Chapter 7

                                                        साइकिल की सवारी


प्रश्न:1 लेखक को किसी को साइकिल या हारमोनियम बजाते देख कर अपने ऊपर कैसी दया आती है?
उत्तर: लेखक को जब किसी को साइकिल चलाते या हारमोनियम बजाते देखता है तो उसके मन में अपने प्रति गहरी दया उठती है। उसे लगता है कि दूसरों ने इन दोनों विद्याओं में महारत हासिल कर ली है, जबकि वह स्वयं इनका अभ्यास नहीं कर सकता। यह भावना उसे अपने अपूर्ण होने का एहसास कराती है।

प्रश्न:2 लेखक ने क्यों महसूस किया कि वह साइकिल और हारमोनियम सीख नहीं सकता?
उत्तर: लेखक ने महसूस किया कि प्रारब्ध में उसकी यह योग्यता नहीं लिखी गई है। दूसरों की दक्षता देखकर और स्वयं कभी प्रयास न करने के कारण मन में यह धारणा बैठ गई कि वह कभी इन विद्या में पारंगत नहीं हो पाएगा।

प्रश्न:3 लेखक ने साइकिल सीखने का निर्णय कब लिया?
उत्तर: 1932 में, लेखक का छोटा लड़का चुपके-चुपके साइकिल सीखकर उसके सामने सवार होने लगा। इसे देखकर लेखक को लज्जा और आत्म‑ग्लानि हुई, जिससे उसने स्वयं साइकिल सीखने का निश्चय किया।

प्रश्न:4 लेखक के पहले दिन साइकिल पर बैठते समय उसके मन की स्थिति कैसी थी?
उत्तर: लेखक उत्साहित और निश्चयी था। वह कूदकर साइकिल पर बैठ गया, पैरों से जोर-जोर से पेडल मारने लगा और रास्ते में किसी को देखकर घंटी बजाई। यह उसकी सीखने की प्रक्रिया का पहला उत्साही अनुभव था।

प्रश्न:5 लेखक ने साइकिल सीखने के लिए पुराने कपड़े क्यों पहने?
उत्तर: लेखक जानता था कि गिरने और चोट लगने की संभावना है। नए कपड़े खराब न हों, इसलिए उसने पुराने फटे कपड़े पहने।

प्रश्न:6 श्रीमतीजी ने पुराने कपड़ों की मरम्मत क्यों की?
उत्तर: श्रीमतीजी ने लेखक की युक्ति समझते हुए मिस्त्री बुलाकर कपड़ों की मरम्मत करवा दी ताकि अभ्यास के दौरान उनका उपयोग किया जा सके।

प्रश्न:7 लेखक ने चोट के लिए क्या तैयारी की?
उत्तर: लेखक ने जंबक के दो डिब्बे खरीदे ताकि गिरने पर चोट का तुरंत इलाज हो सके। साथ ही, पड़ोस के मिस्त्री से साइकिल भी मँगवाई।

प्रश्न:8 लेखक ने साइकिल सीखने के लिए मैदान क्यों चुना?
उत्तर: लेखक ने लारेंसबाग का मैदान चुना क्योंकि वहाँ जमीन नरम थी और चोट कम लगती थी। वहाँ कोई लोग नहीं देखते थे, जिससे आत्मविश्वास बना रहा।

प्रश्न:9 लेखक को साइकिल सीखते समय किन मानसिक संघर्षों का सामना करना पड़ा?
उत्तर: लेखक को डर, लज्जा, गिरने का भय, उत्साह और चुनौती का मिश्रित अनुभव हुआ। उसे लगा कि यह युद्ध-क्षेत्र के घोड़े जैसा चुनौतीपूर्ण कार्य है।

प्रश्न:10 तिवारी लक्ष्मीनारायण लेखक के पास क्यों आए?
उत्तर: लेखक अपने लिए प्रशिक्षक या मार्गदर्शक खोजने के लिए तिवारी जी से मिले, क्योंकि अकेले साइकिल सीखना कठिन था।

