Chapter- 9            वैश्वीकरण


1. अध्याय 9 का शीर्षक क्या है?


उत्तर: अध्याय 9 का शीर्षक “वैश्वीकरण” है। इस अध्याय में वैश्वीकरण की अवधारणा, उसके प्रभाव और उससे जुड़े विरोध आंदोलनों की चर्चा की गई है।


2. यह अध्याय किस विषय से संबंधित है?


उत्तर: यह अध्याय विश्व-राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति पर वैश्वीकरण के प्रभाव से संबंधित है।


3. वैश्वीकरण से क्या आशय है?


उत्तर: वैश्वीकरण से आशय देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों के बढ़ने से है।


4. इस अध्याय में वैश्वीकरण की चर्चा क्यों की गई है?


उत्तर: क्योंकि वैश्वीकरण ने आधुनिक दुनिया को गहराई से प्रभावित किया है और इसके प्रभाव सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों हैं।


5. पुस्तक के अंतिम अध्याय में वैश्वीकरण को क्यों रखा गया है?


उत्तर: क्योंकि वैश्वीकरण आधुनिक विश्व की सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक प्रक्रिया है।


6. इस अध्याय में वैश्वीकरण के किन पहलुओं पर चर्चा की गई है?


उत्तर: राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर चर्चा की गई है।


7. वैश्वीकरण का आर्थिक अर्थ क्या है?


उत्तर: आर्थिक वैश्वीकरण का अर्थ है अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार।


8. वैश्वीकरण का राजनीतिक प्रभाव क्या है?


उत्तर: वैश्वीकरण ने राष्ट्रीय सरकारों की नीतियों और निर्णयों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जोड़ा है।


9. वैश्वीकरण का सांस्कृतिक प्रभाव क्या है?


उत्तर: वैश्वीकरण से विभिन्न संस्कृतियों का संपर्क बढ़ा है, लेकिन स्थानीय संस्कृतियों पर दबाव भी पड़ा है।


10. क्या वैश्वीकरण केवल लाभकारी है?


उत्तर: नहीं, वैश्वीकरण के लाभ के साथ-साथ कई नुकसान भी हैं।


11. वैश्वीकरण से किन वर्गों को अधिक लाभ होता है?


उत्तर: बड़े उद्योगों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और विकसित देशों को अधिक लाभ होता है।


12. वैश्वीकरण से किन वर्गों को नुकसान होता है?


उत्तर: गरीब, किसान, मजदूर और कमजोर वर्गों को नुकसान उठाना पड़ता है।


13. वैश्वीकरण के विरोध के क्या कारण हैं?


उत्तर: असमानता, बेरोजगारी, सांस्कृतिक क्षरण और संसाधनों के शोषण के कारण विरोध होता है।


14. विश्व सामाजिक मंच (World Social Forum) क्या है?


उत्तर: यह वैश्वीकरण के विरोध में विचार साझा करने और वैकल्पिक नीतियाँ सुझाने का अंतरराष्ट्रीय मंच है।


15. “एक और दुनिया संभव है” का क्या अर्थ है?


उत्तर: इसका अर्थ है कि वर्तमान वैश्वीकरण के अलावा भी एक न्यायपूर्ण और समान दुनिया बनाई जा सकती है।


16. मुंबई प्रतिरोध 2004 का क्या महत्व है?


उत्तर: यह वैश्वीकरण के विरोध में आयोजित एक महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन था।


17. मुंबई प्रतिरोध का उद्देश्य क्या था?


उत्तर: नवउदारवादी नीतियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव का विरोध करना।


18. नवउदारवाद से क्या तात्पर्य है?


उत्तर: नवउदारवाद वह नीति है जिसमें बाजार को अधिक स्वतंत्रता दी जाती है और सरकारी हस्तक्षेप कम किया जाता है।


19. नवउदारवाद को खतरनाक क्यों माना जाता है?


उत्तर: क्योंकि इससे सामाजिक असमानता और शोषण बढ़ सकता है।


20. क्या वैश्वीकरण का कोई विकल्प संभव है?


उत्तर: हाँ, न्यायपूर्ण, मानव-केंद्रित और टिकाऊ विकास आधारित वैश्वीकरण संभव है।


21. सामाजिक आंदोलनों की भूमिका क्या है?


उत्तर: ये आंदोलन जनता की आवाज उठाते हैं और वैकल्पिक नीतियों की मांग करते हैं।


22. वैश्वीकरण और पूंजीवाद का क्या संबंध है?


उत्तर: वैश्वीकरण आधुनिक पूंजीवाद का विस्तार माना जाता है।


23. क्या सभी देश वैश्वीकरण से समान रूप से लाभान्वित होते हैं?


उत्तर: नहीं, लाभ देशों की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है।


24. वैश्वीकरण से लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है?


उत्तर: कई बार लोकतांत्रिक निर्णय बाजार शक्तियों से प्रभावित हो जाते हैं।


25. वैश्वीकरण और श्रमिक वर्ग का क्या संबंध है?


उत्तर: वैश्वीकरण से श्रमिकों की सुरक्षा और रोजगार पर खतरा बढ़ा है।


26. वैश्वीकरण के कारण सांस्कृतिक विविधता पर क्या प्रभाव पड़ा है?


उत्तर: स्थानीय संस्कृतियाँ कमजोर हुई हैं और एकरूपता बढ़ी है।


27. वैश्वीकरण के विरोध को क्यों जरूरी माना जाता है?


उत्तर: ताकि इसके नकारात्मक प्रभावों को रोका जा सके।


28. भारत में वैश्वीकरण का क्या प्रभाव पड़ा है?


उत्तर: भारत में आर्थिक विकास हुआ, लेकिन असमानता भी बढ़ी।


29. यह अध्याय हमें क्या सिखाता है?


उत्तर: वैश्वीकरण को आलोचनात्मक दृष्टि से समझना आवश्यक है।


30. अध्याय का मुख्य निष्कर्ष क्या है?


उत्तर: वैश्वीकरण अपरिहार्य है, लेकिन इसे अधिक न्यायपूर्ण और मानव-हितैषी बनाया जाना चाहिए।

Answer by Dimpee Bora