Chapter 19

                                                            आर्यभट्ट 


1. प्रश्न: मानव ने आकाश और नक्षत्रों के प्रति क्यों जिज्ञासा दिखाई?
उत्तर: मानव ने आकाश में चमकते सितारों और नक्षत्रों के रूप-रंग, आकार और रचना को जानने की जिज्ञासा दिखाई। वह यह जानना चाहता था कि किसी नक्षत्र पर अन्य लोग भी रहते होंगे और नक्षत्रों में घटने वाली घटनाओं का अनुभव प्राप्त करना चाहता था।

2. प्रश्न: मानव ने नक्षत्रों की खोजबीन के लिए कौन-कौन से उपाय किए?
उत्तर: युगों से परीक्षणों और प्रयोगों के द्वारा मानव ने नक्षत्रों की खोजबीन की और आज धरती पर बैठे-बैठे नक्षत्रों में घटने वाली घटनाओं को जानने में सक्षम हो गया।

3. प्रश्न: आर्यभट्ट का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी में अश्मक प्रदेश में हुआ था। अश्मक प्रदेश गोदावरी और नर्मदा के बीच के क्षेत्र को कहते हैं।

4. प्रश्न: आर्यभट्ट पाटलिपुत्र क्यों आए थे?
उत्तर: आर्यभट्ट पाटलिपुत्र इसलिए आए ताकि वे लोगों में व्याप्त अंधविश्वास दूर करें और उत्तर भारत के ज्योतिषियों के विचारों का अध्ययन कर अपने नए विचारों का प्रचार कर सकें।

5. प्रश्न: आर्यभट्ट की वेधशाला में कौन-कौन से उपकरण रखे गए थे?
उत्तर: उनकी वेधशाला में तांबे, पीतल और लकड़ी के तरह-तरह के यंत्र रखे गए थे, जिनसे उन्होंने गणना और नक्षत्रों के अध्ययन में प्रयोग किया।

6. प्रश्न: आर्यभट्ट को क्यों 'ज्योतिष सम्राट' कहा गया?
उत्तर: उन्हें 'ज्योतिष सम्राट' कहा गया क्योंकि उन्होंने ग्रह-नक्षत्रों की वास्तविक स्थिति और चाल का सटीक अध्ययन किया और अंधविश्वासों का खंडन किया।

7. प्रश्न: आर्यभटीय ग्रन्थ में कितनी पंक्तियाँ और श्लोक हैं?
उत्तर: आर्यभटीय ग्रन्थ में 242 पंक्तियाँ और 21 श्लोक हैं।

8. प्रश्न: आर्यभट्ट ने पृथ्वी के बारे में क्या कहा?
उत्तर: आर्यभट्ट ने कहा कि पृथ्वी गोल है और अपने धुरी पर घूमती है, जबकि उस समय यह विचार अंधविश्वास और धर्मग्रंथों के अनुसार पाप माना जाता था।

9. प्रश्न: आर्यभट्ट ने चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के कारण क्या बताए?
उत्तर: उन्होंने स्पष्ट किया कि चन्द्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की परछाईं चन्द्रमा पर पड़ती है और सूर्यग्रहण तब होता है जब चन्द्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है।

10. प्रश्न: आर्यभट्ट ने चन्द्रमा की प्रकृति के बारे में क्या स्पष्ट किया?
उत्तर: आर्यभट्ट ने बताया कि चन्द्रमा स्वयं नहीं चमकता, बल्कि वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है।

11. प्रश्न: सूरज, चाँद और नक्षत्रों की यात्रा के मार्ग को क्या कहा गया?
उत्तर: इन्हें ‘रविमार्ग’ कहा गया और इसी के आधार पर ज्योतिषियों ने बारह राशियों का विभाजन किया।

12. प्रश्न: आर्यभट्ट ने अपने ग्रन्थ में अंधविश्वास के प्रति क्या दृष्टिकोण अपनाया?
उत्तर: आर्यभट्ट ने ग्रन्थ में पूर्णतया विज्ञान पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया और किसी भी प्रकार का अंधविश्वास नहीं अपनाया।

