Chapter- 1             बहादुरशाह ज़फ़र


  • प्रश्न: यह कविता किसकी है?
    उत्तर: यह कविता बहादुरशाह ज़फ़र की है।

  • प्रश्न: बहादुरशाह ज़फ़र कौन थे?

  • उत्तर: वह भारत के अंतिम मुग़ल सम्राट और एक प्रसिद्ध शायर थे।

  • प्रश्न: इस कविता में बहादुरशाह ज़फ़र किस विषय पर सोच रहे हैं?
    उत्तर:
    अपने कठिन जीवन, निर्वासन और मृत्यु के बाद सम्मान की कमी पर।

  • प्रश्न: “लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में” पंक्ति का अर्थ क्या है?
    उत्तर:
    उनका दिल अब दुखी और खाली महसूस करता है।

  • प्रश्न: “किसकी बनी है आलमे-नापायदार में” से कवि क्या व्यक्त कर रहे हैं?
    उत्तर:
    दुनिया अस्थिर और नासमझ है, और इंसान की चीज़ें अस्थायी हैं।

  • प्रश्न: “बुलबुल को बागबों से न सय्याद से गिला” का क्या अर्थ है?
    उत्तर:
    बुलबुल (शायर) अपने हालातों से शिकायत नहीं करता।

  • प्रश्न: “किस्मत में कैद लिखी थी, फसले बहार में” का अर्थ क्या है?
    उत्तर:
    उनकी तक़दीर में खुशियाँ नहीं थीं, और जीवन कठिनाइयों से भरा था।

  • प्रश्न: “इन हसरतों से कह दो कहीं और जा बसें” का भाव क्या है?
    उत्तर:
    कवि अपने अधूरे अरमानों और इच्छाओं को छोड़ने की बात कर रहे हैं।

  • प्रश्न: “इतनी जगह कहाँ है दिले दागदार में” में “दिल” का क्या अर्थ है?
    उत्तर:
    भावनाओं और पीड़ा से भरा हृदय।

  • प्रश्न: कविता में बुलबुल का प्रतीक क्या है?
    उत्तर:
    कवि का आत्मा और संवेदनशीलता।

  • प्रश्न: “इक शाखे-गुल पे बैठ के बुलबुल है शाद” का अर्थ क्या है?
    उत्तर:
    बुलबुल (शायर) छोटे सुख में भी खुश है।

  • प्रश्न: “काटे बिछा दिए हैं दिले-लालहजार में” से क्या भाव निकलता है?
    उत्तर:
    जीवन में दुख और कठिनाइयाँ बहुत हैं।

  • प्रश्न: “उम्र-दराज माँग के लाए थे चार दिन” का क्या अर्थ है?
    उत्तर:
    ज़फ़र की उम्र लंबी नहीं थी, जीवन केवल कुछ ही दिन दे पाया।

  • प्रश्न: “दो आरजू में कट गए दो इंतजार में दिन” का भाव क्या है?
    उत्तर:
    उनके जीवन के दिन इच्छाओं और प्रतीक्षा में बीत गए।

  • प्रश्न: कविता में “जिंदगी के खत्म हुए शाम हो गई” किसके लिए कहा गया है?
    उत्तर:
    उनके जीवन और समय की समाप्ति के लिए।

  • प्रश्न: “फैला के पाँव सोएँगे कुंजे-मजार में” का क्या अर्थ है?
    उत्तर:
    कवि ने अपने मरने और अंतिम विश्राम का वर्णन किया है।

  • प्रश्न: “बदनसीब जफर” किसके लिए प्रयुक्त शब्द है?
    उत्तर:
    स्वयं बहादुरशाह ज़फ़र के लिए, जो दुर्भाग्यपूर्ण जीवन जीते थे।

  • प्रश्न: “दफन के लिए दो गज जमीन भी न मिली” से क्या भाव व्यक्त होता है?
    उत्तर:
    मृत्यु के बाद भी उन्हें सम्मानपूर्ण जगह नहीं मिली।

  • प्रश्न: “कूए-यार में” का क्या अर्थ है?
    उत्तर:
    यह अंतिम विश्राम का स्थान या किसी ग़रीब और असहाय जगह को दर्शाता है।

  • प्रश्न: इस कविता में शायर की भावनाएँ कैसी हैं?
    उत्तर:
    वे दुखी, अकेले और उदास हैं।

  • प्रश्न: कविता में जीवन की अनिश्चितता कैसे दिखाई गई है?
    उत्तर:
    अल्पकालिक सुख, अधूरी इच्छाएँ और मृत्यु के बाद सम्मान की कमी से।

  • प्रश्न: “दयार” का अर्थ क्या है?
    उत्तर:
    स्थान या दुनिया।

  • प्रश्न: कविता में “आलमे-नापायदार” का क्या अर्थ है?
    उत्तर:
    अस्थिर और नाशवान दुनिया।

  • प्रश्न: “दयार में किसकी बनी है” में कवि क्या पूछ रहे हैं?
    उत्तर:
    वे पूछ रहे हैं कि इस अस्थिर दुनिया में किसकी किस्मत स्थिर है।

  • प्रश्न: कविता में “फसले बहार” का प्रतीक क्या है?
    उत्तर:
    खुशियों और जीवन के अच्छे क्षणों का प्रतीक।

  • प्रश्न: बहादुरशाह ज़फ़र की कविताओं में मुख्यतः कौन-सी भावनाएँ देखने को मिलती हैं?
    उत्तर:
    दुःख, अकेलापन, अधूरी इच्छाएँ और जीवन की नश्वरता।

  • प्रश्न: यह कविता किस ऐतिहासिक घटना के 150 वर्ष बाद लिखी गई प्रतीत होती है?
    उत्तर:
    1857 के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में।

  • प्रश्न: कविता में “हसरतों” का क्या अर्थ है?
    उत्तर:
    इच्छाएँ और आकांक्षाएँ।

  • प्रश्न: बहादुरशाह ज़फ़र की यह कविता किस शैली की है?
    उत्तर:
    शास्त्रीय शायरी और उदास, भावपूर्ण शैली।

  • प्रश्न: इस कविता से हमें क्या सीख मिलती है?
    उत्तर:
    जीवन अस्थिर है, इच्छाएँ अधूरी रह सकती हैं, और मृत्यु के बाद सम्मान भी जरूरी है।

  • Answer by Dimpee Bora