Chapter 2
नचिकेता
1. महर्षि बाजश्रवा कौन थे और उनका जीवन कैसा था?
उत्तर: महर्षि बाजश्रवा एक महान तपस्वी थे। उनका अधिकांश समय जप-तप और साधना में बीतता था। वे अपने परिवार और धर्म के प्रति सजग और नियमप्रिय थे।
2. नचिकेता का पिता महर्षि बाजश्रवा पर क्या प्रभाव डालता था?
उत्तर: नचिकेता अपने पिता के आचार और जीवन से प्रेरित था। पिता का तप और धार्मिक प्रवृत्ति नचिकेता के जीवन में आदर्श स्थापित करती थी।
3. नचिकेता के व्यक्तित्व के प्रमुख गुण कौन-कौन से थे?
उत्तर: नचिकेता में दृढ़ता, सत्यनिष्ठा, धर्म के प्रति अगाध निष्ठा, तेज, सहिष्णुता और पितृभक्ति के गुण थे।
4. महर्षि बाजश्रवा अपने पुत्र नचिकेता को क्यों प्राणों से प्यारा मानते थे?
उत्तर: नचिकेता के गुणों—सत्य, धर्म, सहिष्णुता और पिता के प्रति स्नेह—के कारण वह पिता के लिए अत्यंत प्रिय बन गया था।
5. सर्वमेघ यज्ञ क्या था और इसकी विशेषता क्या थी?
उत्तर: सर्वमेघ यज्ञ एक विशेष यज्ञ था जिसमें किसी को फल प्राप्त करने के लिए अपना सर्वस्व दान में देना होता था। इसमें दान की मात्रा और तत्परता का विशेष महत्व था।
6. महर्षि बाजश्रवा ने अपने पुत्र को सर्वमेघ यज्ञ के बारे में क्या बताया?
उत्तर: उन्होंने नचिकेता को बताया कि यज्ञ में फल पाने के लिए अपना सब कुछ दान में देना आवश्यक है और उसी अनुसार उन्हें तैयार रहना चाहिए।
7. नचिकेता ने यज्ञ के लिए क्या भावना व्यक्त की?
उत्तर: नचिकेता ने पिता की इच्छा जानकर उसे खुशी का अवसर माना। वह साधु प्रवृत्ति वाला और धर्मनिष्ठ बालक था।
8. सर्वमेघ यज्ञ में कौन-कौन शामिल हुए और यज्ञ का संचालन कैसे हुआ?
उत्तर: दूर-दूर से ब्राह्मण पधारे। नचिकेता ने यज्ञ की एक-एक क्रिया को ध्यान से देखा। सभी क्रियाएँ समयानुसार पूर्ण हुईं और अंत में ब्राह्मणों ने नारियल की पूर्णाहुति देकर यज्ञ समाप्त किया।
9. महर्षि बाजश्रवा ने यज्ञ के बाद क्या निर्णय लिया और क्यों?
उत्तर: यज्ञ पूर्ण होने के बाद उन्होंने अपनी गोशाला की कुछ कमजोर, बूढ़ी और दूध न देनेवाली गायों को ब्राह्मणों को दान में देने का निश्चय किया।
10. नचिकेता ने पिता के व्यवहार पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: नचिकेता दुखी हुआ और पिता से पूछा कि उन्होंने अपनी प्रिय वस्तुएं क्यों नहीं दीं। वह पिता के निर्णय से संतुष्ट नहीं था।
11. नचिकेता ने पिता से क्या प्रश्न किया और इसका परिणाम क्या हुआ?
उत्तर: नचिकेता ने पूछा कि उसे पिता किसे दान में देंगे। महर्षि क्रोधावेश में बोले कि वे उसे यमराज को दान देंगे। नचिकेता ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
12. नचिकेता ने यमराज के पास जाने से पहले क्या शर्त रखी?
उत्तर: उसने कहा कि पिता यज्ञशाला की सारी गायें ब्राह्मणों को दान में दें, अन्यथा यज्ञ निष्फल रहेगा।
13. महर्षि बाजश्रवा ने नचिकेता के प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: क्रोध में उन्होंने कहा कि बच्चे बड़ी बातें करते हैं और यज्ञ की चिंता उन्हें करनी चाहिए।
14. नचिकेता ने पिता की आज्ञा का पालन कैसे करने का संकल्प लिया?
उत्तर: उसने पिता के चरणों को छूकर विनम्रता से अनुमति मांगी और यमराज के पास जाने का संकल्प लिया।
15. महर्षि बाजश्रवा को नचिकेता के निर्णय पर क्या भाव हुआ?
उत्तर: उन्हें होश आया कि क्रोध में उन्होंने क्या कह दिया। वे नचिकेता की दृढ़ निष्ठा और साहस से प्रभावित हुए।
16. नचिकेता ने मृत्यु के विषय में क्या समझ रखा था?
उत्तर: उसने समझ रखा था कि मृत्यु एक अटल सत्य है और एक न एक दिन सभी को यमलोक पहुँचना है।
17. महर्षि ने यमपुरी जाने की अनुमति देने से पहले नचिकेता को क्या समझाया?
उत्तर: उन्होंने कहा कि मृत्यु के पास जाने के बाद कोई नहीं लौटता, इसलिए यह अत्यंत गंभीर कार्य है।
18. नचिकेता ने पिता की आज्ञा का पालन करने का महत्व क्यों बताया?