13. प्रश्न: आर्यभट्ट की सबसे बड़ी गणितीय उपलब्धि क्या थी?
उत्तर: उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शून्य की उपयोगिता को प्रमाणित करना था, जिससे बड़ी संख्याएँ सरलता से लिखी जा सकती हैं।

14. प्रश्न: शून्य का प्रयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: शून्य के प्रयोग से गणना सरल होती है, कम्प्यूटर की माप संभव होती है और अंतरिक्षीय गणनाएँ इसके बिना असंभव हैं।

15. प्रश्न: आर्यभट्ट ने अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित में क्या योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने इन विषयों के अनेक सिद्धान्त दिए, वृत्त के व्यास और परिधि का सूत्र बताया और गणित की जटिल बारीकियों को सरल रूप में समझाया।

16. प्रश्न: आर्यभट्ट ने त्रिकोणमिति में क्या शोध किया?
उत्तर: उन्होंने त्रिकोण की तीन भुजाओं और उनके कोणों का अध्ययन किया और कोण की समिति की नई पद्धति खोजी।

17. प्रश्न: यूनानी गणितज्ञों ने आर्यभट्ट के सिद्धांतों को कैसे स्वीकार किया?
उत्तर: यूनानी गणितज्ञों ने आर्यभट्ट की त्रिकोणमिति और ज्यामिति के सिद्धांतों की चर्चा की और धीरे-धीरे यह ज्ञान यूरोप में फैला।

18. प्रश्न: आर्यभट्ट ने विज्ञान और धार्मिक विश्वासों के बीच क्या भेद दिखाया?
उत्तर: उन्होंने दिखाया कि विज्ञान की खोज का मार्ग धार्मिक विश्वासों से अलग है और वास्तविक ज्ञान पर आधारित होना चाहिए।

19. प्रश्न: आर्यभट्ट को क्यों क्रान्तिकारी विचारक कहा गया?
उत्तर: क्योंकि उन्होंने श्रुति, स्मृति और पुराणों की परंपरा के विरोध में सही विचार प्रस्तुत किए और साहसपूर्वक वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा दिखाई।

20. प्रश्न: भारत ने अपने पहले कृत्रिम उपग्रह का नाम क्यों आर्यभट्ट रखा?
उत्तर: क्योंकि आर्यभट्ट हमारे देश के महान वैज्ञानिक और आधुनिक अनुसंधान के प्रेरक थे।

21. प्रश्न: आर्यभट्ट ने कितनी वर्ष की आयु में आर्यभटीय लिखा था?
उत्तर: आर्यभट्ट केवल 23 वर्ष की आयु में आर्यभटीय ग्रन्थ लिख चुके थे।

22. प्रश्न: आर्यभट्ट ने ग्रहणों के अध्ययन में किस सिद्धांत का वर्णन किया?
उत्तर: उन्होंने सूर्य और चन्द्रमा की छाया के आधार पर चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के सिद्धांत स्पष्ट किए।

23. प्रश्न: आर्यभट्ट ने पृथ्वी की गति के विषय में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर अपने धुरी पर घूमती है और तारामंडल स्थिर रहता है।

24. प्रश्न: आर्यभट्ट ने नक्षत्रों और ग्रहों के अध्ययन में किस विधि का प्रयोग किया?
उत्तर: उन्होंने वेधशाला के यंत्रों और गणना विधियों का प्रयोग किया।

25. प्रश्न: आर्यभट्ट ने गणित में वृत्त की परिधि और व्यास के बीच क्या संबंध बताया?
उत्तर: उन्होंने कहा कि यदि वृत्त का व्यास ज्ञात हो तो उसकी परिधि भी ज्ञात की जा सकती है।

26. प्रश्न: आर्यभट्ट ने शून्य की उपयोगिता कैसे सिद्ध की?
उत्तर: उन्होंने शून्य का प्रयोग करके बड़ी संख्याओं को सरलता से लिखा और गणना की जटिलताओं को कम किया।

27. प्रश्न: आर्यभट्ट ने त्रिकोणमिति में कोणों की समिति की नई पद्धति क्यों खोजी?
उत्तर: ताकि त्रिकोण की भुजाओं और कोणों की गणना सरल और वैज्ञानिक तरीके से की जा सके।

