Chapter 7
सामाजिक-सांस्कृतिक विकास
प्रश्न 1: भारत में भक्ति आंदोलन की शुरुआत कब और किन कारणों से हुई?
उत्तर: भारत में भक्ति आंदोलन की शुरुआत प्राचीन काल से हुई, जब समाज में वैदिक कर्मकाण्ड महंगे हो गए और दलित, निम्न जाति के लोग धार्मिक और सामाजिक भेदभाव का सामना कर रहे थे। भक्ति आंदोलन ने सरलता और समानता का संदेश देकर समाज के शोषित वर्ग को ईश्वर के प्रति भक्ति का मार्ग दिखाया।
प्रश्न 2: भक्ति का अर्थ क्या है और इसे किस प्रकार समझा जा सकता है?
उत्तर: भक्ति का अर्थ ईश्वर पर पूर्ण विश्वास, उनके प्रति प्रेम और समर्पण है। इसे ईश्वर को संसार का कर्ता-धर्ता मानकर, उनके शरण में समर्पित होने और आत्मा की मुक्ति के प्रयास के रूप में समझा जा सकता है।
प्रश्न 3: भक्ति परंपरा का प्रारंभिक स्रोत कौन-कौन से थे?
उत्तर भक्ति परंपरा का प्रारंभिक स्रोत मातृदेवी और शिव की पूजा से हड़प्पा सभ्यता में हुआ। वैदिक काल में वेदों और उपनिषदों ने आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध स्थापित कर भक्ति को व्यवस्थित रूप दिया।
प्रश्न 4: भक्ति आंदोलन के मुख्य कारण क्या थे?
उत्तर: मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन के मुख्य कारण थे—वैदिक कर्मकाण्डों का महंगा होना, दलित और निम्न जाति के लोग सामाजिक भेदभाव और शोषण झेल रहे थे, और समाज में समानता एवं सरल धार्मिक आचरण की आवश्यकता महसूस होना।
प्रश्न 5: नयनार और अलवार संतों की विशेषता क्या थी?
उत्तर: नयनार (शैव) और अलवार (वैष्णव) संतों ने विभिन्न जातियों के लोगों में भगवान के प्रति भक्ति और सादगी का संदेश फैलाया। उनके गीतों और रचनाओं ने समाज में समानता और भक्ति की भावना को बढ़ाया।
प्रश्न 6: माणिक्कवसागार की कविता का संदेश क्या था?
उत्तर: माणिक्कवसागार ने अपनी कविता में भगवान को अपने दुख, जन्म-मृत्यु और माया-मोह से मुक्त करने वाला बताया और ईश्वर की शरण में जाने का आग्रह किया।
प्रश्न 7: शंकराचार्य ने भक्ति और दर्शन का किस प्रकार मेल किया?
उत्तर: शंकराचार्य ने अद्वैतवाद के सिद्धांत प्रस्तुत किए। उनके अनुसार केवल ब्रह्म ही सत्य है और संसार माया है। उन्होंने भक्ति को ज्ञान मार्ग के साथ जोड़कर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया।
प्रश्न 8: शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ कौन-कौन से थे?
उत्तर: उत्तर: बद्रीकाश्रम (उत्तराखण्ड), दक्षिण: श्रृंगेरी (तमिलनाडू), पूरब: पुरी (उड़ीसा), पश्चिम: द्वारिका (गुजरात)।
प्रश्न 9: रामानुज ने भक्ति दर्शन में किस प्रकार का योगदान दिया?
उत्तर: रामानुज ने ईश्वर को दया और अनुकम्पा का स्रोत माना। उन्होंने मोक्ष प्राप्ति के लिए अनन्य भक्ति को बताया और समाज के दलित वर्ग को भी भक्ति का संदेश दिया।
प्रश्न 10: महाराष्ट्र के संतों ने भक्ति के माध्यम से समाज में क्या बदलाव लाए?
उत्तर: महाराष्ट्र के संतों जैसे नामदेव, एकनाथ, तुकाराम ने ऊँच-नीच के भेदभाव का विरोध किया। उन्होंने सभी जातियों, महिलाओं और मुसलमानों को समान दृष्टि से देखा और भक्ति के माध्यम से सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया।
प्रश्न 11: संत तुकाराम के अभंग का मुख्य संदेश क्या था?
उत्तर: संत तुकाराम के अभंग में यह संदेश था कि जो व्यक्ति दीन-दुखियों और परित्यक्तों का सम्मान करता है, वही सच्चा संत है, क्योंकि ईश्वर उसी के साथ है।
प्रश्न 12: चोखमेला और उनके पुत्र द्वारा रचित अभंग में क्या दृष्टिकोण व्यक्त किया गया?
उत्तर: चोखमेला और उनके पुत्र ने निम्न जाति के जीवन संघर्ष और सामाजिक अन्याय को उजागर किया। उन्होंने भगवान से अपनी पीड़ा और असमानता पर प्रश्न किया और समानता एवं न्याय की भावना व्यक्त की।
प्रश्न 13: रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति को किस रूप में लोकप्रिय बनाया?
