Chapter 6
शहर, व्यापारी एवं कारीगर
प्रश्न 1: मध्यकालीन भारत में शहरों के कितने प्रमुख प्रकार पाए जाते थे और उनका क्या महत्व था?
उत्तर: मध्यकालीन भारत में शहर मुख्यतः चार प्रकार के थे। प्रशासनिक नगर, जो शासक वर्ग के सत्ता केन्द्र थे; मंदिर नगर एवं तीर्थ स्थल, जो धार्मिक आस्था और व्यापार के केन्द्र थे; वाणिज्यिक नगर, जो विशेष वस्त्र या उत्पादों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे; तथा बंदरगाह (पत्तन) नगर, जो समुद्र के किनारे विकसित होकर विदेशी व्यापार के केन्द्र बन गए थे। इन शहरों ने शासन, धर्म, व्यापार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 2: प्रशासनिक नगर किस प्रकार का शहर होता था और इसमें किन-किन लोगों का निवास होता था?
उत्तर: प्रशासनिक नगर शासक वर्ग का सत्ता केन्द्र होते थे। इनमें राजमहल होते थे, जहाँ राजा, उनके परिवार, अधिकारी, नौकर-चाकर और सैनिक रहते थे। राजमहलों में सभा कक्ष होते थे, जहाँ से शासक अपने अधीनस्थ अधिकारियों और प्रजा के लिए आदेश जारी करता था।
प्रश्न 3: प्रशासनिक नगरों में बाजार की भूमिका क्या थी?
उत्तर: प्रशासनिक नगरों में बाजार नगरवासियों की अनाज, कपड़ा, आभूषण और अन्य दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं की पूर्ति करते थे। दिल्ली के सुल्तानों और मुगल बादशाहों ने शाही वस्तुओं की आपूर्ति के लिए कारखाने भी स्थापित किए।
प्रश्न 4: दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिर नगरों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: दक्षिण भारत में आठवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच तंजावूर, कांचीपुरम और तिरुपति जैसे मंदिर नगर विकसित हुए। ये नगर धार्मिक श्रद्धा और भक्ति के साथ व्यापारिक गतिविधियों के केन्द्र भी थे।
प्रश्न 5: मंदिर नगरों में वाणिज्य-व्यापार को प्रोत्साहित करने का कारण क्या था?
उत्तर: मंदिरों में अपार धन-संपत्ति जमा हो जाती थी और मंदिर के कर्त्ता-धर्ता इसे व्यापारियों को ऋण देने में लगाते थे। इस प्रकार मंदिर, क्षेत्र विशेष के वाणिज्य-व्यापार को प्रोत्साहित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते थे।
प्रश्न 6: तीर्थ स्थलों का महत्व मध्यकालीन भारत में कैसे बढ़ा?
उत्तर: भक्ति आंदोलन के प्रसार के कारण तीर्थस्थलों का महत्व बढ़ा। लोग विभिन्न क्षेत्रों से पूजा-पाठ और दर्शन के लिए पवित्र स्थलों पर आते थे। मथुरा, काशी, वृंदावन, अजमेर, माउंट आबू, सोमनाथ आदि प्रमुख तीर्थ स्थल बन गए।
प्रश्न 7: वाणिज्यिक नगर कैसे विकसित हुए?
उत्तर: कुछ ग्रामीण बस्तियाँ अपने उत्पादों के लिए व्यापार के केन्द्र बन गईं। धीरे-धीरे ये शहरी केन्द्र बन गए। इनमें व्यापार मुख्य रूप से स्थानीय उत्पादों पर आधारित था, जैसे बुरहानपुर (कपास), अहमदाबाद (कपड़ा), बयाना (नील), कांचीपुरम (सूती कपड़ा), कैम्बे (रत्न बाजार) आदि।
प्रश्न 8: बंदरगाह नगरों का विकास कैसे हुआ और इसका महत्व क्या था?