28. प्रश्न: आर्यभट्ट ने सूर्य, चन्द्रमा और नक्षत्रों की गति पर क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि ये अपने निश्चित मार्गों से यात्रा करते हैं और इसी आधार पर बारह राशियों का विभाजन किया गया।

29. प्रश्न: आर्यभट्ट के अनुसार चन्द्रमा कैसे चमकता है?
उत्तर: चन्द्रमा स्वयं नहीं चमकता, बल्कि सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकता है।

30. प्रश्न: आर्यभट्ट ने ग्रहों और नक्षत्रों के अध्ययन में अंधविश्वास के प्रति क्या रवैया अपनाया?
उत्तर: उन्होंने अंधविश्वास को खारिज करते हुए विज्ञान और गणित पर आधारित अध्ययन किया।

31. प्रश्न: आर्यभट्ट ने गणित के कौन-कौन से क्षेत्रों में योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने अंकगणित, बीजगणित, रेखागणित और ज्यामिति के अनेक सिद्धांत दिए।

32. प्रश्न: आर्यभट्ट ने नालंदा या अन्य मठों में अध्ययन किया था या नहीं?
उत्तर: पाठ में इसका उल्लेख नहीं है; उनका अध्ययन मुख्य रूप से वेधशाला और गणना यंत्रों के माध्यम से हुआ।

33. प्रश्न: आर्यभट्ट ने विज्ञान और धार्मिक विश्वासों के बीच कैसे भेद दिखाया?
उत्तर: उन्होंने दिखाया कि वैज्ञानिक खोज का मार्ग धर्मग्रंथों या अंधविश्वासों से अलग होता है और अनुभव एवं गणना पर आधारित होना चाहिए।

34. प्रश्न: आर्यभट्ट के ग्रन्थ में गणित और ज्योतिष का अनुपात कैसा है?
उत्तर: आर्यभटीय ग्रन्थ में गणित और ज्योतिष दोनों शामिल हैं और यह केवल 242 पंक्तियों और 21 श्लोकों में समाहित है।

35. प्रश्न: आर्यभट्ट ने नक्षत्रों की गति का अध्ययन किस आधार पर किया?
उत्तर: उन्होंने सूर्य, चन्द्रमा और नक्षत्रों के मार्ग यानी ‘रविमार्ग’ का अध्ययन करके उनकी गति का ज्ञान प्राप्त किया।

36. प्रश्न: आर्यभट्ट के सिद्धांतों से तत्कालीन समाज में क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: उनके सिद्धांतों ने अंधविश्वास को चुनौती दी और वैज्ञानिक सोच और गणितीय अनुसंधान को बढ़ावा दिया।

37. प्रश्न: आर्यभट्ट ने किस प्रकार नयी गणितीय विधियाँ प्रस्तुत की?
उत्तर: उन्होंने बारीक गणितीय सिद्धांतों, वृत्त और त्रिकोणमिति की विधियों, और शून्य के प्रयोग को प्रस्तुत किया।

38. प्रश्न: आर्यभट्ट ने सूर्य और चन्द्रमा के प्रकाश का अध्ययन कैसे किया?
उत्तर: उन्होंने ग्रहणों के अध्ययन और प्रकाश की व्याख्या करते हुए चन्द्रमा और सूर्य के कारणों को स्पष्ट किया।

39. प्रश्न: आर्यभट्ट की वैज्ञानिक दृष्टि किस प्रकार क्रांतिकारी थी?
उत्तर: उन्होंने धार्मिक विश्वासों और अंधविश्वासों के विरोध में वैज्ञानिक तथ्यों और गणना पर आधारित निष्कर्ष प्रस्तुत किए।

40. प्रश्न: आर्यभट्ट की महानता और योगदान को आज किस प्रकार सम्मानित किया गया है?
उत्तर: भारत ने अपने पहले कृत्रिम उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा, जिससे उनकी वैज्ञानिक महानता और प्रेरणा को सम्मानित किया गया।


Answer by Mrinmoee