प्रश्न:11 तिवारी जी ने सिखाने वाले व्यक्ति की फीस के बारे में क्या बताया?
उत्तर: तिवारी जी ने कहा कि प्रशिक्षक मुफ्त में नहीं सिखाएगा। दस-बारह दिन में सीखाने के लिए बीस रुपए फीस लेगा।

प्रश्न:12 लेखक ने फीस का मूल्यांकन कैसे किया?
उत्तर: लेखक ने सोचा कि दस दिन-बीस रुपए, यानी दो रुपए रोजाना। यदि तीन-चार ट्यूशन मिल जाएँ तो मासिक आमदनी साठ से तीन सौ रुपए तक हो सकती है।

प्रश्न:13 श्रीमतीजी ने साइकिल सीखने पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: श्रीमतीजी ने कहा कि पहले सीख लें, फिर दूसरों को सिखाने की सोचें। उन्होंने लेखक की उम्र और क्षमता का हवाला देते हुए टोका।

प्रश्न:14 लेखक ने पहले दिन साइकिल से गिरने के बाद क्या अनुभव किया?
उत्तर: लेखक के पाँव और हाथ जख्मी हो गए। पास खड़े लोग मदद के लिए आए। भगवान का नाम लेकर उसने दुबारा अभ्यास करने का साहस जुटाया।

प्रश्न:15 लेखक ने तिवारी जी को अल्टीमेटम क्यों दिया?
उत्तर: लेखक ने चेतावनी दी कि बाईं तरफ हो जाएँ, वरना साइकिल उनके ऊपर चढ़ा देंगे, ताकि रास्ते में संतुलन बन सके।

प्रश्न:16 लेखक ने तिवारी जी की बात क्यों अनसुनी की?
उत्तर: लेखक ने कहा कि अभी चढ़ना नहीं सीखा, केवल चलाना सीख रहा है, इसलिए बात सुनने का समय नहीं था।

प्रश्न:17 लेखक ने ताँगे को क्यों चेताया?
उत्तर: लेखक ने चेताया कि बाईं तरफ हो जाए क्योंकि वह नया सवार है, ताकि कोई दुर्घटना न हो।

प्रश्न:18 लेखक ने साइकिल को “लोहे का घोड़ा” क्यों कहा?
उत्तर: लेखक ने साइकिल को युद्ध-क्षेत्र के घोड़े की तरह खतरनाक और चुनौतीपूर्ण समझा।

प्रश्न:19 लेखक ने गिरने के बाद समाज की प्रतिक्रिया कैसी पाई?
उत्तर: लोग मदद के लिए आए, सहानुभूति दिखाई, चोट की चिंता की और जंबक का डिब्बा भी दिया।

प्रश्न:20 लेखक ने उस्ताद साहब के लस्सी पीने के समय क्या किया?
उत्तर: लेखक ने साइकिल के पुर्जों की जांच की और थोड़ी दूरी तक चलने की कोशिश की।

प्रश्न:21 लेखक ने गिरने के अनुभव से क्या सीखा?
उत्तर: 
लेखक ने यह समझा कि सीखने की प्रक्रिया में गिरना सामान्य है और इसे सहन करते हुए लगातार अभ्यास करना ही सफलता की कुंजी है।

प्रश्न:22 लेखक ने भगवान का नाम क्यों लिया?
उत्तर: 
लेखक ने भय और आशंका को दूर करने तथा हिम्मत जुटाने के लिए भगवान का नाम लिया।

प्रश्न:23 लेखक का मन गिरने के समय कैसा था?
उत्तर: 
लेखक के मन में डर और बेचैनी के साथ-साथ हल्का उत्साह भी था। उसके हाथ-पाँव सुन्न हो गए और दिल तेजी से धड़क रहा था।

