Chapter 10 

                                                          हमारे इतिहासकार


1. प्रश्न: अस्करी साहब किन-किन शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े थे और उन्होंने शोध सामग्री कैसे एकत्र की?

उत्तर: अस्करी साहब कई शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े थे। शोध सामग्री एकत्र करने के लिए उन्होंने सुदूर देहातों तक की यात्राएँ कीं। फारसी पांडुलिपियों के जानकार के रूप में उनकी प्रतिष्ठा दूर-दूर तक फैल चुकी थी।

2. प्रश्न: अस्करी साहब ने किस भाषा में अधिक लेखन कार्य किया और कितने शोध-पत्र प्रस्तुत किए?

उत्तर: उन्होंने लेखन कार्य मुख्यतः अंग्रेजी भाषा में किया, हालांकि कुछ रचनाएँ उर्दू में भी उपलब्ध हैं। उन्होंने निरंतर इतिहास विषय पर कार्य करते हुए लगभग 150 मानक शोध पत्र प्रस्तुत किए।

3. प्रश्न: अस्करी साहब ने शोधकार्य को अर्थोपार्जन का साधन क्यों नहीं बनाया?

उत्तर: वे शोध को केवल अपनी रुचि और आदत के रूप में करते थे। उनकी आर्थिक अपेक्षाएँ शोध पर आधारित नहीं थीं। वे शोध को ज्ञान प्राप्ति और समाज के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने का माध्यम मानते थे।

4. प्रश्न: मध्यकालीन बिहार के बारे में जानकारी देने में अस्करी साहब क्यों महत्वपूर्ण माने जाते थे?

उत्तर: पटना के मध्यकालीन इतिहास से संबंधित किसी भी गली, कुएँ, मंदिर या मस्जिद की प्रमाणिक जानकारी वे सहजता से प्रदान कर देते थे। इसलिए शोधार्थी उन्हें स्वयं एक प्राथमिक स्रोत की तरह मानते थे।

5. प्रश्न: शोध कार्य की परिभाषा पाठ के अनुसार क्या है?

उत्तर: समकालीन स्रोतों के आधार पर तैयार सामग्री की नई, तर्कसंगत और क्रमबद्ध प्रस्तुति जब कोई शोधार्थी करता है तो उसे शोध कार्य कहा जाता है।

6. प्रश्न: अस्करी साहब किन महत्वपूर्ण संस्थानों से जुड़े रहे और उन्हें अंग्रेजी सरकार ने कौन-सा सम्मान दिया?

उत्तर: वे काशी प्रसाद जयसवाल शोध संस्थान के निदेशक तथा खुदाबख्श ओरियंटल पब्लिक लाइब्रेरी की संचालन समिति के सदस्य थे। अंग्रेजी सरकार ने उन्हें ‘खान साहब’ की पदवी से सम्मानित किया।

7. प्रश्न: अस्करी साहब को कौन-कौन से राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए?

उत्तर: उन्हें पटना के नागरिकों ने ‘बिहार रत्न’, भारत सरकार ने ‘पद्मश्री’ और भारतीय इतिहास कांग्रेस ने उन्हें ‘वैज्ञानिक एवं धर्मनिरपेक्ष इतिहास लेखन’ के लिए सम्मानित किया। वे तीन-तीन राष्ट्रपति से सम्मानित होने वाले दुर्लभ इतिहासकार थे।

8. प्रश्न: खुदाबख्श लाइब्रेरी ने अस्करी साहब की कौन-कौन सी रचनाएँ प्रकाशित कीं?

उत्तर: लाइब्रेरी ने उनकी 200 से अधिक अंग्रेजी और उर्दू लेखों को संकलित कर अंग्रेजी में पाँच खण्डों और उर्दू में एक खण्ड में प्रकाशित किया। उर्दू का एक संकलन बिहार उर्दू अकादमी ने भी प्रकाशित किया।

9. प्रश्न: अस्करी साहब ने किन पुस्तकों या ग्रंथों का सम्पादन किया?

