Chapter 1
कहाँ, कब और कैसे
1.प्रश्न: बिहार दिवस के अवसर पर राखी और आयुष ने किस प्रकार का अनुभव किया?
उत्तर: बिहार दिवस के अवसर पर राखी और आयुष पटना के गांधी मैदान में आए। वहाँ मेले जैसा माहौल था। विभिन्न पंडालों में अलग-अलग गतिविधियाँ चल रही थीं। उन्होंने क्विज प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहाँ राखी ने पाटलिपुत्र का उत्तर देकर पुरस्कार प्राप्त किया। आयुष सोचने लगा कि कैसे समय के साथ स्थान और नाम बदलते हैं।
2.प्रश्न: समय के साथ समाज में कौन-कौन से परिवर्तन होते हैं?
उत्तर: समय के साथ समाज में शब्दों के अर्थ, स्थानों के नाम, भौगोलिक सीमाएँ, जीवन शैली, खान-पान, पहनावा, रीति-रिवाज आदि में परिवर्तन होते रहते हैं।
3.प्रश्न: आठवीं से अठारहवीं शताब्दी तक के इतिहास में क्या विशेषताएँ देखी जाती हैं?
उत्तर: इस एक हजार वर्षों में भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन में कई परिवर्तन हुए। नए विचार, तकनीकी सुधार, कृषि और शहरी जीवन के विकास, व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि, और संस्कृति एवं कला में नवाचार इस युग की प्रमुख विशेषताएँ थीं।
4.प्रश्न: हिन्दुस्तान शब्द कब और क्यों प्रचलित हुआ?
उत्तर: हिन्दुस्तान शब्द तेरहवीं शताब्दी में तुर्क सत्ता की स्थापना के बाद प्रचलित हुआ। इसका प्रयोग पहले उन क्षेत्रों के लिए किया जाता था जो तुर्क सत्ता के अधीन थे। बाद में बाबर ने इस शब्द का प्रयोग पूरे उपमहाद्वीप के लिए किया।
5.प्रश्न: बिहार शब्द का इतिहास क्या है?
उत्तर: बिहार शब्द का प्रयोग सबसे पहले तेरहवीं शताब्दी में इतिहासकार मिन्हाज-ए-सिराज ने किया। उन्होंने बौद्ध विहारों की भूमि के लिए इसे 'अर्ज-ए बिहार' कहा। मुगल काल में अकबर ने इसे प्रांत के रूप में गठित किया।
6.प्रश्न: आठवीं शताब्दी के बाद भारत में राजनैतिक स्थिति कैसी रही?
उत्तर: आठवीं शताब्दी के बाद भारत में कई नए राज्यों और साम्राज्यों का उदय हुआ। तुर्क, अफगान और मुगलों ने भारत में स्थाई राज्यों की स्थापना की और सामाजिक, सांस्कृतिक तथा बौद्धिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।
7.प्रश्न: मध्ययुगीन भारत का आर्थिक जीवन किस पर आधारित था?
उत्तर: मध्ययुगीन भारत का आर्थिक जीवन मुख्यतः कृषि पर आधारित था। इसके अलावा छोटे स्तर पर अन्य आर्थिक गतिविधियाँ भी होती थीं। कृषि और तकनीकी प्रगति के कारण वाणिज्य, व्यापार और शहरी जीवन धीरे-धीरे बढ़ा।
8.प्रश्न: प्राचीन और मध्यकालीन सिंचाई तकनीक में क्या अंतर था?
उत्तर: प्राचीन काल में जल प्राप्ति के लिए अरघट्ट या घटी यंत्र का प्रयोग होता था। मध्यकाल में रहट और जंजीरयुक्त यंत्र प्रचलित हुए, जिससे गहराई से पानी निकालना और पशु शक्ति का उपयोग संभव हुआ।
9.प्रश्न: चरखे और धुनकी का वस्त्र उद्योग में योगदान क्या था?
उत्तर: तकली से सूत कातने में समय लगता था, लेकिन चरखे और धुनकी के आने से सूत की गति बढ़ी, कपड़े की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि हुई।
10.प्रश्न: कागज के प्रचलन ने इतिहास और शिक्षा में क्या योगदान दिया?
उत्तर: तुकों के आगमन के साथ कागज का प्रयोग बढ़ा। इससे पांडुलिपियाँ अधिक उपलब्ध हुईं, ज्ञान और शिक्षा का प्रसार हुआ और व्यापारिक लेन-देन में सुविधा हुई।
11प्रश्न: समुद्री व्यापार में चुंबकीय कुतुबनुमा का योगदान क्या था?
उत्तर: चुंबकीय कुतुबनुमा या दिशा-सूचक यंत्र ने समुद्री यात्रा को आसान बनाया और समुद्री व्यापार के विकास में योगदान दिया।
12.प्रश्न: समय सूचक यंत्रों का महत्व क्या था?