प्रश्न:24 लेखक ने पहले दिन किस कारण से अभ्यास विफल पाया?
उत्तर: 
लेखक का अभ्यास इसलिए सफल नहीं हो पाया क्योंकि उसने उलटे कपड़े पहन लिए और बार-बार गिरने की वजह से अभ्यास बाधित हुआ।

प्रश्न:25 लेखक ने अभ्यास के दौरान ध्यान कैसे रखा?
उत्तर: 
उसने अपने आस-पास सड़क, तिवारी जी और ताँगे जैसी बाधाओं पर सतर्क दृष्टि बनाए रखी।

प्रश्न:26 लेखक ने तिवारी जी और ताँगे के साथ किस तरह व्यवहार किया?

उत्तर: उसने उन्हें आगाह किया, सही दिशा में रहने को कहा और अपनी साइकिल पर संतुलन बनाए रखा।

प्रश्न:27 लेखक ने गिरते समय क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: 
लेखक ने भगवान का नाम लेकर साहस जुटाया, मदद के लिए पुकारा और लोगों से सहानुभूति पाई।

प्रश्न:28 लेखक ने साइकिल सीखते समय कितनी सावधानी बरती?
उत्तर: 
लेखक ने सुरक्षा के लिए पुराने कपड़े पहने, जंबक का डिब्बा साथ रखा, सुरक्षित मैदान का चुनाव किया और आसपास के लोगों को आगाह किया।

प्रश्न:29 लेखक के पहले दिन के अनुभव का परिणाम क्या हुआ?
उत्तर: लेखक का पहला दिन व्यर्थ गया, गिरने और उलटे कपड़े पहनने के कारण।

प्रश्न:30 लेखक ने अभ्यास के समय किन कठिनाइयों का सामना किया?
उत्तर: गिरना, संतुलन बनाए रखना, भय और दूसरों की नजरें जैसी कठिनाइयों का सामना किया।

प्रश्न:31 लेखक ने साइकिल सीखने में किस प्रकार की मानसिक तैयारी की?
उत्तर: उसने भगवान का नाम लिया, उत्साह और साहस जुटाया और गिरने को सीखने का हिस्सा माना।

प्रश्न:32 लेखक ने साइकिल सीखने में दूसरों की मदद क्यों ली?
उत्तर: अकेले सीखना कठिन था, इसलिए उस्ताद और तिवारी जी की मदद ली।

प्रश्न:32 लेखक ने तिवारी जी के सुझावों का पालन क्यों नहीं किया?
उत्तर: उसने कहा कि अभी चढ़ना नहीं आया है, केवल चलाना सीख रहा है, इसलिए बात सुनने का समय नहीं था।

प्रश्न:33 लेखक ने गिरने के बाद लोगों की मदद कैसे स्वीकार की?
उत्तर: उसने जंबक का डिब्बा लिया, लोगों की सहानुभूति और सहायता स्वीकार की और दुबारा अभ्यास करने का साहस जुटाया।

प्रश्न:34 लेखक ने तिवारी जी से फीस देकर सीखने की क्या योजना बनाई?
उत्तर: लेखक ने बीस रुपए फीस देकर प्रशिक्षक से दस दिन में साइकिल सीखने की योजना बनाई।

प्रश्न:35 लेखक ने पहले दिन से ही भविष्य की योजना कैसे बनाई?
उत्तर: लेखक ने सोचा कि साइकिल सीखने के बाद परिवार और मित्रों को आश्चर्यचकित करेगा।

प्रश्न:36 लेखक ने अभ्यास के समय किस तरह के मानसिक चित्र बनाए?
उत्तर: उसने गिरने और साइकिल हवा में चलती हुई देखने के कल्पनात्मक चित्र बनाए।

प्रश्न:37 लेखक ने साइकिल सीखने में कितना धैर्य और निश्चय दिखाया?
उत्तर: गिरने, चोट लगने और आलोचना के बावजूद उसने लगातार अभ्यास करने और सीखने का दृढ़ निश्चय दिखाया।

Answer by Mrinmoee