उत्तर: समुद्र तटीय क्षेत्रों में शासकों और व्यापारियों ने बंदरगाह विकसित किए। विदेशी व्यापारियों (यहूदी, ईसाई, अरब) को बसने और व्यापार करने की अनुमति दी गई। गुजरात के बंदरगाह जैसे भड़ौच और सूरत पश्चिमी देशों के व्यापारिक केन्द्र बन गए। पूर्वी तट के प्रमुख बंदरगाह- हुगली, मोटुपल्ली, मसूलीपटनम दक्षिण-पूर्वी व्यापार के केन्द्र बने।
प्रश्न 9: शहरी परिदृश्य का सामान्य स्वरूप क्या था?
उत्तर: अधिकांश शहर एक चहारदीवारी से घिरे होते थे, जिनमें एक या अधिक प्रवेश द्वार होते थे। शहर सुनियोजित ढंग से मुहल्लों में बंटे होते थे। प्रमुख मुहल्लों में किसी विशेष जाति या व्यवसाय से जुड़े लोग रहते थे।
प्रश्न 10: शहरों में मुहल्लों का नामकरण किस आधार पर किया जाता था?
उत्तर: शहरों में मुहल्लों का नाम पेशे, व्यवसाय या जाति के आधार पर रखा जाता था। उदाहरण के लिए कुंजड़ी मुहल्ला (सब्जी विक्रेता), मोची बाड़ा (जूते बनाने वाले), मुहल्ला जरगरान (सुनार), कूचा रंगरेज (कपड़ा रंगने वाले)।
प्रश्न 11: शहरों में मध्यम वर्ग के लोगों में कौन-कौन शामिल थे?
उत्तर: छोटे मनसबदार, कर्मचारी, दुकानदार, साहुकार, वैद्य, चित्रकार, संगीतकार और पांडुलिपि लेखक आदि मध्यम वर्ग में आते थे। ये लोग प्रशासनिक या धार्मिक कार्यों में भी योगदान करते थे।
प्रश्न 12: बंजारे कौन थे और उनका कार्य क्या था?
उत्तर: बंजारे घुमंतू व्यापारी थे जो अनाज, नमक, चीनी, मक्खन आदि वस्तुएँ एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाते थे। उनका कारवां 'टांडा' कहलाता था। वे व्यापार के साथ-साथ मुगलों की सेना के लिए खाद्य सामग्री भी ढोते थे।
प्रश्न 13: पीटर मुंडी ने बंजारों के बारे में क्या वर्णन किया?
उत्तर: उन्होंने लिखा कि बंजारों का एक टांडा 14,000 बैलों से भरा था। वे अपने परिवार के साथ यात्रा करते थे। एक दिन में 6-7 मील चलते थे। बैल और गाय उनके अपने होते थे और वे कभी-कभी सौदागर द्वारा भाड़े पर काम करते थे, लेकिन अधिकांश समय स्वयं सौदागर होते थे।
उत्तर: मैदानी इलाकों में बैलगाड़ियों का उपयोग होता था। अन्य क्षेत्रों में बैल, खच्चर, ऊँट और इंसान सामान ढोने के लिए इस्तेमाल होते थे। जलमार्ग पर नावों और समुद्र में बड़े जहाजों का प्रयोग होता था।
प्रश्न 15: मुद्रा और सिक्कों का क्या महत्व था?
उत्तर: वस्त्रों और अन्य वस्तुओं की खरीद-बिक्री में सिक्के मुख्य साधन थे। सिक्के सोने, चांदी और तांबे के बने होते थे। मुगल काल में रूपया और दाम प्रमुख मुद्रा थी। सर्राफ सिक्कों की शुद्धता और वजन की जाँच करते थे और हुंडी के माध्यम से लेन-देन करते थे।
प्रश्न 16: व्यापारी संघ क्या थे और उनका महत्व क्या था?
