Chapter 2
प्रतीक्षा
1. कहानी “2 प्रतीक्षा” का मुख्य पात्र कौन है?
उत्तर: कहानी का मुख्य पात्र भगवान बुद्ध हैं।
2. भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ कहाँ जा रहे थे?
उत्तर: भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ राजगीर जा रहे थे।
3. रास्ता किस प्रकार का था और क्यों कठिन था?
उत्तर: रास्ता लंबा और पथरीला था, इसलिए चलना कठिन था।
4. रास्ते में भगवान बुद्ध को किस चीज़ की आवश्यकता महसूस हुई?
उत्तर: रास्ते में भगवान बुद्ध को प्यास लगी।
5. प्यास लगने पर वे क्या करने लगे?
उत्तर: वे अपने शिष्यों के साथ एक वटवृक्ष की छाया में बैठकर विश्राम करने लगे।
6. आनंद कहाँ गया और किस काम के लिए?
उत्तर: आनंद पास के पहाड़ी झरने पर पानी लेने गए।
7. झरने का पानी पहले गंदा क्यों था?
उत्तर: झरने के पास अभी-अभी बैलगाड़ियाँ गुजरी थीं, जिससे पानी गंदला हो गया था।
8. पहली तीन बार जब आनंद झरने गए तो उन्होंने क्या देखा?
उत्तर: उन्होंने देखा कि पानी अभी भी गंदा था और साफ नहीं हुआ।
9. चौथी बार जब आनंद झरने गए तो उन्होंने क्या पाया?
उत्तर: उन्होंने देखा कि मिट्टी और सड़े-गले पत्ते नीचे बैठ गए थे और पानी आईने की तरह साफ था।
10. भगवान बुद्ध ने आनंद को झरने पर बार-बार क्यों भेजा?
उत्तर: भगवान बुद्ध ने उन्हें यह सिखाने के लिए भेजा कि थोड़ी प्रतीक्षा से जीवन के जल यानी हमारे मन के बुरे विचार भी शांत और स्वच्छ हो जाते हैं।
11. कहानी का शीर्षक “प्रतीक्षा” क्यों रखा गया है?
उत्तर: क्योंकि कहानी में आनंद को झरने का पानी साफ होने तक प्रतीक्षा करनी पड़ी और यह प्रतीक्षा जीवन में धैर्य रखने का संदेश देती है।
12. इस कहानी से हमें जीवन के बारे में क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: हमें धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि प्रतीक्षा करने से समस्याएँ अपने आप हल हो जाती हैं।
13. आनंद कुल कितनी बार झरने पर गए?
उत्तर: आनंद कुल चार बार झरने पर गए।
14. झरने का पानी आखिरकार साफ कैसे हुआ?
उत्तर: पानी के अंदर मिट्टी और सड़े-गले पत्ते नीचे बैठ गए, जिससे पानी साफ हो गया।
15. “मन की झील” किस बात का प्रतीक है?
उत्तर: “मन की झील” हमारे मन और विचारों की शांति का प्रतीक है।
16. कहानी में बैलगाड़ियों का क्या अर्थ है?
उत्तर: बैलगाड़ियों का अर्थ है जीवन में आने वाले बुरे विचार और गलत कार्य, जो मन को गंदा कर देते हैं।
17. आनंद ने चौथी बार जाकर क्या अनुभव किया?
उत्तर: उन्होंने अनुभव किया कि थोड़ी प्रतीक्षा करने से सब स्वच्छ और साफ हो जाता है।
18. भगवान बुद्ध ने आनंद को झरने पर बार-बार भेजकर क्या सिखाया?
उत्तर: धैर्य रखने और प्रतीक्षा करने का महत्व।
19. इस कहानी में “स्वच्छ” शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर: स्वच्छ का अर्थ है साफ और निर्मल।
20. आनंद ने पहले तीन बार झरने का पानी क्यों साफ नहीं पाया?
