Chapter 5
वीर कुँवर सिंह बाबू कुँवर सिंह तेगवा बहादुर
1. फाल्गुन माह में बिहार के लोगों के बीच कौन-सा गीत गाया जाता है और उसका महत्व क्या है?
उत्तर: फाल्गुन माह के प्रारंभ में बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में बाबू कुँवर सिंह की वीरता और शौर्य गाथा पर आधारित गीत गाए जाते हैं। ये गीत उनके अदम्य साहस और देशभक्ति को सम्मानित करते हैं।
2. बाबू कुँवर सिंह की प्रसिद्धि के पीछे कौन-सी घटनाएँ प्रमुख हैं?
उत्तर: उनके जीवन की घटनाएँ जैसे अंग्रेजों की गोली लगने पर अपने ही हाथ को काट कर गंगा में समर्पित करना, सुरंग का निर्माण करना, और स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेना उनकी प्रसिद्धि के मुख्य कारण हैं।
3. बाबू कुँवर सिंह ने गंगा नदी पर किस प्रकार का अद्भुत साहस दिखाया?
उत्तर: जब अंग्रेजों की गोली उनके बाएँ हाथ में लगी, उन्होंने बिना देरी किए अपने ही हाथ को काटकर गंगा मैया को भेंट चढ़ा दिया।
4. बाबू कुँवर सिंह के सुरंग का निर्माण क्यों किया गया था?
उत्तर: उन्होंने युद्ध के समय सुरक्षित आवागमन और रणनीति के लिए जगदीशपुर से आरा के बीच सुरंग बनवाई थी।
5. सुरंग का वर्तमान में क्या महत्व है?
उत्तर: आज भी आरा के महाराजा कॉलेज में इस सुरंग के अवशेष देखे जा सकते हैं, जो एक ऐतिहासिक पहेली के रूप में प्रसिद्ध हैं।
6. बाबू कुँवर सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: बाबू कुँवर सिंह का जन्म 1782 ई. में भोजपुर जिले के जगदीशपुर गाँव में हुआ था।
7. उनके पिता और माता का नाम क्या था?
उत्तर: उनके पिता का नाम साहबज़ादा सिंह और माता का नाम पंचरतन कुँवर था।
8. बाबू कुँवर सिंह की प्रारंभिक शिक्षा कैसे हुई?
उत्तर: उनकी शिक्षा घर पर ही हुई, जहाँ उन्होंने संस्कृत और फ़ारसी सीखी।
9. बाबू कुँवर सिंह को किन गतिविधियों में अधिक रुचि थी?
उत्तर: उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती में अधिक रुचि थी।
10. बाबू कुँवर सिंह ने अपनी रियासत की जिम्मेदारी कब संभाली?
उत्तर: अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् 1827 ई. में उन्होंने रियासत की जिम्मेदारी संभाली।
11. ब्रिटिश हुकूमत का अत्याचार उनके लिए क्यों चिंता का विषय था?
उत्तर: उस समय ब्रिटिश हुकूमत अत्याचारी थी, और उन्होंने समाज में अन्याय और शोषण फैलाया था। बाबू कुँवर सिंह ने इसे बदलने का संकल्प लिया।
12. 1857 की क्रांति में बाबू कुँवर सिंह की भूमिका क्या थी?
उत्तर: उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूँका और आरा पर विजय प्राप्त की। उनका नेतृत्व क्रांति के सफल होने में महत्वपूर्ण था।
13. आरा की लड़ाई में सैनिकों और कैदियों का क्या योगदान था?
उत्तर: सैनिकों ने बाबू कुँवर सिंह का जयघोष किया, जेल की सलाखें तोड़ी और कैदियों को आज़ाद कराया।
14. बाबू कुँवर सिंह ने आरा पर कब विजय प्राप्त की?
उत्तर: 27 जुलाई, 1857 को उन्होंने आरा पर विजय प्राप्त की और सैनिकों ने उन्हें फ़ौजी सलामी दी।
15. अंग्रेजों का प्रतिक्रिया आरा की लड़ाई पर कैसी थी?
उत्तर: अंग्रेजों ने अपना दमन-चक्र चलाया और बाबू कुँवर सिंह एवं उनकी सेना के खिलाफ भीषण युद्ध किया।
16. बाबू कुँवर सिंह ने अंग्रेजों से बदला लेने की योजना कैसे बनाई?
उत्तर: उन्होंने रीवा, काल्पी, कानपुर, लखनऊ आदि क्षेत्रों की यात्रा कर वहाँ के राजाओं और जमींदारों से समर्थन प्राप्त किया।
17. बाबू कुँवर सिंह की कीर्ति पूरे उत्तर भारत में कैसे फैली?
उत्तर: उनकी विजय यात्रा और युद्ध कौशल की चर्चा पूरे उत्तर भारत में फैल गई और लोग उनके नेतृत्व में लड़े।
18. बाबू कुँवर सिंह ने लखनऊ और आजमगढ़ में क्या किया?
उत्तर: ग्वालियर और जबलपुर के सैनिकों के सहयोग से उन्होंने लखनऊ पहुँचकर आजमगढ़ पर कब्जा किया और अंग्रेजों को परास्त किया।
19. 23 अप्रैल, 1858 को बाबू कुँवर सिंह ने क्या किया?