उत्तर: रामानंद ने सगुण और निर्गुण संप्रदाय के माध्यम से भक्ति को उत्तर भारत में लोकप्रिय बनाया। उन्होंने जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव को नकारा और सभी को समान दृष्टि से भगवान की भक्ति में शामिल किया।
प्रश्न 14: तुलसीदास ने भक्ति साहित्य में क्या योगदान दिया?
उत्तर: तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना कर रामभक्ति की परंपरा को हिन्दी भाषी क्षेत्रों में ऊँचाई प्रदान की। उन्होंने आदर्श समाज की कल्पना की, जिसमें सभी जातियाँ शांति और अनुशासन के साथ जीवन व्यतीत करें।
प्रश्न 15: मीराबाई की भक्ति का मुख्य संदेश क्या था?
उत्तर: मीराबाई ने कृष्ण के प्रति पूर्ण श्रद्धा और प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने सुखमय जीवन त्यागकर साधु संतों की संगति अपनाई और भक्ति में जाति या सामाजिक स्थिति को महत्व नहीं दिया।
प्रश्न 16: चैतन्य महाप्रभु का भक्ति दर्शन क्या था?
उत्तर: चैतन्य महाप्रभु ने वैष्णव धर्म का सरल और नैतिक रूप प्रस्तुत किया। उन्होंने भजन-कीर्तन, आत्मा की शुद्धता और ईश्वर के प्रति प्रेम को प्रमुख माना।
प्रश्न 17: सूरदास और रसखान ने कृष्ण भक्ति को किस रूप में फैलाया?
उत्तर: सूरदास ने कृष्ण के बाल रूप की महिमा गाई, जबकि रसखान ने प्रेम और भक्ति के भाव से जन-जन तक कृष्ण भक्ति का संदेश पहुँचाया।
प्रश्न 18: कबीर ने भक्ति आंदोलन में कौन-कौन सी सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं का विरोध किया?
उत्तर: कबीर ने ब्राह्मणवादी हिन्दूधर्म, इस्लाम के आडम्बर, मूर्तिपूजा, पाखण्ड और जातिवाद का विरोध किया। उन्होंने प्रेम और भक्ति को जीवन का मूल मार्ग बताया।
प्रश्न 19: कबीर के प्रमुख दोहे और उनका संदेश क्या था?
उत्तर:
"पाहन पूजे हरि मिले…" — बाहरी पूजा से ज्यादा आत्मा की भक्ति महत्वपूर्ण है।
"पोथि पढ़ि-पढ़ि जग मुआ…" — प्रेम के बिना शिक्षा अधूरी है।
"गुरु गोविन्द दोऊ खड़े…" — गुरु और ईश्वर का ज्ञान समान रूप से महत्वपूर्ण है।
"कांकर पाथर जोरि के…" — बाहरी आडम्बर और दिखावा अर्थहीन है।
प्रश्न 20: गुरु नानक का भक्ति और सामाजिक विचार क्या था?
उत्तर: गुरु नानक ने इस्लाम और हिन्दू धर्म दोनों की शिक्षाओं को ग्रहण किया। उन्होंने सर्वशक्तिमान ईश्वर की आराधना, आपसी सहयोग और अन्तरजातीय विवाह पर बल दिया। उनके अनुयायी सिख धर्मावलंबी कहलाए।
प्रश्न 21: दरिया साहेब के भक्ति और सामाजिक विचार क्या थे?
उत्तर: दरिया साहेब ने ईश्वर को सर्वव्यापी, निर्गुण और निराकार माना। उन्होंने प्रेम, भक्ति और ज्ञान को मोक्ष का साधन बताया। जाति प्रथा, छुआ-छूत और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया।
प्रश्न 22: सूफीवाद में प्रेम और भक्ति का महत्व क्या था?
उत्तर: सूफी संतों ने प्रेम और भक्ति को मोक्ष और ईश्वर की अनुभूति का माध्यम माना। उन्होंने मनुष्यों के प्रति दया और समानता का संदेश फैलाया।
प्रश्न 23: सूफीवाद और भक्ति संतों में समानताएँ कौन-कौन सी थीं?
उत्तर: दोनों ने बाहरी आडम्बर को अस्वीकार किया, भक्ति और प्रेम को प्रधान माना, समाज में समानता को बढ़ावा दिया और धर्मों के बीच मेल-जोल को प्रोत्साहित किया।
प्रश्न 24: सूफी संतों ने धर्मान्तरण को किस दृष्टि से अपनाया?
उत्तर: सूफी संतों ने धर्मान्तरण में रुचि नहीं ली। उनका मुख्य उद्देश्य केवल ईश्वर प्रेम, भक्ति और मानव सेवा था।
प्रश्न 25: भारत में सूफीवाद का प्रमुख केंद्र कौन सा था?