उत्तर: उन्होंने ‘कम्प्रीहेन्सिव हिस्ट्री ऑफ बिहार’ तथा दो अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकों—‘इकबालनामा’ और ‘शाहनामा मुनव्वर कलान’ का सम्पादन किया। इसे प्रो. क्यामुद्दीन अहमद के साथ सह-संपादक के रूप में किया गया।

10. प्रश्न: अस्करी साहब किस प्रकार की इतिहासलेखन शैली से प्रभावित थे?

उत्तर: वे पारंपरिक इतिहास लेखन शैली से प्रभावित थे, इसलिए उन्होंने मुख्यतः राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास पर लिखा। आर्थिक इतिहास में उनकी रुचि अपेक्षाकृत कम थी।

11. प्रश्न: उन्होंने मध्यकालीन भारत के किन-किन पहलुओं पर लेख लिखे?

उत्तर: उन्होंने तुर्क शासनकाल से लेकर मुगल साम्राज्य के पतन तक कई लेख लिखे। साथ ही सूफी संतों, विशेषकर फिरदौसी संतों, और सामाजिक जीवन के अनेक पहलुओं जैसे पान खाने की आदतों पर भी उन्होंने शोध किया।

12. प्रश्न: अस्करी साहब के शोध का इतिहास लेखन में क्या महत्व है?

उत्तर: उन्होंने अनेक स्रोतों और पांडुलिपियों का अध्ययन करके उन पर लेख लिखे, जिससे इतिहास लेखन में गहराई आई और पाठकों व शोधकर्ताओं की समझ समृद्ध हुई।

13. प्रश्न: इतिहास लेखन में अस्करी साहब की वस्तुनिष्ठता कैसे दिखाई देती है?

उत्तर: उन्होंने बिना किसी पक्षपात के स्रोतों में उपलब्ध जानकारी को छात्रों और शोधकर्ताओं के सामने रखा। उनकी ईमानदारी और निष्पक्षता इतिहास लेखन की सबसे बड़ी विशेषता थी।

14. प्रश्न: फारसी भाषा के स्रोतों के अध्ययन में उनकी दक्षता क्यों अद्वितीय मानी जाती है?

उत्तर: फारसी अभिलेखों, फरमानों और पांडुलिपियों के विश्लेषण में उनका ज्ञान अत्यंत गहरा था। वे दुर्लभ दस्तावेजों को पढ़कर उसका वास्तविक अर्थ समझाते थे।

15. प्रश्न: अस्करी साहब का स्वभाव कैसा था?

उत्तर: वे अत्यंत सरल, विनम्र और अहंकार रहित व्यक्ति थे। छात्रों और शोधकर्ताओं की सहायता व मार्गदर्शन करने में हमेशा तत्पर रहते थे।

16. प्रश्न: मानवीय संवेदनाओं के प्रति उनकी दृष्टि कैसी थी?

उत्तर: वे मानवता के सच्चे प्रेमी थे। उन्होंने अपने बच्चों को अपनी मृत्यु के बाद के रीति-रिवाजों पर पैसा खर्च न करने को कहा था। इसके बजाय गरीबों, अनाथों और विधवाओं की सहायता करने को प्रेरित किया।

17. प्रश्न: अस्करी साहब ने गरीबों और जरूरतमंदों के लिए क्या निर्देश दिए थे?

उत्तर: उन्होंने कहा था कि चालीसवें के दिन गरीबों को भोजन कराएं या किसी अनाथ बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाएं। किसी विधवा की शादी में सहायता करें और भीख मांगने वालों को चाहे वे किसी भी धर्म के हों, आर्थिक सहयोग दें।

18. प्रश्न: पाठ के आधार पर सिद्ध करें कि वे बड़े इतिहासकार होने के साथ-साथ बड़े मानवतावादी भी थे।

उत्तर: उन्होंने इतिहास लेखन में ईमानदारी और समर्पण दिखाया और व्यक्तिगत जीवन में विशाल हृदय और मानवीय संवेदना। उन्होंने धर्म, जाति से ऊपर उठकर सभी जरूरतमंदों की सहायता का संदेश दिया।

19. प्रश्न: ‘कम्प्रीहेन्सिव हिस्ट्री ऑफ बिहार’ पुस्तक क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह बिहार के मध्यकालीन इतिहास पर आधारित विस्तृत शोधग्रंथ है, जिसका सम्पादन अस्करी साहब ने सह-सम्पादक प्रो. क्यामुद्दीन अहमद के साथ किया। इसमें अनेक प्राथमिक स्रोतों का संकलन है।

20. प्रश्न: अस्करी साहब ने अमीर खुसरो की रचनाओं पर क्या कार्य किया?