उत्तर: उन्होंने जगदीशपुर में स्वाधीनता की विजय पताका फहराई और यूनियन जैक को उतारकर अपना झंडा फहराया।
20. बाबू कुँवर सिंह की उम्र और युद्ध कौशल को देखकर कवियों ने क्या लिखा?
उत्तर: कवि ने लिखा कि अस्सी वर्ष की उम्र में भी उनमें पुराना जोश जागा था और वे वीर तथा मर्दाना थे।
21. बाबू कुँवर सिंह का रण कौशल किस प्रकार का था?
उत्तर: वे छापामार युद्ध में कुशल थे और अंग्रेजी सेना उनके रण कौशल को समझने में असमर्थ थी।
22. दुश्मन बाबू कुँवर सिंह के सामने क्या करते थे?
उत्तर: दुश्मनों को उनके सामने या तो भागना पड़ता था या मरना पड़ता था।
23. बाबू कुँवर सिंह का निधन कब हुआ?
उत्तर: 26 अप्रैल, 1858 को उन्होंने इस संसार से विदा ली।
24. उनके निधन के समय उनके योगदान का मूल्यांकन कैसे किया गया?
उत्तर: उन्हें भारत माता का महान सपूत और अदम्य वीर माना गया। उनके चित्र देखकर दुश्मन भी भयभीत हो जाते थे।
25. बाबू कुँवर सिंह के साहस और वीरता का प्रतीक क्या है?
उत्तर: उनके साहस, रण कौशल और बलिदान ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक और लोक नायक बना दिया।
26. बाबू कुँवर सिंह की छापामार युद्ध शैली क्या थी?
उत्तर: वे अचानक हमला करके दुश्मन को आश्चर्यचकित करते थे और तेज़ी से पीछे हटते थे।
27. बाबू कुँवर सिंह का जन्मस्थान किस जिले में था?
उत्तर: उनका जन्म भोजपुर (आरा) जिले के जगदीशपुर गाँव में हुआ।
28. बाबू कुँवर सिंह ने अपने जीवन में किस प्रकार की रणनीति अपनाई?
उत्तर: उन्होंने सुरंगों, छापामार युद्ध और मित्र राज्यों के सहयोग से युद्ध की रणनीति अपनाई।
29. बाबू कुँवर सिंह की क्रांति में नेतृत्व की विशेषता क्या थी?
उत्तर: उनका नेतृत्व साहसपूर्ण, रणनीतिक और लोगों को प्रेरित करने वाला था।
30. बाबू कुँवर सिंह और सैनिकों के बीच किस प्रकार का संबंध था?
उत्तर: सैनिक उन्हें सम्मान और प्रेम से देखते थे, उनके नेतृत्व में निडर होकर लड़ते थे।
31. बाबू कुँवर सिंह की विजय यात्रा का महत्व क्या था?
उत्तर: यह स्वतंत्रता संग्राम में लोगों को प्रेरित करने वाली और अंग्रेजों के लिए चुनौतीपूर्ण यात्रा थी।
32. बाबू कुँवर सिंह ने आजमगढ़ में कब विजय प्राप्त की?
उत्तर: 22 मार्च, 1858 को उन्होंने आजमगढ़ पर कब्जा किया और अंग्रेजों को हराया।
33. बाबू कुँवर सिंह की उम्र के बावजूद उनका उत्साह क्यों नहीं कम हुआ?
उत्तर: उनका साहस और देशभक्ति का जोश उम्र की सीमा से परे था।
34. 1857 के विद्रोह में बाबू कुँवर सिंह की भूमिका क्या थी?
उत्तर: उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख भूमिका निभाई।
35. बाबू कुँवर सिंह ने किस प्रकार के युद्ध में महारत हासिल की थी?
उत्तर: वे छापामार युद्ध और पारंपरिक युद्ध दोनों में कुशल थे।
36. बाबू कुँवर सिंह का इतिहास आज क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: वे स्वतंत्रता संग्राम के अदम्य वीर और देशभक्ति के प्रतीक हैं।
37. बाबू कुँवर सिंह की वीरता की तुलना किस प्रकार से की जाती है?
उत्तर: उनकी वीरता और साहस की तुलना अत्यंत शूरवीरों और रणनैतिक योद्धाओं से की जाती है।
38. उनके युद्ध कौशल को देखकर अंग्रेजों की प्रतिक्रिया क्या थी?
उत्तर: अंग्रेज पूरी तरह असमर्थ और भयभीत थे। कई स्थानों पर उनकी सेना भाग गई।
39. बाबू कुँवर सिंह की प्रमुख उपलब्धियों का सार क्या है?
उत्तर: आरा और आजमगढ़ पर विजय, अंग्रेजों को परास्त करना, और स्वाधीनता की झंडी फहराना।
40. बाबू कुँवर सिंह के जीवन से हमें कौन-सी शिक्षा मिलती है?
उत्तर: हमें साहस, निडरता, देशभक्ति और संघर्षशीलता की सीख मिलती है। उनके जीवन से यह भी पता चलता है कि उम्र केवल संख्या है, देशभक्ति और वीरता में कोई सीमा नहीं होती।
Answer by Mrinmoee