Chapter- 18 पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
प्रश्न: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ राज्य में हुआ।
प्रश्न: उनका निधन कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: उनका निधन सन् 1971 में रायपुर में हुआ।
प्रश्न: बख्शी जी किस युग के साहित्यकार थे?
उत्तर: वे द्विवेदी युग के प्रतिष्ठित साहित्यकार थे।
प्रश्न: बख्शी जी की प्रमुख निबंध रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर: निबंधा प्रदीप, पंचपात्र और मेरे प्रिय निबंधा।
प्रश्न: बख्शी जी की आलोचनात्मक रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर: हिन्दी साहित्य विमर्श, विश्व-साहित्य और हिन्दी कहानी साहित्य।
प्रश्न: बख्शी जी की कविता कौन-सी प्रमुख है?
उत्तर: शतदल उनकी प्रमुख कविता है।
प्रश्न: बख्शी जी के निबंधों के विषय किस प्रकार के हैं?
उत्तर: उनके निबंध साहित्यिक और सामाजिक दोनों प्रकार के हैं।
प्रश्न: बख्शी जी पर किस युग की छाप है?
उत्तर: द्विवेदी युग की छाप उनके निबंधों पर दिखाई देती है।
प्रश्न: बख्शी जी समाज और राष्ट्र के लिए किस प्रकार जागरूक थे?
उत्तर: वे समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए सजग और जागरूक थे।
प्रश्न: बख्शी जी ने सामाजिक जीवन की किन बातों पर पहार किया?
उत्तर: उन्होंने सामाजिक जीवन की रुढ़ियों और कुरीतियों पर पहार किया।
प्रश्न: बख्शी जी ने साहित्य के सिद्धांतों पर क्या लिखा?
उत्तर: उन्होंने साहित्य के सिद्धांतों पर समीक्षात्मक निबंध लिखे।
प्रश्न: बख्शी जी की भाषा में कौन-कौन सी विशेषताएँ हैं?
उत्तर: उनकी भाषा सजीव, प्रभावपूर्ण और सरस है, जिसमें मुहावरे और लोकोक्तियों का सुंदर प्रयोग हुआ है।
प्रश्न: बख्शी जी ने किन भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया?
उत्तर: उन्होंने उर्दू, फारसी और अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग किया।
प्रश्न: बख्शी जी की निबंध लेखन शैली कैसी थी?
उत्तर: उनकी निबंध लेखन शैली प्रमुखतः विवेचनात्मक और भावात्मक थी।
प्रश्न: उनके निबंधों में और कौन-कौन सी शैली देखने को मिलती है?
उत्तर: व्यंग्यात्मक शैली, उद्धरण शैली और हास्यपुट उनकी शैली की विशेषता हैं।
प्रश्न: बख्शी जी का साहित्य में स्थान कैसा है?
उत्तर: हिन्दी साहित्य में उनका विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान है।
प्रश्न: बख्शी जी की रचनाओं की भाषा का सरलता और सरसता में योगदान क्या है?
उत्तर: भाषा की सरलता और सरसता उनके निबंधों को स्मरणीय और पठनीय बनाती है।
प्रश्न: बख्शी जी ने साहित्यिक और सामाजिक चेतना में किस प्रकार योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने साहित्यिक विवेचना और सामाजिक जागरूकता दोनों में योगदान दिया।
प्रश्न: बख्शी जी ने साहित्य में किसके प्रयोग से अपने विचार व्यक्त किए?
उत्तर: उन्होंने मुहावरों, लोकोक्तियों और विभिन्न भाषाओं के शब्दों के प्रयोग से अपने विचार व्यक्त किए।
प्रश्न: बख्शी जी के निबंधों में हास्यपुट का क्या महत्व है?
उत्तर: हास्यपुट उनके निबंधों को रोचक और प्रभावशाली बनाता है।
प्रश्न: बख्शी जी की साहित्यिक विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: विषय की विविधता, भाषा की सरसता, सरलता, विवेचनात्मकता और सामाजिक जागरूकता उनकी विशेषताएँ हैं।
प्रश्न: बख्शी जी ने किस प्रकार के साहित्य पर समीक्षात्मक निबंध लिखे?
उत्तर: उन्होंने साहित्य के सिद्धांत और कहानी, कविता, निबंध सभी पर समीक्षात्मक निबंध लिखे।
प्रश्न: बख्शी जी ने किन माध्यमों से समाज के कुरीतियों पर प्रहार किया?
उत्तर: उन्होंने अपने निबंधों के माध्यम से समाज की रुढ़ियों और कुरीतियों पर प्रहार किया।
प्रश्न: बख्शी जी की निबंध लेखन शैली में किस प्रकार का दृष्टिकोण मिलता है?
उत्तर: उनकी शैली में विवेचनात्मक, भावात्मक और सामाजिक दृष्टिकोण मिलता है।
प्रश्न: बख्शी जी ने साहित्य के सिद्धांतों पर लिखकर किस दिशा में योगदान दिया?
उत्तर: उन्होंने साहित्य के सिद्धांतों की समीक्षा करके हिंदी साहित्य के वैचारिक विकास में योगदान दिया।
प्रश्न: बख्शी जी ने अपनी भाषा में मुहावरे और लोकोक्तियाँ क्यों प्रयोग कीं?
उत्तर: ताकि उनकी भाषा सजीव, प्रभावपूर्ण और पाठक के लिए रोचक बन सके।
प्रश्न: बख्शी जी का साहित्य आज क्यों स्मरणीय है?
उत्तर: उनकी विषय विविधता, भाषा की सरसता और सरलता, सामाजिक चेतना और साहित्यिक विवेचना के कारण।
प्रश्न: बख्शी जी की आलोचनात्मक दृष्टि का उद्देश्य क्या था?
उत्तर: उनका उद्देश्य साहित्य और समाज की समीक्षा कर जागरूकता फैलाना था।
प्रश्न: बख्शी जी के निबंधों में किस प्रकार का प्रभाव सामाजिक जीवन पर दिखाई देता है?
उत्तर: उनके निबंधों में सामाजिक सुधार और रुढ़ियों का विरोध स्पष्ट दिखाई देता है।
Answer by Dimpee Bora