उत्तर: उन्होंने अमीर खुसरो की कई रचनाओं की आलोचनात्मक व्याख्या की और उनके साहित्यिक व ऐतिहासिक योगदान को स्पष्ट किया।

21. प्रश्न: मध्यकालीन भारत के सामाजिक जीवन के किन पहलुओं पर उन्होंने लिखा?

उत्तर: उन्होंने सामाजिक जीवन की आदतों, रहन-सहन, धार्मिक परंपराओं और यहाँ तक कि पान खाने की मध्यकालीन प्रथा पर भी विस्तृत शोध किया।

22. प्रश्न: शोधकार्य के प्रति उनकी दृष्टि कैसी थी?

उत्तर: वे शोध को ज्ञानार्जन और समाज के हित में जानकारी प्रदान करने का माध्यम मानते थे। वे शोधार्थियों को प्रेरित करते और सामग्री उपलब्ध कराते थे।

23. प्रश्न: अस्करी साहब की रचनाएँ इतिहास के छात्रों के लिए क्यों आवश्यक मानी जाती हैं?

उत्तर: उनकी रचनाओं में प्रामाणिक स्रोत, सटीक विश्लेषण और वस्तुनिष्ठता है, जिससे छात्रों को मध्यकालीन इतिहास की गहरी और विश्वसनीय समझ मिलती है।

24. प्रश्न: खुदाबख्श लाइब्रेरी में उनकी भूमिका क्या थी?

उत्तर: वे लाइब्रेरी की संचालन समिति के सदस्य रहे और उनके योगदान से लाइब्रेरी में अनेक महत्वपूर्ण शोधकार्य और प्रकाशन सम्पन्न हुए।

25. प्रश्न: ‘वैज्ञानिक एवं धर्मनिरपेक्ष इतिहास लेखन’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: बिना पक्षपात और भावनात्मक प्रभाव के केवल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर इतिहास लिखना वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष इतिहास लेखन कहलाता है। अस्करी साहब का लेखन इसी पर आधारित था।

26. प्रश्न: उनके लेखन में राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास का महत्व क्यों अधिक है?

उत्तर: क्योंकि उनकी रुचि परंपरागत शैली में थी, जिसमें राजनीतिक घटनाएँ और सांस्कृतिक विकास अधिक प्रमुखता रखते हैं। आर्थिक इतिहास में उनकी रुचि अपेक्षाकृत कम थी।

27. प्रश्न: बिहार के सूफी संतों पर किए गए उनके शोध का महत्व क्या है?

उत्तर: सूफी संतों, विशेषकर फिरदौसी संतों के बारे में उन्होंने विस्तृत सामग्री जुटाई और उनके योगदान को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित किया, जिससे बिहार के आध्यात्मिक इतिहास को नई रोशनी मिली।

28. प्रश्न: उनके लेख सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को कैसे समृद्ध करते हैं?

उत्तर: उनके लेख सामाजिक व्यवहार, सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक प्रथाओं और लोकजीवन के विवरण प्रदान करते हैं, जो इतिहास की समझ को विस्तृत बनाते हैं।

29. प्रश्न: अस्करी साहब का अहंकाररहित स्वभाव उनके कार्यों में कैसे प्रदर्शित होता है?

उत्तर: वे इतने जानकार होने के बावजूद हमेशा विनम्र रहे और किसी भी शोधार्थी की सहायता करने में तत्पर रहते थे। वे अपने ज्ञान का प्रदर्शन नहीं करते थे।

30. प्रश्न: उनकी मृत्यु के बाद के रीति-रिवाजों के संबंध में उनके निर्देश क्या बताते हैं?

