Chapter- 5           छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य


प्रश्न: यह पाठ किस इकाई से संबंधित है?
उत्तर:
यह पाठ “छत्तीसगढ़ी भाषा व साहित्य” नामक इकाई से संबंधित है।

प्रश्न: इस इकाई के लेखक का नाम क्या है?
उत्तर:
इस इकाई के लेखक भगवती लाल सेन हैं।

प्रश्न: छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक परिवेश कैसा बताया गया है?
उत्तर:
छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक परिवेश वैविध्यपूर्ण और विशिष्ट बताया गया है।

प्रश्न: छत्तीसगढ़ी मनखे की छवि कैसी दिखाई गई है?
उत्तर:
छत्तीसगढ़ी मनखे को स्वाभिमानी, आत्मविश्वासी और मुस्कान बिखेरने वाला बताया गया है।

प्रश्न: छत्तीसगढ़ की किन विशेषताओं का उल्लेख किया गया है?
उत्तर:
भाषा, साहित्य, लोक कलाएँ और लोक परम्पराओं का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न: इस इकाई का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
बच्चों में छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति सराहना का भाव विकसित करना।

प्रश्न: विद्यार्थी छत्तीसगढ़ी भाषा से कैसे परिचित होंगे?
उत्तर:
छत्तीसगढ़ी की मिठास और कथन भंगिमाओं के माध्यम से।

प्रश्न: यह इकाई विद्यार्थियों को किससे जोड़ने का प्रयास करती है?
उत्तर:
अपने भाव और अनुभव के साथ साहित्य की विभिन्न विधाओं से।

प्रश्न: इस इकाई में शामिल पद्य पाठ का नाम क्या है?
उत्तर:
इस इकाई में शामिल पद्य पाठ का नाम ‘ये जिनगी फेर चमक जाए’ है।

प्रश्न: ‘ये जिनगी फेर चमक जाए’ का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर:
नकारात्मक भावों को त्याग कर सकारात्मकता को अपनाने का संदेश।

प्रश्न: इस पद्य पाठ में क्या छिपा हुआ है?
उत्तर:
बेहतर जीवन जीने के सूत्र छिपे हुए हैं।

प्रश्न: इस इकाई की दूसरी रचना कौन-सी है?
उत्तर:
इस इकाई की दूसरी रचना कहानी ‘भरिया’ है।

प्रश्न: ‘भरिया’ कहानी किस परंपरा पर प्रश्न उठाती है?
उत्तर:
मृत्युभोज की परंपरा पर।

प्रश्न: कहानी ‘भरिया’ का उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
मृत्युभोज जैसी रुढ़ परंपरा को समाप्त करने की प्रेरणा देना।

प्रश्न: रुढ़ परंपराएँ समाज को कैसे प्रभावित करती हैं?
उत्तर:
समाज को प्रगति की राह से पीछे ढकेलती हैं।

प्रश्न: रुढ़ परंपराओं से किस वर्ग को अधिक नुकसान होता है?
उत्तर:
आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को।

प्रश्न: कहानी ‘भरिया’ किस निष्कर्ष को सामने रखती है?
उत्तर:
हानिकारक परंपराओं को त्यागने की आवश्यकता।

प्रश्न: इस इकाई का तीसरा पाठ कौन-सा है?
उत्तर:
इस इकाई का तीसरा पाठ ‘शील के बरवै छंद’ है।

प्रश्न: ‘शील के बरवै छंद’ के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर:
इसके रचनाकार छत्तीसगढ़ी के चर्चित कवि शेषनाथ शर्मा ‘शील’ हैं।

प्रश्न: यह पाठ किस छंद में रचित है?
उत्तर:
यह पाठ बरवै छंद में रचित है।

प्रश्न: बरवै छंद किस काल में प्रचलित था?
उत्तर:
भक्तिकाल और रीतिकाल में।

प्रश्न: इस छंद में किसके मनोभावों का चित्रण है?
उत्तर:
स्त्री के मनोभावों का।

प्रश्न: स्त्री के जीवन के किस प्रसंग को विशेष रूप से दर्शाया गया है?
उत्तर:
विवाह के बाद विदाई और ससुराल–मायके की स्मृतियों को।

प्रश्न: ससुराल में रहते हुए स्त्री किन भावनाओं में डूबी रहती है?
उत्तर:
मायके की मधुर स्मृतियों में।

प्रश्न: मायके पहुँचकर स्त्री क्या याद करती है?
उत्तर:
ससुराल को।

प्रश्न: इस पाठ में किस रस का चित्रण है?
उत्तर:
श्रृंगार रस का।

प्रश्न: छंद की कौन-सी विशेषता विद्यार्थियों को आकर्षित करती है?
उत्तर:
उसकी भाषा और लयात्मकता।

प्रश्न: यह पाठ बच्चों को किससे जोड़ने का प्रयास करता है?
उत्तर:
नारी मन की कोमल संवेदनाओं से।

प्रश्न: पूरी इकाई का समग्र उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य की भावगत विशिष्टताओं से परिचित कराना।

प्रश्न: यह इकाई विद्यार्थियों को क्या अनुभव कराती है?
उत्तर:
साहित्यिक सरोकारों और मधुरता का आस्वाद कराती है।

Answer by Dimpee Bora