Chapter 20 

                                                             यशस्विनी


1. प्रश्न: लेखक पाठ में नारी को किस रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं?

उत्तर: लेखक नारी को केवल जीव या दया की वस्तु नहीं बल्कि स्वतंत्र, सशक्त और सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। नारी का जीवन, उसकी आकांक्षाएँ और उसके सपने मूल्यवान हैं और उनका संरक्षण किया जाना चाहिए।

2. प्रश्न: पाठ में ‘उसके सपनों को मत तोड़ो’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि किसी भी नारी के आत्मसम्मान, आकांक्षाओं और जीवन के सपनों को नष्ट न किया जाए। नारी को स्वतंत्र रूप से अपनी इच्छाओं के अनुसार जीने दिया जाना चाहिए।

3. प्रश्न: लेखक नारी को ‘दान-दया की वस्तु’ क्यों नहीं मानते?

उत्तर: लेखक के अनुसार नारी केवल सहानुभूति या दया की वस्तु नहीं है, बल्कि उसके पास अपनी स्वतंत्रता, शक्ति और अधिकार हैं। उसे केवल सहानुभूति या संरक्षण की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।

4. प्रश्न: पाठ में ‘जो चला गया, पर अब जो है उसको संवारो’ का क्या संदेश है?

उत्तर: यह नारी को वर्तमान में सशक्त बनाने और उसका सम्मान करने का संदेश है। अतीत की बाधाओं और गलतियों में फँसे बिना वर्तमान में उसकी स्वतंत्रता और विकास का समर्थन करना चाहिए।

5. प्रश्न: लेखक नारी को किन व्यक्तित्वों से जोड़ते हुए जीने देने का सुझाव देते हैं?

उत्तर: लेखक नारी को टेरेसा, इंदिरा, कल्पना और लता जैसे सशक्त, स्वतंत्र और प्रेरक व्यक्तित्वों से जोड़कर जीने देने की बात कहते हैं।

6. प्रश्न: पाठ में ‘बेड़ी’ का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?

उत्तर: ‘बेड़ी’ प्रतीक है नफरत, समाज की पाबंदियों और मानसिक या सामाजिक सीमाओं का। इसे तोड़कर नारी को स्वतंत्र और सशक्त होने दिया जाना चाहिए।

7. प्रश्न: लेखक नारी को कैसे सजाने की प्रेरणा देते हैं?

उत्तर: लेखक कहते हैं कि नारी को गहनों और बाहरी श्रृंगार से नहीं बल्कि विद्या और ज्ञान से सजाना चाहिए। ज्ञान ही उसका असली सम्मान और शक्ति है।

8. प्रश्न: पाठ में नारी के ‘पंख खुलने’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: यह नारी के स्वतंत्र और सशक्त होने का प्रतीक है। पंख खुलने का अर्थ है कि नारी अब अपने अधिकारों और क्षमता के साथ स्वतंत्र रूप से उड़ान भर सकती है।

9. प्रश्न: लेखक नारी की स्वतंत्रता और समाज के नजरिए को कैसे जोड़ते हैं?

उत्तर: लेखक बताते हैं कि नारी का स्वतंत्र होना समाज के लिए भी लाभकारी है। उसे केवल पारंपरिक या सीमित भूमिकाओं में देखने के बजाय समाज में सक्रिय और सशक्त भूमिका निभाने दिया जाना चाहिए।

10. प्रश्न: पाठ में ‘विद्या से श्रृंगार’ का क्या संदेश है?

उत्तर: विद्या से श्रृंगार का अर्थ है कि नारी का सच्चा सौंदर्य और सम्मान उसके ज्ञान, शिक्षा और आत्मनिर्भरता में है, न कि बाहरी आभूषणों में।

11. प्रश्न: पाठ में नारी के प्रति समाज की पुरानी सोच पर लेखक क्या टिप्पणी करते हैं?

उत्तर: लेखक कहते हैं कि नारी को केवल दया, परंपरा या पारंपरिक भूमिकाओं में सीमित करने वाली सोच गलत है। नारी को सशक्त और स्वतंत्र बनाया जाना चाहिए।

12. प्रश्न: ‘अपने नारीत्व को स्वीकार करो’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि नारी को अपने अस्तित्व, अधिकार और पहचान को समझकर आत्मसम्मान के साथ जीना चाहिए और खुद को कमजोर नहीं मानना चाहिए।

13. प्रश्न: पाठ में नारी को किन बाधाओं से मुक्त करने की बात की गई है?