उत्तर: समय सूचक यंत्रों जैसे जल घड़ी और धूप घड़ी का प्रयोग समय की सही जानकारी देने के लिए किया गया, जिससे प्रशासन और समाज में अनुशासन कायम रहा।
13.प्रश्न: युद्ध क्षेत्र में लोहे की रकाब का महत्व क्या था?
उत्तर: लोहे की रकाब घुड़सवार सैनिकों को सुरक्षा प्रदान करती थी और घोड़े की चाल और स्थिरता में सहायता करती थी।
14.प्रश्न: अरब लोगों का भारत पर सांस्कृतिक प्रभाव क्या रहा?
उत्तर: अरब लोग अपने साथ इस्लाम धर्म, रीति-रिवाज, पहनावा और पकवान (पुलाव, बिरयानी, कोरमा, फिरनी) लेकर आए। उनका प्रभाव सीमावर्ती और तटीय क्षेत्रों तक सीमित रहा, लेकिन ज्ञान और विज्ञान में सीमित आदान-प्रदान हुआ।
15.प्रश्न: तुर्क, अफगान और मुगलों ने भारत में कौन-कौन से प्रभाव डाले?
उत्तर: इन समूहों ने भारत में स्थाई राज्य स्थापित किए। सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई, धार्मिक और प्रशासनिक जीवन पर उनका व्यापक और स्थायी प्रभाव पड़ा।
16.प्रश्न: मध्यकालीन भारत में खाद्य और पहनावे के बदलाव क्या थे?
उत्तर: अरबी, तुर्क और मुगल प्रभाव से पुलाव, बिरयानी, कोरमा, फिरनी आदि खाद्य प्रचलित हुए। आम लोगों का पहनावा भी इन प्रभावों से बदलने लगा, जैसे कपड़े और आभूषण।
17.प्रश्न: हिन्दू धर्म में मध्यकाल में कौन-कौन से बदलाव हुए?
उत्तर: शिव, विष्णु, राम, कृष्ण की पूजा प्रचलित रही। तांत्रिक विचारधारा उभरी, जिसमें कपाल धारण करना और भोजन का चर्या के रूप में प्रयोग शामिल था। मंदिर निर्माण और ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा बढ़ी।
18.प्रश्न: भक्ति आंदोलन के महत्व को समझाइए।
उत्तर: भक्ति संतों ने कर्मकांड छोड़कर प्रेम, भाईचारा और भक्ति से ईश्वर के निकट पहुँचने का संदेश दिया। कबीर, रैदास, नानक, रामानंद जैसे संतों ने लोगों को सामाजिक और धार्मिक सुधार की दिशा में प्रेरित किया।
19.प्रश्न: सूफी संतों की भूमिका क्या थी?
उत्तर: सूफियों ने अल्लाह के प्रति सच्चे प्रेम और गरीबों की सेवा को धर्म मानते हुए सामाजिक सुधार में योगदान दिया। बिहार के हजरत शरफुद्दीन अहमद और दरिया साहब प्रसिद्ध सूफी संत थे।
20.प्रश्न: राजपूत और अन्य सामाजिक समूहों का उदय कैसे हुआ?
उत्तर: मध्यकाल में राजपूत, कवि, चारण, कायस्थ, सिक्ख, जाट आदि नए राजनीतिक और सामाजिक समूह बने। राजपूत शासक, सेनापति और सैनिक के रूप में इतिहास में उभरे।
21.प्रश्न: चेरो राजवंश का बिहार में योगदान क्या था?
उत्तर: चेरो राजवंश ने शाहाबाद, सारण, चंपारण, मुजफ्फरपुर और पलामू में शक्तिशाली राज्य स्थापित किया। वे लगभग 300 वर्षों तक शासन में रहे।
22.प्रश्न: मध्यकाल में खेती और वनवासियों में क्या बदलाव आया?
उत्तर: प्रौद्योगिकी के विकास से खेती योग्य भूमि बढ़ी। जंगलों में रहने वाले वनवासी खेती करने लगे। किसानों में सामाजिक और आर्थिक अंतर बढ़ा और जाति व्यवस्था विकसित हुई।
23.प्रश्न: जाति पंचायत की भूमिका क्या थी?
उत्तर: जातियाँ अपने नियम बनाती थीं। इन नियमों के पालन की जिम्मेदारी बड़े बुजुर्गों की सभा यानी जाति पंचायत करती थी।
24.प्रश्न: ऐतिहासिक स्रोत क्या होते हैं?
उत्तर: इतिहास को जानने के साधन या स्रोत होते हैं। इनमें लिखित पांडुलिपियाँ, अभिलेख, सिक्के, चित्र, भग्नावशेष आदि शामिल हैं।
25.प्रश्न: अभिलेखागार का महत्व क्या है?