उत्तर: इससे स्पष्ट होता है कि वे आडंबर और बाहरी दिखावे के विरोधी थे। वे समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता को ही वास्तविक धर्म मानते थे।

31. प्रश्न: इतिहास लेखन में स्रोतों का महत्व क्या है, और अस्करी साहब इसे कैसे सिद्ध करते हैं?

उत्तर: इतिहास स्रोतों पर आधारित होता है। अस्करी साहब ने हमेशा स्रोतों का अध्ययन कर उनके आधार पर तथ्य प्रस्तुत किए, जिससे इतिहास की प्रामाणिकता बढ़ी।

32. प्रश्न: फारसी पांडुलिपियों के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: मध्यकालीन भारत का बहुत बड़ा इतिहास फारसी भाषा में लिखा गया है। इन्हें समझने के लिए गहरी भाषा–दक्षता और ऐतिहासिक दृष्टि चाहिए, जो अस्करी साहब में थी।

33. प्रश्न: पाठ के आधार पर बताइए कि शोधार्थी उनसे क्या सीख सकते हैं?

उत्तर: शोधार्थी उनसे ईमानदारी, स्रोतों पर निर्भरता, विनम्रता, और मानवता की भावना जैसे गुण सीख सकते हैं। साथ ही शोध की पद्धति और गहन अध्ययन की आदत भी सीख सकते हैं।

34. प्रश्न: अस्करी साहब के लेखन में सामाजिक संवेदनशीलता कैसे दिखाई देती है?

उत्तर: वे सामाजिक जीवन के छोटे-छोटे पहलुओं तक का अध्ययन करते थे और उनके महत्व को समझाते थे। पान खाने जैसी सामान्य प्रथा पर भी उनका लेख उनकी संवेदनशील दृष्टि दर्शाता है।

35. प्रश्न: ‘इकबालनामा’ और ‘शाहनामा मुनव्वर कलान’ का संपादन क्यों महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है?

उत्तर: ये दोनों महत्वपूर्ण फारसी ग्रंथ हैं जिनका सम्पादन विद्वानों के लिए बहुत उपयोगी है। इससे मध्यकालीन इतिहास के नए पहलू उजागर हुए।

36. प्रश्न: अस्करी साहब के लेखन को ‘वैज्ञानिक’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि उन्होंने तथ्य, प्रमाण, तर्क और विश्लेषण के आधार पर इतिहास लिखा। उनकी रचनाओं में कल्पना या पक्षपात की कोई जगह नहीं थी।

37. प्रश्न: उन्होंने शोधार्थियों की किस प्रकार सहायता की?

उत्तर: वे शोधार्थियों को स्रोत सामग्री उपलब्ध कराते, मार्गदर्शन देते और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते थे। वे सदैव उनके लिए उपलब्ध रहते थे।

38. प्रश्न: उनकी मानवीय सोच का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: उनकी सोच लोगों को दूसरों की सहायता करने, दिखावे के खर्च से बचने और मानव सेवा को महत्व देने की प्रेरणा देती है।

39. प्रश्न: पाठ में वर्णित उनके गुणों से एक आदर्श इतिहासकार की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: गहरी जानकारी, स्रोतों की समझ, वस्तुनिष्ठता, विनम्रता, मेहनत, सामाजिक संवेदनशीलता और मानवता—ये सभी गुण अस्करी साहब में थे, जो एक आदर्श इतिहासकार की पहचान हैं।

40. प्रश्न: राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के पाँच बिंदुओं की व्याख्या करें।

उत्तर:
i) सभी तंबाकू उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
ii) कोई भी तंबाकू उत्पाद किसी भी मात्रा में सुरक्षित नहीं होता।
iii) बीड़ी भी सिगरेट जितनी ही हानिकारक होती है।
iv) किसी के पास बैठकर उसका धुआँ (सेकेंड हैंड स्मोक) लेना भी जानलेवा हो सकता है।
v) तंबाकू चबाने से मुँह के कैंसर सहित कई गंभीर रोग हो सकते हैं।


Answer by Mrinmoee