उत्तर: उसने कहा कि पिता की आज्ञा सर्वोपरि है और उसी से उसे साहस और सुरक्षा मिलती है।
19. नचिकेता की वाणी ने महर्षि को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर: नचिकेता की ज्ञानपूर्ण वाणी ने महर्षि को निरुत्तर कर दिया और उनके मन में पुत्र के प्रति स्नेह और चिंता दोनों जगा दी।
20. नचिकेता ने यमपुरी की ओर प्रस्थान से पहले क्या किया?
उत्तर: उसने पिता को नमस्कार किया और उनकी अनुमति के साथ यमपुरी के मार्ग पर चल पड़ा।
21. नचिकेता की यात्रा में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?
उत्तर: उसे दिन-रात चलना पड़ा और यमपुरी पहुँचने में कई दिन लगे।
22. यमपुरी में नचिकेता को किस स्थिति का सामना करना पड़ा?
उत्तर: यमपुरी के मुख्य द्वार पर उसे रोक दिया गया क्योंकि यमराज बाहर गए हुए थे। उसे तीन दिन और तीन रातें प्रतीक्षा करनी पड़ी।
23. नचिकेता ने प्रतीक्षा के दौरान क्या सहन किया?
उत्तर: वह भूखा-प्यासा तीन दिन और रातें यमपुरी के द्वार पर प्रतीक्षा करता रहा।
24. यमराज लौटने पर उनकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
उत्तर: उन्होंने चिन्तित होकर नचिकेता से पूछा कि वह कौन है और उसका परिचय जानना चाहा।
25. नचिकेता ने यमराज को स्वयं का परिचय कैसे दिया?
उत्तर: विनम्रता और आदरपूर्वक कहकर कि वह महर्षि बाजश्रवा का एकमात्र पुत्र है।
26. नचिकेता की विनम्रता और धैर्य का महत्व क्या है?
उत्तर: यह दर्शाता है कि साहस और निष्ठा के साथ धैर्य रखने वाला व्यक्ति सभी कठिनाइयों का सामना कर सकता है।
27. नचिकेता का धर्म और पितृभक्ति किस प्रकार दिखती है?
उत्तर: उसने पिता की आज्ञा का पालन सर्वोपरि मानकर यमराज के पास जाने का संकल्प लिया, यह पितृभक्ति और धर्म का प्रमाण है।
28. महर्षि के क्रोध और पश्चाताप से पाठक को क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: यह सिखाता है कि कभी-कभी क्रोध में हम गलत निर्णय ले लेते हैं, पर स्नेह और समझ से सुधार संभव है।
29. नचिकेता की दृढ़ता का महत्त्व क्या है?
उत्तर: दृढ़ता से उसने पिता की आज्ञा निभाई और धर्म तथा न्याय के मार्ग पर अडिग रहा।
30. यमपुरी की प्रतीक्षा में नचिकेता ने क्या गुण दिखाए?
उत्तर: धैर्य, साहस, निष्ठा और संयम।
31. पिता-पुत्र के रिश्ते में नचिकेता ने किस प्रकार आदर्श प्रस्तुत किया?
उत्तर: उसने सम्मान, विनम्रता और आज्ञापालन से आदर्श पुत्र का रूप प्रस्तुत किया।
32. पाठ में नचिकेता के ज्ञान और विवेक का उदाहरण क्या है?
उत्तर: उसने मृत्यु का सत्य स्वीकार किया और पिता की आज्ञा पालन को सर्वोपरि मानकर यमराज के पास जाने का विवेक दिखाया।
33. महर्षि बाजश्रवा के व्यवहार में लोभ और मानवीय कमजोरी कैसे दिखती है?
उत्तर: यज्ञ के पश्चात गोशाला की प्रिय गायों को दान न देना और केवल कमजोर गायें देना उनकी लोभ प्रवृत्ति को दिखाता है।
34. नचिकेता ने अपने ज्ञान से पिता को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर: अपने तर्क, विनम्रता और दृढ़ निष्ठा से पिता को निरुत्तर कर दिया और उन्हें पुत्र की महानता का एहसास कराया।
35. पाठ से जीवन में निर्णय लेने की शिक्षा क्या मिलती है?
उत्तर: निर्णय करते समय धर्म, न्याय और साहस का पालन करना चाहिए, साथ ही माता-पिता या गुरु की आज्ञा का आदर करना चाहिए।
36. नचिकेता का यमराज के पास जाने का साहस कैसे दिखता है?
उत्तर: उसने मृत्यु के देवता से मिलने में निडरता दिखाई और पिता की आज्ञा का पालन करने का संकल्प लिया।
37. पाठ में किस प्रकार धार्मिक और नैतिक मूल्य प्रस्तुत हुए हैं?
उत्तर: पितृभक्ति, सत्य, धर्म, निष्ठा, साहस और धैर्य—सभी नैतिक और धार्मिक मूल्य नचिकेता के व्यक्तित्व में दिखते हैं।
38. नचिकेता की यात्रा से हम क्या सीख सकते हैं?
उत्तर: कठिनाई और प्रतीक्षा के समय भी धैर्य, निष्ठा और साहस बनाए रखना चाहिए।
39. यमपुरी में प्रतीक्षा के दौरान नचिकेता ने कौन-सा आदर्श प्रस्तुत किया?
उत्तर: उसने संयम और धैर्य दिखाया, भूखा-प्यासा रहते हुए भी बिना क्रोध या शिकायत के लक्ष्य की ओर ध्यान बनाए रखा।
40. संपूर्ण पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: यह पाठ सिखाता है कि धर्म, पितृभक्ति, निष्ठा, धैर्य, साहस और सत्यनिष्ठा मानव जीवन में सर्वोपरि हैं। कठिन परिस्थितियों में भी इन गुणों का पालन करना चाहिए।