Chapter- 9 फिराक गोरखपुरी
प्रश्न 1: फ़िराक गोरखपुरी का मूल नाम क्या था?
उत्तर: फ़िराक गोरखपुरी का मूल नाम रघुपति सहाय था।
प्रश्न 2: फ़िराक गोरखपुरी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: उनका जन्म 28 अगस्त 1896 को गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था।
प्रश्न 3: फ़िराक गोरखपुरी ने शिक्षा की शुरुआत किससे की?
उत्तर: उन्होंने शिक्षा की शुरुआत रामकृष्ण की कहानियों से की।
प्रश्न 4: बाद में फ़िराक ने किन भाषाओं की शिक्षा प्राप्त की?
उत्तर: बाद में उन्होंने अरबी, फारसी और अंग्रेजी भाषाओं की शिक्षा प्राप्त की।
प्रश्न 5: फ़िराक गोरखपुरी का चयन किस पद पर हुआ था?
उत्तर: उनका चयन 1917 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ था।
प्रश्न 6: फ़िराक ने डिप्टी कलेक्टर का पद क्यों छोड़ा?
उत्तर: उन्होंने स्वराज आंदोलन में भाग लेने के लिए 1918 में पद त्याग दिया।
प्रश्न 7: फ़िराक गोरखपुरी को जेल क्यों जाना पड़ा?
उत्तर: 1920 में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें डेढ़ वर्ष की जेल हुई।
प्रश्न 8: फ़िराक गोरखपुरी ने अध्यापन कार्य कहाँ किया?
उत्तर: वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में अध्यापक रहे।
प्रश्न 9: फ़िराक गोरखपुरी को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
उत्तर: उन्हें ‘गुले-नग्मा’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
प्रश्न 10: फ़िराक को कौन-कौन से प्रमुख पुरस्कार मिले?
उत्तर: उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड मिला।
प्रश्न 11: फ़िराक गोरखपुरी की प्रमुख कृति कौन-सी है?
उत्तर: उनकी प्रमुख कृति ‘गुले-नग्मा’ है।
प्रश्न 12: ‘बज्मे जिंदगीः रंगे-शायरी’ किस विधा से संबंधित है?
उत्तर: यह उर्दू शायरी से संबंधित कृति है।
प्रश्न 13: फ़िराक गोरखपुरी किस विधा के प्रमुख रचनाकार थे?
उत्तर: वे उर्दू ग़ज़लगोई के प्रमुख रचनाकार थे।
प्रश्न 14: फ़िराक गोरखपुरी का निधन कब हुआ?
उत्तर: उनका निधन सन् 1983 में हुआ।
प्रश्न 15: दिए गए शेर में फ़िराक किससे विदा ले रहे हैं?
उत्तर: वे नई पीढ़ी के शायरों से विदा लेते हुए ग़ज़ल की परंपरा उन्हें सौंप रहे हैं।
प्रश्न 16: पारंपरिक उर्दू शायरी किन तत्वों से जुड़ी रही है?
उत्तर: पारंपरिक उर्दू शायरी रुमानियत, रहस्य और शास्त्रीयता से जुड़ी रही है।
प्रश्न 17: पारंपरिक उर्दू शायरी में किसका अभाव रहा है?
उत्तर: उसमें लोकजीवन और प्रकृति के पक्ष कम उभरे हैं।
प्रश्न 18: उर्दू शायरी की परंपरा को तोड़ने वाले शायरों में किनका नाम आता है?
उत्तर: नज़ीर अकबराबादी, इल्ताफ हुसैन हाली और फ़िराक गोरखपुरी का नाम आता है।
प्रश्न 19: फ़िराक गोरखपुरी की शायरी की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: उनकी शायरी में सामाजिक दुख-दर्द व्यक्तिगत अनुभूति बनकर सामने आता है।
प्रश्न 20: फ़िराक ने परंपरा का उपयोग किस रूप में किया?
उत्तर: उन्होंने परंपरागत भावबोध और शब्द-भंडार को नई भाषा और नए विषयों से जोड़ा।
प्रश्न 21: फ़िराक की शायरी में इंसान के जीवन का कौन-सा पक्ष प्रमुख है?
उत्तर: इंसान के हाथों इंसान पर होने वाले अत्याचार और पीड़ा का यथार्थ चित्रण।
प्रश्न 22: फ़िराक की शायरी में भविष्य को लेकर क्या दृष्टि मिलती है?
उत्तर: उनकी शायरी में आने वाले कल के प्रति आशा और उम्मीद दिखाई देती है।
प्रश्न 23: फ़िराक ने अपनी शायरी को किन प्रतीकों से जोड़ा?
उत्तर: उन्होंने भारतीय संस्कृति और लोकभाषा के प्रतीकों से अपनी शायरी को जोड़ा।
प्रश्न 24: उर्दू शायरी किसके लिए प्रसिद्ध मानी जाती है?
उत्तर: उर्दू शायरी अपने लाक्षणिक प्रयोगों और चुस्त मुहावरेदारी के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 25: “शेर लिखे नहीं जाते, कहे जाते हैं” का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि शेर बोलचाल की सहज भाषा और भाव से जन्म लेते हैं।
प्रश्न 26: फ़िराक की भाषा की विशेषता क्या है?
उत्तर: उनकी भाषा सहज, सरल और आम आदमी के अनुभवों से जुड़ी हुई है।
प्रश्न 27: फ़िराक की शायरी में प्रेम किस रूप में दिखाई देता है?
उत्तर: प्रेम जीवन की सच्चाइयों और संघर्षों से जुड़ी मानवीय संवेदना के रूप में दिखाई देता है।
प्रश्न 28: फ़िराक ने उर्दू ग़ज़ल को क्या नया दिया?
उत्तर: उन्होंने उर्दू ग़ज़ल को नए विषय, नई संवेदना और नया सामाजिक अर्थ दिया।
प्रश्न 29: फ़िराक को आधुनिक उर्दू शायरी का महत्वपूर्ण शायर क्यों माना जाता है?
उत्तर: क्योंकि उन्होंने परंपरा को बनाए रखते हुए उसे नई दिशा और नया विस्तार दिया।
प्रश्न 30: फ़िराक गोरखपुरी का साहित्यिक महत्व क्या है?
उत्तर: फ़िराक गोरखपुरी ने उर्दू शायरी को लोकजीवन, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदना से जोड़कर उसे समृद्ध बनाया।
Answer by Dimpee Bora