे?
उत्तर: उन्हें पूर्व में पुस्तकों का अध्ययन करना आवश्यक था और शास्त्रार्थ में योग्य होने पर ही प्रवेश मिलता।

23. प्रश्न: नालंदा मठ में भिक्षु किस प्रकार एक-दूसरे की सहायता करते थे?
उत्तर: युवा भिक्षु वृद्ध भिक्षुओं से सीखते और वृद्ध भिक्षु उन्हें मार्गदर्शन देते।

24. प्रश्न: नालंदा मठ में प्रवेश से पूर्व हुएनत्सांग को कितने भिक्षुओं ने निर्देश दिए?
उत्तर: लगभग 20 भिक्षुओं ने उन्हें विभिन्न प्रकार की जानकारी दी।

25. प्रश्न: नालंदा मठ का वातावरण छात्रों के लिए कैसे लाभदायक था?
उत्तर: कठोर नियम, अध्ययन-अध्यापन, और विद्वानों की संगति ने अध्ययन के लिए उपयुक्त वातावरण बनाया।

26. प्रश्न: नालंदा मठ में शीलभद्र के साथ हुएनत्सांग का प्रथम संवाद कैसा था?
उत्तर: उन्होंने श्रद्धापूर्वक चरण स्पर्श किया और शीलभद्र से शिष्य बनने का निवेदन किया।

27. प्रश्न: शीलभद्र ने हुएनत्सांग को क्यों शिष्य बनाने का निर्णय लिया?
उत्तर: स्वप्न में देवों के संकेत और धर्मज्ञान के प्रति हुएनत्सांग की लगन देखकर उन्होंने यह निर्णय लिया।

28. प्रश्न: हुएनत्सांग ने नालंदा मठ में भाषा का अध्ययन क्यों किया?
उत्तर: ताकि विद्वानों से संवाद कर सके और ग्रंथों का सही अर्थ समझ सके।

29. प्रश्न: नालंदा मठ की भौतिक संरचना के विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर: चार मंजिले कक्ष, रोशनदान, चमकदार फर्श, लाल-मूगिया खम्भे और तालाबों में कमल और रक्ताभ पुष्प।

30. प्रश्न: नालंदा मठ में विद्वानों के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: धर्म, दर्शन, भाषा और शास्त्रों का गहन अध्ययन कर ज्ञान और विद्वत्ता प्राप्त करना।

31. प्रश्न: शास्त्रार्थ में असफल विद्यार्थियों का क्या होता था?
उत्तर: द्वारपाल प्रश्न पूछते, उत्तर न देने वाले वापस चले जाते।

32. प्रश्न: नालंदा मठ में प्रवेश की शर्त क्या थी?
उत्तर: प्रत्येक विद्यार्थी को नई और पुरानी पुस्तकों का अध्ययन पूर्व में करना आवश्यक था।

33. प्रश्न: नालंदा मठ में शास्त्रार्थ का महत्व क्या था?
उत्तर: यह विद्यार्थियों की विद्वत्ता और समझ का परीक्षण करता था और योग्य ही प्रवेश पाते।

34. प्रश्न: शीलभद्र के स्वप्न में देवों का संदेश क्या था?
उत्तर: चीन से एक भिक्षु आ रहा है जिसे शिक्षा ग्रहण करनी है और उसे शिक्षित करना शीलभद्र का धर्म है।

35. प्रश्न: शीलभद्र की बीमारी और स्वप्न का क्या सम्बन्ध था?
उत्तर: शीलभद्र बीमार थे और स्वप्न ने उन्हें जीवन की इच्छा और हुएनत्सांग को शिक्षित करने का उद्देश्य दिया।

36. प्रश्न: हुएनत्सांग ने शीलभद्र से शिष्य बनने का निवेदन कैसे किया?
उत्तर: उन्होंने घुटनों के बल बैठकर चरण स्पर्श किया, भूमि पर सिर रखा और नम्रतापूर्वक कहा कि वे शिक्षा ग्रहण करने आए हैं।

37. प्रश्न: नालंदा मठ में अध्ययन की दिनचर्या कैसी थी?
उत्तर: सुबह से शाम तक अध्ययन, अनुशासन पालन, युवाओं और वृद्धों का सहयोग, शास्त्रार्थ और नियमों का कड़ाई से पालन।

38. प्रश्न: नालंदा मठ के भिक्षु किस प्रकार विद्वान थे?
उत्तर: वे सभी भिक्षु विद्वान, दक्ष और अपने विषयों में निपुण थे।

39. प्रश्न: हुएनत्सांग ने अध्ययन के दौरान किन विषयों में गहन ज्ञान प्राप्त किया?
उत्तर: भाषा, दर्शन, बौद्ध और ब्राह्मण ग्रंथों, योगशास्त्र और धर्म के सिद्धांतों में।

40. प्रश्न: नालंदा मठ में हुएनत्सांग के अध्ययन का मुख्य लाभ क्या था?
उत्तर: उनके बुद्धि का पूर्ण विकास हुआ, उन्होंने विद्वानों से संवाद और ज्ञान प्राप्त किया, और धर्म तथा दर्शन में गहन समझ हासिल की।


Answer by Mrinmoee