उत्तर: अभिलेखागार दस्तावेज़ और पांडुलिपियों के संग्रह का स्थान है। इससे इतिहासकार पुराने सरकारी अभिलेख और लेन-देन का अध्ययन कर सकते हैं।
26.प्रश्न: फरमान किसे कहते हैं और इसका उपयोग कैसे होता था?
उत्तर: फरमान राजा या शासक द्वारा जारी किया गया आदेश होता था। अधिकतर भूमि अनुदान और राजस्व से संबंधित होते थे।
27.प्रश्न: मुगल कालीन पांडुलिपियों की विशेषताएँ क्या थीं?
उत्तर: पांडुलिपियाँ हस्तलिखित होती थीं, ताड़पत्र या भोजपत्र पर लिखी जाती थीं। बाद में कागज पर लिखना प्रचलित हुआ।
28.प्रश्न: खुदाबख्श ओरियेंटल लाइब्रेरी का महत्व क्या है?
उत्तर: यह लाइब्रेरी अरबी और फारसी में लिखी मध्यकालीन पुस्तकों का संग्रह करती है। इससे भारतीय इतिहास और संस्कृति का अध्ययन संभव है।
29.प्रश्न: मिनिएचर चित्र क्या होते थे?
उत्तर: मिनिएचर छोटे-छोटे सचित्र चित्र होते थे, जो पुस्तकों में शाही दरबार, शिकार और युद्ध का दृश्य दर्शाते थे।
30.प्रश्न: अकबरनामा का महत्व क्या है?
उत्तर: अकबरनामा अबुल फजल द्वारा लिखी गई मुगलकालीन रचना है। इसमें अकबर के प्रशासन, शासन और राजनीतिक घटनाओं का चित्रण किया गया है।
31.प्रश्न: संस्मरण का अर्थ क्या है?
उत्तर: संस्मरण किसी व्यक्ति द्वारा अपने जीवन की यादों का वर्णन होता है। बाबर का बाबरनामा इसका उदाहरण है।
32.प्रश्न: इब्ने बतूता के वृतान्त का महत्व क्या है?
उत्तर: इब्ने बतूता ने मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत की यात्रा की और सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति का विस्तृत वर्णन किया।
33.प्रश्न: सिक्कों से क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर: सिक्कों से शासकों का राज्यारोहण, साम्राज्य विस्तार, पड़ोसी राज्यों के संबंध और आर्थिक समृद्धि का पता चलता है।
34.प्रश्न: मध्यकालीन बिहार की वास्तुकला का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: शेरशाह का मकबरा सासाराम में, मनेर में मख्दुम शाह दौलत का समाधि भवन और वैकटपुर का शिवमंदिर, रोहतास गढ़ का हरिश्चन्द्र मंदिर प्रमुख उदाहरण हैं।
35.प्रश्न: इतिहासकार का मुख्य कार्य क्या होता है?
उत्तर: इतिहासकार स्रोतों की मदद से अतीत की घटनाओं का अध्ययन करता है और सर्वमान्य समझ बनाने का प्रयास करता है।
36.प्रश्न: जियाउद्दीन बरनी और एसामी में मुहम्मद बिन तुगलक की राजधानी परिवर्तन की घटना में क्या अंतर है?
उत्तर: बरनी के अनुसार राजधानी परिवर्तन सामरिक योजना के लिए हुआ, जबकि एसामी के अनुसार यह सुल्तान का जनता को कष्ट देने का उपाय था।
37.प्रश्न: इतिहासकारों को अतीत के अध्ययन में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर: अलग-अलग स्रोतों में विरोधाभास, व्यक्तिगत दृष्टिकोण और अप्रामाणिक जानकारी इतिहासकार के लिए चुनौतीपूर्ण होती है।
38.प्रश्न: मध्यकालीन भारत को किस आधार पर युगों में बांटा गया?
उत्तर: आठवीं शताब्दी से अठारहवीं शताब्दी तक के काल को मध्यकाल कहा गया क्योंकि सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों की शुरुआत और समाप्ति इस समय में हुई।
39.प्रश्न: समय के साथ सभी लोग नए विचारों से क्यों प्रभावित नहीं होते?
उत्तर: नए विचार और परिवर्तन एक ही समय में पूरे समाज को प्रभावित नहीं करते। कुछ क्षेत्रों में उनका प्रभाव देर से महसूस होता है।
40.प्रश्न: मध्यकाल और प्राचीन काल में अध्ययन की तुलना कैसे की जा सकती है?
उत्तर: प्राचीन काल में लिखित स्रोत कम और सीमित थे, जबकि मध्यकाल में कागज, पांडुलिपियाँ, सिक्के, चित्र, अभिलेख आदि के माध्यम से जानकारी अधिक विस्तृत और विविध हुई। इस तरह मध्यकालीन इतिहास अधिक प्रमाणिक और व्यापक रूप में अध्ययन किया जा सकता है।
Answer by Mrinmoee