उत्तर: क्योंकि पानी में अभी भी मिट्टी और गंदगी तैर रही थी।
21. क्या आपने कभी प्रतीक्षा करने का अनुभव किया है? उदाहरण दें।
उत्तर: हाँ, मैंने स्कूल बस के आने तक प्रतीक्षा की, तब मुझे धैर्य रखने का महत्व समझ आया।
22. झरने की तरह जीवन में प्रतीक्षा कब जरूरी होती है?
उत्तर: जब हम क्रोध या अधीरता महसूस करें या कोई समस्या तुरंत हल न हो रही हो।
23. कहानी में “मिट्टी व सड़े-गले पत्ते नीचे बैठ गए” का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह प्रतीक है कि समय के साथ बुरे विचार और नकारात्मकताएँ शांत हो जाती हैं।
24. आनंद को इस कहानी से क्या सीख मिली?
उत्तर: कि थोड़ी प्रतीक्षा और धैर्य से सब कुछ शांत और साफ हो जाता है।
25. जीवन में प्रतीक्षा करना क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: प्रतीक्षा करने से व्यक्ति समझदार और संयमी बनता है, और फैसले बेहतर होते हैं।
26. कहानी में भगवान बुद्ध ने किस प्रकार से उदाहरण दिया?
उत्तर: उन्होंने झरने के साफ होने की प्रक्रिया के माध्यम से धैर्य और प्रतीक्षा का उदाहरण दिया।
27. आनंद ने झरने से पानी लेने क्यों जाना चाहा?
उत्तर: क्योंकि भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों को प्यास लगी थी।
28. कहानी में वटवृक्ष का क्या महत्व है?
उत्तर: वटवृक्ष छाया देने वाला पेड़ है, जहाँ भगवान बुद्ध और शिष्य विश्राम कर रहे थे।
29. जीवन में प्रतीक्षा करने का एक और उदाहरण बताइए।
उत्तर: परीक्षा के परिणाम आने तक प्रतीक्षा करना और शांत रहना।
30. कहानी में “जल को आईने की तरह चमकना” का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि समय के साथ जीवन और मन शांति और स्वच्छता पा लेते हैं।
31. कहानी में आनंद को झरने पर चौथी बार क्यों जाना पड़ा?
उत्तर: क्योंकि पहले तीन बार पानी गंदा था और भगवान बुद्ध उन्हें धैर्य के महत्व को समझाना चाहते थे।
32. भगवान बुद्ध की सीख से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: धैर्य और प्रतीक्षा जीवन में महत्वपूर्ण हैं और जल्दबाजी से बचना चाहिए।
33. झरने पर पानी गंदा होने की स्थिति किसके जीवन से तुलना की गई है?
उत्तर: जीवन के बुरे विचारों और कार्यों से तुलना की गई है।
34. आनंद की कहानी से बच्चों को क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर: बच्चों को धैर्य रखना, प्रतीक्षा करना और शांत रहना सीखने को मिलता है।
35. कहानी में प्रतीक्षा करने का कौन सा प्राकृतिक उदाहरण दिया गया है?
उत्तर: झरने का पानी जो समय के साथ साफ हुआ।
36. आनंद को कितनी बार झरने का पानी गंदा मिला और क्यों?
उत्तर: तीन बार, क्योंकि पानी में अभी भी मिट्टी और सड़ती पत्तियाँ तैर रही थीं।
37. कहानी में “जल को आईने की तरह चमकना” किस सीख का प्रतीक है?
उत्तर: प्रतीक्षा और धैर्य से जीवन और मन शुद्ध और स्पष्ट हो जाते हैं।
38. इस कहानी से बच्चों को जीवन में किस गुण का महत्व समझाया गया?
उत्तर: जीवन में धैर्य, संयम और प्रतीक्षा का महत्व।
39. कहानी का संदेश सरल शब्दों में क्या है?
उत्तर: कुछ भी तुरंत नहीं होता, समय और धैर्य से सब कुछ सही और स्वच्छ हो जाता है।
40. आप अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में इस कहानी की शिक्षा कैसे लागू कर सकते हैं?
उत्तर: जैसे क्रोध या अधीरता में कोई फैसला तुरंत न लें, थोड़ी प्रतीक्षा करें और धैर्य रखें।
Answer by Mrinmoee