उत्तर: नारी को मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक पाबंदियों और नफरत की बेड़ियों से मुक्त करने की बात की गई है।

14. प्रश्न: लेखक नारी को टेरेसा और इंदिरा जैसे व्यक्तित्व क्यों बताते हैं?

उत्तर: टेरेसा, इंदिरा और अन्य उल्लेखित व्यक्तित्व नारी की शक्ति, स्वतंत्रता और समाज में योगदान का प्रतीक हैं। लेखक चाहता है कि नारी भी ऐसे सशक्त और प्रेरक बने।

15. प्रश्न: पाठ में नारी के सपनों का महत्व क्यों बताया गया है?

उत्तर: नारी के सपने उसकी स्वतंत्रता, आकांक्षा और जीवन दृष्टि का प्रतीक हैं। इनके सम्मान और संरक्षण से ही समाज में सशक्त नारी विकसित हो सकती है।

16. प्रश्न: पाठ में नारी के पंख खुलने की क्रिया को क्या संकेत माना गया है?

उत्तर: यह संकेत है कि नारी अब किसी सामाजिक या मानसिक सीमा में नहीं बंधी, वह स्वतंत्र, सशक्त और आत्मनिर्भर बन गई है।

17. प्रश्न: लेखक नारी को स्वयं का सम्मान करने के लिए क्या प्रेरित करते हैं?

उत्तर: लेखक नारी को अपनी विद्या, ज्ञान और आत्मनिर्भरता के माध्यम से स्वयं का सम्मान करने और बाहरी परंपराओं पर निर्भर न रहने के लिए प्रेरित करते हैं।

18. प्रश्न: पाठ में नारी का स्वतंत्र जीवन क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: स्वतंत्र जीवन से नारी अपने अधिकारों और आकांक्षाओं को पूरा कर सकती है और समाज में प्रभावशाली भूमिका निभा सकती है।

19. प्रश्न: नारी को ‘कल्पना बन जीने दो, लता बन जीने दो’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि नारी को अपनी प्रतिभा और कला के अनुसार स्वतंत्र रूप से जीने दिया जाए। वह अपनी पसंद और क्षमता के अनुसार समाज में योगदान दे सके।

20. प्रश्न: लेखक नारी के आत्मसम्मान को कैसे परिभाषित करते हैं?

उत्तर: लेखक कहते हैं कि नारी का सच्चा सम्मान उसकी विद्या, आत्मनिर्भरता और जीवन में अपने अधिकारों को पहचानने में है।

21. प्रश्न: पाठ में नारी को ‘दान-दया की वस्तु नहीं’ बताने का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: यह बताने के लिए कि नारी को सिर्फ सहानुभूति, दया या संरक्षण की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसे सशक्त और स्वतंत्र मानना चाहिए।

22. प्रश्न: नारी की स्वतंत्रता के लिए किन सामाजिक बाधाओं को तोड़ने की आवश्यकता है?

उत्तर: पारिवारिक दबाव, सामाजिक रूढ़िवादिता, मानसिक और भावनात्मक पाबंदियाँ, और नफरत की बेड़ियाँ।

23. प्रश्न: ‘पग-नूपुर कंगन-हार नहीं’ में लेखक नारी को क्या समझाना चाहते हैं?

उत्तर: लेखक कहना चाहते हैं कि नारी का सच्चा श्रृंगार बाहरी आभूषणों में नहीं बल्कि विद्या, ज्ञान और आत्मसम्मान में है।

24. प्रश्न: पाठ में नारी के सपनों और समाज के नजरिए के बीच संबंध कैसे बताया गया है?

उत्तर: लेखक बताते हैं कि समाज को नारी के सपनों का सम्मान करना चाहिए और उसे पूर्ण स्वतंत्रता के साथ जीने देना चाहिए।

25. प्रश्न: नारी के पंख खुलने का प्रतीक समाज में नारी की भूमिका से कैसे जुड़ा है?

उत्तर: पंख खुलना प्रतीक है कि नारी अब समाज में स्वतंत्र और सशक्त भूमिका निभाने में सक्षम है।

26. प्रश्न: पाठ में नारी के जीवन के प्रति लेखक की दृष्टि क्या है?

उत्तर: लेखक की दृष्टि है कि नारी का जीवन मूल्यवान है, उसे सशक्त और स्वतंत्र बनाया जाना चाहिए, और उसके सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान होना चाहिए।

27. प्रश्न: नारी को स्वतंत्र बनाने में शिक्षा की क्या भूमिका है?