उत्तर: व्यापारी संघ अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए संगठन थे। संघ के प्रमुख राजा से मिलकर वस्तुओं पर चुंगी तय करता और संघ की आंतरिक व्यवस्था संचालित करता था। दक्षिण भारत के नानादेशी और मनीग्रामम् ऐसे प्रमुख संघ थे।
प्रश्न 17: नगरों में कारीगरों की स्थिति क्या थी?
उत्तर: कारीगर अपने व्यवसाय को पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलाते थे। उनके कार्य स्थानीय होते थे और कुछ शहर विशिष्ट उत्पादों के लिए प्रसिद्ध थे। दिल्ली के सुल्तानों और मुगल बादशाहों ने शाही वस्तुओं के निर्माण के लिए कारखाने स्थापित किए।
प्रश्न 18: बर्नियर के अनुसार मुगल कारखानों में कौन-कौन से कारीगर काम करते थे?
उत्तर: कशीदाकार, स्वर्णकार, चित्रकार, लाख की पालिश करने वाले, जड़िये, दर्जी, मोची, रेशम बनाने और कलावात कार्य करने वाले।
प्रश्न 19: मुगल कारखानों में उत्पादित वस्तुओं का उपयोग किसके लिए होता था?
उत्तर: ये वस्तुएँ शासक, उनके परिवार और राज्य की आवश्यकताओं के लिए बनाई जाती थीं।
प्रश्न 20: प्राचीन भारत में वस्त्र निर्माण के प्रमुख केन्द्र कौन-कौन से थे?
उत्तर: ढाका का मलमल, दक्षिण भारत में कांचीपुरम और मसूलीपटनम, खंभात के रेशमी कपड़े और कश्मीर की ऊनी शाल प्रमुख केन्द्र थे।
प्रश्न 21: चोलकालीन कांस्य मूर्तियाँ किस तकनीक से बनाई जाती थीं?
उत्तर: लुप्तमोम तकनीक से। इसमें पहले मोम की मूर्ति बनाई जाती, मिट्टी की परत चढ़ाई जाती, फिर गर्म करने पर मोम पिघल जाता और धातु भरकर मूर्ति बनाई जाती।
प्रश्न 22: यूरोपीय व्यापारियों के भारत आगमन का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: वे मसालों, सूती वस्त्रों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की तलाश के लिए भारत आए।
प्रश्न 23: पुर्तगाल ने भारत में अपने व्यापारिक अधिकार कैसे स्थापित किए?
उत्तर: पुर्तगालियों ने गोवा, कालीकट, कोचीन आदि तटीय क्षेत्रों में नौ-सैनिक अड्डे स्थापित किए और कार्ज (आज्ञा पत्र) प्रणाली से व्यापार नियंत्रित किया।
प्रश्न 24: सत्रहवीं शताब्दी में अन्य यूरोपीय देशों ने क्या किया?
उत्तर: इंग्लैंड, हॉलैण्ड और फ्रांस ने ईस्ट इंडिया कंपनियाँ बनाई और भारत में व्यापारिक कोठियों (गोदाम) की स्थापना की।
प्रश्न 25: ईस्ट इंडिया कम्पनी की विशेषता क्या थी?
उत्तर: कई व्यापारी मिलकर साझेदारी में कंपनी बनाते थे और लाभ-हानि में सभी बराबर के साझेदार होते थे।
प्रश्न 26: यूरोपीय कंपनियों के आगमन से दस्तकारों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: भारतीय दस्तकारों की स्वतंत्रता घट गई। कंपनियाँ उन्हें अग्रिम राशि देतीं और यूरोप में मांग वाले उत्पाद बनाने के लिए बाध्य करती थीं।
प्रश्न 27: दादनी व्यवस्था क्या थी?
उत्तर: इसमें भारतीय व्यापारी यूरोपीय कंपनियों के एजेंट बनकर उनसे मांग वाले उत्पाद तैयार करवाते थे।
प्रश्न 28: कलकत्ता, मद्रास और बम्बई में कोठियाँ क्यों बनाई गईं?