उत्तर: भारत में सूफीवाद का प्रमुख केंद्र बिहारशरीफ, मनेर, अजमेर और दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र थे।
प्रश्न 26: मनेरी साहब का मजार क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: मनेरी साहब का मजार सूफीवाद का प्रमुख केंद्र है। यहाँ उनके अनुयायी शिक्षा, भक्ति और सांस्कृतिक समन्वय के लिए आते हैं।
प्रश्न 27: चिश्ती सिलसिले के प्रमुख संत कौन थे और उनके उद्देश्य क्या थे?
उत्तर: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती, निजामुद्दीन औलिया, बख्तियार काकी, बाबा फरीद आदि प्रमुख थे। उनका उद्देश्य सादगी, निर्धनता और एकान्तवास में जीवन व्यतीत करना और सभी धर्मों के लोगों के लिए खुले दरवाजे रखना था।
प्रश्न 28: चिश्ती संतों और सुहरवर्दी संतों में क्या अंतर था?
उत्तर: चिश्ती संत निर्धनता, सादगी और तप में विश्वास करते थे, जबकि सुहरवर्दी संत धन और राजकीय सहयोग से जीवन व्यतीत करते थे।
प्रश्न 29: भारत में सूफीवाद के अन्य प्रमुख सिलसिले कौन-कौन से थे?
उत्तर: कादरी, नक्शबंदी, शुत्तारी और बिहार में फिरदौसी सिलसिले प्रमुख थे।
प्रश्न 30: हजरत मखदूम शराफुद्दीन यहिया मनेरी का योगदान क्या था?
उत्तर: उन्होंने बिहार में सूफीवाद का प्रसार किया, मठ की स्थापना की और समाज में भक्ति, प्रेम और समानता की भावना फैलायी।
प्रश्न 31: सूफी खानकाह की लाइब्रेरी में क्या उपलब्ध था?
उत्तर: इसमें लगभग 4 हजार पाण्डुलिपियां, चीनी मिट्टी पर कुरान की आयतें, 20 हजार इस्लामी और फारसी पुस्तकें उपलब्ध थीं।
प्रश्न 32: चिश्ती सिलसिले का जीवन दर्शन क्या था?
उत्तर: सादगी, निर्धनता, एकान्तवास और सभी धर्मों के लोगों के लिए खुले दरवाजे। राजकीय सहयोग और धन की आवश्यकता नहीं।
प्रश्न 33: कबीर और दरिया साहेब में समानताएँ क्या थीं?
उत्तर: दोनों ने जाति, धर्म और बाहरी आडम्बर का विरोध किया, प्रेम और भक्ति को प्रधान माना और समाज में समानता का संदेश दिया।
प्रश्न 34: मीराबाई और सूरदास की भक्ति परंपरा में समानता क्या थी?
उत्तर: दोनों ने कृष्ण भक्ति को प्रमुख बनाया और जाति, सामाजिक स्थिति या वर्ग भेदभाव से परे भक्तिभाव का संदेश फैलाया।
प्रश्न 35: रामानंद ने सगुण और निर्गुण संप्रदाय कैसे स्थापित किए?
उत्तर: उन्होंने राम को विष्णु का मानवीय अवतार मानकर सगुण संप्रदाय और ईश्वर की निराकार कल्पना करके निर्गुण संप्रदाय स्थापित किया।
प्रश्न 36: कबीर ने राम और विष्णु के बारे में क्या विचार प्रस्तुत किए?
उत्तर: कबीर ने राम को अयोध्या के राजा दशरथ का पुत्र नहीं माना। उन्होंने निर्गुण, निराकार ईश्वर के रूप में भक्ति और प्रेम का संदेश दिया।
प्रश्न 37: गुरु नानक ने सामाजिक सुधार में क्या योगदान दिया?
उत्तर: गुरु नानक ने जाति भेद और धार्मिक कुरीतियों का विरोध किया, आपसी सहयोग, अन्तरजातीय विवाह और ईश्वर की सर्वव्यापकता पर जोर दिया।
प्रश्न 38: दरिया साहेब ने भक्ति और ज्ञान का संबंध कैसे समझाया?
उत्तर: प्रेम के बिना भक्ति अधूरी है, और भक्ति के बिना ज्ञान अधूरा। प्रेम ईश्वर की अनुभूति और पाप से मुक्ति में सहायक है।
प्रश्न 39: सूफी संतों की शिक्षाओं का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: समाज में समानता और सहिष्णुता बढ़ी, हिन्दू-मुस्लिम मेलजोल हुआ और बाहरी आडम्बर की प्रथा समाप्त होने लगी।
प्रश्न 40: चिश्ती, सुहरवर्दी और फिरदौसी सिलसिलों की तुलना में उनका विशेष योगदान क्या था?
उत्तर: चिश्ती सादगी और तप में विश्वास करते थे, सुहरवर्दी राजकीय सहयोग से शिक्षा और भक्ति फैलाते थे, और फिरदौसी बिहार में भक्ति, प्रेम और समानता के केंद्र बने।
Answer by Mrinmoee