उत्तर: शिक्षा नारी को आत्मनिर्भर, सशक्त और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है। यह उसके आत्मसम्मान और सामाजिक योगदान का आधार है।

28. प्रश्न: पाठ में नारी की सशक्तिकरण की आवश्यकता क्यों बताई गई है?

उत्तर: क्योंकि सशक्त नारी ही समाज में बदलाव ला सकती है, अपने अधिकारों को समझ सकती है और अपने जीवन को सार्थक बना सकती है।

29. प्रश्न: नारी के सपनों को साकार करने में समाज की क्या भूमिका है?

उत्तर: समाज को नारी के सपनों और आकांक्षाओं का सम्मान करना चाहिए, उसे अपने विकल्प चुनने और स्वतंत्र रूप से जीने देना चाहिए।

30. प्रश्न: पाठ में नारी के अधिकार और स्वतंत्रता का महत्व कैसे बताया गया है?

उत्तर: नारी के अधिकार और स्वतंत्रता उसके आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का आधार हैं।

31. प्रश्न: लेखक नारी की परंपराओं से स्वतंत्र सोच को कैसे महत्व देते हैं?

उत्तर: लेखक मानते हैं कि नारी को केवल पारंपरिक भूमिकाओं में सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि स्वतंत्र और सशक्त जीवन जीने देना चाहिए।

32. प्रश्न: पाठ में नारी के जीवन में विद्या का महत्व क्या बताया गया है?

उत्तर: विद्या नारी का सच्चा श्रृंगार है, जो उसे सशक्त, स्वतंत्र और सम्मानित बनाती है।

33. प्रश्न: पाठ में नारी को किसी बाहरी शक्ति या पुरुष की कृपा पर निर्भर न रहने की सलाह क्यों दी गई है?

उत्तर: ताकि नारी आत्मनिर्भर, स्वतंत्र और सशक्त बन सके और उसके निर्णय उसकी खुद की बुद्धि और क्षमता पर आधारित हों।

34. प्रश्न: पाठ में नारी के आत्मसम्मान और समाज में सम्मान का संबंध कैसे बताया गया है?

उत्तर: नारी का आत्मसम्मान समाज में उसके सम्मान का आधार है। समाज को नारी के अधिकार और स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।

35. प्रश्न: नारी के जीवन में कल्पना और सृजन का क्या महत्व है?

उत्तर: कल्पना और सृजन नारी की स्वतंत्रता और सशक्तिकरण का प्रतीक हैं। यह उसके आत्मनिर्भर और रचनात्मक व्यक्तित्व को दर्शाते हैं।

36. प्रश्न: पाठ में नारी को ‘टेरेसा और इंदिरा’ बनने देना क्यों कहा गया है?

उत्तर: यह सशक्त, प्रेरक और स्वतंत्र व्यक्तित्व के प्रतीक हैं। लेखक चाहता है कि नारी भी ऐसे ही समाज में अपना योगदान दे सके।

37. प्रश्न: पाठ में नारी की सामाजिक और मानसिक स्वतंत्रता का महत्व कैसे दर्शाया गया है?

उत्तर: नारी की स्वतंत्रता उसके आत्मसम्मान, निर्णय क्षमता और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने की क्षमता से जुड़ी है।

38. प्रश्न: पाठ में नारी की सशक्तिकरण प्रक्रिया को कौन-कौन से उपाय सुझाए गए हैं?

उत्तर: विद्या से श्रृंगार करना, नफरत की बेड़ियाँ तोड़ना, अपने सपनों का सम्मान करना, सामाजिक और मानसिक स्वतंत्रता प्राप्त करना।

39. प्रश्न: नारी के सशक्तिकरण में शिक्षा और विद्या की क्या भूमिका है?

उत्तर: शिक्षा और विद्या नारी को आत्मनिर्भर, ज्ञानवान और समाज में सम्मानित बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

40. प्रश्न: पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: पाठ का मुख्य संदेश है कि नारी केवल दया या परंपरा की वस्तु नहीं है, बल्कि स्वतंत्र, सशक्त और विद्या से संपन्न होकर समाज में सम्मान और अधिकार प्राप्त करने वाली है। समाज और परिवार को उसे अपने सपनों और अधिकारों के साथ जीने देना चाहिए।


Answer by Mrinmoee