उत्तर: व्यापारिक गतिविधियों के संचालन के लिए। इनमें वस्तुओं का संग्रह, कार्यालय और कर्मचारियों के आवास होते थे। सुरक्षा के लिए इन्हें किलेबंद किया गया।
प्रश्न 29: पटना का मध्यकालीन नाम क्या था और उसका कारण क्या था?
उत्तर: पटना को अजीमाबाद भी कहा जाता था। यह अफगान-मुगल काल में बिहार का प्रमुख व्यापारिक नगर था।
प्रश्न 30: अजीम ने पटना को कैसे विकसित किया?
उत्तर: अजीम ने मुहल्लों का निर्माण इस प्रकार किया कि शहर की सुंदरता बढ़ी। मुहल्लों का नाम पेशे और निवासियों के अनुसार रखा गया।
प्रश्न 31: पटना के प्रमुख मुहल्लों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: लोदीकटरा, मुगलपुरा, कैवां शिकोह, मैदाने फसाहत, दीवान मुहल्ला, ठठेरी बाजार, कमंगर गली, पानदारी, नूनगोला, चौहट्टा, गुरहट्टा।
प्रश्न32: सत्रहवीं शताब्दी में पटना का व्यापारिक महत्व क्या था?
उत्तर: अंग्रेज और डच कंपनियों के प्रयास से पटना यूरोप, मध्य एशिया और अफ्रीका से व्यापार का केंद्र बन गया।
प्रश्न 33: पटना से कौन-कौन सी वस्तुएँ विदेशों को जाती थीं?
उत्तर: सूती वस्त्र, नील, शोरा।
प्रश्न 34: पटना में अंग्रेजों द्वारा कौन-सी व्यापारिक कोठी बनाई गई और उसका उद्देश्य क्या था?
उत्तर: गुलजारबाग मुहल्ले में 1620 में गंगा नदी के किनारे कोठी बनाई गई। इसका उद्देश्य शोरा और अन्य व्यापारिक वस्तुएँ संग्रहित करना था।
प्रश्न 35: पटना में बड़े पैमाने पर कौन-कौन सी वस्तुएँ बनाई जाती थीं?
उत्तर: रेशम वस्त्र, चावल, चीनी और सूती धागे।
प्रश्न 36: मुगल काल में पटना में सिक्का बनाने की क्या व्यवस्था थी?
उत्तर: 1580 में अकबर ने टकसाल स्थापित की। 1705 में अजीम के समय में सिक्कों पर ‘अजीमाबाद’ लिखा गया।
प्रश्न 37: मालसलामी मुहल्ले का क्या महत्व था?
उत्तर: यह मुगल काल में व्यापारिक सामान पर चुंगी वसूलने का केन्द्र था।
प्रश्न 38: शहरों में व्यापारियों और कारीगरों का संगठन किस प्रकार था?
उत्तर: व्यापारी संघों और कारीगर कारखानों के माध्यम से संगठित थे। संघ नियम बनाते और अपने सदस्यों के हितों की रक्षा करते थे।
प्रश्न 39: शहरों में व्यापारिक मार्ग और यातायात का महत्व क्या था?
उत्तर: सड़क और समुद्री मार्ग व्यापारिक सम्पर्कों को जोड़ते थे। बैलगाड़ियाँ, नाव और जहाज वस्तुओं की ढुलाई के मुख्य साधन थे।
प्रश्न 40: सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय व्यापारियों के आगमन के प्रभाव क्या हुए?
उत्तर: भारतीय व्यापार वैश्विक स्तर पर फैल गया, दस्तकारों की स्वतंत्रता कम हुई, विदेशी कंपनियाँ व्यापार नियंत्रित करने लगीं और शहरों में यूरोपीय व्यापारिक केन्द्र स्थापित हुए।
Answer by Mrinmoee